मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य का है सीधा संबंध, जानें इस पर एक्सपर्ट की राय

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 17, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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‘टूट के डाल से हाथों पर बिखर जाती है, ये तो मेंहदी है, मेंहदी तो रंग लाती है…’ बेशक मेंहदी चाहें कैसे भी लगाएं रंग तो उसका चढ़ना ही है। मेंहदी हमारे भारतीय परंपरा में सोलह शृंंगार का एक अहम हिस्सा माना जाता है। वहीं आयुर्वेद में भी मेंहदी को एक विशेष औषधि के रूप में देखा गया है। लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य का भी आपस में कोई संबंध है?  जी हां, यहां पर बात हो रही है, मेंहदी और मानसिक तनाव के बीच के संबंध की। साल 2020 शुरू होते ही सभी को घरों में बंद हो जाना पड़ा, लॉकडाउन के चलते बहुत सारे लोग अकेले हो गए और वे किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझने लगे। लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे भी मिलें जिन्होंने मेंहदी लगा कर या मेंहदी लगाना सीख कर अपनी मानसिक समस्या काे दूर किया। आइए जानते हैं, कुछ ऐसे ही लोगों की कहानी…

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मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य के बीच क्या है संबंध?

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को जानने के लिए हैलो स्वास्थ्य ने बात किया वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के सर सुंदरलाल अस्पताल (BHU) के मनोवैज्ञानिक डॉ. जयसिंह यादव से। डॉ. जयसिंह बताते हैं कि “मेंहदी लगाना एक कला है। हर कला में एक अलग ही क्रिएटिविटी छुपी होती है। क्रिएटिविटी हमारे दिमाग को कुछ अच्छा सोचने के लिए प्रेरित करती है, उस दौरान हमारा दिमाग स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन से दूर होने लगता है।” 

डॉ. जयसिंह ने कहा कि “एक कहावत तो आप सभी ने  सुनी ही होगी, ‘खाली दिमाग शैतान का घर होता है’। बिल्कुल उसी तरह से जब आप अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल किसी भी काम के लिए नहीं करते हैं, तो वह तनाव या अवसाद ग्रसित होने लगता है। इसलिए एक मनोचिकित्सक अपने मरीज को अपना पसंदीदा काम या हॉबी को फॉलो करने की सलाह देता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपको डांस करना पसंद है तो करें, इससे आपका दिमाग डांस में कुछ नए स्टेप्स के बारे में सोचेगा। ठीक इसी तरह से मेंहदी लगाना भी है, जब आप मेंहदी लगाते हैं तो एक तरह की डिजाइनिंग करते हैं। जिससे हमारे ब्रेन में एंग्जायटी और स्ट्रेस का लेवल कम हो जाता है।”

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध रचनात्मकता से है। कुछ भी क्रिएटिव करने से व्यक्ति अंदर से पॉजिटिव महसूस करता है। एक रिसर्च के अनुसार अगर हम रोजाना कुछ क्रिएटिव करते हैं तो हमारा सामाजिक व्यवहार बहुत बेहतर होता है, जिसका सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क है। माना कि भागदौड़ भरी जिंदगी में हम रोजाना बहुत क्रिएटिव नहीं कर पाते हैं, लेकिन अगर हफ्ते में एक दिन का भी वक्त निकालें तो हम खुद को पॉजिटिव रख सकते हैं। 

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मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य की कहानी, लोगों की जुबानी

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य की कुछ कहानियां, जिन्होंने खुद को एंग्जायटी और स्ट्रेस को खुद पर हावी नहीं होने दिया :

लॉकडाउन के स्ट्रेस को मेंहदी लगा कर किया दूर

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य

जौनपुर (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली 17 वर्षीया सृष्टि मौर्या बताती हैं कि “वो बोर्ड एग्जाम खत्म होने के बाद आगे एंट्रेंस एग्जाम की तैयारियों में जुट गई थी। लेकिन तभी लॉकडाउन हो गया और आगामी सभी एंट्रेंस एग्जाम रद्द हो गएं। जिसके बाद मुझे अपने भविष्य को लेकर स्ट्रेस महसूस होने लगा। क्योंकि लोग कहते थें कि ये चीजें लंबी चलेंगी और लॉकडाउन पर लॉकडाउन लगता चला जा रहा था। इन बातों ने मुझे काफी तनाव में डाल दिया और रोजाना मुझे सिरदर्द की शिकायत भी रहने लगी। इसी बीच मैंने दो नई चीजें करने की ठानी, जिसमें एक तो था पेंटिंग करना और दूसरा मेंहदी लगाना। इस लॉकडाउन में पेंटिंग और मेंहदी लगाना सीख कर मैनें खुद की क्रिएटिविटी को निखारा है। अपनी क्रिएटिविटी से खुद को पॉजिटिव भी रखा है। साथ ही अपने एंट्रेंस एग्जाम्स की तैयारियां भी अच्छे से कर रही हूं।”

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हिना ने मानसिक तनाव को कम किया

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली पूजा सिंह ने बताया, “मेंहदी कभी कबार शौकिया तौर पर लगाना एक अलग बात होती है। लेकिन जब आप अपने हुनर में एक्सपेरिमेंट करते हैं तो वह आपके लिए किसी बोनस से कम नहीं होता है। बस लॉकडाउन में मैंने भी यही किया। जब लॉकडाउन की घोषणा हुई और जॉब पर भी जाना बंद हो गया तो आने वाले समय को लेकर मानसिक तनाव होना लाजमी है। ऐसे में मैंने खुद के हुनर को निखारने की सोची और मेंहदी की नई-नई डिजाइंस को लेकर काम करने लगी। जिससे मैं मानसिक तनाव को नहीं महसूस करती थी और काफी पॉजिटिव भी रही। इसलिए मेरा मानना है कि मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य का आपस में संबंध है।” 

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लॉकडाउन में सीखा नया हुनर

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य

इस बारे में लखनऊ (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली 26 वर्षीया सौम्या श्रीवास्तव बताती हैं कि “लॉकडाउन शुरू होते ही ऑफिस बंद हो गया। अब सिर्फ घर पर ही रहना था इस बीच अंदर ही अंदर घुटन सी महसूस होने लगी कि किस तरह से ये मुश्किल वक्त बीतेगा। मुझे हमेशा से मेंहदी लगवाने का बड़ा शौक रहा है। इसलिए मैंने सोचा कि इस समय तो बाहर जा कर मेंहदी लगवा नहीं सकती थी। इसलिए मैंने इस लॉकडाउन में मेंहदी लगाने का हुनर सीखा। जिससे मैंने खुद की मेंटल हेल्थ को फिट रख पाई।  लॉकडाउन के दौरान  मेंहदी लगाना सीख कर मैंने खुद को क्रिएटिव बनाया और इस तरह से लॉकडाउन में खुद पर स्ट्रेस को हावी नहीं होने दिया।”

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मेंहदी के चिकित्‍सीय उपयोग क्या हैं? 

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य

मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही मेंहदी  के कई चिकित्सीय उपयोग भी है। आइए जानते हैं कि मेंहदी किन स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपयोगी है :

तेज बुखार में है बहुत उपयोगी

जैसा कि बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि मेंहदी की तासीर ठंडी होती है और बुखार में सिर पर ठंडी पट्टी रखने का प्रावधान भी है। ऐसे में आयुर्वेद में तेज बुखार को कम करने के लिए मेंहदी का उपयोग किया जाता है। ऐसे में सिर पर मेंहदी की पत्तियां पीस कर लगाने से शरीर का तापमान कम होता है और मरीज को राहत मिलती है। 

सिरदर्द में दे राहत

सिरदर्द कई कारणों से होता है, कई बार मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने के कारण भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य का आयुर्वेद में भी संबंध है। मेंहदी की पत्तियों को पीस कर सिर पर लगाने से सिरदर्द में राहत मिलती है। इससे सिर पर मौजूद नसों में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है और माइग्रेन व सिरदर्द में भी राहत मिलती है। 

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 अनिद्रा को दूर करने के लिए

मेंहदी के तेल का इस्तेमाल सोने से पहले करने से आपको अच्छी भी नींद आती है। मेंहदी का तेल एक प्रकार का इसेंशियल ऑयल है, जिससे आपके दिमाग की कोशिकाएं रिलैक्स होती है और बेहतर नींद आती है।

मेंहदी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है 

मेंहदी के पानी को पीने या बीज का सेवन करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम भी अच्छी तरह से काम करता है और हार्ट में ब्लॉकेज को रोकता है। लेकिन इसके इस्तेमाल के पहले आपको डॉक्टर का परामर्श ले लेना चाहिए।

एजिंग को कम करती है मेंहदी

मेंहदी में एंटी एजिंग गुण होते हैं। मेंहदी का तेल त्वचा पर नियमित इस्तेमाल करने से एजिंग और झुर्रियां जल्दी नहीं पड़ती है। वहीं, इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होने के कारण ही कील-मुंहासों में भी राहत मिलती है। 

इस तरह से आपने जाना कि मेंहदी और मानसिक स्वास्थ्य का आपस में क्या संबंध है। साथ ही मेंहदी का चिकित्सीय उपयोग भी जाना आपने। इसलिए अब तो आप समझ ही गए होंगे कि मेंहदी सोलह शृंगार से भी ज्यादा की चीज है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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