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कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा, बचने का सिर्फ एक रास्ता

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील · फार्मेसी · Hello Swasthya


Mona narang द्वारा लिखित · अपडेटेड 21/07/2020

कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा, बचने का सिर्फ एक रास्ता

कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार लगातार लोगों को घर में रहने की सलाह दे रही है। इस खतरनाक वायरस से बचने के लिए घर को सबसे सुरक्षित स्थान माना जा रहा है। संक्रमण से बचने के लिए घर पर भी सावधानी बरतने के लिए कहा जा रहा है। जो लोग क्रॉनिक डिजीज से ग्रसित हैं उन्हें विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। इसलिए कैंसर रोगियों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।

कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस का खतरा क्यों है ज्यादा?

कुछ शोध इस बात पर जोर देते हैं कि कैंसर पेशेंट्स के लिए यह बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है। कैंसर रोग विशेषज्ञ विजय तोमर बताते हैं कि कैंसर रोगियों कि प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है। कई कैंसर पेशेंट्स जिनकी कीमोथेरेपी चल रही है उन्हें उल्टी की शिकायत रहती है, जिस वजह से वह कई चीजों का सेवन नहीं करती। इससे भी उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। कोरोना वायरस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में घातक हो रहा है। यहीं कारण है कि कैंसर पेशेंट्स को खास ध्यान रखने के लिए कहा जा रहा है।

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किन कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस का खतरा अधिक है?

पोर्टलैंड में ओरेगन हेल्थ और विज्ञान विश्वविद्यालय में हैमेटोलॉजर और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चिकित्सा निदेशक ब्रैंडन हेस लातिन के अनुसार, कोरोना वायरस से सबसे अधिक असुरक्षित ब्लड कैंसर वाले लोग हैं, जैसे कि ल्यूकेमिया (leukemia) या लिम्फोमा (lymphoma) और वो लोग जो हैवी-ड्यूटी कीमोथेरेपी, बोन मैरो या स्टेम सेल प्रत्यारोपण करा रहे हो। जिन लोगों में व्हाइट ब्लड सेल्स का काउंट बहुत कम होता है उनमें इसका जोखिम ज्यादा होता है।

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ल्यूकेमिया (leukemia) या लिम्फोमा (lymphoma) के पेशेंट्स को इसका खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि इन लोगों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है। इसके साथ ही इनके कीमोथेरेपी के सेशन भी होते हैं। कोरोना वायरस का जोखिम आपके कैंसर उसके उपचार के प्रकार और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। इसके अलावा जो लोग सिगरेट पीते हैं और उन्हें फेफड़ों के संबंधित रोग हैं उन्हें भी इसका खतरा अधिक होता है। बुजुर्ग लोगों में भी इसके होने की संभावना ज्यादा है।

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कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस का जोखिम कम करने के लिए क्या किया जा सकता है?

सबसे पहली बात आपको जिस चीज का ध्यान रखना चाहिए वो है आपका खानपान। थोड़ी- थोड़ी देर बाद कुछ खाते रहें। जितना हो सके तरल पदार्थ का सेवन करें। इससे आपके शरीर में कमजोरी नहीं होगी और प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।

इसके साथ ही अपनी और अपने आस-पास साफ सफाई पर ध्यान देना है। अपने हाथ बार-बार धोते रहें। आप यह सुन सुन कर थक गए होगें। क्योंकि हर एड और हर पोस्ट में इसकी सलाह दी जा रही है। बावजूद इसके बहुत सारे लोगों को हाथ को साफ करने का सही तरीका नहीं मालूम है। हाथों को साफ करते समय निम्नलिखित बातों का पालन करें:

  • हाथ धोने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।
  • हाथ धोते वक्त साबुन का इस्तेमाल करना जरूरी है।
  • डब्लयूएचओ के दिशा निर्देशों के अनुसार हाथों को धोते वक्त 20 सेकेंड तक अच्छे से मलें।
  • हाथ धोते वक्त हथेलियों को आपस में रगड़ें। दोनों हाथों की अंगुलियों को जोड़कर रगड़ें।
  • अंगूठे को हल्के हाथ से रगड़ना न भूलें।
  • हाथों के पिछले हिस्से पर साबुन लगाना जरूरी है।
  • हाथों को हमेशा कलाई तक साफ करें।
  • हाथों को धोने के बाद उन्हें तौलिए या ड्रायर से साफ करना न भूलें।

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कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस: इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान

  • खुद को घर में एक अलग कमरे में आइसोलेट कर लें।
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
  • जिन लोगों को खांसी या जुकाम की शिकायत है उनके संपर्क में न आएं।
  • बीमार लोगों से मिलने से बचें।
  • हाथों की सफाई के लिए सैनेटाइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अच्छी नींद लें।
  • न्युट्रिंट्स युक्त आहार लें।
  • अल्‍कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है
  • एक्सरसाइज करें
  • स्मोकिंग न करें

आप अपने लाइफस्टाइल को जितना हेल्दी रखेंगे उतना ही इस इंफेक्शन के खिलाफ लड़ाई में जीत पाएंगे। इसके अलावा कैंसर पेशेंट्स को फॉलोअप के लिए हॉस्पिटल जाना पड़ता है। अभी इस सेंसिटिव समय में अस्पताल जाने से बचें। यदि अस्पताल जाना पड़े तो मास्क लगाने के साथ ही अपने साथ सैनेटाइजर लेकर जाएं। सैनेटाइजर इस्तेमाल करते रहें। अस्पताल में किसी भी वस्तु को न छूएं, अपने हाथ को नाक, आंख और चेहरे से न लगाएं।

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कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस के लक्षण नजर आने पर क्या करना चाहिए?

हाई रिस्क पेशेंट्स के लिए कोविड-19 जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए रोजाना अपना टेंपरेचर चेक करते रहे। यदि आपको फीवर के साथ कफ की भी परेशानी है तो मास्क लगाएं, जिससे आपसे किसी दूसरे को वायरस न फैले। अपनी जांच कराने के लिए घर से बाहर न निकले। इससे आप दूसरों के संपर्क में आएंगे और वायरस दूसरों तक पहुंच सकता है। परिवार में भी खुद को दूसरों से दूर रखें। कोरोना के टेस्ट के लिए आप हेल्पलाइन नंबर 1075 पर फोन कर सकते हैं या फिर अपने राज्य द्वारा जारी की गई कोरोना वायरस टेस्ट हेल्पलाइन नंबर पर कॉल लगाएं। आपकी जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य टीमों के पास भेजी जा सकती है। कोविड-19 टेस्ट के बाद जब तक परिणाम नहीं आ जाते आपको अकेले रहने के लिए कहा जाएगा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या नर्स आपको क्या करना है इसकी जानकारी देंगे।

लाेगों से बनाएं दूरी

कैंसर पेशेंट्स का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। ऐसे में अगर वह कोरोना वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति के टच में आते हैं तो उन्हें बड़ी आसानी से इसका संक्रमण हो सकता है। इसलिए आने वाले कुछ दिनों तक अगर आप किसी से बहुत जरूरी काम हो तभी मिलें वर्ना लोगों से मिलना एवॉइड करें। कोरोना वायरस से बचे रहने के लिए बताई गई सावधानियों का जरूर पालन करें। हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में कैंसर पेशेंट्स में कोरोना वायरस से जुड़ी हर जरूरी जानकारी देने की कोशिश की गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो आप अपना सवाल कमेंट सेक्शन में कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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