योग, व्यायाम और ध्यान का एक पुराना तरीका है, जिसमें कई आसन हैं। इन सभी आसनों को करने से ढेरों स्वास्थ्य, भावनात्मक और मानसिक लाभ होते हैं। अन्य आसनों की तरह बैठ कर करने वाले आसान भी हमारे लिए फायदेमंद हैं। इन्हीं में से एक है बद्ध पद्मासन। बद्ध पद्मासन में बद्ध का अर्थ है “बंधा हुआ’ और पद्मा का अर्थ है “कमल का फूल’ और आसन का अर्थ है “पुजिशन’। इस आसन को करते हुए मनुष्य का आकार एक बंधे हुए कमल के फूल के समान लगता है। इसीलिए, इसका नाम यह पड़ा। यह एक क्रॉस-लेग्ड योगासन है, जो मन को शांत करता है। यह आसन विभिन्न शारीरिक बीमारियों में राहत पहुंचाता है और साथ ही ध्यान लगाने में भी यह मददगार है। जानिए बद्ध पद्मासन को कैसे किया जाता है। इसके साथ ही इसके फायदों और किन स्थितियों में इसे नहीं करना चाहिए यह जानना न भूलें।
बद्ध पद्मासन करने का तरीका
- बद्ध पद्मासन को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत स्थान पर दरी या मैट बिछा लें।
- अब इस दरी पर पद्मासना यानी लोटस पोज में बैठ जाए।
- पद्मासना में बैठने के लिए आप अपने दायें पैर को बायीं टांग पर रखे और बाएं पैर को दायीं टांग पर रखें।
- अब अपने दोनों हाथों को पीठ के पीछे की तरफ ले कर जाएं और अपने दाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे व बाएं हाथ से दाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें।
- जब आप ऐसा कर रहे हों तो उस समय आपकी रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी होनी चाहिए।
- इसके साथ ही आप अपनी आंखों को बंद या खुला भी रख सकते है। किंतु बंद आंखों से आपको ध्यान लगाने में आसानी होगी।
- इस योगासन को करने के लिए आपको बहुत अधिक अभ्यास की आवश्यकता हो सकती है। क्योंकि, दोनों पैरों के अंगूठे पकड़ने में समस्या होती है।
- अब इस मुद्रा में आप जितनी देर रह सकते हैं, उतनी देर रहने की कोशिश करें।
- इस दौरान आपकी सांस सामान्य होनी चाहिए।
- अब धीरे धीरे अपने पैरों की उंगलियों को छोड़ कर अपनी शुरुआती स्थिति में आ जाएं।
- फिर से दोहरा सकते हैं।
बद्ध पद्मासन के फायदे इस प्रकार हैं:
रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद
बद्ध पद्मासन रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है। इससे रीढ़ की हड्डी की लचीलता बढ़ती है। पीठ के दर्द से राहत मिलती है। इसके साथ ही इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत भी होती है।
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इस आसन को करने से शारीरिक और मानसिक स्थिरता बढ़ती है। जिससे दिमाग भी स्थिर रहता है। जब हम इस पोज को लगातार करते हैं तो इससे दिमाग की तरफ खून का प्रवाह सही से होता है। जिससे दिमाग शांत रहता है। ध्यान लगाने में भी इससे मदद मिलती है। यह आसन जीवन में सकारात्मकता लाता है।
बद्ध पद्मासन में पैरों और हाथों को मोड़ना पड़ता है। जिससे यह मजबूत होते हैं और जब आप इन्हे लॉक करते हैं तो उससे टांगे भी मजबूत और लचीली बनती है। कूल्हों और पीठ के लिए भी यह योगासन लाभदायक है।
इस पोज को करने के लिए कंधे, कोहनी, पीठ, कूल्हे, घुटने आदि के जोड़ों को फैलाना पड़ता है। जिससे इन अंगों में होने वाले दर्द या अन्य समस्याओं को दूर करने में यह योगासन प्रभावी है।
अगर किसी को गठिया की समस्या है तो बद्ध पद्मासन करने से उन्हें गठिया में होने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। इससे जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। लेकिन, अगर आपको गठिया है तो पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की राय अवश्य लें। उसके बाद ही इस आसन का अभ्यास करें।
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यह पोज पेट के अंगों के लिए फायदेमंद है। इससे पाचन तंत्र सही रहता है मेटाबोलिज्म बढ़ता है और पेट के अंगों की अच्छे से मालिश होती है। इससे कब्ज, अपच या पेट की अन्य समस्याएं भी दूर होती हैं।
इस आसन से सिरदर्द और माइग्रेन से छुटकारा मिलता है। अगर आपको यह समस्याएं हैं तो बद्ध पद्मासन के नियमित अभ्यास से राहत मिलेगी।
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- जब भी आप इस बद्ध पद्मासन को कर रहे हों। तब आपका पेट साफ होना चाहिए।
- भोजन से पहले या तुरंत बाद इसे न करें।
- सुबह के समय इसे करना सबसे सर्वोत्तम है
- अगर आपकी योग करने की अभी शुरुआत है तो पहली ही बार में इसे कर पाना मुश्किल है। ऐसे में नियमित रूप से इसका अभ्यास करें। अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा इस योगासन को न करे।
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किन स्थितियों में इसे न करें
- बद्ध पद्मासन आसान को करने के लिए बहुत धैर्य और अभ्यास की जरूरत है। इसलिए, इस आसन को पहले अच्छे से सीख कर इसका अभ्यास कर लें। किसी योग एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं।
- गर्भवती महिलाओं या मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को इस आसन को करने की सलाह नहीं दी जाती। गर्भवती महिलाओं को अगर यह आसान करना है। तो पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
- अगर आपके घुटने में दर्द है या सर्जरी हुई है तो भी आप बद्ध पद्मासन को न करें।
- जिन लोगों को पीठ या कंधों में दर्द रहता है, उन्हें भी इस आसन को नहीं करना चाहिए। किसी एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में इसे करें।
- कंधे में दर्द या सर्जरी, पैर में समस्या आदि की स्थिति में भी इसे न करें।
योग के किसी भी आसन या मुद्रा को बिना अभ्यास या अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए। सबसे पहली इसे अच्छे से सीखें और अभ्यास करें। डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह और मार्गदर्शन के बाद ही योगासन करें। अन्यथा, यह आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।