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बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी का कब दी जाती है? साथ ही जानिए इसके प्रकार

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी का कब दी जाती है? साथ ही जानिए इसके प्रकार

    बोन कैंसर बॉडी की किसी भी हड्डी में हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर पेल्विस या हाथ या पैर की बड़ी हड्डियों में होता है। बोन कैंसर होना दुर्लभ है। जबकि नॉनकैंसरस बोन ट्यूमर कैंसरस ट्यूमर की तुलना में अधिक कॉमन है। कैंसर के इलाज के लिए सर्जिकल रिमूवल सबसे कॉमन है, लेकिन कीमोथेरिपी और रेडिएशन थेरिपी भी फायदेमंद हो सकती हैं। इस लेख में हम बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer) के बारे में जानकारी दे रहे हैं। सर्जरी, कीमोथेरिपी या रेडिएशन थेरिपी के उपयोग का निर्णय बोन कैंसर के प्रकार पर भी निर्भर करता है।

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer)

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी का यूज हाय एनर्जी किरणों या पार्टिकल्स का यूज कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए किया जाता है। बोन कैंसर के ज्यादातर प्रकार में कैंसर कोशिकाएं रेडिएशन के जरिए आसानी से नहीं मरती हैं। इसलिए हाय डोज की जरूरत होती है। जिससे आसपास के हेल्दी टिशूज, नर्वस, ब्लड वेसल्स डैमेज हो जाते हैं। इस वजह से ज्यादातर प्रकार के बोन ट्यूमर के लिए रेडिएशन थेरिपी को मुख्य ट्रीटमेंट की तरह उपयोग नहीं किया जाता है।

    एक्सर्टनल बीम रेडिएशन थेरिपी

    एक्सर्टनल बीम रेडिएशन थेरिपी को बॉडी के बाहर से दिया जाता है जिसे कैंसर पर फोकस किया जाता है। इस प्रकार की रेडिएशन थेरिपी का उपयोग बोन कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा किया जाता है। ट्रीटमेंट शुरू होने से पहले टीम टार्गेट एरिया का अच्छी तरह से मेजरमेंट लेती है। जिसके लिए इमेजिंग टेस्ट जैसे कि एमआरआई का यूज किया जाता है ताकि रेडिएशन बीम्स के लिए सही एंगल और रेडिएशन के प्रॉपर डोज को निर्धारित किया जा सके। इस प्लानिंग सेशन को स्टिमुलेशन कहा जाता है।

    अधिकतर, रेडिएशन एक से अधिक ट्रीटमेंट में दिया जाता है। प्रत्येक ट्रीटमेंट एक्स-रे प्राप्त करने जैसा है, हालांकि रेडिएशन का डोज बहुत अधिक होता है। उपचार दर्दनाक नहीं होता है। प्रत्येक सेशन के लिए, व्यक्ति एक विशेष टेबल पर लेटता है जबकि एक मशीन सटीक कोणों से रेडिएशन भेजती है। प्रत्येक उपचार केवल कुछ मिनटों तक चलता है।

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer) का उपयोग कब किया जाता है?

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer) निम्न स्थितियों में उपयोग की जाती है।

    सर्जरी के बाद

    अगर डॉक्टर इस बात को लेकर निश्चिंत नहीं होते हैं कि कैंसर चला गया है तो बची हुई कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन थेरिपी का उपयोग किया जाता है।

    और पढ़ें: स्केरॉटिक लीजन्स (Sclerotic lesions) से बढ़ जाता है कैंसर का खतरा?

    सर्जरी की जगह

    दूसरी ट्रीटमेंट के साथ सर्जरी की जगह बोन कैंसर के लिए रेडिएशन थेरिपी का यूज किया जाता है। यह ऐसे कैंसर के लिए उपयोग होती है जो पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। यह थेरिपी ट्यूमर की ग्रोथ को कंट्रोल करने और दूसरे लक्षणों जैसे कि दर्द और सूजन को कंट्रोल करने में मदद करती है।

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी के प्रकार (Radiation therapy types)

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer) के कई प्रकार यूज होते हैं। चूंकि हड्डी के कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन के हाय डोज की आवश्यकता होती है, डॉक्टर आमतौर पर इलाज करते समय विशेष प्रकार की रेडिएशन थेरिपी का उपयोग करते हैं। ये दृष्टिकोण उन्हें रेडिएशन बीम की स्ट्रेंथ को नियंत्रित करने की अनुमति देते हैं ताकि हाय डोज ट्यूमर तक पहुंच जाए और आस-पास के ऊतकों को नुकसान न पहुंचाएं।

    इंटेंसिटी मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरिपी (Intensity-modulated radiation therapy)

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी के इस प्रकार में एक कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग ट्यूमर तक रेडिएशन बीम्स को अलग-अगल एंगल से टार्गेट करने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही बीम्स की स्ट्रेंथ को भी एडजस्ट किया जाता है। जिससे रेडिएशन डोज को बढ़ाने से आसपास के टिशूज के डैमेज का खतरा कम होता है।

    और पढ़ें: Stages of Bone cancer: जानिए बोन कैंसर के स्टेज 1 से 4 तक की महत्वपूर्ण जानकारी और टेस्ट!

    स्टेरियोटेक्टिक रेडियोसर्जरी (Stereotactic radiosurgery)

    इस टेक्नीक के जरिए स्माल ट्यूमर एरिया के लिए डॉक्टर रेडिएशन के बड़े डोज का इस्तेमाल करते हैं। जो आमतौर पर एक सेशन में दिया जाता है। ट्यूमर की स्पष्ट लोकेशन को बताने वाले इमेजिंग टेस्ट के होने के बाद रेडिएशन की एक बहुत पतली बीम प्रभावित एरिया को अलग-अगल एंगल से फोकस करती है। यह रेडिएशन सोर्स और कंप्यूटर कंट्रोल्ड रोबोटिक आर्म के जरिए होता है जो व्यक्ति के लेटने के बाद रोटेट होती है।

    कई बार डॉक्टर कई छोटे ट्रीटमेंट्स में रेडिएशन का हाय डोज देते हैं जिसे स्टिरियोटेक्टिक बॉडी रेडियोथेरिपी (Stereotactic body radiotherapy) कहा जाता है।

    प्रोटॉन बीम रेडिएशन थेरिपी (Proton-beam radiation therapy)

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer) के तीसरे प्रकार प्रोटॉन बीम रेडिएशन थेरिपी में एक्स रे या किसी दूसरे रेडिएशन की जगह प्रोटोन का उपयोग कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए किया जाता है। प्रोटॉन्स एटम्स का हिस्से होते हैं जो अपनी ज्यादातर एनर्जी को पूरी तरह से रिलीज करने से पहले निश्चित दूरी से ट्रैवल करते हैं, लेकिन ये जहां से गुजरते हैं वहां पर थोड़ा डैमेज करते हैं।

    यह एक्स-रे से अलग है, जो ट्यूमर तक पहुंचने से पहले और बाद में सामान्य ऊतक से उतनी ही मात्रा में ऊर्जा छोड़ते हैं। डॉक्टर प्रोटॉन का उपयोग ट्यूमर को विकिरण की उच्च खुराक देने के लिए कर सकते हैं ताकि इससे आसपास के सामान्य ऊतक को कम नुकसान पहुंचे।

    इस प्रकार का उपचार छोटे, जटिल क्षेत्रों (जैसे खोपड़ी या रीढ़ की हड्डी के आधार) में ट्यूमर के इलाज में सहायक हो सकता है, जहां आस-पास की संरचनाओं तक पहुंचने वाले विकिरण को सीमित करना बहुत महत्वपूर्ण है।

    ब्रैकीथेरेपी (Brachytherapy)

    हड्डी के कैंसर के कुछ मामलों के इलाज के लिए डॉक्टर ब्रैकीथेरेपी का उपयोग करते हैं। यह इंर्टनल रेडिएशन का एक रूप है जो रेडिएशन थेरिपी को सीधे ट्यूमर तक पहुंचाता है। इस थेरिपी का एक आम उपयोग है, जिसमें शल्य चिकित्सा के दौरान रेडिएशन का एक बड़ा डोज सीधे ट्यूमर तक पहुंचाना है। अन्य प्रकार की ब्रैकीथेरेपी में अस्थायी या स्थायी रेडियोएक्टिव तत्व शामिल होते हैं जो ट्यूमर के अंदर इलाज करते हैं। बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी में ये थेरिपी भी प्रभावी मानी जाती है।

    और पढ़ें: Photodynamic therapy for Skin Cancer: जानिए स्किन कैंसर के लिए फोटोडायनेमिक थेरिपी की प्रक्रिया और इससे होने वाले साइड इफेक्ट्स!

    बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी के दुष्प्रभाव (Radiation therapy side effects)

    विकिरण चिकित्सा के संभावित दुष्प्रभाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर के किस क्षेत्र का इलाज किया जा रहा है और कितने रेडिशन उपयोग किया जा रहा है।अल्पकालिक समस्याओं में विकिरण प्राप्त करने वाले त्वचा क्षेत्रों पर प्रभाव शामिल हो सकते हैं, जो हल्के सनबर्न जैसे परिवर्तन और बालों के झड़ने से लेकर अधिक गंभीर त्वचा प्रतिक्रियाओं तक हो सकते हैं।

    पेट या एब्डोमिन में विकिरण से मतली, दस्त और मूत्र संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। संभावित दुष्प्रभावों के बारे में मरीज को डॉक्टर से बात करना चाहिए क्योंकि उनमें से कुछ को दूर किया जा सकता है।विकिरण कहां दिया जा रहा है, इसके आधार पर अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

    और पढ़ें: लिवर कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in liver cancer) कब दी जाती है जानिए

    बोन कैंसर के लिए रेडिएशन थेरिपी

    इन अंगों को पहुंच सकता है नुकसान

    • चेस्ट वॉल या फेफड़ों में विकिरण फेफड़े और हार्ट फंक्शन को प्रभावित कर सकता है।
    • जॉ एरिया में रेडिएशन लार ग्रंथियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे शुष्क मुंह और दांतों की समस्या हो सकती है।
    • रीढ़ या खोपड़ी के लिए रेडिएशन रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क में नसों को प्रभावित कर सकता है। इससे तंत्रिका क्षति, सिरदर्द और सोचने में परेशानी हो सकती है, जो आमतौर पर उपचार के एक या दो साल बाद सबसे गंभीर हो जाती है। रीढ़ की हड्डी में विकिरण शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता या कमजोरी का कारण बन सकता है।
    • एब्डोमिन में विकिरण मूत्राशय या आंतों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पेशाब या मल त्याग में समस्या हो सकती है। यह प्रजनन अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए डॉक्टर इन अंगों को विकिरण से बचाने की पूरी कोशिश करते हैं।
    • विकिरण जोड़ों (एक जगह जहां दो हड्डियां एक साथ आती हैं) को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसके परिणामस्वरूप दर्द, निशान, और/या कम मूवमेंट की समस्या हो सकती है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको बोन कैंसर में रेडिएशन थेरिपी (Radiation therapy in bone cancer) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 07/07/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड