Suicidal Tendency : सुसाइड टेंडेंसी (आत्महत्या) क्या है?

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अपडेट डेट नवम्बर 30, 2019 . 6 मिनट में पढ़ें
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परिचय

सुसाइड टेंडेंसी (Suicidal Tendency) क्या है?

आत्महत्या या सुसाइड टेंडेंसी (Suicidal Tendency) एक व्यक्तिगत निजी फैसला होता है। जिसकी वजह से लोग अपनी खुद की जान दे देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण तनावपूर्ण जीवन होता है। अगर आपको किसी के भी साथ सुसाइड के लक्षण देखते हैं, तो आप उस व्यक्ति को सुसाइड करने से रोक सकते हैं।

जब लोगों को लगता है कि उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है तो वे सुसाइड का फैसला कर सकते हैं। लेकिन ऐसी स्थितियों से निकलकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं और दोबारा अपने जीवन का आनंद ले सकते हैं।

कितना सामान्य है सुसाइड टेंडेंसी?

हर साल विश्व भर में एक लाख से अधिक लोग सुसाइड करते हैं। वैश्विक स्तर पर सुसाइड का आंकड़ा प्रति 1 लाख में से 16 व्यक्ति है। दुनिया में औसतन, हर 40 में एक व्यक्ति सुसाइड करता है। दुनिया में होने वाली लगभग 1.8 फीसदी मौतें आत्महत्या की वजह से होती है। पिछले 45 सालों से वैश्विक स्तर पर आत्महत्या का मामला 60 फीसदी तक बढ़ा है।

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लक्षण

सुसाइड टेंडेंसी के लक्षण क्या है?

सुसाइड टेंडेंसी के सामान्य लक्षणों की पहचान इनसे की जा सकती हैः

  • आत्महत्या के बारे में बात करना- उदाहरण के तौर पर, इस तरह की बातें करना “मैं खुद को मारने जा रहा हूं,” “काश मैं मर चुका होता” या “काश मैं पैदा ही नहीं हुआ होता”
  • जानलेवा वस्तुएं खरीदना जैसे- बंदूक या तरह-तरह की दवाओं को इकट्ठा करना
  • सामाजिक जीवन से दूरी बनाना, अकेले रहना
  • मूड स्विंग होना, कभी बहुत ज्यादा भावनात्मक होना
  • मरने की कोशिश करना
  • किसी स्थिति में उलझना और निराश रहना
  • बहुत ज्यादा शराब या दवाएं लेना
  • खाने या सोने के पैटर्न सहित सामान्य दिनचर्या में बदलाव
  • खुद के लिए जोखिमभरे या खतरनाक कदम उठाना, जैसे बहुत तेज वाहन चलाना
  • लोगों से ऐसे अलविदा कहना जैसे फिर से उनसे मिलने वाले नहीं हो
  • गंभीर तौर पर परेशान रहना, चिंता करना या अकेले में रहना

ध्यान रखें कि हर किसी व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों की इन स्थितियों के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है, जबकि कुछ लोग अपनी स्थितियों के बारे में कोई बात नहीं करते हैं। वे आमतौर पर अपनी भावनाओं को सीक्रेट के तौर पर रखते हैं।

सुसाइड के सारे लक्षण ऊपर नहीं बताए गए हैं। अगर आपको इसके लक्षणों के बारे में कोई सवाल है, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको आत्महत्या जैसे ख्याल आ रहे हैं, लेकिन आप खुद को तुरंत नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं तोः

  • अपने करीबी दोस्त या परिवार के सदस्य से मिलें
  • किसी आध्यात्मिक व्यक्ति से संपर्क करें
  • आत्महत्या बचाव नंबर पर कॉल करें
  • अपने मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात करें। उनसे मिलने का समय निर्धारित करें
  • ध्यान रखें कि आत्महत्या के विचार अपने आप नहीं बदल सकते हैं, इसलिए उचित मदद लें।

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कारण

सुसाइड टेंडेंसी के क्या कारण हैं?

मन में आत्महत्या के विचार आने के कई कारण हो सकते हैं। जिनमें से अधिकतर, आत्महत्या के विचार उन स्थितियों की वजह से आते हैं जिनका सामना हम नहीं कर सकते हैं या वो उम्मीदों को तोड़ने वाले होते हैं। कई स्थितियों में कुछ लोगों के पास भविष्य के लिए कोई आशा या उम्मीद नहीं रहती है, जिसकी वजह से वो आत्महत्या का प्रयास करने लगते हैं।

कई बार आत्महत्या के आनुवंशिक लिंक भी हो सकते हैं। जो लोग आत्महत्या करते हैं या जिनके पास आत्मघाती विचार या व्यवहार होते हैं, उनके परिवार में आत्महत्या का इतिहास हो सकता है।

जोखिम

कैसी स्थितियां सुसाइड टेंडेंसी के विचार को बढ़ा सकती हैं?

आंकड़ों के मुताबिक, महिलाएं आत्महत्या के लिए अधिक प्रयास करती हैं। लेकिन, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में आत्महत्या करने की अधिक संभावना होती है क्योंकि वे आमतौर पर अधिक प्रभावी तरीकों का उपयोग करते हैं, जैसे कि बंदूक।

आपको आत्महत्या का खतरा हो सकता है अगर आप:

  • निराशाजनक, बेकार, उत्तेजित, सामाजिक रूप से अलग या अकेला महसूस करते हैं
  • किसी तनाव से भरा जीवन जीते हैं, जैसे किसी प्रियजन से दूर होना, वित्तीय या कानूनी समस्याएं
  • शराब या नशीले पदार्थों का बहुत ज्यादा सेवन करते हैं, जो आपको अकेले रहने के लिए मजबूर कर सकते हैं और इससे मन में आत्महत्या के विचार को बढ़ावा मिलता है
  • कोई मानसिक विकार, जैसे- डिप्रेशन, तनाव या बाइपोलर डिसऑर्डर
  • परिवार में मानसिक समस्याओं का इतिहास होना, शारीरिक या यौन शोषण जैसे मेंटल डिसऑर्डर
  • लंबे समय से कोई बीमारी, जो उपाचर के बाद भी ठीक नहीं हो रही हो
  • समलैंगिक (लेस्बियन), गे, बाइसेक्सुअल या ट्रांसजेंडर होना, जिसकी वजह से पारिवारिक कलेश या सामाज मे अपमान की भावना महसूस करना
  • पहले कभी आत्महत्या का प्रयास किया हो

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निदान और उपचार

प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

सुसाइड टेंडेंसी का निदान कैसे किया जाता है?

आपकी शारीरिक और मानसिक स्थिति के आधार पर आपके डॉक्टर आपके लक्षणों की पहचान कर सकते हैं। आपकी स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है इसके बारे में वो आपके व्यक्तिगत इतिहास और पारिवारिक इतिहास की जानकारी भी ले सकते हैं।

आपके निदान के दौरान आपका डॉक्टर आपसे निजी बातों को जानेंगे। आपके मन में आत्महत्या के ख्याल कब से आ रहें हैं, क्यों आ रहे हैं इनकी जानकारी लेंगे। वे आपसे आपकी और आपके परिवार की पिछली और मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियों के बारे में बात करेंगे। इससे उन्हें आपके लक्षणों के निदान के लिए मदद मिलेगी।

इस दौरान वे कुछ बातों का मूल्याकंन भी करेंगेः

  • मेंटल हेल्थ कंडीशनः अधिकतर मामलों में, आत्महत्या का मुख्य कारण मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर हो सकता है। अगर आपके डॉक्टर को लगता है कि आपके मन में आत्महत्या के विचार किसी मेंटल डिसऑर्डर के कारण आ रहे हैं, तो वह आपको किसी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल के पास इलाज कराने की सलाह देंगे। जो आपको आत्महत्या से बचान करने के लिए सटीक निदान प्रदान कर सकते हैं और आपकी स्थिति के अनुसार आपका उपचार निर्धारित कर सकते हैं।
  • नशीले पदार्थों का सेवनः शराब या नशीली दवाओं के दुरुपयोग करने के कारण भी आत्मघाती सोच और आत्महत्या जैसे विचारों को बढ़ावा मिल सकता है। शराब या नशीली दवाओं के उपयोग से होने वाली किसी भी समस्या के बारे में अपने स्वास्थ्य चिकित्सक को बताएं। अगर नशीले पदार्थों के सेवन से आपको आत्महत्या के विचार आ रहे हैं, तो आपको शराब छुड़ाने या रीहबिलटैशन प्रोग्राम की मदद लेनी चाहिए।
  • मेडिकेशन: काउंटर पर मिलने वाली दवाओं का इस्तेमाल या कुछ घरेलू उपायों से भी आत्महत्या और आत्मघाती व्यवहारों को बढ़ावा मिल सकता है। अगर आप मौजूदा समय में काउंटर से मिलने वाली किसी दवा या हर्बल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।

आत्महत्या का इलाज कैसे होता है?

व्यक्ति के आत्मघाती विचारों और व्यावहारों के अनुसार उसका इलाज किया जा सकता है। सुसाइड के ज्यादातर मामलों में, उपचार में टॉक थेरेपी और दवाएं शामिल हो सकती हैं।

टॉक थेरेपी

टॉक थेरेपी को मनोचिकित्सा के रूप में भी जाना जाता है। यह आत्महत्या करने के जोखिम को कम करने के लिए सबसे मददगार उपचार विधि होती है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) (Cognitive behavioral therapy) टॉक थेरेपी का एक रूप है जो अक्सर उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जो आत्महत्या के विचार रखते हैं। इस थेरेपी की मदद से यह सिखाया जाता है कि तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं और भावनाओं को कैसे कम किया जा सकता है। सीबीटी नकारात्मक विचारों को सकारात्मक लोगों के साथ बदलने में भी मदद कर सकता है और आपके जीवन में संतुष्टि और नियंत्रण की भावना वापस ला सकता है।

मेडिकेशन

अगर टॉक थेरेपी इसके इलाज के लिए असफल होती है, तो दवाओं का सहारा लिया जा सकता है जो शारीरिक और मानसिक स्थिति को बदलने में मददगार हो सकती हैं। इस दौरान आपको निम्न दवाओं की सलाह दी जा सकती हैः

  • एंटीडिप्रेसन्ट
  • एंटीसाइकोटिक दवाएं
  • एंटी-एंग्जाइटी दवाएं

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जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

जीवनशैली में बदलाव या घरेलू उपचार क्या हैं, जो मुझे आत्महत्या करने से रोकने में मदद कर सकते हैं?

लाइफस्टाइल में बदलाव और घरेलू उपाय निम्न प्रकार से हैं जो आपको आत्महत्या के विचार से छुटकारा दिला सकते हैं:

  • एल्कोहॉल और ड्रग्स से दूरीः शराब और ड्रग्स का उपयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये पदार्थ आत्मघाती विचारों की सोच को बढ़ावा देते हैं।
  • नियमित रूप से व्यायाम करना: हर हफ्ते कम से कम तीन बार, नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने से मस्तिष्क के कुछ रसायनों का उत्पादन तेज होता है जो आपको खुशी और अधिक आराम का अनुभव कराती हैं।
  • अच्छी नींद लेना: हर दिन कम से कम छह से आठ घंटे की नींद लें। अगर आपको सोने में परेशानी हो रही है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें।

आत्मघाती विचारों को रोकने में मदद करने के लिए, आपको निम्न कदम उठाने चाहिए:

  • किसी से इस बारे में बात करें- आपको कभी भी आत्मघाती भावनाओं को पूरी तरह से खुद से सुलझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अगर किसी तरह की कोई परेशानी है तो परिवार के किसी करीबी सदस्य या करीबी दोस्तों से इसके बारे में बात करें। उन वजहों के बारे में उनसे बात करें जिनकी वजह से आपके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं। ऐसे कई संगठन और सहायता समूह हैं जो आत्मघाती विचारों का सामना करने में आपकी सहायता कर सकते हैं। यह आपको इसका एहसास दिलाते हैं कि आत्महत्या करना तनावपूर्ण जीवन की घटनाओं से निपटने का सही तरीका नहीं है। राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम लाइफलाइन ऐसी ही एक संस्था है। जो हफ्ते के सातों दिन और 24 घंटे आपकी मदद करने के लिए तैयार रहता है।
  • अपने डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएं लें- जब तक आपका डॉक्टर आपको दवाओं के सेवन बंद करने का निर्देश न दें, तब तक उन दवाओं का सेवन करना चाहिए। बिना अपने डॉक्टर के निर्देश के आपको अपनी दवा के खुराक में बदलाव नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी आत्महत्या की भावनाएं वापस आ सकती हैं। अगर मौजूदा समय में जिन दवाओं का इस्तेमाल आप कर रहे हैं, अगर उसके कारण आपको नकारात्मक साइड इफेक्ट्स दिखाई दें, तो अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करें।
  • कभी भी अपॉइंटमेंट न छोड़ें- आपने डॉक्टर द्वारा थेरेपी के लिए दिए गए समय पर उनसे मिलने जाएं।
  • चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दें- अपनी आत्महत्या की भावनाओं को रोकने और खत्म करने के लिए अपने चिकित्सक से बात करें। इसके लक्षणों को पहचानने और उसके निदान के बारे में उनसे बात करें। इसके लक्षणों और चेतावनी के संकेतों के बारे में परिवार के सदस्यों और दोस्तों को भी बताएं ताकि वे समय रहते आपकी मदद कर सकें।
  • खतरनाक हथियारों से दूर रहना- आत्महत्या के घातक तरीकों जैसे किस भी हथियार, चाकू या खतरनाक दवाओं से दूर रहें।

अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो उसकी बेहतर समझ के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

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