Iritis : आईराईटिस क्या है? जानें इसका कारण, लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट मई 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिभाषा

आंखें कई चीजों से मिलकर बनी है, इसमें में से एक है आइरिस। आइरिस आंख का रंगीन हिस्सा होता है यह कॉर्निया के नीचे होता है और यह बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि यही आईबॉल (पुतली) में जाने वाले प्रकाश की मात्रा निर्धारित करता है। आइरिस में किसी कारण से जब सूजन आ जाए तो उसे ही आईराईटिस कहा जाता है। आईराईटिस के लक्षण और उपचार क्या है जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।

आईराईटिस (Iritis) क्या है?

आंखों का रंगीन हिस्सा जिसे आइरिस कहते हैं, मस्कुलर फाइबर्स से बना होता है और यही निर्धारित करता है कि आंख की पुतली में प्रकाश कितनी मात्रा में जाएगा। ऐसा वह अधिक रोशनी में पुतली को छोटा और कम रोशनी में उसे बड़ा करके करता है। कुछ लोगों की आइरिस में  सूजन या इंफ्लामेश हो जाती है इसे ही आईराईटिस कहा जाता है। ऐसा कई कारणों से हो सकता है।

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आईराईटिस के कारण

आईराईटिस किसी दुर्घटना/चोट का परिणाम हो सकते हैं या फिर इसकी अन्य वजहें हो सकती हैः

और पढ़ें – बायपोलर डिसऑर्डर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

लक्षण

आईराईटिस के लक्षण

आईराईटिस तुरंत विकसित होता है और आमतौर पर सिर्फ एक ही आंख को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में शामिल है-

  • आंख ये भौंह के पास दर्द
  • प्रकाश के संपर्क में आने पर आंख में दर्द
  • लाल आंखें, खासतौर पर आइरिस के पास
  • पुतली का छोटा होना या आकार में बदलाव
  • धुंधली दृष्टि
  • सिरदर्द
  • आंख से बहुत अधिक पानी आना।
  • आईराईटिस के कारण ग्लूकोमा या मोतियाबिंद होना, जिसकी वजह से आंखों की रोशनी जा सकती है।

और पढ़ें : Campylobacter : कैम्पिलोबैक्टर इंफेक्शन क्या है?

डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवाल

यदि आपको आईराईटिस डायग्नोस होता है, तो आपके मन में कुछ सवाल रहते है जिसका जवाब आप डॉक्टर से चाहते हैं। ऐसे में डॉक्टर से निम्न सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत करेःं

क्या आंख को स्थाई क्षति का कोई संकेत हैं?

क्या स्थाई रूप से आंखों की रोशनी जाने का कोई संकेत है?

जब मेरी आंखें ठीक हो मुझे क्या उम्मीद करनी चाहिए?

आपके यहां आने के दौरान मुझे किन लक्षणों के बारे में बताना है?

मेरा आईराईटिस क्या सिर्फ आंख की समस्या है या किसी अन्य कारण से है?

और पढ़ें : कोलाइटिस क्या है?

निदान

आईराईटिस का निदान

डॉक्टर आपसे पूछेगा कि आपको आईराईटिस के लक्षण कब से महसूस हो रहे हैं। इसके बाद आपको निम्न टेस्ट की जरूरत पड़ सकती हैः

स्लिट लैंप टेस्ट

इसकी मदद से डॉक्टर को आपके आंख की अंदर की स्पष्ट स्थिति पता चलती है। डॉक्टर आंख में चमकदार लाइट के जरिए देखता है कि सूजन कहां है। आंख की पुतली को बड़ा करने के लिए आई ड्रॉप डाला जा सकता है।

टोनोमेट्री

यह परीक्षण आपकी आंख के दबाव को मापता है। डॉक्टर आई ड्रॉप से आपकी आंख को सुन्न कर देगा और एक उपकरण की मदद से आंख को स्पर्श करेगा। आंख में हवा का एक झोंका डाला जाता है जिससे दवाब मापा जाता है।

और पढ़ें : Blood clotting disorder : ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर क्या होता है?

उपचार

आईराईटिस का उपचार

आईराईटिस में डॉक्टर की दी हुई दवा और फॉलोअप चेकअप की जरूरत होती है, इसलिए आई स्पेशलिस्ट से दिखाना जरूरी है।

  • हमेशा डॉक्टर की दी हुई दवा का ही इस्तेमाल करें।
  • यदि प्रकाश की वजह से आंख में दर्द अधिक हो रहा है गहरे रंग का चश्मा पहनें।
  • हल्के एनाल्जेसिक ले सके हैं, जैसे एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल) या आइबुप्रोफेन (एडविल) यह आपकी असुविधा को थोड़ा कम करेंगे।

आईराईटिस के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट

उसके उपचार के लिए डॉक्टर आई ड्रॉप या दवाओं का इस्तेमाल करेगा, जिससे घाव जल्दी ठीक हो और दर्द भी कम हो जाए।

आईराईटिस के लिए दवाएं

इसमें उपचार के लिए दवा का इस्तेमाल आई ड्रॉप के रूप में किया जाता है जिससे आंख की पुतली चौड़ी हो जाती है और यह आइरिस मसल्स में होने वाली ऐंठन को कम करता है, जिससे सूजी हुई आइरिस को थोड़ा आराम मिले। इससे घाव जल्दी ठीक होने और दर्द कम होने में मदद मिलती है।

स्टेरॉयड आई ड्रॉप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते आईराईटिस का कारण वायरस या बैक्टीरिया न हों। स्टेरॉयड आई ड्रॉप से आइरिस की सूजन कम करने में मदद मिलती है। यदि आंख की स्थिति में एक हफ्ते में सुधार नहीं होता है, तो आपका डॉक्टर स्टेरॉयड की गोलिया या आंख के पास स्टेरॉयड का इंजेक्शन दे सकता है। उपचार कितना लंबा चलेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका घाव या बीमारी कितनी गंभीर है। उपचार के बाद आंख की स्थिति में सुधार हो जाता है।

और पढ़ें : Pilonidal cyst- पिलोनाइडल सिस्ट क्या है?

जोखिम

आईराईटिस से जुड़े जोखिम

यदि आईराईटिस का सही तरीके से उपचार न किया जाए तो इसकी वजह से निम्न का खतरा बढ़ जाता हैः

मोतियाबिंद

यदि आईराईटिस के कारण सूजन लंबे समय तक रहता है तो आंख की लेंस पर धुंधली परत जैसी जम सकती है, जिससे मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है।

असामान्य पुतली

स्कार टिशू पुतली को अंतर्निहित लेंस या कॉर्निया से चिपकाए रख सकता है, जिसकी वजह से इसका आकार बदल जाता है और यह प्रकाश को नियंत्रित करने का अपना काम बहुत धीमी गति से करता है।

ग्लूकोमा

बार-बार होने वाले आईराईटिस के कारण ग्लूकोमा हो सकता है। यह गंभीर स्थिति है जिसमें आंख के अंदर बहुत अधिक दबाव पड़ता है और इससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

कॉर्निया में कैल्शियम जमा होना

इससे कॉर्निया को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता है और आपकी दृष्टि कमजोर होने लगती है।

और पढ़ें- Thrush: थ्रश क्या है?

रेटीना के अंदर सूजन

सूजन और तरल पदार्थ से भरे सिस्ट आंख के पीछे रेटीना में विकसित होते हैं जिससे वजह से आपको धुंधला नजर आएगा।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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