संजय दत्त को हुआ स्टेज 3 का लंग कैंसर, कहा कि फिल्मों से ब्रेक ले रहा हूं

    संजय दत्त को हुआ स्टेज 3 का लंग कैंसर, कहा कि फिल्मों से ब्रेक ले रहा हूं

    2020 बॉलीवुड के लिए बुरी खबरों से भरा हुआ लग रहा है और एक के बाद एक चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक खबर बॉलीवुड के बाबा संजय दत्त के बारे में है। रिपोर्टों के अनुसार, यह पुष्टि की गई है कि संजय दत्त को फेफड़ों का कैंसर है। रिपोर्टों ने यह भी सुझाव दिया कि उन्होंनेCOVID-19 के लिए नकारात्मक परीक्षण किया है। सांस की तकलीफ के कारण बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को शनिवार को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों का मानना है कि उनका लंग कैंसर इलाज योग्य है। उसे तत्काल उपचार की जरूरत है। खबर है कि वे अमेरिका में इलाज कराने के लिए रवाना हो गए हैं।

    सोशल मीडिया पर दी जानकरी

    संजय दत्त का लंग कैंसर तीसरे स्टेज पे - Sanjay Dutt Diagnosed with Third Stage Lung Cancer

    अस्पताल से लौटने के बाद उन्होंने फैंस के लिए इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि “मैं पूरी तरह से ठीक नहीं है और उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है। मैं काम से शॉर्ट ब्रेक ले रहा हूं। मेरे दोस्त और फैमिली मेरे साथ है। मैं शुभचिंतकों से आग्रह करता हूं कि वे चिंता न करें या अनावश्यक रूप से अटकलें न लगाएं। आप लोगों के प्यार और दुआओं के साथ मैं जल्दी ही ठीक होकर लौटूंगा।”

    और पढ़ें : कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में हर किसी को होनी चाहिए यह जानकारी

    लंग कैंसर की स्टेज-3 कितनी खतरनाक

    रिपोर्ट के अनुसार बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त थर्ड स्टेज लंग कैंसर से गुजर रहे हैं जो जानलेवा मानी जाती है। आपको बता दें कि फेफड़े के कैंसर आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं जिन्हें स्मॉल सेल और नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर कहा जाता है। दोनों ही तरीके के लंग कैंसर अलग तरह से बढ़ते हैं और अलग तरह से ट्रीट किए जाते हैं। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर, स्मॉल सेल लंग कैंसर की तुलना में अधिक सामान्य है। संजय दत्त को फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा का निदान किया गया है। लंग्स के एडेनोकार्सिनोमा नॉन-स्मॉल सेल कैंसर (एनएससीएलसी) का एक सब-टाइप है।

    और पढ़ें : Punctured Lung: पंक्चर लंग क्या है? जानें कारण, लक्षण व बचाव

    लंग कैंसर क्या है?

    फेफड़े का कैंसर लंग्स में शुरू होता है और शरीर में लिम्फ नोड्स या अन्य अंगों में फैल सकता है, जैसे कि ब्रेन। साथ ही अन्य अंगों से भी कैंसर फेफड़ों में फैल सकता है। जब कैंसर कोशिकाएं एक अंग से दूसरे अंग में फैलती हैं, तो उन्हें मेटास्टेस कहा जाता है। लंग कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें लंग्स में मौजूद कुछ कोशिकाएं असामान्य हो जाती हैं और मल्टीप्लाई होकर एक ट्यूमर बना लेती हैं। इससे फेफड़े शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाने में असक्षम हो जाते हैं। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, “फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है।” आमतौर पर फेफड़े का कैंसर वयस्कों में उनकी उम्र साठ या सत्तर से अधिक होने पर होता है। ज्यादातर लोग जो लंग कैंसर से ग्रस्त होते हैं, उनमें लंबे समय तक स्मोकिंग की हिस्ट्री पाई जाती है। हालाँकि, यह स्थिति उन लोगों में भी हो सकती है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है।

    और पढ़ें : निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरिपी (NRT) की मदद से धूम्रपान छोड़ना होगा आसान, जानें इसके बारे में

    लंग कैंसर के लक्षण क्या हैं?

    लंग कैंसर आमतौर पर कोई शुरुआती संकेत नहीं देता है। फेफड़े के कैंसर के लक्षण आमतौर पर तब दिखाई देते हैं जब वह उसकी एडवांस स्टेज पर होता है। लंग कैंसर के लक्षण हो सकते हैं:

    • खांसी आना और उसका ठीक न होना,
    • खांसने, हंसने और सांस लेने में चेस्ट में दर्द होना,
    • बिना कोशिश किए वजन कम होना,
    • बलगम (थूक या कफ) में ब्लड आना,
    • गला बैठना,
    • भूख में कमी,
    • बिना किसी वजह सिरदर्द महसूस होना,
    • गले से घरघराहट जैसी आवाज आना,
    • सांस लेने में तकलीफ होना,
    • ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसे इंफेक्शन का बार-बार होना आदि।

    और पढ़ें : कैंसर से दो साल तक लड़ने के बाद ऋषि कपूर ने दुनिया को कहा, अलविदा

    लंग कैंसर की स्टेज

    कैंसर की स्टेज बताती है कि यह शरीर में कितनी दूर तक फैल गया है और वह कितना गंभीर है। यह ट्यूमर की संख्या और आकार को भी बताता है। लिम्फ नोड्स लसीका प्रणाली (lymphatic system) का हिस्सा होते हैं, जो शरीर के बाकी हिस्सों से जुड़ते हैं। यदि कैंसर इन तक पहुँच जाता है, तो यह अधिक खतरनाक बन सकता है। कैंसर की स्टेजिंग की परिभाषाएँ अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन डॉक्टर आमतौर पर ट्यूमर के आकार का उपयोग करते हुए नॉन-स्मॉल सेल वाले फेफड़े के कैंसर की स्टेज बताते हैं।

    ये स्टेजेस इस प्रकार हो सकती हैं-

    हिडन: कैंसर इमेजिंग स्कैन पर नहीं दिखता है, लेकिन कैंसर की कोशिकाएं कफ या बलगम में दिखाई दे सकती हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच सकती हैं।
    स्टेज 0: इसमें असामान्य कोशिकाएं केवल एयरवेज की लाइनिंग की ऊपरी परतों में दिखाई देती हैं।
    स्टेज I: इस स्टेज का मतलब है कि फेफड़े में एक ट्यूमर विकसित हुआ है, लेकिन 5 सेंटीमीटर (सेमी) के नीचे है और शरीर के अन्य भागों में नहीं फैला है।
    स्टेज II: ट्यूमर 5 सेमी से छोटा है और फेफड़े के क्षेत्र में लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है, या 7 सेमी से छोटा हो सकता है और पास के ऊतकों में फैल सकता है लेकिन लिम्फ नोड्स में नहीं।
    स्टेज III: कैंसर लिम्फ नोड्स में फैल गया है और फेफड़े और आसपास के अन्य हिस्सों में पहुंच गया है।
    स्टेज IV: कैंसर दूर के शरीर के अंगों, जैसे हड्डियों या मस्तिष्क तक फैल गया है।

    [mc4wp_form id=”183492″]

    किन लोगों को लंग कैंसर का खतरा ज्यादा?

    कई कारकों से आपके फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए, धूम्रपान छोड़ने से कुछ जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है। फेफड़ों के कैंसर के जोखिम कारकों में शामिल हैं:

    धूम्रपान

    आपके लंग कैंसर का खतरा हर दिन आपके द्वारा स्मोक की गई सिगरेट की संख्या और धूम्रपान किए गए वर्षों की संख्या के साथ बढ़ जाता है। स्मोकिंग छोड़ने से फेफड़ों के कैंसर के विकास का खतरा काफी कम हो सकता है।

    सेकेंड हैंड स्मोक एक्सपोजर

    यहां तक ​​कि अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, लेकिन यदि आप सेकेंड हैंड स्मोक (passive smoking) के संपर्क में आते हैं तो फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

    और पढ़ें : धूम्रपान (Smoking) ना कर दे दांतों को धुआं-धुआं

    रेडिएशन थेरिपी

    यदि आप किसी दूसरे प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए रेडिएशन थेरिपी से गुजर चुके हैं, तो आपको फेफड़ों के कैंसर के विकास का खतरा बढ़ सकता है।

    राडॉन गैस के संपर्क में आना

    राडॉन गैस मिट्टी, चट्टान और पानी में मौजूद यूरेनियम (uranium) के नेचुरल ब्रेकडाउन से उत्पन्न होती है। जो आपके द्वारा साँस लेने वाली हवा का हिस्सा बन जाती है। और सांस के जरिए फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है।

    एस्बेस्टस और अन्य कार्सिनोजेन्स (carcinogens) के संपर्क में आना

    एस्बेस्टस और कैंसर पैदा करने के लिए जाने जाने वाले अन्य पदार्थों जैसे – आर्सेनिक, क्रोमियम और निकल जैसे वर्कप्लेस के संपर्क में आने से फेफड़ों के कैंसर के विकास का खतरा बढ़ सकता है, खासकर यदि आप धूम्रपान करने वाले हैं।

    फेफड़े के कैंसर की फैमिली हिस्ट्री

    लंग कैंसर की फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों में बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

    और पढ़ें : फेफड़ों की बीमारी के बारे में वाे सारी बातें जो आपको जानना बेहद जरूरी है

    खुद को लंग कैंसर से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

    वैसे तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दिनचर्या में बदलाव करके लंग कैंसर के रिस्क को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। फिर भी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को कुछ हद तक कम करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें-

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    सूत्र

    What Is Lung Cancer?. https://www.cdc.gov/cancer/lung/basic_info/what-is-lung-cancer.htm. Accessed On 12 Aug 2020

    Lung Cancer. https://www.cancer.org/cancer/lung-cancer/about/what-is.html. Accessed On 12 Aug 2020

    Lung cancer. https://ghr.nlm.nih.gov/condition/lung-cancer. Accessed On 12 Aug 2020

    What to know about lung cancer. https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/lung-cancer/symptoms-causes/syc-20374620. Accessed On 12 Aug 2020

    A random test confirmed Sanjay Dutt’s cancer; read details. https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/exclusive-a-random-test-confirmed-sanjay-dutts-cancer-read-details/articleshow/77492006.cms. Accessed On 12 Aug 2020

    Sanjay Dutt diagnosed with lung cancer, likely to visit US for treatment: Reports. https://www.timesnownews.com/india/article/sanjay-dutt-diagnosed-with-lung-cancer-likely-to-visit-us-for-treatment-film-journalist/635523. Accessed On 12 Aug 2020

     

    लेखक की तस्वीर badge
    Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/09/2020 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड