
जैपनीज एप्रिकॉट एक छोटा सजावटी पेड़ है। इसका वानस्पातिक नाम Prunus mume है। ये रोसासिए (rosaceae) परिवार से ताल्लुख रखता है। इसे चीनी बेर (चाइनीज प्लम) के नाम से भी जाना जाता है। इस पौधे पर पीले रंग के फल लगते हैं। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसके फलों, फूलों और शाखाओं का प्रयोग दवाओं में किया जाता है।

लोग जापानी खुबानी (Japanese Apricot) का इस्तेमाल फीवर, कफ, पेट और इंटेस्टाइन डिसऑर्डर, इंसोम्निया, मेनोपोज के लक्षण, कैंसर और हृदय सबंधित परेशानियों को दूर रखने के लिए करते हैं। कई बार इसे सनबर्न होने पर स्किन पर भी लगाया जाता है। जापान में इसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक लोशन में किया जाता है।
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जापानी खुबानी का उपयोग निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जाता है। जैसे:
दिल को रखे स्वस्थ:
जापानी खुबानी जूस शरीर के माध्यम से रक्त के प्रवाह की क्षमता में सुधार करने में मदद करता है। इसके अलावा ये हृदय की मसल सेल्स के गठन के लिए एक स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देता है। दिल के रोगी (Heart related problems) इसका उपयोग कर सकते हैं।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ:
जापानी खुबानी क्रोनिक एट्रोफिक गैस्ट्रिटिस से ग्रसित लोगों में सूजन और इंफेक्शन को कम करने में मदद करती है। डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन मददगार साबित हो सकता है।
एंटीबैक्टीरियल:
इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज ब्रोंकाइटिस, क्रोनिक कफ, क्रोनिक डायरिया और राउंडवॉर्मस से निजात दिलाती हैं। इसका उपयोग की जानकारी हेल्थ एक्सपर्ट से लेने के बाद ही उपयोग करें।
हड्डियां होती हैं स्ट्रॉन्ग:
हड्डियों को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए कैल्शियम के साथ-साथ आयरन एवं मैंगनीज की आवश्यकता पड़ती है और जापानी खुबानी में ये सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करने से लाभ मिल सकता है।
अस्थमा पेशेंट्स के लिए है लाभकारी:
रिसर्च के अनुसार जापानी खुबानी का तेल अस्थमा के पेशेंट्स के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। लेकिन अस्थमा के पेशेंट्स को जापानी खुबानी के ऑयल (Japanese Apricot Oil) का सेवन बिना डॉक्टर के कंसल्ट के नहीं करना चाहिए।
इन परेशानियों में भी मददगार:
इस बारे में कोई वैज्ञानिक जानकारी नहीं है कि जापानी खुबानी कैसे काम करती है। हालांकि कुछ शोध बताते हैं कि इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीपायरेटिक, एंटीस्पास्मोडिक, एस्ट्रिंजेंट, कार्मिनेटिव और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं। इसकी अधिक जानकारी के लिए किसी डॉक्टर या हर्बलिस्ट से बात करें।
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निम्नलिखित परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या हर्बलिस्ट से सलाह लें:
अन्य दवाइयों के मुकाबले औषधियों के संबंध में रेग्युलेटरी नियम अधिक सख्त नही हैं। इनकी सुरक्षा का आंकलन करने के लिए अतिरिक्त अध्ययनों की आवश्यकता है। जैपनीज एप्रिकॉट का इस्तेमाल करने से पहले इसके खतरों की तुलना इसके फायदों से जरूर की जानी चाहिए। इसकी अधिक जानकारी के लिए अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।
सीमित मात्रा में इसका प्रोसेस्ड फल का सेवन सुरक्षित है। रॉ फल का सेवन सेफ नहीं है, क्योंकि इसमें टॉक्सिक केमिकल होते हैं। कई शोध के अनुसार, कम मात्रा में इसका सेवन करने से श्वसन तंत्र उत्तेजित होता है और पाचन में सुधार भी होता है। इसके अलावा यह कैंसर के उपचार में मदद करता है। वहीं अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से श्वसन विफलता हो सकता है। इसके साथ ही जान जाने का भी खतरा रहता है।
सर्जरी: जापानी खुबानी ब्लड क्लोटिंग को धीमा करता है। सर्जरी के दौरान इससे ब्लीडिंग होने का खतरा रहता है। इसलिए सर्जरी से दो हफ्ते पहले और दो हफ्ते बाद तक इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
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कुछ समय तक सीमित मात्रा में इसका सेवन सुरक्षित है। लंबे समय तक इसका सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। इससे आपको उल्टी, जी मिचलाना और पेट खराब की शिकायत हो सकती है। कई बार इसके परिणाम काफी सीरियस हो सकते हैं। इंसान की इससे जान भी जा सकती है। खुद से इसका इस्तेमाल न करें। हमेशा डॉक्टर की देख रेख में ही इसका सेवन करें।
हालांकि हर किसी को ये साइड इफेक्ट हों ऐसा जरुरी नहीं है, कुछ ऐसे भी साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जो ऊपर बताए नहीं गए हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी साइड इफेक्ट महसूस हो या आप इनके बारे में और जानना चाहते हैं तो नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
जापानी खुबानी की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और अन्य कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लीमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें। कभी भी इसे लेने की मात्रा खुद से तय न करें। आपके द्वारा की गई जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकती है।
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जापानी खुबानी (Japanese Apricot) निम्नलिखित रूपों में उपलब्ध है:
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डिस्क्लेमर
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Current Version
24/12/2021
Mona narang द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी
Updated by: Nikhil deore