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Heart failure: हार्ट फेलियर एक नहीं बल्कि हो सकता है कई तरीकों से!

Heart failure:  हार्ट फेलियर एक नहीं बल्कि हो सकता है कई तरीकों से!

हार्ट फेलियर हार्ट की इनएबिलिटी है, जिसके कारण हार्ट पूरे शरीर को ठीक प्रकार से ब्लड पंप नहीं कर पाता है। हमारे शरीर के लिए ब्लड की पंपिंग सही से होना बहुत जरूरी होता है। आवश्यक ब्लड फ्लो न हो पाने के कारण बॉडी के अधिकांश हिस्से में खून नहीं पहुंच पाता है और शरीर का फंक्शन या बॉडी फंक्शन बिगड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। हार्ट फेलियर एक कंडीशन है, जिसके कारण हार्ट को नुकसान पहुंचता है और साथ ही इस कारण से हार्ट कमजोर भी हो जाता है। हार्ट फेलियर के कारण हार्ट के दाई और बायी ओर नुकसान पहुंचता है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको हार्ट फेलियर के प्रकार (Types of heart failure) के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही आपको उससे संबंधित अन्य बातों के बारे में भी बताएंगे। जानिए क्या है हार्ट फेलियर के प्रकार।

और पढ़ें: सिस्टोलिक हार्ट फेलियर : लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव से सुधर सकती है दिल की यह कंडिशन!

हार्ट फेलियर के लक्षण (Heart failure symptoms)

हार्ट फेल होने के कारण शरीर में कुछ लक्षण भी दिखाई पड़ते हैं। अगर आपको निम्नलिखित लक्षण नजर आते हैं, तो आपको सावधान होना चाहिए

और पढ़ें:दाईं ओर हार्ट फेलियर : दिल से जुड़ी ये दिक्कत बन सकती है परेशानी का सबब!

हार्ट फेलियर प्रकार (Types of heart failure)

हार्ट फेलियर की समस्या या तो राइट साइड हो सकती है या फिर लेफ्ट साइड। कुछ लोगों में ये दोनों तरफ हो सकता है। इसे डायस्टोलिक या सिस्टोलिक (Diastolic or Systolic) में भी बांट सकते हैं। हार्ट फेलियर के प्रकार (Types of heart failure) के बारे में।

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left-sided heart failure)

हार्ट फेलियर के प्रकार (Types of heart failure) में लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर शामिल है। लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left-sided heart failure) को कॉमन हार्ट फेलियर माना जाता है। लेफ्ट हार्ट वेंट्रिकल लेफ्ट साइड हार्ट के बॉटम में होती है। ये एरिया पूरी बॉडी को ऑक्सीजन रिच ब्लड पहुंचाने का काम करता है। लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर की समस्या का सामना व्यक्ति को तब करना पड़ सकता है, जब लेफ्ट वेंट्रीकल का कॉन्ट्रैक्ट ठीक तरह से नहीं हो पाता है। जब हार्ट के लेफ्ट साइड की मसल्स में किसी कारण से समस्या पैदा हो जाती है, तो उस ओर ब्लड पंपिंग में समस्या आ जाती है। इस कारण से सांस लेने में समस्या हो जाती है।

और पढ़ें: बायवेंट्रिकुलर हार्ट फेलियर : इस हार्ट फेलियर के लक्षणों को पहचानना क्यों है जरूरी?

राइट साइड हार्ट फेलियर (Right-sided heart failure)

हार्ट फेलियर के प्रकार (Types of heart failure) में राइट साइड हार्ट फेलियर शामिल है। राइट साइड हार्ट फेलियर (Right-sided heart failure) एक कंडीशन है, जिसमें हार्ट की राइट साइड मसल्स सही तरह से काम नहीं कर पाती हैं। इस कारण से शरीर में ब्लड पंपिंग प्रभावित होती है। जिन लोगों में लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर की समस्या होती है, उनके लिए राइट साइड हार्ट फेलियर की समस्या बढ़ जाने की अधिक संभावना रहती है। कुछ लोगों में लंग डिजीज के कारण भी राइट साइड हार्ट फेलियर की संभावना अधिक रहती है। इस कारण से पैर, एब्डॉमन आदि में स्वैलिंग की समस्या भी हो सकती है। सांस की तकलीफ, थकान (Fatigue), भूख न लगना (Lack of appetite), हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) अनियमित हार्ट बीट ( irregular heartbeat) आदि राइट साइड हार्ट फेलियर (Right-sided heart failure) के लक्षण हो सकते हैं। अगर आपको हार्ट फेलियर (Heart failure) के लक्षण दिखते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर हार्ट फेलियर का इलाज न कराने पर शरीर के दूसरे ऑर्गन जैसे कि किडनी, लीवर (Liver) आदि पर बुरा असर पड़ सकता है।

डायस्टोलिक हार्ट फेलियर (Diastolic heart failure)

डायस्टोलिक हार्ट फेलियर की समस्या तब होती है, जब हृदय की मांसपेशी सामान्य से अधिक सख्त हो जाती है। ऐसा हार्ट डिजीज के कारण हो सकता है। इस समस्या के कारण हार्ट में आसानी से ब्लड नहीं भर पाता है। इसे डायस्टोलिक डिस्फंक्शन (diastolic dysfunction) के नाम से जाना जाता है।

सिस्टोलिक हार्ट फेलियर (Systolic heart failure)

सिस्टोलिक हार्ट फेलियर की समस्या हार्ट मसल्स के सिकुड़ने की क्षमता खो जाने के कारण पैदा होती है। बॉडी में ऑक्सीजन युक्त ब्लड को पंप करने के लिए हार्ट कॉन्ट्रेक्शन जरूरी हैं। इस समस्या को सिस्टोलिक डिसफंक्शन (Systolic dysfunction) के रूप में जाना जाता है।

और पढ़ें: Anti-arrhythmics: हार्ट एरिथमिया की हो जाए समस्या, तो इन दवाओं का किया जाता है इस्तेमाल

हार्ट फेलियर को ऐसे किया जाता है डायग्नोज (Heart failure diagnosis)

अगर आपको हार्ट फेलियर के लक्षण दिखते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर आपसे बीमारियों के लक्षणों के बारे में पूछेंगे और साथ ही आपसे अन्य बीमारियों के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। हार्ट फेलियर की जांच के लिए डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट भी कर सकते हैं।

और पढ़ें: क्रॉनिक डायस्टोलिक हार्ट फेलियर : यह बीमारी है सामान्य हार्ट फेलियर से अलग

कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए देखें ये 3डी मॉडल:

हार्ट फेलियर का ट्रीटमेंट (Heart failure treatment)

हार्ट फेलियर का ट्रीटमेंट बीमारी के अनुसार किया जाता है। अगर समय पर ट्रीटमेंट करा लिया जाए, तो लक्षणों को ठीक किया जा सकता है लेकिन पेशेंट को समय-समय पर चेकअप कराने की जरूरत पड़ती है। ट्रीटमेंट सही समय पर कराने से पेशेंट की लाइफ बढ़ जाती है और साथ ही बीमारी से होने वाले अन्य खतरों को भी कम किया जा सकता है। बीमारी में मेडिकेशन की हेल्प से ब्लड क्लॉट बनने से रोके जा सकते हैं, वहीं कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी कम किया जाता है। डॉक्टर ऐसे में बीटा ब्लॉकर्स (Beta-blockers), कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स (calcium channel blockers), ब्लड थिनर्स (Blood thinners) आदि दवाएं दी जाती हैं। जरूरत पढ़ने पर डॉक्टर बायपास सर्जरी (Bypass surgery), एंजियोप्लास्टी (Angioplasty), पेसमेकर (Pacemakers) आदि का इस्तेमाल करते हैं। जब कोई भी ट्रीटमेंट हेल्प नहीं करता है, तो अंतिम विकल्प के रूप में ट्रांसप्लांट सर्जरी की जाती है।

हार्ट फेलियर को रोकने के लिए आपको अपनी लाइफस्टाइल बेहतर करने की जरूरत है। अगर आप एल्कोहॉल लेते हैं या फिर स्मोकिंग करते हैं, तो इसे पूरी तरह से बंद कर दें। आपको खाने में हाय फैट फूड को भी इग्नोर करना शुरू कर देना चाहिए। रोजाना पर्याप्त मात्रा में नींद लेने से भी हार्ट से संबंधित समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हार्ट फेलियर लॉन्ग टर्म कंडीशन है, जिसका सही से ट्रीटमेंट कराना बहुत जरूरी होता है। अगर ऐसा न किया जाए, तो हार्ट कमजोर हो सकता है और मौत का कारण भी बन सकता है।

हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। अगर आपको हार्ट संबंधित कोई भी समस्या है, तो पहले डॉक्टर से जांच कराएं और इसके बाद ही किसी दवा का सेवन करें। इस आर्टिकल में हमने आपको हार्ट फेलियर के प्रकार (Types of heart failure) के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 4 weeks ago को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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