कैसे समझें कि आपको एक बच्चा चाहिए या दो?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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फैमिली प्लानिंग या परिवार नियोजन से जुड़े मुद्दों में अब हर कपल बहुत सावधानी बरततें हैं। आज के समय में अधिकतर कपल सिंगल चाइल्ड पेरेंट बनना पसंद कर रहे हैं। हालांकि, वो इसे भी लेकर बहुत उलझन में रहते हैं कि उन्हें एक बच्चा चाहिए या दो? अगर फैमिली प्लानिंग शुरू कर रहे हैं, तो यह सवाल आपके लिए भी बहुत जरूरी हो सकता है। दरअसल, इसके पीछे कई बातों का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। जहां कुछ कपल फैमिली प्लानिंग में आर्थिक स्थिति पर जोर देतें है, वहीं कुछ कपल सामाजिक और अन्य स्थितियों पर जोर देते हैं।

क्या कहती है रिसर्च?

बता दें कि नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन ने अपने एक रिसर्च में 32 साल की कुछ महिलाओं की प्रेग्नेंसी पर शोध किया था। इस शोध में शामिल 73 फीसदी महिलाओं ने अपनी प्रेग्नेंसी की प्लानिंग की थी। उनकी यह प्लानिंग ठीक वैसी ही थी, जैसे हम सभी अपने जीवन के कई अहम फैसलों की प्लानिंग करते हैं। वहीं, शोध में शामिल 24 फीसदी महिलाओं को यह उलझन थी कि उन्हें क्या करना चाहिए। जबकि, तीन फीसदी महिलाओं ने यह भी माना कि वो अनचाहे गर्भ की वजह से मां बनी हैं।

शादी के बाद जीवन में कई तरह के बदलाव होते हैं। शादी के पहले जहां आपके सिर्फ अपना ख्याल रखना होता था वहीं शादी के बाद आपको अपने साथ-साथ अपने साथी, परिवार के सदस्यों और बच्चे का भी ख्याल रखना होता है। इन सब के बीच किसी और काम के लिए समय निकलाना बहुत मुश्किल हो सकता है।

अगर आपके मन में भी फैमिली प्लानिंग को लेकर यह सवाल है कि आपको एक बच्चा चाहिए या दो, तो इन बातों का ध्यान रख कर आप अपने इस फैसले को थोड़ा आसान बना सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

1.क्या आपके पास दूसरे बच्चे के लिए पर्याप्त समय है?

पहले बच्चे की परवरिश में कोई भी माता-पिता किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहते हैं। वो पहले बच्चे की पढ़ाई से लेकर उसके खाने-पीने, खेलने और उसके साथ समय बिताने का पूरा ध्यान रखते हैं। ऐसे में जब बच्चा शुरू-शुरू में स्कूल जाना शुरू करता है, तो उसके प्रति माता-पिता की जिम्मेदारियां और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। यह जिम्मेदारियां तब तक कम नहीं होती है, जब तक कि बच्चा खुद से अपनी छोटी-मोटी जिम्मेदारियां नहीं समझने लगता। इसलिए, जब आपको लगे कि आप अब दूसरे बच्चे को भी भरपूर समय दे सकते हैं, तो आप दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर सकते हैं।

2.आर्थिक स्थिति को देखें

आर्थिक स्थिति किसी भी परिवार को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए बहुत मायने रखती है। अगर आर्थिक स्थिति के हिसाब से आप बच्चे की प्लानिंग करें, तो यह आपके लिए एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। क्योंकि, पहले बच्चे की परवरिश और अच्छी पढ़ाई-लिखाई के लिए आपको एक अच्छे बजट की जरूरत हो सकती है। वहीं, दूसरे बच्चे के आने पर आपका यह बजट दोगुना हो सकता है। इसलिए ,अपनी आर्थिक स्थिति और बजट के मुताबिक ही दूसरे बच्चे की योजना करें।

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3.साथ की मर्जी जानें

बेबी प्लानिंग या फैमिली प्लानिंग हमेशा दोनों की मर्जी के मुताबिक ही होना चाहिए। कभी भी बेबी प्लानिंग का फैसला अकेले नहीं लेना चाहिए। चाहे आप मां हो या पिता हमेशा अपने साथी की मर्जी भी बेबी प्लानिंग में शामिल करें। क्योंकि, आप दोनों को मिलकर ही अपने बच्चे की परवरिश करनी है।

4.परिवार की कितनी सुनें

एक बात का ध्यान रखें कि फैमिली प्लानिंग के लिए पहले या दूसरे बच्चे की प्लानिंग पूरी तरह से आप दोनों की अपनी निजी फैसला होना चाहिए। इस फैसले में अगर आप अपने परिवार के फैसले न शामिल करें, तो यह आपके लिए बेहतर हो सकता है, क्योंकि एक समय के बाद आपके बच्चे की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी आपके ही कंधे पर आ सकती है।

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5.पहले बच्चे की उम्र भी आंके

अगर देखा जाए, तो डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब पहला बच्चा कम से कम तीन साल हो तभी दूसरे बच्चे की प्लानिंग के बारे में सोचा जा सकता है। ऐसे में जब आपका पहला बच्चा तीन से पांच साल को हो आप दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर सकते हैं। क्योंकि, इतने समय में मां का गर्भ दूसरे भ्रूण के लिए पूरी तरह से स्वास्थ्य हो चुका होता है। साथ ही, पहले बच्चे की जिम्मेदारियां भी आपके सिर से थोड़ी कम हो सकती हैं।

6.पहले बच्चे की मर्जी

जब बच्चे छोटी उम्र के होते हैं, तो उन्हें दूसरे की चीजें देखकर उसे पाने की जिद्द हो सकती है। ऐसे में कई बार वो अपने छोटे भाई-बहन की भी जिद्द कर सकते हैं। वहीं, कई पेरेंट्स को यह भी डर रहता है कि दूसरे बच्चे से उनका पहला बच्चा चिढ़ सकता है या वो खुद को असुरक्षित समझ सकता है। इसलिए, अपने बच्चे से भी इस बारे में पूछना चाहिए कि क्या उसे एक छोटा भाई या बहन चाहिए। साथ ही, उसे इसके बारे में भी बताएं कि जब घर में उसका छोटा भाई या बहन आएंगे, तो उनके प्रति उसकी जिम्मेदारियां क्यो हो सकती हैं। अपनी जिम्मेदारियों को वह किस तरह से पूरा कर सकते हैं।

निजी रायों से लें अनुभव

कानपुर की रहने वाली भावना एक वर्किंग वुमेन हैं। उनकी एक तीन साल की बेटी है। बेटी के जन्म के पहले भावना जॉब करती थी। लेकिन बेटी के आने के बाद कुछ समय के लिए उन्हें अपने काम को ब्रेक देना पड़ा। हालांकि, बेटी के थोड़े बड़े होने के बाद अब वो वापस से अपने काम पर फोकस कर पा रहीं है। उनका कहना है ”जब भी दूसरे बच्चे का फैसला लें, तो यह पूरी तरह से पति-पत्नि का निजी मामला होना चाहिए। उनके इस फैसले में किसी भी तीसरे को शामिल नहीं करना चाहिए। क्योंकि, बच्चे की परवरिश पूरी तरह से उसके माता-पिता पर ही निर्भर होती है। साथ ही अगर दूसरे बच्चे का फैसला ले ही लिया है तो आपनी आर्थिक प्लानिंग पर भी ध्यान दें।”

अगर आप दूसरे बच्चे के लिए मन बना चुके हैं, तो कैसे उसकी परवरिश का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में अपने दोस्त या परिवार के सदस्यों की भी मदद लें सकते हैं। साथ ही, दूसरे बच्चे के आने के बाद आपको अपने पहले बच्चे की भी जरूरतों का पूरा ख्याल रखना चाहिए। कोशिश भी करें कि दोनों बच्चों को एक साथ एक बराबर समय दें।

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