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अनियंत्रित डायबिटीज से जुड़ी स्थिति "डायबिटिक कोमा" का इस तरह से संभव है सही उपचार!

डायबिटीज यानी मधुमेह पिछले कुछ सालों से एक बड़ी समस्या बन कर उभरी है। यह रोग शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है और केवल वयस्क ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकती है? यानी, अगर समय रहते इसके लक्षणों को मैनेज न किया जाए, तो इसके कारण मृत्यु भी हो सकती है। आज हम डायबिटीज से जुडी एक ऐसी ही जटिलता के बारे में बात करने वाले हैं, जिसे डायबिटिक कोमा के नाम से जाना जाता है। पाएं इस डायबिटीज की जटिलता डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से।

क्या है डायबिटिक कोमा (What is Diabetic Coma)?

डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) डायबिटीज से जुडी एक ऐसी जटिलता है, जिसके कारण मरीज बेहोश हो सकता है। डायबिटिक डिपार्टमेंट, किंग’स कॉलेज हॉस्पिटल, लंदन (Diabetic Department, King’s College Hospital, London) के अनुसार डायबिटिक कोमा होश खो देने वाली स्थिति है। जिसका कारण है अनियंत्रित डायबिटीज चाहे यह गंभीर कीटोसिस से जुडी हो या नहीं। अगर आपको डायबिटीज है तो बहुत हाय ब्लड शुगर यानी हायपरग्लाइसेमिया (Hyperglycemia) और बहुत कम ब्लड शुगर यानी हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) के कारण डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति कोमा में चला जाता है , तो वो जीवित तो होता है लेकिन चाह कर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाता।

अगर इस स्थिति का सही इलाज न कराया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। अगर इसे अच्छे से कंट्रोल न किया जाए तो यह समस्या समान्यतया टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अधिक प्रभावित करती है। इसे साथ ही बुजुर्गों व गंभीर रूप से लोगों को भी यह बीमारी हो सकती है।

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डायबिटिक कोमा के हैं यह प्रकार (Types of Diabetic Coma)

डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) के बारे में सोचना ही भयानक है। डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) तब हो सकता है जब किसी व्यक्ति के शरीर में ब्लड ग्लूकोज की मात्रा 600 मिलीग्राम पर डेसीलीटर (mg/dL) या इससे अधिक हो जाए। इसके कारण रोगी बहुत अधिक डीहायड्रेटेड महसूस करते हैं। डायबिटीज कोमा तीन तरह के हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:

डायबिटिक कोमा

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस कोमा (Diabetic Ketoacidosis Coma)

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस आमतौर पर उन लोगों में होता है जो टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हों, जिसे जुवेनाइल डायबिटीज भी कहा जाता है। हालांकि, यह टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में भी पाई जाती है। यह तरह का कोमा कीटोन्स जैसे केमिकलस के बनने से ट्रिगर होता है। कीटोन्स बहुत अधिक एसिडिक होते हैं और इनके कारण खून भी एसिडिक हो जाता है। कीटोएसिडोसिस का सबसे मुख्य कारण है इन्सुलिन की डोज का मिस हो जाना या टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में एक्यूट इंफेक्शन।

डायबिटिक हायपरऑज्मोलर कोमा (Diabetic Hyperosmolar Coma)

यह कोमा गंभीर डीहायड्रेशन और हाय ब्लड ग्लूकोज लेवल (Hyperglycemia) के कारण होता है। इसके साथ ही कुछ अन्य कारणों से भी ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ सकता है जैसे डायबिटीज की दवाई या इन्सुलिन लेना भूल जाना, कोई बीमारी, मीठा खाना आदि। इस प्रकार डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) उन टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में अधिक होता है, जो किसी इंफेक्शन या गंभीर बीमारी का शिकार हों या फ्लूइड की मात्रा कम लेते हों। यह कोमा कुछ ही दिनों या हफ्तों में धीरे-धीरे विकसित होता है। इसलिए, अगर हाय ब्लड ग्लूकोज लेवल या डीहाइड्रेशन का निदान और उपचार शुरू में ही हो जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है।

देखिए कुछ इस तरह आपको जकड़ती है डायबिटीज़ की समस्या

डायबिटिक हायपोग्लाइसीमिक कोमा (Diabetic Hypoglycemic Coma)

हायपोग्लाइसीमिया या लौ ब्लड ग्लूकोज लेवल तब होता है जब रोगी अपनी डायबिटीज की दवाई या इन्सुलिन की अधिक डोज ले लेता है। इसके साथ ही इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर ब्लड ग्लूकोज बहुत लौ लेवल तक पहुंच जाती है तो प्रभावित व्यक्ति बेहोश हो सकता है और उसे दौरे भी पड़ सकते हैं।

डायबिटिक कोमा के लक्षण (Symptoms of Diabetic Coma)

डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) के विकास से पहले आप हाय या लौ ब्लड शुगर के कुछ लक्षण महसूस कर सकते हैं। पीड़ित व्यक्ति को इस समस्या के लक्षणों के बारे में पता होना बेहद जरूरी है। इसके लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं।

हाय ब्लड शुगर (Hyperglycemia)

अगर आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक है तो आप इन लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं

लौ ब्लड शुगर (Hypoglycemia)

अगर आपको लौ ब्लड शुगर की समस्या है, तो डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) की स्थिति में आपको यह लक्षण नजर आ सकते हैं:

  • कम्पन और घबराहट (Shakiness or Nervousness)
  • एंग्जायटी (Anxiety)
  • थकावट (Fatigue)
  • कमजोरी (Weakness)
  • पसीना आना (Sweating)
  • भूख (Hunger)
  • जी मचलना (Nausea)
  • चक्कर आना (Dizziness)
  • बोलने में समस्या (Difficulty speaking)
  • बैचैनी (Confusion)

यह भी पढ़ें : हाइपरग्लाइसेमिया और टाइप 2 डायबिटीज में क्या है सम्बंध?

कुछ लोग, विशेष रूप से जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज है। उनमें हायपोग्लाइसीमिया का पता नहीं चलता है और उन्हें ऐसे कोई संकेत नहीं मिलते हैं, जिससे वो जान पाएं कि उनकी ब्लड ग्लूकोज बहुत कम हो चुकी है। ऐसे में अगर आप हाय या लौ ब्लड शुगर का कोई भी लक्षण महसूस करें, तो अपनी ब्लड शुगर का टेस्ट कराएं और टेस्ट रिजल्ट के अनुसार ही अपने डायबिटीज के लक्षणों का उपचार कराएं।

क्या हैं इस समस्या के कारण (Causes of Diabetic Coma) ?

डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) आमतौर पर शुगर लेवल के बहुत अधिक कम हो जाने या बढ़ जाने के कारण होता है। इसकी एक स्थिति हायपरऑज्मोलर सिंड्रोम (Diabetic Hyperosmolar Syndrome) भी होती है। यह टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में होता है। अगर आप इस स्थिति का अनुभव करते हैं, अगर:

  • आपकी ब्लड शुगर 600 mg/dL से अधिक हो जाए (Your Blood Sugar could be as High as 600 mg/dL)
  • आपके यूरिन में कीटोन्स न हों (Your Urine won’t contain Ketones Usually)
  • आपका खून सामान्य से गाढ़ा हो (Your Blood will be much Thicker than Normal)

एक अन्य स्थिति डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (Diabetic Ketoacidosis) है, जो टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों में आम है। इस स्थिति के बारे में इन चीजों का जानना जरूरी है:

डायबिटिक कोमा

इस परेशानी से जुड़े रिस्क फैक्टर्स कौन से हैं (Risk Factors of Diabetic Coma)?

डायबिटिक से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) का जोखिम हो सकता है। लेकिन इन स्थितियों में यह जोखिम और भी बढ़ सकता है:

इंसुलिन डिलीवरी में समस्या (Insulin Delivery Problems)

अगर आप इंसुलिन पंप कर प्रयोग करते हैं, तो आपको नियमित रूप से अपनी ब्लड शुगर की जांच करनी चाहिए। क्योंकि पंप में समस्या आने के कारण आपमें डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की (Diabetic Ketoacidosis) समस्या हो सकती है।

कोई बीमारी, ट्रामा या सर्जरी (Any Illness, Trauma or Surgery)

अगर आप बीमार हैं या आपको चोट लगी है तो आपके शरीर में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है। यह भी डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (Diabetic Ketoacidosis) का कारण बन सकते हैं।

मेडिकल कंडीशंस

कुछ मेडिकल कंडीशंस जैसे हार्ट फेलियर या किडनी के रोग भी डायबिटिक हायपरऑज्मोलर सिंड्रोम (Diabetic Hyperosmolar Syndrome) की स्थिति के जोखिम को बढ़ा सकती है।

डायबिटीज को अच्छे से मैनेज न करना (Poorly Managed Diabetes)

अगर आप अपनी डायबिटीज को अच्छे से मैनेज नहीं करेंगे, दवाईयां या इंसुलिन डॉक्टर की सलाह के अनुसार नहीं लेंगे तो आपको डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) का खतरा हो सकता है।

एल्कोहॉल का सेवन (Drinking Alcohol)

शराब ब्लड ग्लूकोज पर अप्रत्याशित प्रभाव डाल सकती है। इसके साथ ही इसके प्रभाव से आपको लौ ब्लड शुगर के लक्षणों के बारे में जानना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में हायपोग्लाइसीमिया के कारण डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) का जोखिम बढ़ सकता है। कुछ अवैध ड्रग्स भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं।

यह भी पढ़ें: करना है टाइप 1 डायबिटीज में कीटो डायट फॉलो, तो रखें इन बातों का ध्यान!

डायबिटिक कोमा का निदान (Diagnosis of Diabetic Coma)

अगर आप डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) के लक्षण महसूस करते हैं तो तुरंत इसका निदान और उपचार जरूरी है। इसके निदान के लिए डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच करेंगे और आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में आपसे जानेंगे। आपको इन टेस्ट्स को कराने की सलाह दी जा सकती है:

  • ब्लड शुगर लेवल को जांचने के लिए टेस्ट (Blood Sugar Level Test)
  • कीटोन लेवल के लिए टेस्ट (Ketone Level Test)
  • खून में नाइट्रोजन और क्रिएटिनिन की मात्रा के लिए टेस्ट (Test for Amount of Nitrogen or Creatinine in Blood)
  • खून में पोटैशियम, फॉस्फेट और सोडियम की मात्रा को जांचने के लिए टेस्ट (Test for Amount of Potassium, Phosphate and Sodium in your Blood)

डायबिटिक कोमा का उपचार (Treatment of Diabetic Coma)

डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) की स्थिति में इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट कराना जरूरी है। यह उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि रोगी में ब्लड ग्लूकोज लेवल बहुत अधिक या बहुत कम है। जानिए, कैसे किया जाता है इसका उपचार:

हाय ब्लड शुगर की स्थिति में (High Blood Sugar)

अगर आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक है, तो आपका इलाज इस तरह से किया जा सकता है।

  • आपके टिश्यूस में पानी को रिस्टोर करने में लिए इंट्रावेनस फ्लूइड का प्रयोग किया जा सकता है।
  • आपके सेल्स अच्छे से काम करें इसके लिए पोटैशियम, सोडियम या फॉस्फेट सप्लीमेंट्स दिए जा सकते हैं।
  • टिश्यू खून में ग्लूकोज को अब्सॉर्ब करने में मदद के लिए इंसुलिन की सलाह दी जाती है।
  • किसी अंडरलाइंग इंफेक्शन के लिए सही उपचार किया जाता है।

लौ ब्लड शुगर (Low Blood Sugar)

अगर आपकी ब्लड शुगर लेवल बहुत कम है तो आपको ग्लूकेगॉन (Glucagon Injection) दिया जा सकता है। जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। इसके लिए इंट्रावेनस डेक्सट्रोज का प्रयोग भी किया जा सकता है।

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क्या डायबिटिक कोमा से बचाव संभव है (Prevention of Diabetic Coma)?

आप ब्लड शुगर लेवल को सही रख कर डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) से बच सकते हैं। अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए आप इन तरीकों को अपनाना जरुरी है:

  • ऐसे आहार का सेवन करें जो आपके शरीर में ब्लड ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित रखे। इसके लिए आप हमेशा सही और संतुलित आहार को ही खाएं: जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज आदि। जंक फ़ूड या अनहेल्दी आहार से सेवन से बचें। कभी भी आपके भोजन को स्किप न करें। थोड़ी-थोड़ी देर के बाद कुछ न कुछ खाते रहें। इसके लिए आप अपने डॉक्टर और डायटिशन की सलाह ले सकते हैं।
  • एल्कोहॉल के सेवन से बचें।

Diabetes and Yeast Infection

  • अपने शुगर लेवल को नियमित रूप से चेक और रिकॉर्ड करते रहें। यही नहीं, डॉक्टर के बताए अनुसार ही दवाइयों और इंसुलिन को लें।
  • शारीरिक रूप से एक्टिव रहें। व्यायाम और सैर को अपने जीवन का जरूरी हिस्सा बना लें। अपने डॉक्टर से जानें कि किस तरह से विभिन्न व्यायाम आपके ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं।
  • अगर ब्लड शुगर लेवल अधिक है तो कीटोन्स के लिए यूरिन की जांच कराएं।
  • तनाव से बचें। अगर तनाव की समस्या अधिक हो तो डॉक्टर से इलाज कराएं।
  • मेडिकल आइडेंटिफिकेशन नेकलेस या ब्रेसलेट पहनें, ताकि आप आपकी डायबिटीज के बारे में जान पाएं।

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डायबिटिक कोमा (Diabetic Coma) डायबिटीज से जुड़ी एक गंभीर और जानलेवा समस्या है। लेकिन, इससे बचाव भी आपके हाथों में हैं। उन लक्षणों के बारे में जानें जो डायबिटिक कोमा का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही उन समस्याओं का जल्दी से जल्दी उपचार कराएं, जो इस आपातकालीन स्थिति में परिवर्तित हो सकती है। इसके लिए डायबिटीज के जोखिमों को मैनेज करने की भी कोशिश करें। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर और विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड