कोरोना वायरस (कोविड 19) का टीका: क्या वैक्सीन के साइड इफेक्ट की होगी चिंता? 

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट August 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना का कहर साल की शुरुआत से अब तक जारी है। जहां एक ओर कोरोना के रोगी रोज़ाना बढ़ रहे हैं, वहीं कोरोना वायरस का टीका अब तक लोगों के बीच नहीं पहुंच पाया है। हालांकि भारतीय वैज्ञानिकों को कोविड 19 वैक्सीन के लिए ह्यूमन ट्रायल की अनुमति मिल गई है। इसलिए, कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस का टीका 15 अगस्त तक लॉन्च कर दिया जाएगा। भले ही कोविड 19 वैक्सीन बनाने की होड़ अलग-अलग देशों के बीच शुरू हो गई हो, लेकिन इससे जुड़े कई अहम सवाल आम जनता के मन में घूम रहे हैं। इन में से सबसे बड़ा और ज़रूरी सवाल है कि क्या कोविड 19 वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट होगा?

हाल ही में देश के कुछ जानेमाने डॉक्टर्स द्वारा कम्युनिटी ट्रांसमिशन और हर्ड इम्यूनिटी पर आयोजित वेबिनार में कई खास जानकारियां लोगों को दी गईं। जिसके मुताबिक देश में बढ़ रहे कोरोना के मामलों और कोविड वैक्सीन से जुड़े अलग-अलग पहलूओं को समझाया गया। खास तौर पर कोरोना वैक्सीन के लॉन्च के बाद इसके असर, ड्यूरेबिलिटी, अलग-अलग उम्र के लोगों पर इसके असर और साइड इफ़ेक्ट पर चर्चा की गई। जिसके मुताबिक कई अहम जानकारियां आज हम लेकर आए हैं। आइये जानते हैं कोविड 19 के वैक्सीन से जुड़ी ऐसी ही कुछ खास बातें।

वैक्सीन से जुड़ी खास बातें

मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज की डायरेक्टर प्रोफ़ेसर डॉ सुनीला गर्ग की मानें, तो कोरोना वायरस का टीका बनाने में कुछ बातों का ध्यान रखने की बेहद ज़रुरत होगी। जैसा कि सभी जानते हैं कोरोना वायरस का अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग तरह का प्रभाव दिखाई दे रहा है। जिसके चलते कोरोना वैक्सीन बनाने में कुछ बातों को तवज्जो देनी चाहिए। इसमें सबसे पहले ध्यान रखनेवाली बात है बायोसेफ्टी। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के दौरान इसका उपयोग सबसे पहले जानवरों पर किया जा रहा है। इसलिए इस प्रक्रिया में एनिमल मॉडल के अंतर्गत आने वाले लेवल थ्री कंटेनमेंट मेजर्स का ध्यान रखा जाए।

इसके अलावा जब वैक्सीन का इस्तेमाल शरीर पर होता है, तो शरीर में एंटीबॉडी बनने लगते हैं। लेकिन इस दौरान कई बार साइटोकाइन स्ट्रॉम की प्रक्रिया शरीर में होने लगती है। जिसकी वजह से शरीर में सुरक्षात्मक एंटीबॉडी होते हुए भी रोग दोबारा होने की आशंका रहती है।

साथ ही वैक्सीन के इस्तेमाल के दौरान दो प्रकार की समस्या हो सकती है, जिसमें पहली वैक्सीन से संबंधित, तो दूसरी सब्जेक्ट से संबंधित होती है। कई बार वैक्सीन लगाने या उसे स्टोर करने की प्रक्रिया में खामियों के चलते ये रोगी के स्वास्थ्य पर गलत असर डालती है। वहीं यदि रोगी हायपरसेंसिटिव है या उसकी उम्र बेहद कम या बेहद ज़्यादा है, तब भी ये वैक्सीन शरीर को तकलीफ पहुंचा सकती है। ऐसे में वैक्सीन के लॉन्च से पहले वैज्ञानिकों को कई पहलूओं पर विचार करने की ज़रुरत पड़ेगी।

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क्या वैक्सीन के होंगे साइड इफेक्ट?

covid 19 vaccine side effects - कोविड 19 वैक्सीन के साइड इफेक्ट

डॉ गर्ग की माने, तो किसी भी वैक्सीन को आम जनता तक पहुंचाने में ट्रेंड मैनपावर का बड़ा योगदान माना जाता है। जब ये वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध करवाई जाती हैं, तो कई बातें इसे प्रभावित करती हैं। जैसे इसे किस तरह स्टोर किया जाता है या किसी भी देश के लोगों की इम्यूनिटी कैसी है, ये सब बातें उतनी ही ज़रूरी है, जितनी वैक्सीन की खोज करना। क्योंकि कोविड 19 वैक्सीन एक नया वैक्सीन है, लोगों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हमें बेहद सतर्क रहने की ज़रुरत है। इसमें कोई दो मत नहीं कि इसके साइड इफ़ेक्ट देखे जा सकते हैं।

वहीं अमृता इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ संजीव सिंह की माने तो किसी भी वैक्सीन को टेस्ट करने के लिए कम से कम 5 साल की अवधि की ज़रुरत पड़ती है। क्योंकि हमने कोविड 19 वैक्सीन बनाने के लिए क्लिनिकल ट्रायल, यानी कि फेज 1, 2 और फेज 3 से समझौता किया है, तो हमें इस पूरी प्रक्रिया में समस्या होने की आशंका है। हालांकि वैक्सीन के लॉन्च से पहले सभी ज़रूरी बातों का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन फिर भी इसके प्रतिकूल प्रभाव हमें दिखाई दे सकते हैं।

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कितने प्रकार की हैं कोविड 19 वैक्सीन?

डॉ संजीव सिंह के अनुसार भारत में अब तक कुल 126 कंपनियों ने कोरोना वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन किया है। इसमें से 6 कंपनियां कोविड 19 वैक्सीन बनाने के सबसे करीब हैं और तीसरे फेज में पहुंच चुकी है। डॉ संजीव की माने, तो वैक्सीन के तीन प्रकार पाए जाते हैं, जिसमें पहला है न्यूक्लिक एसिड बेस वैक्सीन। इस प्रकार की वैक्सीन में mRNA और DNA दोनों तरह के वैक्सीन पाए जाते हैं।

वैक्सीन का दूसरा प्रकार है वायरल वेक्टर वैक्सीन, जो खुद में लाइव वायरस कैरी करता है। इस वायरस की मदद से शरीर में किसी बीमारी के खिलाफ इम्यूनिटी बनाई जाती है। आखिर में, वैक्सीन का तीसरा प्रकार है इनएक्टिवेटेड और रिकॉम्बिनेंट वैक्सीन। कोविड 19 का टीका भी इन्ही तीन तरीकों के वैक्सीन में से एक हो सकता है।

और पढ़ें: कोरोना वैक्सीन को लेकर इन वैक्सीन की है दावेदारी, क्या आप जानते हैं इनके बारे में?

क्या है कोविड 19 वैक्सीन इस्तेमाल करने के मेथड्स?

कोविड 19 वैक्सीन को तीन मेथड्स के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें बाइंडिंग एंटीबॉडीज को इंड्यूज करके, न्युट्रिलाइजिंग एक्टिविटी से या टी सेल रेस्पॉन्स के जरिए शरीर तक पहुंचाया जा सकता है।

और पढ़ें: 15 अगस्त तक लॉन्च हो सकती है भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’

क्या है 15 अगस्त को लॉन्च होनेवाली कोवैक्सीन?

जैसा कि सभी जानते हैं, देश में चर्चा है कि 15 अगस्त तक कोरोना वायरस का टीका लॉन्च कर दिया जाएगा। ऐसे में बेहद जरूरी है कि हम इस वैक्सीन से संबंधित पहलूओं को समझें। भारत में लॉन्च होने वाली कोवैक्सीन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा विकसित की गई है। इसे आईसीएमआर स्वदेशी वैक्सीन मान रही है। इस कोवैक्सीन को SARS-Cov-2 के स्ट्रेन को आइसोलेट करके निर्मित किया गया है, जिस पर आईसीएमआर और भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड का काम लगातार जारी है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार यह वैक्सीन 2 ट्रायल में  सफल पाया गया है। इसलिए जुलाई महीने की शुरुआत से इसका ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है।

आईसीएमआर के माने तो इस कोवैक्सीन के ट्रायल के लिए भारत में 12 अस्पतालों का चुनाव किया गया है, जिसके बाद 15 अगस्त 2020 को इसे लॉन्च किया जा सकता है। बता दें कि इस क्लीनिकल ट्रायल को 29 जून को मंजूरी मिली थी। दूसरी ओर वैज्ञानिकों का मानना है कि इतने कम समय के ट्रायल के बाद वैक्सीन को लॉन्च करना आम जनता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों की माने, तो इस मामले में जल्दबाजी न कर के वैक्सीन को पूरी तरह से सुरक्षित किया जाना चाहिए।

इस तरह कोरोना वायरस का टीका अपने साथ कई तरह की चुनौतियां भी लेकर आ सकता है। जिसमें से कोरोना वैक्सीन का साइड इफ़ेक्ट एक अहम पहलू है।

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