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हार्ट फेलियर वाले पेशेंट्स के लिए ये छोटी क्लिप कम कर सकती है मौंत के खतरे को!

    हार्ट फेलियर वाले पेशेंट्स के लिए ये छोटी क्लिप कम कर सकती है मौंत के खतरे को!

    मित्रा क्लिप (MitraClip) हार्ट पेशेंट्स के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। आपको सुनकर हैरानी हो सकती है लेकिन यह सच है कि भारत में हार्ट से संबंधित बीमारियों के पेशेंट्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अगर डब्ल्यूएचओ (WHO) की मानें, तो साल 2016 में भारत में कुल 63% मौतों में से 27% मौंते कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के कारण हुई थी। उनमें से 45 परसेंट लोगों की जो मौत हुई, उनकी उम्र 40 से 70 साल थी। हार्ट से संबंधित बीमारियों का खतरा हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure), ग्लूकोज और लिपिड के साथ-साथ मोटापे की समस्या के कारण बढ़ रहा है। हार्ट की बीमारियों का मुख्य कारण लोगों की खराब लाइफ स्टाइल है। खराब लाइफस्टाइल में स्ट्रेस लेना, नींद ना आना, एक्सरसाइज ना करना, खाने में पौष्टिक आहार को शामिल ना करना आदि कारण हार्ट से संबंधित बीमारियों का कारण बनते हैं। जो लोग अपनी लाइफ स्टाइल को बेहतर बनाए रखते हैं, उनमें हार्ट संबंधित बीमारियों का खतरा कम होता है।

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    हार्ट से संबंधित बीमारियों के साथ जी रहे लोगों के लिए जिंदगी एक चुनौती की तरह होती है। जिन लोगों को सेवर हार्ट फेलियर की समस्या है, उनके लिए ट्रीटमेंट और मेडिकेशन भी कठिन होता जाता है। कुछ ऐसे भी पेसेंट्स भी होते हैं, जो पूरी तरह से हताश हो चुके होते हैं और उनकी स्थिति बुरी हो जाती है। सांस लेने में समस्या होना, थकान का बार-बार एहसास होना, बार बार किसी समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती होना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हार्ट पेशेंट की मृत्यु दर भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पाया है कि अगर ऐसे में स्मॉल क्लिप जिसे मित्रा क्लिप (MitraClip) कहते हैं, अगर इसे हार्ट में इंसल्ट कर दिया जाए, तो पेशेंट की जान को बचाया जा सकता है और साथ ही हॉस्पिटलाइजेशन या अस्पाल में भर्ती होने की जरूरत बहुत कम हो जाती है। इस संबंध में रिसर्च में क्या सामने आया है, आइए जानते हैं इस आर्टिकल के माध्यम से।

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    मित्रा क्लिप (MitraClip) से पहले जानें माइट्रल रिगर्जिटेशन (Mitral regurgitation) क्या है?

    जैसा कि हम सभी को पता है कि हमारे शरीर में हृदय का बहुत ही महत्वपूर्ण रोल होता है। यह फेफड़ों और वेंस से ब्लड को लेता है और फिर लंग और सर्कुलेटरी सिस्टम में ब्लड को पंप करने का काम करता है। हार्ट फेलियर की समस्या में यह दोनों ही प्रकार के काम नहीं कर पाता है, जिसके कारण पेशेंट पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इस कारण से व्यक्ति को हल्की थकान महसूस होना, ऊर्जा का एहसास ना होना, कोई भी काम करते समय सांस का फूलने लगना, सीढ़ियां भी ना चढ़ पाना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर व्यक्ति को समस्या गंभीर हो चुकी है, तो इस कारण से उसकी जान भी जा सकती है। कई बार अस्पताल में भर्ती होने के कारण और शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्या के कारण व्यक्ति सदमे में जा सकता है और मौत का खतरा बढ़ जाता है। हार्ट फेलियर की समस्या मसल्स को कमजोर करने लगती हैं, जिसके कारण माइट्रल वॉल्व फैलने लगती है।

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    जिससे ब्लड लेफ्ट वेंट्रिकल से लेफ्ट एट्रियम की ओर प्रवाहित होता है। माइट्रल वॉल्व के फैलने से इसके सपोर्टिंग स्ट्रक्चर भी लीक होना शुरू हो जाते हैं, जिसे माइट्रल रिगर्जिटेशन ( Mitral regurgitation) के नाम से जाना जाता है। माइट्रल वॉल्व की हार्ट फेलियर (heart failure) के दौरान कुछ डिग्री होती है। । कुछ पेशेंट्स ऐसे भी हैं, जहां अधिकतम सहनशील चिकित्सा उपचार (Maximally tolerated medical therapy,) के बावजूद, माइट्रल वाल्व का गंभीर रूप से रिगर्जिटेशन (regurgitation) जारी रहा। आइए जानते हैं कि रिसर्च के दौरान मित्रा क्लिप (MitraClip) के बारे में क्या जानकारी मिली?

    मित्रा क्लिप (MitraClip) क्या है?

    मित्रा क्लिप (MitraClip) माइट्रल रिगर्जिटेशन ( Mitral regurgitation) को कम करने में मदद करता है। यह एक छोटा सा वी-आकार का उपकरण है, जिसे माइट्रल वाल्व लीफलेट्स के रूप में डिजाइन किया गया है ताकि ये पूरी तरह से बंद हो सकें और लीक होने की समस्या से छुटकारा मिले।मित्रा क्लिप (MitraClip) माइट्रल रिगर्जिटेशन ( Mitral regurgitation) को कम करती है।क्लिप को पैर में फेमोरल वेन में डाले गए कैथेटर ( femoral vein in the leg) के माध्यम से पहुंचाया जाता है।

    इस दौरान किसी कट या चीरे की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि यह डिवाइस आसानी से लगाई जा सकती है। इससे पहले पेशेंट के हार्ट फेलियर और सेकंडरी माइट्रल रिगर्जिटेशन (Mitral regurgitation) का इलाज दवाइयों या फिर पेसमेकर के साथ किया जाता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि दवाइयों के साथ इलाज करने पर बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सके। ऐसे में पेशेंट के पास आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट करने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचता है। ओपन हार्ट सर्जरी उन पेशेंट्स के लिए खतरनाक मानी जाती है, जिनकी हार्ट फंक्शन अच्छा नहीं होता है। आप मान सकते हैं कि हार्ट फंक्शन खराब होने के कारण हार्ट सर्जरी या पेसमेकर की जरूरत पड़ती है, ताकि हार्ट ठीक प्रकार से काम कर सके। अगर सही समय पर मित्रा क्लिप (MitraClip) का इस्तेमाल किया जाता है, तो ऐसे में पेशेंट के मौत के खतरे से बचाने में मदद मिल सकती है।

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    माइट्रल वाल्व को ठीक करने पर हार्ट पेशेंट्स की सेहत में सुधार महसूस किया जा सकता है। यूनाइटेड स्टेट और कनाडा में करीब 614 रोगियों में मित्रा क्लिप (MitraClip) का इस्तेमाल किया जा चुका है, जिनके परिणाम अच्छे मिले हैं। ऐस में ये कहना गलत नहीं होगा कि दुनियाभर के हार्ट के पेशेंट्स के लिए मित्रा क्लिप (MitraClip) वरदान के रूप में सामने आया है। फिलहाल एफडीए की ओर से इस क्लिप को सभी हार्ट पेशेंट्स (heart patients) के लिए मंजूरी नहीं मिली है लेकिन उम्मीद की जाती है कि जल्द ही इसे मंजूरी दे दी जाएगी।

    अगर आपको हार्ट की बीमारी से संबंधित लक्षण नजर आए, तो आपको बिना रुके डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। हॉर्ट संबंधी समस्या होने पर सांस का तेजी से फूलना, छाती में दर्द होना, थकान का एहसास होना, चक्कर आना आदि लक्षण दिख सकते हैं। अगर आप तुरंत डॉक्टर से जांच करा लेते हैं, तो भविष्य में बड़ी समस्या से बच सकते हैं। आपको हार्ट डिजीज के बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी लेनी चाहिए।

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    इस आर्टिकल में हमने आपको मित्रा क्लिप (MitraClip) से संबंधित शोध के बारे में अहम जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की ओर से दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको हार्ट की बीमारियों के संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हैलो हेल्थ की वेबसाइट में आपको अधिक जानकारी मिल जाएगी।

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/04/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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