जानिए किडनी के रोगी का डायट प्लान,क्या खाएं क्या नहीं

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट October 26, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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वर्तमान समय में बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं, जो हमारे खान-पान में हुई लापरवाही के कारण होती हैं तो उन बीमारियों का इलाज सही खान-पान द्वारा ही ठीक किया जा सकता है। आपने शायद ध्यान दिया होगा कुछ बीमारियों का इलाज करते समय आपका चिकित्सक आपको खाने को लेकर कई प्रकार की रियायत बरतने की सलाह देता है। तो आज हम बात कर रहे हैं, किडनी की बीमारी को एक सही डायट एक बेहतर खान-पान द्वारा कैसे मेंटेन रखा जा सकता है। किडनी के रोगियों को डॉक्टर द्वारा एक विशेष डायट लेने की सलाह दी जाती है। दरअसल किडनी की समस्या आज एक आम समस्या बन चुकी है। इसका एक मुख्य कारण खान-पान में हुई लापरवाही है, तो आज हम जानेगें किडनी के रोगी का डायट प्लान क्या हो सकता है। यह कैसे फॉलो किया जा सकता है।

किडनी डायट क्या है?

किडनी डायट खाने का एक तरीका है, जो आपकी किडनी को और अधिक नुकसान होने से बचाने में मदद करता है। इसका मतलब है कि कुछ खाद्य पदार्थों और तरल पदार्थों को सीमित करना ताकि आपके शरीर में कुछ खास खनिजों का निर्माण न हो जो आपकी किडनी को प्रभावित करें। इसलिए किडनी डायट लेने के लिए कहा जाता है। जिससे आप यह तय कर सकें कि  प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन और खनिजों की कितनी मात्रा लेनी है। साफ तौर पर कहें तो इसमें आपको यह जानने में भी मदद मिलती है कि आप क्या खा सकते हैं और क्या नहीं खा सकते हैं।

किडनी के रोगी का डायट प्लान

किडनी के रोगी का डायट प्लान क्या है। इस आर्टिकल में आपको यह पता चलेगा कि यदि आपको किडनी की समस्या है, तो आपको क्या और कितना खाना चाहिए।

प्याज का उपयोग

लहसुन और जैतून के तेल के साथ प्याज का उपयोग आपके किडनी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक  हो सकता है। प्याज में विटामिन सी, मैंगनीज और बी-विटामिन अधिक होते हैं और इसमें प्रीबायोटिक फाइबर होते हैं। जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

लहसुन का उपयोग

लहसुन का उपयोग किडनी के मरीजों में बहुत लाभदायक होता है। लहसुन में मैंगनीज, विटामिन सी, और विटामिन बी6 होता है। इनके अलावा इनमें सल्‍फर भी होता है जिसमें एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं।

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गोभी का उपयोग

फूल गोभी एक पौष्टिक सब्जी है जो विटामिन सी, विटामिन के और विटामिन बी फोलेट सहित कई पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी यौगिक होते हैं। किडनी के रोगी का डायट प्लान में गोभी का उपयोग किया जा सकता है। इसमें सोडियम,पोटेशियम और फास्फोरस उतना ही पाया जाता है। जितना किडनी के रोगियों की स्थिति को खराब न कर सके।

करौंदा का उपयोग

करौंदा का उपयोग किडनी के मरीजों में किया जा सकता है। इसमें ए-टाइप प्रोथेकाइनिडिन (A-type proanthocyanidins) नामक फाइटोन्‍यूट्रिएंट पाए जाते हैं। ये बैक्‍टीरिया को मूत्र मार्ग और मूत्राशय की परत में चिपकने से बचाने का कार्य करते हैं।

स्किनलेस चिकन का उपयोग

किडनी की बीमारी वाले लोगों के लिए एक सीमित प्रोटीन का सेवन आवश्यक है, शरीर को पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन प्रदान करना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। स्किनलेस चिकन स्तन में त्वचा पर चिकन की तुलना में कम फास्फोरस, पोटेशियम और सोडियम होता है। चिकन की खरीदारी करते समय, ताजे चिकन का चयन करें और पहले से भुने हुए चिकन से बचें, क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में सोडियम और फॉस्फोरस होता है।

मैकाडामिया नट्स का उपयोग

आमतौर पर ज्यादातर नट्स में फास्फोरस उच्च मात्रा में पाया जाता है। इसलिए किडनी को रोगियों में लेने की सलाह नहीं दी जाती है। हालांकि, किडनी की समस्या वाले लोगों के लिए मैकाडामिया नट्स एक स्वादिष्ट विकल्प है। इसमें मूंगफली और बादाम जैसे नट्स की तुलना में फास्फोरस बहुत कम होता है। इसमें गुड फैट , विटामिन बी, मैग्नीशियम, तांबा, आयरन और मैंगनीज पाया जाता है।

मशरूम का उपयोग

किडनी के मरीजों में मशरूम का उपयोग किया जा सकता है। मशरूम में विटामिन बी, कॉपर, मैंगनीज और सेलेनियम की अच्‍छी मात्रा होती है।

और पढ़ें : खानपान और ये आसान तरीके बचाएंगे थायराइॅड से

बेल मिर्च का उपयोग

बेल मिर्च में पोटेशियम की मात्रा बेहद कम होती है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट विटामिन सी अधिक मात्रा में होती है। किडनी के रोगियों में बेल मिर्च का उपयोग किया जा सकता है।

पाइन एप्पल का उपयोग

पाइन एप्पल में बहुत लो पोटेशियम पाया जाता है। जबकि कई ऐसे फल हैं जिनमें अत्यधिक मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है। पाइन एप्पल का उपयोग किडनी के मरीजों में आसानी से किया जा सकता है। इसलिए किडनी के रोगी का डायट प्लान में पाइन एप्पल शामिल करना अच्छा होता है।

लाल अंगूर का उपयोग

लाल अंगूर में विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह न केवल किडनी की बीमारी में बल्कि दिल की बीमारी में भी उपयोग के लिए अच्छा माना जाता है।

शलजम का उपयोग

शलजम किडनी फ्रेंडली होते हैं, शलजम की जड़ फाइबर और विटामिन सी से भरी हुई होती हैं। वे विटामिन बी 6 और मैंगनीज का भी एक अच्छा स्रोत हैं। इस कारण से किडनी के मरीजों में इसका उपयोग आसानी से किया जा सकता है। किडनी के रोगी के डायट प्लान में इसीलिए शलजम शामिल करना चाहिए।

मूली का उपयोग

मूली एक ऐसी सब्जी है ,जिसमें पोटेशियम और फास्फोरस की मात्रा बहुत कम होती हैं, लेकिन इसमें कई अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की उच्च मात्रा होती है। मूली विटामिन सी का एक बड़ा स्रोत माना जाता है, इसमे मौजूद एंटीऑक्सिडेंट हृदय रोग और मोतियाबिंद के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

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बकवीट का उपयोग

कई सारे अनाज फास्फोरस में उच्च होते हैं, लेकिन एक स्वस्थ अपवाद है। लेकिन यह एक पौष्टिक अनाज होता है, जो बी विटामिन, मैग्नीशियम, आयरन और फाइबर की एक अच्छी मात्रा प्रदान करता है। किडनी के रोगी का डायट प्लान में बकवीट का उपयोग करना चाहिए।

डायट चार्ट देखें

ब्रेकफास्ट सुबह- 1 कप ओटमील,½ कप ब्लूबेरी और 3 बड़े चम्मच व्हिपिंग क्रीम

मिड मील सुबह- लाल अंगूर या करौंदा

लंच में –दो चपाती, गोभी की सब्जी, थोड़ी दाल और  राइस

शाम में- एक कप चाय और बिस्कुट

डिनर में- 2 चपाती या चावल, शलजम की सब्जी और कम मात्रा में सलाद

नोट: यदि आप किडनी के लिए डायट फॉलो करना चाहते हैं, तो आपके लिए यह एक उदाहरण है। इसके आधार पर डायट फॉलो कर सकते हैं। किडनी के लिए डायट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

सोडियम वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग

सोडियम नमक (सोडियम क्लोराइड) में पाया जाने वाला पदार्थ है, और इसका उपयोग भोजन बनाने में और अन्य कई प्रकार के खाद्य पदार्थों में किया जाता है। नमक सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले सीजनिंग में से एक है। जो लोग खाने में थोड़ा तेज नमक पसंद करते हैं, उनके लिए नमक का उपयोग करना बेहद मुश्किल होता है। हालांकि, आपके गुर्दे की बीमारी को नियंत्रित करने में नमक (सोडियम) कम करना एक महत्वपूर्ण उपकरण है। आपको भोजन पकाते समय कम नमक का प्रयोग करना चाहिए। यदि आप बाजार से खरीदा हुआ या पैक्ड भोजन खरीदते हैं। तो नमक मिले हुए खाद्य पदार्थो या पेय का उपयोग न करें। आपको  खाने में आचार और पापड़ का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि आपको खाने में नमक कम लग रहा हो तो भी ऊपर से नमक का छिड़काव न करें। किडनी के बीमारी वाले मरीजों को नमक के अधिक प्रयोग से बचना चाहिए।कम सोडियम किडनी के रोगी के डायट प्लान में शामिल होना चाहिए।

और पढ़ें : Thyroid Function Test: जानें क्या है थायरॉइड फंक्शन टेस्ट?

पोटैशियम वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग

पोटेशियम एक खनिज है जो मांसपेशियों के काम करने में शामिल है। जब गुर्दे ठीक से काम नहीं करते हैं, तो पोटेशियम रक्त को बनाता है। यह हर्ट बीट में बदलाव का कारण बन सकता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना हो सकती है। पोटेशियम मुख्य रूप से फलों,दूध ,मीट और सब्जियों में पाया जाता है। आपको इन चीजों से बचने इसकी मात्रा को सीमित करने की आवश्यकता है। पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थइस प्रकार से हैं।

  • खरबूजा
  • केला
  • संतरा
  • अंगूर
  • टमाटर 
  • टमाटर सॉस
  • सूखे सेम
  • कद्दू
  • आलू
  • पका हुआ साग
  • पालक
  • गुड़
  • कोलार्ड
  • स्विस चार्ड

बहुत अधिक पोटेशियम से बचने के लिए हर दिन अलग प्रकार के फलों और सब्जियों का सेवन करना सुनिश्चित करें। जो इस सूची में न हो।

बात यहां खाने पीने की हो रही है तो पारंपरिक खानपान की ताकत को जानना जरूरी है, आइए वीडियो के जरिए जानते हैं क्या होती है पारंपरिक खानपान की ताकत

फास्फोरस वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग

फास्फोरस एक खनिज है, जो आपके रक्त में बन सकता है जब आपकी किडनी ठीक से काम नहीं करती है। ऐसा होता है, तो कैल्शियम आपकी हड्डियों से निकलकर आपकी त्वचा या रक्त वाहिकाओं में इकट्ठा हो सकता है। ऐसे में हड्डी की बीमारी हो सकती है, जिससे आपको हड्डी टूटने की अधिक संभावना है। डेयरी खाद्य पदार्थों में फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इसलिए दूध को प्रति दिन 1 कप तक सीमित करें। यदि आप दूध के बजाय दही या पनीर का उपयोग करते हैं। तो अब आपको केवल एक कप दिन में लेना है।

  • कुछ सब्जियों में भी फास्फोरस होता है जैसे,सूखे बीन्स, साग, ब्रोक्ली, मशरूम और ब्रसेल्स स्प्राउट्स। इन्हें प्रति सप्ताह केवल 1 कप लेने की कोशिश करें।
  • कुछ अनाज में भी फास्फोरस होता है, इन्हें सप्ताह में 1 बार लेने की कोशिश करें जैसे गेहूं के अनाज, दलिया और ग्रेनोला।
  • कुछ पेय पदार्थों में भी फास्फोरस होता है जैसे बीयर, आइस्ड चाय, एक्वाफिना,कीनू और अनानास आदि।

और पढ़ें : थायरॉइड के बारे में वो बातें जो आपको जानना जरूरी हैं

किडनी के रोगियों को क्या नहीं खाना चाहिए

  • नमक वाले पदार्थ
  • फास्फोरस वाले पदार्थ
  • तला हुए चिकन
  • दाल
  • मीट
  • नारियल पानी
  • चाकलेट
  • नमक युक्त मक्खन
  • फालसा
  • खरबूज
  • मटन
  • सूअर का मीट

ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल डायट करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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