फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार, जल्द मिलेगी राहत

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Update Date जुलाई 6, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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फंगल इंफेक्शन एक आम संक्रमण है और फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार भी उपलब्ध हैं। किसी व्यक्ति में फंगल इंफेक्शन तब होता है, जब कवक (फंगस) शरीर के किसी भाग को प्रभावित करती है। इम्यून सिस्टम जब इनसे लड़ने में सक्षम नहीं होता है, तब फंगल फंगल इंफेक्शन होने लगता है। इसमें त्वचा की ऊपरी सतह पर पपड़ी, पैरों में खुजली, पैरों के नाखूनों का पीला और मोटा होना, त्वचा पर लाल चकत्ते बनना और उनके चारों ओर खुजली होना, पसीने वाले हिस्सों में ज्यादा खुजली होना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। यह ज्यादातर पैर की उंगलियों के पोरों पर, उनके बीच की जगहों पर तेजी से फैलता है। फंगल इंफेक्शन कई प्रकार के होते हैं, जैसे :

फंगल इंफेक्शन के प्रकार:

  • एथलीट फुट
  • जॉक खुजली
  • रिंगवार्म
  • कैंडिडिआसिस
  • नाखून में फंगस

और पढ़ें : अपनी डायट में शामिल करें ये 7 चीजें, वायरल इंफेक्शन से रहेंगे कोसों दूर

फंगल इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षण निम्नलिखित हैं। जैसे-

  • प्रभावित क्षेत्र लाल होना या छाले पड़ना
  • त्वचा में पपड़ी निकलना
  • संक्रमित क्षेत्र में खुजली या जलन होना
  • योनि के आसपास खुजली और सूजन
  • सफेद दाग आना और अत्यधिक खुजली होना
  • पेशाब करने या संभोग करने के दौरान जलन या दर्द होना
  • त्वचा रूखी हो जाना तथा दरारें पड़ जाना

और पढ़ें : पेनिस फंगल इंफेक्शन के कारण और उपचार

फंगल इंफेक्शन के कारण क्या हैं?

इसका मुख्य कारण मिट्टी, हवा और पर्यावरण में मौजूद कवक (फंगस) होते हैं। यह समस्या किसी को भी हो सकती है। फंगल इंफेक्शन अक्सर फेफड़ों या त्वचा पर मुख्य रूप से अपना प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा भी फंगल इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • इम्यून सिस्टम कमजोर होना 
  • ज्यादातर गर्म, नम वातावरण या त्वचा का नम रहना
  • एड्स रोग, एचआईवी संक्रमण, कैंसर, मधुमेह जैसी बीमारियां
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना
  • ज्यादा पसीना आना 

और पढ़ें : यीस्ट इंफेक्शन कैसे फर्टिलिटी को कर सकता है प्रभावित?

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार क्या हैं?

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं। जैसे-

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार दही:

फंगल इंफेक्‍शन के घरेलू उपचार के लिए आप दही का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। समस्‍या होने पर दही को कॉटन में लेकर संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से धो लें। इस उपाय को संक्रमण के साफ होने तक एक दिन में दो बार अपनाएं। इसके साथ ही दही में प्रोबायोटिक फैक्टर यानी ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो कि पेट को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इससे आपके डायजेशन में मदद मिलती है और साथ ही पेट में होने वाली हर परेशानी से राहत भी मिलती है। यह दूध के मुकाबले आसानी से पच जाता है।

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार लहसुन:

लहसुन में मौजूद उपयोगी एंटी-फंगल गुणों के कारण यह किसी भी प्रकार के इंफेक्शन का बहुत ही प्रभावी उपाय है। इसके अलावा, इसमें एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटीबायोटिक गुण भी मौजूद होते हैं, जो रिकवरी की प्रक्रिया के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समस्‍या होने पर दो लहसुन की कली को अच्‍छे से पीसें। फिर इसमें जैतून के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर बारीक पेस्‍ट बना लें। फिर इस पेस्‍ट को संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें। अब गुनगुने पानी से इसे धो लें। दरअसल लहसुन खाने में स्वाद और फ्लेवर डालने के साथ-साथ शरीर को पोषण देने का भी काम करता है। इसमें एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण होते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन, मैंगनीज, कैल्शियम, आयरन आदि पोषक तत्व होते हैं।

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार हल्दी:

हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और एंटी-फंगल गुणों के रूप में जाना जाता है। साथ ही, इसके हीलिंग गुण समस्या को ठीक करने और संक्रमण को दोबारा होने से रोकते हैं। फंगल इंफेक्शन से राहत पाने के लिए त्‍वचा के प्रभावित हिस्‍से पर कच्ची हल्दी की जड़ के रस को लगाएं। दो से तीन घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। फिर फिर गुनगुने पानी से धो लें। संक्रमण के दूर होने तक इस उपाय को दिन में दो बार करें। हल्दी हम सभी के आहार में रोज शामिल होने वाला मसाला है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक चिकित्सा पद्धति तक हर जगह हल्दी के फायदों का उल्लेख मिलता है। इसकी जड़ का इस्तेमाल कई तरह की दवाओं में किया जाता है। इसका बोटेनिकल नाम करकुमा लोंगा (Curcuma longa) नाम है, जो कि जिंगीबरेसी (Zingiberaceae) फैमिली से आता है।

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार टी ट्री ऑयल:

टी ट्री ऑयल में मौजूद प्राकृतिक एंटी-फंगल गुण फंगल इंफेक्शन को रोकने में मदद करते हैं। साथ ही इसके एंटीसेप्टिक गुण शरीर के अन्‍य भाग में इंफेक्शन के प्रसार को रोकते हैं। ट्री टी ऑयल में ऑलिव ऑयल और बादाम के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिलाएं फिर इस मिश्रण को संक्रमित त्‍वचा पर लगाएं। टी-ट्री ऑयल (Tea Tree Oil) को टी-ट्री (Tea Tree) की पत्तियों से निकाला जाता है। इसका बोटेनिकल नाम मेलेलुका अल्टरनिफोलिया (Melaleuca alternifolia) है जो कि Myrtaceae प्रजाति का है। यह मुख्यतः ऑस्ट्रेलियाई तटों पर पाया जाता है। इसा ऑयल त्वचा के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। यह मुंहासे, दाद, खुजली जैसी त्वचा संबंधित समस्याओं में काफी लाभदायक होता है

पिछले कुछ वर्षों में इसका ऑयल पूरे विश्व में काफी इस्तेमाल किया जाने लगा है। वर्तमान में यह एसेंशसियल ऑयल कॉस्मेटिक, टॉपिकल मेडिसिन और दूसरे घरेलू उत्पादों में काफी इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं।

और पढ़ें : हर समय रहने वाली चिंता को दूर करने के लिए अपनाएं एंग्जायटी के घरेलू उपाय

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार नारियल का तेल:

यह फैटी एसिड इंफेक्शन के लिए जिम्‍मेदार फंगस को मारने में मदद करता है। नारियल के तेल को संक्रमित त्‍वचा पर लगाकर, थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। इंफेक्शन साफ होने तक इस उपाय को दिन में दो से तीन बार दोहराएं। आप चाहें तो नारियल तेल और दालचीनी के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर भी लगा सकते हैं। 

फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार जैतून के पत्ते:

जैतून की पत्तों में एंटीफंगल के साथ-साथ एंटी-माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। इस कारण यह फंगस को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं। इससे इंफेक्शन को तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है। जैतून के पत्तों को पीसकर पेस्‍ट बना लें। फिर इसे संक्रमित त्‍वचा पर सीधा लगा लें। तीस मिनट लगा रहने के बाद इसे गुनगुने पानी से साफ कर लें।

फंगल इंफेक्शन होने पर आप ऊपर बताए गए फंगल इंफेक्शन के घरेलू उपचार के उपायों को अपना सकते हैं। ये इस समस्या को दूर करने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं। लेकिन, अगर आपको लगे कि समस्या ज्यादा बढ़ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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