एंग्जायटी (Anxiety) से निजात पाना चाहते हैं, तो अपनाएं ये टिप्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 6, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आज की इस भागती-दौड़ती लाइफ में तनाव, टेंशन, अवसाद, चिंता, फ्रिक जैसें शब्द आम हो गए हैं। इस डिजिटल दौर में अधिकांश लोग इन समस्याओं से खुद को घिरा हुआ पाते हैं। लोग दिन-रात काम के साथ-साथ कई तरह की मानिसिक लड़ाइयां अपने भीतर लड़ रहे हैं। एंग्जायटी के कुछ उपाय जानकर आप अपनी लाइफ को बैलेंस और रिलैक्स कर सकते हैं। अत्यधिक चिंता जल्द ही आपकी मानसिक आदत में तब्दील हो सकती है। इसलिए, अपने दिमाग को शांत रखें और हमेशा ही ज्यादा चिंता करने से बचें।

क्या होती है एंग्जायटी

एंग्जायटी स्ट्रेस के प्रति आपकी बॉडी की नेचुरल प्रतिक्रिया है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि एंग्जायटी उस डर या भावना को कहते हैं जिसमें आप यह सोचते हैं कि आगे क्या होने वाला है। एंग्जायटी में कुछ परिस्थितियां जैसे कि स्कूल का पहला दिन, जॉब इंटरव्यू, स्पीच देने से पहले लोगों को लगने वाला डर शामिल हैं। लेकिन, अगर आपकी एंग्जायटी का स्तर ज्यादा बढ़ चुका है और यह छह महीने से ज्यादा समय से हैं। साथ ही एंग्जायटी के कारण अगर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, तो समझ लीजिए कि आप एंग्जायटी डिसऑर्डर का शिकार हो चुके हैं।

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एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार

किसी नई जगह शिफ्ट करने, नई नौकरी शुरू करने या परीक्षा के लिए जाने से पहले थोड़ा चिंतित होना आम बात है। इस तरह की एंग्जायटी आपका मन उदास कर सकती हैं। लेकिन साथ ही यह आपको बेहतर काम करने के लिए मोटिवेट भी कर सकती हैं। एंग्जायटी डिसऑर्डर होने पर आपके अंदर हमेशा डर की भावना रह सकती है। इस तरह की एंग्जायटी होने पर आप रोजमर्रा की चीजों को एंजॉय करने में बाधा महसूस कर सकते हैं। एंग्जायटी का स्तर बढ़ने पर लोगों को लिफ्ट में जाने, रोड क्रॉस करने और यहां तक की घर से बाहर जाने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही सही समय पर मेडिकल हेल्प न लेने पर यह स्थिति और खराब हो सकती है। एंग्जायटी डिसऑर्डर इमोशनल डिसऑर्डर की सबसे कॉमन फॉर्म है और यह किसी भी उम्र में लोगों को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकन साइकेट्रिक एसोसिएशन के अनुसार, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में यह ज्यादा पाया जाता है। ऐसे में कई तरह के एंग्जायटी डिसऑर्डर होते हैं।

पैनिक डिसऑर्डर

समय-समय पर पैनिक अटैक्स का अनुभव करना। पैनिक डिसऑर्डर से ग्रसित लोग अगले पैनिक डिसऑर्डर के डर में जीते हैं।

फोबिया

किसी विशेष चीज, जगह या गतिविधि से डर को फोबिया कहते हैं

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सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर

सामाजिक तौर पर दूसरों द्वारा जज होने के डर को सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर कहते हैं।

सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर

घर या अपने नजदीकी लोगों से दूर जाने का डर सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर कहलाता है।

इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर

बीमारी के कारण होने वाली एंग्जायटी को इलनेस एंग्जायटी डिसऑर्डर कहा जाता है।

 पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर

एंग्जायटी के कारण ट्रॉमा बढ़ जाता है।

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एंग्जायटी अटैक

एंग्जायटी अटैक बढ़ा हुआ डर और चिंता होती है। एंग्जायटी अटैक लोगों में धीरे-धीरे बढ़ता है। साथ ही किसी स्ट्रेसफुल इवेंट के कारण यह स्थिति और खराब हो सकती है। एंग्जायटी अटैक के लक्षण लोगों में अलग-अलग भी हो सकते हैं। क्योंकि कई लोगों में इसके सारे लक्षण नहीं दिखते हैं और साथ ही समय के साथ ये बदलते रहते हैं। एंग्जायटी डिसऑर्डर के ऐसे ही कुछ सामान्य लक्षण हैं:

पैनिक अटैक और एंग्जायटी अटैक में कुछ एक जैसे लक्षण हो सकते हैं। लेकिन, इन दोनों को एक समझने की भूल न करें। इनके बारे में सही जानकारी रखने से आप पहचान पाएंगे कि कब यह एंग्जायटी या पैनिक डिसऑर्डर है।

एंग्जायटी के उपाय

एक बार एंग्जायटी का परीक्षण होने के बाद आप अपने डॉक्टर से इसके इलाज को लेकर बात कर सकते हैं। वहीं कई मामलों में मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है। इन मामलों में लाइफस्टाइल को बदलने भर से काम चल सकता है।  वहीं अगर समस्या गंभीर हो गई है, तो मेडिकल हेल्प की मदद से रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार किया जा सकता है।

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कुछ साधारण उपाय करके इससे बचा जा सकता है।

  • एंग्जायटी के उपाय चाहते हैं, तो आप जरूरत से ज्यादा चिंता न लें और अपने दिमाग को शांत रखें।
  • अपने आपको हर मुश्किल से लड़ने के काबिल समझें और दिमाग में नेगेटिव विचारों को न आने दें। इससे आपको बुरे और नेगेटिव ख्याल नहीं आएंगे और मन शांत रहेगा।
  • आपको यह तय करना होगा कि जिस भी बात को लेकर आप चिंतित हैं, उसका कोई समाधान है या नहीं। यदि है, तो उसके बारे में सोचना सही है, अन्यथा व्यर्थ है।
  • अपनी चिंताओं के बारे में अपने करीबी से बात करें। इससे आप के भीतर की एंग्जायटी कम हो सकती है।
  • अपनी एंग्जायटी को कम करने के लिए आप मेडिटेशन भी कर सकते हैं, जिससे आपका दिमाग शांत और फ्रेश रहेगा।
  • रिसर्च में पता चला है कि संगीत सुनने से दिमाग शांत होता है। इसलिए, एंग्जायटी को कम करने के लिए आप मधुर संगीत सुन सकते हैं। जरूरी नहीं कि आप दिमाग को उत्तेजित करने वाला संगीत सुनें। आप बासुरी की धुन, कुछ लोक संगीत, ट्रांस, नेचर साउंड जैसे पानी का बहना, चिड़ियों का चहकना जैसे साउंड या बैकग्राउंड साउंड को सुन कर खुद को रिलैक्स कर सकते हैं।
  • जब भी आपको बहुत ज्यादा चिंता या एंग्जायटी हो रही हो, तो गहरी सांस लें। इससे आपका मन और दिमाग दोनों शांत होंगे। गहरी सांस लेने से आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और कई बार ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है।

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अपने दिमाग को दूसरी तरफ फोकस करने के लिए आप एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। इससे आपके दिमाग में चल रही चिंता से आपका ध्यान आपके शारीरिक व्यायाम की तरफ मुड़ जाएगा। एक्सरसाइज आपको व्यस्त रखती है और मन में चल रही हलचलों को शांत करने में भी आपकी मदद करती है।

यह थे एंग्जायटी के उपाय। इन्हें अपने जीवन में जरूर इस्तेमाल करें। अपनी रोजमर्रा के कामों को लेकर जीवन में थोड़ी-बहुत चिंता, एंग्जायटी हर इंसान को होती है। लेकिन, यदि कोई व्यक्ति अधिक चिंतित रहने लगे और हर छोटी बात पर गहनता से विचार करें, जिससे उसके मन में भविष्य के लिए डर और तनाव होने लगे, तो यह चिंता का विषय है।

नए संशोधन की डॉ. प्रणाली पाटील द्वारा समीक्षा की गई है।

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