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क्या आप जानते हैं टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी से जुड़ी ये जरूरी जानकारी?

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Sayali Chaudhari · फार्मेकोलॉजी · Hello Swasthya


Toshini Rathod द्वारा लिखित · अपडेटेड 02/12/2021

क्या आप जानते हैं टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी से जुड़ी ये जरूरी जानकारी?

डायबिटीज की समस्या किसी भी व्यक्ति को कभी भी होती है। ये एक लाइफ़स्टाइल डिजीज के रूप में मानी जाती है। यही वजह है कि लाइफ़स्टाइल के खराब होने पर डायबिटीज की तकलीफ आपको घेर लेती है। डायबिटीज की समस्या में व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई ऐसे डायबिटीज से जुड़े कॉम्प्लिकेशन हैं, जो व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। इसलिए डायबिटीज (Diabetes) की समस्या में व्यक्ति को अपना खास ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। लेकिन बात हो टाइप टू डायबिटीज में महिलाओं और पुरुषों में दिखाई देने वाली असमानताओं की, तो दोनों ही जेंडर को टाइप टू डायबिटीज के चलते कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes) की बात करें,  तो इस पर कई तरह की रिसर्च की गई है, जिससे टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी से जुड़ी जानकारी को समझा जा सकता है। आइए जानते हैं टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी से जुड़ी यह जरूरी बातें। लेकिन इससे पहले बात करते हैं डायबिटीज के बारे में इन जरूरी बातों को।

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क्या है डायबिटीज (Diabetes) की समस्या?

डायबिटीज (Diabetes) की तकलीफ का सीधा असर हमारे इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। आमतौर पर जब व्यक्ति खाना खाता है, तो शरीर भोजन से मिले शुगर को तोड़कर उसका इस्तेमाल कोशिका में उर्जा बनाने के लिए करता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए पैंक्रियाज को इंसुलिन का उत्पादन करना पड़ता है। इंसुलिन हॉर्मोन शरीर में एनर्जी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जब आप डायबिटीज की गिरफ्त में होते हैं, तो यही पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन (Insulin) पैदा नहीं कर पाती। इसकी वजह से शरीर में ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) बढ़ता चला जाता है। जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर के कामकाज पर इसका प्रभाव पड़ता है और शरीर की कार्यप्रणाली कमजोर होती चली जाती है।

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यदि समय पर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल ना किया जाए, तो डायबिटीज (Diabetes) अपने साथ-साथ कई अन्य जटिलताओं को भी साथ ले आता है। आपके साथ ऐसी स्थिति ना हो, इसलिए जरूरत है आपको डायबिटीज के लक्षण पहचानने की। आइए जानते हैं डायबिटीज के लक्षणों के बारे में।

ये हो सकते हैं डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of Diabetes)

यह तो सभी जानते हैं कि डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकार होते हैं, टाइप वन डायबिटीज (Type 1 Diabetes) और टाइप टू डायबिटीज (Type 2 Diabetes)। टाइप वन डायबिटीज में पैंक्रियाज (Pancreas) इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जिसकी वजह से बीमार व्यक्ति को इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। वहीं टाइप टू डायबिटीज में पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने की रफ्तार कम हो जाती है, जिसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। लेकिन जब आपको डायबिटीज की समस्या रहती है, तब आपको यह लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

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ऐसे भी कुछ लक्षण हैं जो व्यक्तिगत रूप से किसी को महसूस हो सकते हैं और किसी को नहीं। जिनमें शामिल हैं:

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जब आपको यह लक्षण दिखाई दें, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जितनी जल्दी आप डॉक्टर से संपर्क करेंगे, उतनी ही जल्दी आप ब्लड शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर ला सकते हैं। इसलिए समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी माना जाता है। जैसा कि आपने जाना डायबिटीज के समस्या किसी भी व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब बन सकती है, इसलिए डायबिटीज (Diabetes) को समय रहते कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। जैसा कि आपने जाना टाइप टू डायबिटीज किसी भी व्यक्ति के लिए खतरा बन सकता है, वहीं टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes) के बारे में भी आपको जानकारी होनी चाहिए। आइए अब जानते हैं टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी से जुड़ी इस रिसर्च के बारे में।

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टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी को लेकर क्या कहती है रिसर्च? (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes)

टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes)

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association) में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एक रिसर्च में यह पाया गया कि जिन महिलाओं को कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या होती है और साथ ही साथ जो डायबिटीज से ग्रसित होती हैं, उनमें पुरुषों की तुलना में प्रोटेक्टिव इफेक्ट अलग तरीके से दिखाई देता है। दरअसल महिलाओं में देखा जाने वाला प्रोटेक्टिव इफ़ेक्ट डायबिटीज के चलते कम हो जाता है, जिससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) के समस्या का रिस्क बढ़ जाता है। इस रिसर्च के में ये पता चला कि टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes) के मुताबिक पुरुषों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या में डायबिटीज के चलते महिलाओं की अपेक्षा रिस्क ज़्यादा होता है। लेकिन वहीं डायबिटीज से ग्रसित महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा हार्ट रिस्क से जुड़े हुए ट्रीटमेंट आसानी से नहीं मिलते, जिसके चलते डायबिटीज के साथ-साथ कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या में इलाज का सही असर होता हुआ नहीं दिखाई देता और इसका कारण महिलाओं और पुरुषों में मौजूद बायोलॉजिकल डिफरेंस को मारा गया है।

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ऐसी स्थिति में महिलाओं को डायबिटीज के साथ-साथ कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या में खास ध्यान रखने की हिदायत दी जाती है। हालांकि इस क्षेत्र में अधिक जानकारी और रिसर्च की आवश्यकता है। लेकिन मौजूदा रिपोर्ट के मुताबिक यह कहा जा सकता है कि टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी को आसानी से परखा जा सकता है। यही वजह है कि टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes) की स्थिति में महिलाओं को अपने खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ सकती है।

डायबिटीज की समस्या किसी भी व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। खासतौर पर तब, जब व्यक्ति हृदय संबंधित समस्याओं से ग्रसित हो। इन्ही संबंधित समस्याओं में से कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) एक गंभीर समस्या के तौर पर देखी जाती है। ऐसी स्थिति में बायोलॉजिकल डिफरेंस को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ सकती है। टाइप टू डायबिटीज पेशेंट में सेक्स डिस्पैरिटी (Sex Disparities in Treatment of Cardiac Risk Factors in Patients With Type 2 Diabetes)  की स्थिति देखी गई है, इसलिए इस स्थिति में महिलाओं को ध्यान रखने की जरूरत पड़ सकती है।

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