असामान्य तरीके से वजन का बढ़ना संकेत है कमजोर मेटाबॉलिज्म का

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अपडेट डेट दिसम्बर 18, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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मेटाबॉलिज्म एक स्वस्थ्य शरीर के लिए काफी अहम माना जा सकता है। भूख लगने और खाना खाने की मात्रा भी मेटाबॉलिज्म पर भी निर्भर कर सकती है। दरअसल, हमारे शरीर में भोजन को एनर्जी का रूप में बदलना की प्रक्रिया ही मेटाबॉलिज्म होता है। जिसे हम चयापचय भी कहते हैं। हमारे शरीर और उसके अंगों को उचित रूप से उसका कार्य करने के लिए एनर्जी की जरूरत होती है। भोजन पचाने के लिए, शरीर में खून का प्रवाह करने के लिए, सांस लेने या हॉर्मोनल संतुलन को बनाए रखने जैसे कई शारीरिक कार्यों के लिए उचित मात्रा में एनर्जी की जरूरत होती है। जिसे हम भोजन के जरिए पूरी करते हैं। अगर किसी के पास कमजोर मेटाबॉलिज्म है, तो उसे किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं या उसके स्वास्थ्य में किस तरह के बदलाव हो सकते हैं, यह इसी बात पर निर्भर कर सकता है।

कमजोर मेटाबॉलिज्म की समस्या क्यों जरूरी है दूर करनी?

जब किसी व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म असंतुलित होता है, तो उसका वजन बढ़ने लगता है और वह मोटा हो जाता है। मोटापे से शरीर में ग्लूकोज का लेवल असंतुलित हो जाता है, जो डायबिटीज होने का जोखिम भी बढ़ा सकता है। कमजाेर मेटाबॉलिज्म कई बड़ी बीमारियों का कारण भी बन सकता है। मेटाबॉलिज्म एक प्रक्रिया है, जो हमारे शरीर में भोजन को ऊर्जा के रूप से बदलता है। जब मेटाबॉलिज्म कमजोर हाेने लगता है तो  वजन असामान्य तरीके से घटने या बढ़ने लग सकता है।

सामान्य तौर पर देखा जाए, तो 20 वर्ष की आयु तक शरीर का मेटाबॉलिज्म मजबूत रह सकता है। हालांकि, इस उम्र में अगर वजन अचानक से बढ़ता या घटता है, तो वह मेटाबॉलिज्म में किसी तरह की कमी का संकेत हो सकता है। इसी तरह, 40 से 50 वर्ष की आयु के बाद अक्सर लोगों का मेटाबॉलिज्म अपने आप ही कम होने लगता है और जिसके बाद आमतौर पर लोगों का वजन भी बढ़ना शुरू हो जाता है। अगर उस समय वजन के बढ़ने पर ध्यानपूर्वक निगरानी नहीं रखी जाए, तो इसके कारण मेटाबॉलिक रोगों के साथ-साथ मस्कुलोस्केलेटल संबंधित समस्याएं होने का खतरा भी अधिक बढ़ सकता है। इस तरह से हम यह भी कह सकते हैं कि विभिन्न आयु वर्गों में मेटाबॉलिज्म अलग-अलग तरह का हो सकता है। इसके लिए बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) मोटापे को परिभाषित करने का एक तरीका होता है। जिसके आधार पर हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि किसी वयस्क भारतीय व्यक्ति का 18 से 23 के बीच बीएमआई सामान्य माना जा सकता है।

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कमजोर मेटाबॉलिज्म की समस्या दूर करने के लिए क्या कर सकते हैं?

कमजोर मेटाबॉलिज्म की समस्या दूर करने के लिए आप एक्सरसाइज से लेकर उचित डायट का भी सहारा ले सकते हैं। जिसके बारे में आप नीचे पढ़ सकते हैंः

अच्छे मेटाबॉलिज्म के लिए एक्सरसाइज

मेटाबॉलिज्म हमारा जितना ज्यादा अच्छा होगा, हम उतने ज्यादा एक्टिव रहेंगे। अच्छे मेटाबॉलिज्म में आहार और व्यायाम की अहम भूमिका होती है। व्यक्ति के पोषण और स्वास्थ्य में अच्छे डायट प्लान और नियमित रूप से एक्सरसाइज को शामिल करने से मोटापे से ग्रस्त रोगियों का मेटाबॉलिज्म ठीक किया जा सकता है। साथ ही, वे इससे होने वाली जोखिमों और नुकसान से भी बचाव कर सकते हैं। कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जिन पर मात्र आहार और व्यायाम से कोई असर नहीं होता। ऐसे लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह पर सर्जरी का भी सहारा लेना पड़ सकता है।

बेरिएट्रिक सर्जरी

कमजाेर मेटाबॉलिज्म को सुधारने के लिए कोई भी दवाई या जादूई गोली नहीं है। यदि किसी व्यक्ति की मेटाबॉलिज्म अनुकूल है तो मोटापे और मेटाबॉलिक रोगों के उपचार लिए आहार और व्यायाम से अच्छे परिणाम अवश्य प्राप्त होते हैं। लेकिन, अगर कोई अच्छे परिणाम नहीं दे पा रहा है या कम कैलोरी वाला आहार नहीं ले पा रहा है या कठिन व्यायाम नहीं कर पा रहा है तो इसका अर्थ यह होता है कि मेटाबॉलिक निर्धारण बिंदु सामान्य अवस्था से बहुत अधिक दूर हो गया है। विचलित हुआ मेटाबॉलिक निर्धारण बिंदु किसी व्यक्ति को आहार या कठिन व्यायाम व्यवस्था का पालन करने नहीं दे सकता है।

ऐसी अवस्था में और 35 से अधिक की बीएमआई होने पर मेटाबॉलिक निर्धारण बिंदु को ठीक करने के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी सबसे अच्छे उपाय के तौर पर काम करती है। यह सर्जरी सफलतापूर्वक और स्थायी तरीके से वजन कम करने के लिए सबसे अच्छे वैज्ञानिक उपचार साबित हुई है। यह और भी कई मेटाबॉलिक रोगों को ठीक करती है, जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हॉर्मोन का असंतुलन, जोड़ों का असंतुलन, वैरिकोज वेन्स, वसा यकृत, बांझपन, सांस का फूलना, ह्रदय और गुर्दे की समस्याएं आदि।

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डायट

मेटाबॉलिज्म घटनाक्रमों की एक प्रक्रिया और अनुक्रम है और इसे लगातार देखभाल की जरूरत हो सकती है। अपने कमजाेर मेटाबॉलिज्म को सही करने के लिए हाई प्रोटीन डायट लेना चाहिए जैसे कि अंडा, दूध, चीज, चिकन, फिश, सीफूड और मीट आदि। इसी के साथ एक्सरसाइज भी करना चाहिए। प्रोटीन फैट को मांसपेशियों में बदलकर मजबूत बनाता है इसलिए वजन का  कंट्रोल भी रहता है। इसके अलावा आयोडीन की भरपूर मात्रा भी लेते रहें। यह अच्छे मेटाबॉलिज्म  में अहम रोल निभाता है। इसके लिए आप नमक, दूध से बने पदार्थ और अंडे का सफेद भाग आदि ले सकते हैं। इसके अलावा मछली भी इसका अच्छा स्त्रोत है। आयरन के अलावा कैल्शियम की भी आवश्यक मात्रा लेनी जरूरी होती है। इसके लिए जरूरी हैं  कि आप अपने खाने में कैल्शियम की भी भरपूर मात्रा में शामिल करें। इससे आपकी हड्डियां भी मजबूत बनती हैं, साथ ही आपका कमजाेर मेटाबॉलिज्म भी अच्छा बना रहता है। इसके लिए आप दूध, पनीर और डेयरी प्रोडक्ट ले सकते हैं।

मेटाबॉल्जिम को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों में अदरक भी महत्वपूर्ण है। इसलिए कोशिश करें कि आप अदरक का भी सेवन करें, लेकिन उचित मात्रा में। एक रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि यह शरीर के वजन और रक्त शर्करा पर एक शक्तिशाली प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही अगर ब्रेकफास्ट में अदरक से बनी कोई गर्म ड्रिंक पी जाए तो आपका मजबूत थर्मोजेनिक (कैलोरी-बर्निंग)  मजबूत होता है। इसलिए इसे चाय, सूप, डिश आदि में डालकर जरूर खाना चाहिए। इसके अलावा हरी सब्जियों का सेवन करें।  इस तरह के फूड्स आपके पाचन तंत्र के लिए अच्छे होते हैं क्योंकि यह धीरे-धीरे डायजेस्ट होते हैं। इससे आपकी रक्त शर्करा में वृद्धि नहीं होती है। कई रिसर्च ये बताते हैं कि लो-जीआई डाइट डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम के अलावा कैंसर की समस्याओं से बचाते हैं। इसलिए आप अधिक मात्रा में हरी सब्जी, छोले, फल, बीन्स और चोकर वाले ब्रेकफ्रास्ट अपनी डाइट में शामिल करें।

इसके अलावा पानी का तो आप सभी को पता होगा कि यह शरीर के लिए फायदेमंद होता है। मेटाबॉलिज्म को अच्छा बनाए रखने में पानी का भी एक बड़ा हाथ है। इससे शरीर के सभी बैक्टेरिया बाहर निकल निकालता है और साथ ही मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है।

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कमजोर मेटाबॉलिज्म के लक्षण(ADD THIS BEFORE-कमजोर मेटाबॉलिज्म की समस्या दूर करने के लिए क्या कर सकते हैं?)

  • बढ़ता मोटापा यानी वजन का तेजी से बढ़ना
  • कमर का बढ़ता आकार यानी कमर के हिस्से में मोटापा ज्यादा बढ़ना
  • गर्दन पर काले धब्बे नजर आना
  • सुस्ती होना, आलस लगना या सुबह उठकर खासतौर पर फ्रेश महसूस न होना
  • बदन दर्द होना और ऐसा लगातार बने रहना
  • जोर की भूख लगना और लगातार खाना खाते रहना
  • मिठाई खाने की इच्छा होना और चाह के भी उसे न रोक पाना
  • किसी भी काम में मन न लगना
  • एक्सरसाइज के दौरान मन न लगना और बहुत जल्दी थक जाना

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कमजोर मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए आप इन बातों का भी ध्यान रख सकते हैं

समय पर हेल्दी ब्रेकफास्ट करना

अगर आप अभी बिजी लाइफस्टाइल के कारण हर दूसरे दिन ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं या भूल जाते हैं, तो आपको अपनी यह आदत बदलनी चाहिए। मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए शरीर को उचित मात्रा में खाने की जरूरत होती है। इसलिए हर रोज सुबह उठने के बाद लगभग एक घंटे के अंदर आपको ब्रेकफास्ट कर लेना चाहिए। सुबह ब्रेकफास्ट स्किप करने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है। जिसके कारण आपके शरीर में कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया भी धीमी हो सकती है। जो आपको अधिक थका हुआ महसूस होने का कारण भी बन सकता है।

प्रोटीन युक्त डायट शामिल करना

रिसर्च के अनुसार, कार्बोहाइडेट(PRONUNCIATION) और फैट के मुकाबले प्रोटीन शरीर के मेटाबॉलिक रेट को 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। इसलिए आपको अपनी डायट में प्रोटीन की मात्रा अधिक शामिल करनी चाहिए। जिसके लिए आप आपने भोजल में नट्स, पालक, अंडा, मछली, ब्रोकली आदि शामिल कर सकते हैं। हालांकि, अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन न करें। आपके लिए इसकी उचित मात्रा कितनी हो सकती है इस बारे में आपने डॉक्टर की उचिच सलाह भी आप ले सकते हैं।

चाय की जगह कॉफी करें शामिल(REFERENCE?)

हममें से अधिकतर लोग सुबह उठते ही चाय पीने की आदत फॉलो करते हैं। अगर आप भी इन्हीं में से एक हैं, तो आपको अपनी यह आदत बदलनी चाहिए। अपने मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए आप सुबह-सुबह चाय की जगह कॉफी पी सकते हैं। कॉफी मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने में मदद कर सकती है। कैफीन के गुण मेटाबॉलिज्म को 3 से 11 प्रतिशत तक बूस्ट कर सकती है। साथ ही, यह फैट बर्न करने में भी मदद कर सकती है।

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