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पढ़ाई में नहीं लगता दिल तो ट्राई करें मरीच्यासन और जानें इसके फायदे और नुकसान

पढ़ाई में नहीं लगता दिल तो ट्राई करें मरीच्यासन और जानें इसके फायदे और नुकसान

मरीच्यासन का नाम ऋषि मारीच के नाम पर पड़ा है जो सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी के पुत्र थे। संस्कृत में मारीच का अर्थ होता है “रोशनी की किरण”। अपने नाम के अनुरूप, इस योगासन का अभ्यास आपको चमत्कारिक परिणाम दे सकता है। आपके शरीर को यह आसन पुराने किसी भी तरह के दर्द से राहत दिला सकता है। इसके साथ ही कूल्हों से संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी यह लाभदायक है। जानिए, इस आसन को कैसे किया जाता है और इसके क्या हैं लाभ।

मरीच्यासन करने का तरीका

मरीच्यासन का अभ्यास करने से पहले इसे अच्छे से सीखना आवश्यक है। इस योगासन को निम्नलिखित चरणों में किया जाता है।

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप किसी साफ और शांत जगह पर कोई दरी या मैट बिछा लें।
  • दंडासन में इस आसन की शुरुआत करें। यानी, सबसे पहले अपने दोनों पैरों को आगे की तरफ सीधा फैला कर बैठ जाएं।
  • अब अपनी गर्दन और कमर को सीधा रखें और दोनों हाथों को अपने शरीर की साइड में आराम से जमीन पर रख दें।
  • अब एक पैर को अपने घुटने की तरफ मोड़ लें। ताकि, आपके पैर का घुटना आपके सीने से टच हो।

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  • इस दौरान अपने दूसरे पैर को सीधा रखें।
  • अब आपका जो पैर सीधा है, उस तरफ ऊपरी शरीर को पैर की तरफ झुकाएं।
  • इसके बाद अपने हाथों को पीछे की तरफ मोड़ें और फोल्ड किये हुए घुटने को पकड़ते हुए एक हाथ से दूसरे हाथ की कलाई के सिरे को पकड़ लें।
  • अब गहरी सांस लें और कुछ देर इसी स्थिति में बने रहें।
  • जितनी देर हो सके, आप इस स्थिति में रह सकते हैं। अधिक देर रहने से आपको अधिक फायदा होगा।
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें और अपनी पहले वाली स्थिति में वापस आ जाएं।
  • ऐसी ही प्रक्रिया दूसरे पैर के साथ दोहराएं।
  • एक बार में कम से कम पांच से छह बार इस मरीच्यासन को रोजाना करें।

मरीच्यासन के लाभ

अन्य सभी योगासन की तरह मरीच्यासन भी हमारे शरीर और दिमाग के लिए लाभदायक है। इसके लाभ कुछ इस प्रकार से हैं:

पाचन क्रिया के लिए बेहतरीन

मरीच्यासन को करने से पाचन क्रिया सही रहती है, जिससे पेट में कोई समस्या नहीं होती। पेट की समस्याओं जैसे गैस, कब्ज, अपच या एसिडिटी को दूर करने के लिए यह आसन बेहतरीन है।

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कंधों और कूल्हों की अकड़न करे दूर

कई लोगों को कूल्हों और कंधों में अकड़न की समस्या होती है। लेकिन, मरीच्यासन करने से कूल्हे और कंधों की मांसपेशियां खुल जाती है। जिससे यहां की अकड़न को दूर होने में मदद मिलती है।

रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद

मरीच्यासन को करने हुए रीढ़ की हड्डी और पीठ सीधी रखनी पड़ती है। जिससे यह मजबूत और लचीली बनती हैं।

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नाक के लिए लाभदायक

शरीर के भीतर श्वास मार्ग को अनलॉक करने में यह योगासन प्रभावी है। इस आसन को करने से जब यह एयरवेज खुलते हैं। तो सूजन और अतिरिक्त बलगम से छुटकारा मिलता है। इसके कारण हमारे फेफड़े भी अच्छे से काम कर पाते हैं।

थकावट से छुटकारा

मरीच्यासन को करने से मांसपेशियां खींचती हैं, शरीर के अंदर के अंग उत्तेजित होते हैं। इस प्रकार से तनावग्रस्त क्षेत्र खुल जाते है और मनुष्य ऊर्जा से भरपूर और खुश महसूस करता है। यह आसन थकावट दूर करने में प्रभावी है। इसे करने पर मनुष्य चुस्त रहता है और खुद में नई ऊर्जा को महसूस करता है।

मासिक धर्म की समस्याओं से राहत

मरीच्यासन करने से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाली दर्द और बेचैनी से मुक्ति मिलती है। इस आसन को करने से पेल्विक क्षेत्र तक खून का परवाह सही से होता है। यही नहीं, पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियां भी मजबूत होती है। जिससे महिलाओं को पीरियड के दौरान होने वाली समस्याओं से राहत मिलती है।

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एकाग्रता बढ़ती है

इस योगासन को करने से दिमाग शांत होता है। मरीच्यासन के अभ्यास के बाद आपकी पीठ का निचला हिस्सा लचीला बनता है। तो इसका प्रभाव हमारे पूरे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। कुछ महीनों तक इस आसन को करने के बाद आप खुद में एक अलग बदलाव महसूस करेंगे। आपका काम में अधिक मन लेगा और अगर आप छात्र हैं तो अच्छे से पढ़ाई कर पाएंगे।

गर्दन और टांगे बने मजबूत

मरीच्यासन में गर्दन को मोड़ने और वापस लयबद्ध तरीके से घुमाने की आवश्यकता पड़ती है। विशेष रूप से, इस आसन में आगे झुकने से गले और कंधों के लचीलेपन में काफी सुधार करता है। इस आसन को करने से टांगे मजबूत और टोन होती हैं। शरीर के वजन को संतुलित करने में भी यह योगासन मददगार है। इसे करने से शरीर में चर्बी नहीं जमती, जिससे मोटापा कम होता है।

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मरीच्यासन को किन स्थितियों में न करें:

इस आसन को करने के कई लाभ हैं लेकिन कुछ स्थितियों में इसे नहीं करना चाहिए, जैसे

  • मरीच्यासन ऐसे लोगो को नहीं करना चाहिए जिन्हे हाई या लो ब्लड प्रेशर की समस्या है।
  • ऐसे लोग भी इस आसन को नहीं करना चाहिए जिन्हे माइग्रेन या सिरदर्द की शिकायत हो। क्योंकि, इस स्थिति में रोगी इस पोज में अधिक समय तक नहीं रह सकता। अगर आप इसे करना चाहते हैं तो डॉक्टर या योग एक्सपर्ट की सलाह लें।
  • अगर आपकी पीठ या कमर में किसी तरह की चोट लगी है या दर्द है। तो भी इस आसन को करने से बचे।
  • पेट दर्द की स्थिति में भी इस आसन को न करें
  • अगर आप गर्भवती हैं तो आप मरीच्यासन या कोई भी आसन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें। किसी योग एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में ही इस आसन को करें।

मरीच्यासन को करने से शरीर के सभी अंग सही से काम करते हैं और इसके साथ ही मानसिक तनाव से भी छुटकारा मिलता है। लेकिन, योग के किसी भी आसान को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें। योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही इन्हें करें। शुरुआत में खुद से योगासनों का अभ्यास करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए, पहले इन्हें अच्छे से सीखना आवश्यक है।

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Anu sharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड