कोरोना की शुरुआत जब भारत में हुई थी, तो लोगों को लगा था कि कुछ महीनों या फिर साल भर बाद तक ये बीमारी खत्म हो जाएगी। अगर खत्म न भी हुई तो कुछ दवाइयों या वैक्सीन से ये बीमारी पूरी तरह से कंट्रोल हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देश-दुनिया में चारों और हाहाकार मचा हुआ है। वैक्सीन भी आ गई है और भारत में करोड़ों लोगों को ये लग भी चुकी है, लेकिन कोरोना वायरस का नया म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) लोगों की परेशानी का कारण बन चुका है। हम जानते हैं कि आपके मन में भी कोरोना वायरस म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) को लेकर बहुत जिज्ञासा होगी। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको कोरोना वायरस म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) यानी डबल और ट्रिपल म्यूटेंट्स के बारे में जानकारी देंगे। जानिए कोरोना वायरस म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) के बारे में।
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कोरोना वायरस म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) क्या मतलब है?
वायरस का जीनोम आरएनए में कोड होता है। म्यूटेशन से मतलब कोड में अचानक से आए परिवर्तन से हैं। कोड में परिवर्तन म्यूटेशन के कारण होता है और ये नई सीक्वेंसिंग तैयार कर लेते हैं। म्यूटेशन के कारण वायरस खतरनाक हो जाए, ये जरूरी नहीं होता है, लेकिन कुछ मामलों में वायरस अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।कोरोना के नए वेरिएंट्स तेजी से फैल रहे हैं और लोगों को बीमार कर रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (National Institute of Biomedical Genomics) के डायरेक्टर सौमित्र दास के मुताबिक कोरोना के डबल और ट्रिपल म्यूटेंट्स सेम वैरिएंट यानी B.1.617 कोरोना वायरस के प्रकार ही हैं। कोरोना के डबल और ट्रिपल म्यूटेंट्स समान नहीं है और ये ओवरलैपिंग टर्म्स हैं। कोरोना वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग में परिवर्तन नए म्यूटेंट्स का कारण बनता है। डबल म्यूटेंट्स में तीन नए स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन (three new spike protein mutations) हैं। दो म्यूटेशन यानी E484Q और L452R, एंटीबॉडी-आधारित न्यूट्रलाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसका मतलब ये है कि देश में अभी कोरोना के लिए जो भी वैक्सिनेशन दी जा रही है, वो डबल म्यूटेंट्स से बचाव करने में सक्षम है, लेकिन इस म्यूटेंट्स या वैरिएंट का एक और म्यूटेशन है, जिसे P681R कहते हैं। ट्रिपल म्यूटेंट्स तेजी से फैल रहा है और लोगों को अधिक बीमार कर रहा है। कोविडशील्ड B.1.617 वेरिएंट्स से हमे सुरक्षा प्रदान कर रही है। फिलहाल कोरोना के लक्षण दिखने पर आपको तुरंत टेस्ट कराना चाहिए। अगर आरटी पीसीआर निगेटिव है और मरीज की हालत ज्यादा खराब हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर आप सीटी स्कैन भी करा सकते हैं। आपको सबसे पहले आइसोलेशन के साथ ही शुरुआती ट्रीटमेंट लेना शुरू कर देना चाहिए।
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कोरोना वायरस म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) क्या बदल रहा है बीमारी के लक्षण?
जब वायरस तेजी से अधिक आबादी में फैलता है, तो ये अपनी संख्या भी तेजी से बढ़ाता जाता है। इस कारण से वायरस में उत्परिवर्तन यानी म्यूटेशन होता है। तेजी से फैलने के कारण ये खुद को तेजी से रेप्लीकेट भी करता है और इसमें परिवर्तन भी होता है। वायरस के जेनिटिक मैटीरियल में परिवर्तन जरूरी कई बार खतरनाक भी साबित हो सकता है। कुछ वेरिएंट्स के लिए कोरोना की वैक्सीन कम प्रभावकारी भी हो सकती है। कोरोना वायरस म्यूटेंट्स (Corona virus mutants) में आए बदलाव के कारण बीमारी के लक्षणों में बदलाव आ रहा है। लोगों को डायरिया के साथ ही स्किन रैशेज, उंगुली या पैरों की उंगुली के रंग में बदलाव (discolouration of fingers or toes) की समस्या, छाती में दर्द या प्रेशर, आंख आना (conjunctivitis) आदि लक्षण भी दिख रहे हैं।
क्या आरटी पीसीआर (RT-PCR) नहीं पकड़ पा रहा है नए म्यूटेंट्स को?
कोरोना के लक्षण दिखने पर लोग तुरंत रैपिड एंटीजन टेस्ट (Rapid antigen test ) करवाते हैं और जब संतुष्ट न होने पर आरटी पीसीआर (RT-PCR) भी करवाते हैं। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि ऐसे कई पेशेंट हैं, जिनको कोरोना के लक्षण दिखने पर भी आरटी पीसीआर (RT-PCR) रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। ऐसे में डॉक्टर सीटी स्कैन की सलाह दे रहे हैं। सेकेंड कोरोना वायरस वेव (Second Corona Wave) के दौरान डॉक्टर पेशेंट्स को सलाह दे रहे हैं कि भले ही आपकी रिपोर्ट निगेटिव आई हो और आपको कोविड-19 के लक्षण महसूस हो रहे हो, आपको खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक कोरोना वायरस के न्यू म्यूटेंट्स को स्टैंडर्ड RT-PCR डिटेक्ट नहीं कर पा रही है। जब शरीर में संक्रमण की मात्रा बहुत कम होती है, तो भी आरटी पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आती है। अगर स्वैब स्टिक (swab stick) का इस्तेमाल ठीक तरह से नहीं किया गया है, तो भी RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है।
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