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गृह मंत्री अमित शाह भी आए कोरोना की चपेट में, देश में नहीं थम रही कोरोना की रफ्तार

गृह मंत्री अमित शाह भी आए कोरोना की चपेट में, देश में नहीं थम रही कोरोना की रफ्तार

कई हफ्तों से कोरोना का इलाज करवा रहें सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की कोरोना रिपोर्ट जहां आज ही निगेटिव आई और उधर देश के गृह मंत्री अमित शाह पॉजिटिव हो गए। अमित शाह ने अपने कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी ट्विटर के जरिए दी। साथ ही यह भी कहा कि जो लोग पिछले कुछ दिनों में उनके संपर्क में आए हैं खुद को आइसोलेट करके अपना टेस्ट करवाएं।

अमित शाह को कोरोना के कुछ शुरुआती लक्षण दिखें जिसके बाद उन्होंने जांच करवाई और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फिलहाल उन्हें गुरग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि अमित शाह की तबियत ठीक है और खुद ट्वीटर हैंडल पर उन्होंने इस बात की जानकारी दी। तमाम तरह की एहतियात बरतने के बावजूद राजनेता लगातार कोरोना की चपेट में आ रहे हैं।

इन्हें भी हुआ कोरोना

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए और फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। उधर अमित शाह के बाद आज ही तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित भी कोरोना वायरस पॉजिटिव मिले हैं। इसके अलावा उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। अब तक कई छोटे-बड़े नेता कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, कई की तो मौत भी हो चुकी है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा को भी कोरोना हुआ था और कुछ ही दिनों में वह ठीक हो गए। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का तो पूरा परिवार की कोरोना की चपेट में आ गया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कोरोना की चपेट में आ गए थे, लेकिन इलाज के बाद जल्द ही स्वस्थ हो गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को भी कोरोना हो चुका है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी और प्लाज्मा थेरपी से उनका इलाज किया गया। इनके अलावा भी बहुत से नेता कोरोना का शिकार हो चुके हैं।

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किसे है ज़्यादा खतरा?

स्वस्थ और युवा लोगों के लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक नहीं है, यदि उन्हें कोरोना होता भी है तो वह जल्द ही उसे मात दे देते हैं। लेकिन उम्रदराज लोग और दिल की बीमारी, डायबिटीज, किडनी की बीमारी, अस्थमा के मरीजों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है। बुजुर्गों को भी इससे अधिक खतरा बताया गया है इसलिए उन्हें ज्यादा एहतियात बरतने को कहा जाता है। स्वस्थ और युवा लोगों को जहां सलाह दी जाती है कि गंभीर लक्षण दिखने पर ही अस्पताल में जाएं, वहीं बुजुर्गों को हल्के लक्षण दिखने पर ही अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी जाती है। देश में कोरोना के मामले 17 लाख का आंकड़ा पार कर चुके हैं। कोरोना की रफ्तार बेहद डरावनी हो चुकी है, पिछले दो दिनों में ही एक लाख का आंकड़ा पार हो चुका है। डब्लूएचओ ने भी हाल ही में कहा है कि यह बीमारी इतनी जल्दी जाने वाली नहीं है और लंबे समय तक इसका असर रहेगा, लोगों को इससे बचने के लिए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और बार-बार हाथ धोना बहुत जरूरी है

कोरोना वायरस के लक्षण

दिसंबर महीने की शुरु हुए कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है और हर इससे जुड़े नए अपडेट आते रहते हैं। इसके लक्षण कुछ इस प्रकार हैः

आम लक्षण-

  • बुखार
  • सूखी खांसी
  • थकान

अन्य लक्षण

  • शरीर/मांसपेशियों में दर्द
  • गले में खराश
  • डायरिया
  • आंखे लाल होना
  • स्वाद और सुगंध का जाना
  • स्किन पर रैश, पैर और हाथ की उंगलियों का रंग बदलना

गंभीर लक्षण

  • सांस लेने में दिक्कत
  • सीने में दर्द और दबाव
  • बोलने में दिक्कत

सामान्य लक्षण दिखने पर खुद ही एहतियात बरतें और फोन पर डॉक्टर से सलाह लें, लेकिन गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत आपको अस्पताल जाने की जरूरत है। इस बीमारी में मरीजों का ऑक्सिजन लेवल भी कम हो जाता है ऐसे में बेहतर होगा कि आप घर पर ऑक्सीमीटर रखें और उससे अपना ऑक्सिजन लेवल चेक करते रहें। आमतौर पर संक्रमिक होने के बाद लक्षण दिखने में 5-6 दिन का समय लगता है, कुच मामलों में 14 दिन बात लक्षण दिखते हैं।

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बिना लक्षण वाले मरीजों से भी है खतरा

कोरोना वायरस होने के बाद भी कुछ लोगों में लक्षण नहीं दिखते हैं, इन्हें असिम्प्टोमैटिक कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऐसा उन लोगों के साथ होता है जिनका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और इसलिए उनमें लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन फिर भी वह दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है।

दुनिया में कोरोना का हाल

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के 18,066,641 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 689,728 लोग जान गंवा चुके हैं। भारत सबसे अधिक संक्रमित देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है। 4,765,342 मामलों के साथ अमेरिका पहले स्थान पर और 2,708,876 केस के साथ ब्राजील दूसरे स्थान पर है। भारत में कोरोना के कुल मामले 1,766,166 हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत का रिकवरी रेट दूसरे देशों की तुलना में बेहतर है, लेकिन रोजाना आने वाले मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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कब खत्म होगा वैक्सीन का इंतजार?

कोरोना की वैक्सीन को लेकर हर दिन नए दावे तो जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन वैक्सीन कब तक आएगी इसकी निश्चित तारीख किसी को नहीं पता है। वैज्ञानिक जल्द से जल्द कोरोना का तोड़ ढूंढ़ने की हर मुमकीन कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो अगले साल से पहले वैक्सीन आना मुमकिन नहीं है। भारत में भी वैक्सीन का ट्रायल जोर शोर से हो रहा है, वहीं रूस ने अगस्त में ही वैक्सीन लॉच करने की बात कही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी वैक्सीन की रेस में सबसे आगे चल रही है, इसका ट्रायल आखिरी फेज में है। भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि ऑक्सफोर्ड की रिसर्च पर पुणे स्थित सीरम इंडिया इंस्टीटयूट वैक्सीन बनाएगी। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के चीफ एग्जिक्यूटिव अदार पूनावाला ने तो सबसे पहले और बड़ी संख्या में वैक्सीन बनाने का दावा भी किया है। दूसरी ओर रूश के स्वास्थ्य मंत्री ने तो यहां तक कहा कि उनकी सरकार अक्टूबर में आम नागरिकों को वैक्सीन देने की तैयारी कर रही है और बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। उम्मीद जगाती इन वैक्सीन का ट्रायल यदि सौ फीसदी सफल रहता है तो यकीनन पूरी दुनिया को कोरोना की त्रासदी से जल्द छुटकारा मिल सकता है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक खुद को सुरक्षित रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Kanchan Singh द्वारा लिखित
अपडेटेड 02/08/2020
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