
फिश ऑयल जैसा की नाम से ही आपने अनुमान लगा लिया होगा की हम मछली के तेल के बारे में बात कर रहें है। आपने कई बार फिश ऑयल के बारे में किसी न किसी से जरुर सुना होगा। लेकिन शायद अब-तक आपने इसको उपयोग नहीं किया होगा, क्योंकि सुनी-सुनाई बातों पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है।तो आज हम आपसे इसके फायदे नुकसान खुराक सभी के बारे में बताएंगे। सबसे पहले तो बता दें की ये ऑयल आमतौर पर ऑयली फिश, जैसे कि हेरिंग herring, टूना tuna, एन्कोवीज़ anchovies और मैकेरल mackerel से बनाया जाता है। लेकिन कभी-कभी इसके लिए अन्य प्रजातियों की मछलियों से उत्पन्न होता है, जैसा कि कॉड लिवर ऑयल के मामले में होता है। मछली के तेल में दो सबसे महत्वपूर्ण गुण ओमेगा -3 फैटी एसिड इकोसापेंटेनोइक एसिड (ईपीए) और डोकोसाहेक्सैनोइक एसिड (डीएचए) होते हैं। ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने के लिए एक निश्चित दवा के रूप में कुछ मछली के तेल का उपयोग किया जाता है।मछली के तेल का उपयोग अक्सर दिल और बल्ड सिस्टम के लिए कार्य करता है। मछली के तेल का उपयोग किडनी से जुड़ी कई समस्याओं के लिए भी किया जाता है। साधारण रुप से ओमेगा -3 फैटी एसिड भोजन से प्राप्त होते हैं। वे शरीर में अपने आप निर्मित नहीं होते हैं। मछली के तेल में दो ओमेगा -3 एस होते हैं, जिन्हें डोकोसाहेक्सानोइक एसिड (डीएचए) और इकोसापेंटेनोइक एसिड (ईपीए) कहा जाता है। डीएचए और ईपीए के आहार स्रोत फैटी मछली हैं, जैसे सैल्मन, मैकेरल और ट्राउट, और शेलफिश, जैसे कि मसल्स, सीप और केकड़े। कुछ नट, बीज और वनस्पति तेलों में एक और ओमेगा -3 होता है जिसे अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) कहा जाता है। मछली के तेल आपको ऑयल और कैप्सूल के रूप में आती है। हाई ट्राइग्लिसराइड्स और ब्लड प्रेशर के इलाज और दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए मछली का तेल लेते हैं।
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यदि आप हर हफ्ते एक से दो ऑयली फिश नहीं खाते हैं तो आप फिश ऑयल को उपयोग करने के बारे में सोच सकते हैं।
-बता दें की इसकी खुराक आपकी उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर EPA और DHA पर दी जाती है।
-डब्ल्यूएचओ संयुक्त ईपीए और डीएचए के 0.2–0.5 ग्राम (200-500 मिलीग्राम) के दैनिक सेवन की सिफारिश करता है। यदि आप गर्भवती हैं,आपको हृदय रोग (116Trusted Source) का खतरा है, तो खुराक बढ़ाना आवश्यक हो सकता है।
-यदि आप मछली के तेल की खुराक खरीदना चाहते हैं, तो यह आपको ऑनलाइन कई शॉपिंग साइट पर मिल जाएगी।
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मछली के तेल की खुराक की उच्च खुराक लेने से रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। मछली के तेल की खुराक को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन मछली के तेल की खुराक कुछ इस प्रकार के दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।
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एंटीकोआगुलंट और एंटी-प्लेटलेट ड्रग्स, जड़ी बूटियों और पूरक(Anticoagulant and anti-platelet drugs, herbs and supplements)-
इस प्रकार की दवाएं, जड़ी-बूटियां और सप्लीमेंट बल्ड क्लॉट को कम करते हैं। लेकिन यह संभव है कि उनके साथ मछली के तेल की खुराक लेने से रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
रक्तचाप दवाओं, जड़ी बूटियों और पूरक(Blood pressure drugs, herbs and supplements. )
मछली के तेल की खुराक लेने से बल्ड प्रेशर थोड़ा कम हो सकता है।बल्ड प्रेशर की दवाओं के साथ ये लेने से बल्ड प्रेशर प्रभाव बढ़ सकता है।
गर्भनिरोधक दवाएं(Contraceptive drugs)
आमतौर पर ट्राइग्लिसराइड्स पर मछली के तेल के प्रभाव से कुछ गर्भनिरोधक दवाएं अपना हस्तक्षेप कर सकती हैं।
ऑर्लिस्ट (ज़ेनिकल, अल्ली)(Orlistat (Xenical, Alli))
इसे वजन घटाने वाली दवा के साथ मछली का तेल लेने से फिश ऑयल फैटी एसिड का अवशोषण कम हो सकता है। इसलिए इसको अलग-अलग लेने के बारें में सोचे।
विटामिन ई (Vitamin E)
मछली का तेल लेने से विटामिन ई का स्तर कम हो सकता है।
उपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। हैलो स्वास्थ्य किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।
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डिस्क्लेमर
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Current Version
24/06/2020
shalu द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Niharika Jaiswal