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सावधान! यूरिन संबंधी परेशानी कहीं किडनी पर न पड़ जाए भारी

सावधान! यूरिन संबंधी परेशानी कहीं किडनी पर न पड़ जाए भारी

यूरिनरी ट्रैक्ट बॉडी का ड्रेनेज सिस्टम (body’s drainage system) होता है, जो यूरिन को शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। यूरिनरी ट्रैक्ट में किडनी, यूरेटर्स और ब्लैडर शामिल है। यूरिनेशन के लिए यूरिनरी ट्रैक्ट का बेहतर ढंग से एक साथ काम करना बहुत जरूरी है। यूरोलॉजिकल हेल्थ शरीर के कुछ ऑर्गन जैसे कि किडनी, ब्लैडर, यूरेटर आदि से जुड़ा है। हेल्थ अवेयरनेस यूके ( Health Awareness UK) की मानें, तो दो में एक व्यक्ति अपनी जिंदगी में एक बार यूरोलॉजिकल कंडीशन से जरूर प्रभावित होता है। यूरोलॉजिकल इशू, डिसऑर्डर और डिजीज के कारण किडनी, ब्लैडर, प्रोस्टेट, पेनिस, स्क्रोटम और टेस्टेस आदि के कार्य प्रभावित होते हैं। कई प्रकार की यूरोलॉजिकल हेल्थ कंडीशन यूरोलॉजिकल हेल्थ और जनरल हेल्थ पर असर डाल सकती है। यूरोलॉजिकल डिजीज या कंडीशन में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, किडनी स्टोन, ब्लैडर कंट्रोल प्रॉब्लम, प्रोटेस्ट प्रॉब्लम आदि शामिल है। कुछ यूरोलॉजिकल कंडीशन कम समय तक शरीर को प्रभावित करती हैं, वहीं कुछ यूरोलॉजिकल कंडीशन लंबे समय तक शरीर पर बुरा प्रभाव छोड़ सकती हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको मूत्र संबंधी रोगों के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही आप यूरोलॉजिकल हेल्थ से जुड़ी अहम जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। जानिए आखिर क्यों खराब होती है यूरोलॉजिकल हेल्थ।

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इन कारणों से पड़ता है यूरोलॉजिकल हेल्थ (Urological Health) पर बुरा असर

यूरोलॉजिकल डिजीज के कारण शरीर के कुछ ऑर्गन में असर दिखाई पड़ता है। जहां महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट प्रभावित होता है, वहीं पुरुषों में यूरिनरी ट्रैक्ट और रिप्रोडक्टिव ऑर्गन प्रभावित होते हैं। अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोशियएन फाउंडेशन (AUAF) की मानें, तो महिलाओं और पुरुषों में कई प्रकार की यूरोलॉजिकल डिजीज हो सकती हैं। यूरिनरी डिसऑर्डर कई कारणों से हो सकता है। गोनोरिया और क्लैमाइडिया यौन संचारित रोग (Sexually transmitted infections) का कारण बनते हैं। इस कारण से यूरेथराइटिस (urethritis) की समस्या हो जाती है। अन्य इंफेक्शियस एजेंट के कारण यूरेथ्रा ( urethra),ब्लैडर या किडनी का इन्फेक्शन हो सकता है। जलन या ट्रॉमा के कारण यूरेथ्रा में सूजन पैदा हो सकती है। वहीं यूरिनरी इंकॉन्टिनेंस की समस्या (Urinary incontinence) पेल्विक की कमजोर मसल्स के कारण होती है। नर्वस सिस्टम की असामान्यता, प्रोस्टेट के कारण यूरिनरी रिटेंशन (Urinary retention) की समस्या हो जाती है। किडनी की समस्या का कारण हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज हो सकती है। वहीं कुछ यूरिनरी डिसऑर्डर किन कारणों से होता है, इस बारे में अभी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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ये यूरोलॉजिकल डिजीज (Urologic Diseases) आपको कर सकती हैं परेशान

यूरोलॉजिकल समस्याओं में किडनी डिजीज ( Kidney Disease), ब्लैडर प्रॉब्लम (Bladder Problems), यूरिनरी ट्रैक्ट स्टोन्स (Urinary Track Stones), यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस (Urinary Incontinence), यूटीआई ( urinary tract infection) व अन्य यूरोलॉजिकल समस्याएं ( Other Urological Issues) शामिल हैं। अगर आपको यूरिन करने के दौरान किसी प्रकार की समस्या महसूस होती है या फिर पेट में दर्द की समस्या लगातार रहे, तो ये यूरोलॉजिकल डिजीज से संबंधित मामला हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए। जानिए यूरोलॉजिकल डिजीज के बारे में।

किडनी डिजीज ( Kidney Disease) के हो सकते हैं कई कारण

Kidney Disease

किडनी वायटल ऑर्गन है, जो अपर एब्डॉमेन (upper abdomen) में स्थित होती है। किडनी फंक्शन में खराबी के कारण किडनी डिजीज हो सकती है। इस कारण से किडनी फंक्शन में समस्या आती है। किडनी वेस्ट प्रोडक्ट को फिल्टर करती है और खून में अधिक मात्रा में पानी और सॉल्ट को अलग करती है। एक्यूट रीनल फेलियर और क्रॉनिक किडनी डिजीज ऐसी कंडीशन हैं, जो किडनी फंक्शन को प्रभावित करती हैं। यूरिनरी ट्रैक्ट ऑब्सट्रक्शन, टॉक्सिक पदार्थों के कारण एक्यूट रीनल फेलियर हो सकता है। वहीं क्रॉनिक किडनी डिजीज के कारण किडनी डैमेज की समस्या हो सकती है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के कारण क्रॉनिक किडनी डिजीज हो सकती है। किडनी डिजीज होने निम्नलिखत लक्षण दिख सकते हैं।

  • क्लाउडी यूरिन (Cloudy or discolored urine)
  • यूरिनेशन में दिक्कत (Difficulty urinating)
  • खड़े होने में समस्या
  • थकान का एहसास
  • फ्रीक्वेंट यूरिनेशन
  • मसल्म क्रैंप (Muscle cramps)
  • पेनफुल यूरिनेशन
  • पैरों या टखनों में सूजन
  • भूख में कमी
  • असहज महसूस होना

यूरोलॉजिकल डिजीज में किडनी में स्टोन की समस्या भी शामिल है। यूरिन में पाए जाने वाले क्रिस्टल और स्मॉल पार्टिकल किडनी में स्टोन की समस्या पैदा करते हैं। यूरेटरल स्टोंस किडनी से यूरेटर में आ जाते हैं। यूरेटर ट्यूब होती है, जो यूरिन को किडनी से ब्लैडर की ओर ले जाती है। स्टोन के कारण यूरिन फ्लो ब्लॉक हो जाता है। इस कारण दर्द की समस्या हो सकती है। अगर किडनी अचानक से काम करना बंद कर देती है, तो इसे एक्यूट रीनल फेलियर के नाम से जाना जाता है। ऐसे में किडनी में पर्याप्त मात्रा में ब्लड फ्लो नहीं हो पाता है। यूरिन किडनी में वापस आ जाता है। वहीं ऑटोइम्यून डिजीज में इम्यून सिस्टम बॉडी में अटैक करने लगता है। इस कारण से एक्यूट किडनी इंजुरी हो जाती है।

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ब्लैडर संबंधित समस्याएं (Bladder Problems)

ब्लैडर से संबंधित समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं। कुछ हेल्थ प्रॉब्लम्स के कारण स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस हो जाता है, जिसके कारण महिलाओं में पेल्विक फ्लोर मसल्स वीक हो जाती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान, ट्रॉमा या इंजुरी के दौरान, पेल्विक ऑर्गन प्रोलेप्स के कारण, मेनोपॉज आदि के कारण ब्लैडर रिलेटेड प्रॉब्लम हो सकती हैं। वीक पेल्विक फ्लोर मसल्स के कारण ब्लैडर में स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस के दौरान यूरिन नहीं रुक पाती है। स्ट्रेस इंकॉन्टिनेंस से मतलब छींक, खांसी, हंसी या अन्य कोई फिजिकल एक्टिविटी है। इस कारण से यूरिन लीक होने की समस्या होती है। वहीं पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ ही प्रोस्टेट बड़ा हो जाता है। प्रोटेस्ट इंलार्जमेंट (prostate enlargement) के कारण यूरिन पास करने में समस्या होती है। पुरुषों को ब्लैडर प्रॉब्लम होने से यूरिनेशन में दिक्कत, ब्लैडर को खाली करने में समस्या, यूरिन का स्लो होना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ब्लैडर संबंधित समस्याओं के लिए निम्न कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • उम्र बढ़ना
  • ब्लैडर इन्फेक्शन
  • कब्ज की समस्या
  • बर्थ डिफेक्ट
  • ब्लॉक यूरिनरी ट्रैक्ट
  • क्रॉनिक कफ
  • डायबिटीज
  • मोटापा

ब्लैडर प्रॉब्लम होने पर कुछ समस्याएं जैसे कि यूरिन पास करने में दिक्कत, ब्लैडर कंट्रोल न रहना, बाथरूम का बार-बार यूज करना, पेल्विक पेन या यूरिन का लीक होना आदि समस्याएं होती हैं। अगर समय पर डॉक्टर से संपर्क न किया जाए, तो बड़ी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

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यूरिन ब्लॉक समस्या पैदा करता है यूरिनरी ट्रैक स्टोन (Urinary Tract Stones)

Urinary Track Stones
यूरिनरी ट्रैक स्टोन

यूरिनरी ट्रैक्ट स्टोन हार्ड होते हैं, जो यूरिनरी ट्रेक में पेन, ब्लीडिंग, इन्फेक्शन या यूरिन के दौरान ब्लॉक की समस्या पैदा कर सकते हैं। यूरिनरी ट्रैक्ट में छोटे स्टोन के कारण कुछ लक्षण दिखाई पड़ते हैं, जबकि बड़े स्टोन के कारण हिप्स और रिब्स के बीच दर्द की समस्या हो सकती है। यूरिनरी ट्रैक्ट स्टोन की शुरुआत किडनी से होती है और फिर स्टोन यूरेटर या ब्लैडर में बनने लगते हैं। स्टोन जिस स्थान में बनते हैं, उसी के अनुसार उन्हें नाम दिया जाता है। स्टोन फॉर्मेशन को यूरोलिथाइसिस (urolithiasis) कहा जाता है। स्टोन में कैल्शियम, यूरिक एसिड, मैग्नीशियम, अमोनियम और फॉस्फेट होता है। इन्हें इन्फेक्टेड स्टोन भी कह सकते हैं क्योंकि ये इन्फेक्टेड यूरिन से बनते हैं। जब यूरिन सैचुरेटेड हो जाती है, तो स्टोन बनने लगते हैं। यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन के कारण निम्नलिखित लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं।

  • लोअर एब्डॉमन में दर्द
  • बैक पेन
  • वॉमिटिंग
  • पसीना आना
  • यूरिन में खून
  • मितली का एहसास

अगर आपको यूरिन करने में समस्या महसूस हो रही है या उपरोक्त दिए गए लक्षण नजर आ रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। सही समय पर इलाज आपको भविष्य में आने वाली बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचा सकता है।

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ब्लैडर में कंट्रोल न होने से होता है यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस (Urinary Incontinence)

किसी कारण से जब ब्लैडर में यूरिन नहीं रुक पाती है, तो यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या हो जाती है। यूरिन पास करने के दौरान खुद पर नियंत्रण नहीं रहता है, तो यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या जन्म लेती है। इस कारण से यूरिन लीकेज की समस्या होने लगती है। मूत्र संबंधी समस्याओं में यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या आम मानी जाती है। यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या महिलाओं के साथ ही पुरुषों में भी हो सकती है। दोनों में इसका कारण अलग हो सकता है। ओवरएक्टिव ब्लैडर, वीक ब्लैडर, प्रेग्नेंसी के दौरान या डिलिवरी, मधुमेह की बीमारी के कारण यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या हो सकती है। यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस के कारण खांसने, छींकने, हंसने, अचानक तेज चलने पर ब्लैडर पर दबाव पड़ता है और यूरिन लीक हो जाता है। कुछ लोगों में यूरिन थोड़ा लीक होता है और कुछ में अधिक मात्रा में भी हो सकता है। जानिए होने पर क्या लक्षण दिख सकते हैं?

  • यूरिन फ्लो कम होना
  • यूरिन का लीक होना
  • यूरिनेशन के समय पेन
  • ब्लैडर भरे रहने का एहसास
  • सोते समय बेड गीला होना
  • तेज गति से काम करने पर यूरिन लीकेज

उपरोक्त लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें और अपने डॉक्टर को यूरिन संबंधी समस्या के बारे में बताएं। यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस का इलाज संभव है और कुछ सावधानी के माध्यम से इस समस्या का समाधान भी किया जा सकता है।

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यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (Urinary Tract Infection )

यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया के कारण इन्फेक्शन की समस्या हो जाती है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के कारण यूरिन पास करते समय जलन की समस्या होती है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक होती है। पेट के निचले हिस्से में दर्द का एहसास भी हो सकता है। अगर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का समय पर इलाज न करवाया जाए, तो किडनी पर बुरा असर पड़ता है। अगर पहले फेज में बीमारी पहचान ली जाए, तो कुछ दिन एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने के बाद संक्रमण खत्म हो जाता है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आते हैं।

  • यूरिन से तेज बदबू
  • यूरिन के दौरान जलन होना
  • यूरिन में खून आना
  • पेट के निचले हिस्से में ऐंठन
  • बार-बार यूरिन आना
  • जी मिचलाना

महिलाओं को मीनोपॉज के बाद, डिलिवरी के बाद या अधिक उम्र में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। बीमारी के लक्षण हल्के भी हो सकते हैं और ये लक्षण यौन संचारित रोग जैसे भी लग सकते हैं।

अन्य यूरोलॉजिक समस्याएं (Other Urological Issues)

हम आपको कुछ यूरोलॉजिक समस्याओं के बारे में जानकारी दे चुके हैं। इनके अलावा भी मूत्र संबंधी समस्याएं होती हैं, जो आपकी यूरोलॉजिकल हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती है। अन्य यूरोलॉजिकल समस्याओं में प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer), ब्लैडर कैंसर (Bladder cancer), ब्लैडर प्रोलेप्स्ड, हेमाट्यूरिया (hematuria), इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (erectile dysfunction), ओवरएक्टिव ब्लैडर (Overactive bladder), प्रोस्टेटिटिस (Prostatitis) आदि शामिल है। इन समस्याओं के होने से शरीर में विभिन्न प्रकार के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हेमाट्यूरिया (hematuria) की बीमारी होने पर यूरिन के साथ ब्लड भी आता है। वहीं ओवरएक्टिव ब्लैडर के कारण तेजी से पेशाब लगती है।जब बैक्टीरिया यूरिन से प्रोस्टेट में पहुंच जाता है, तो प्रोस्टेटिटिस की समस्या हो जाती है। अगर लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर से तुरंत जांच कराई जाए, तो बीमारी का इलाज करने में आसानी होती है। यूरोलॉजिक समस्याओं के कारण निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं।

  • जी मिचलाना (Nausea)
  • यूरिन में ब्लड (blood in urine)
  • यूरिन से बदबू आना (Smell in urine)
  • फ्रीक्वेंट यूरिनेशन (Frequent urination)
  • उल्टी (Vomiting)
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द
  • तेजी से यूरिन पास होना
  • थकान (Fatigue)

यूरोलॉजिकल समस्याओं से ऐसे करें बचाव

यूरोलॉजिकल हेल्थ

यूरोलॉजिकल समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि बीमारी के लक्षणों के दिखने पर लापरवाही न बरती जाएं और बीमारी का इलाज कराया जाए। यूरोलॉजिकल समस्याएं होने पर यूरिन पास करने के दौरान असहज महसूस हो सकता है। साथ ही पेट के निचले हिस्से में दर्द का एहसास भी हो सकता है। डॉक्टर जांच के बाद बीमारी का इलाज करेंगे और समस्या के समाधान के लिए मेडिकेशन या सर्जरी का सहारा लेंगे। जानिए यूरोलॉजिकल समस्याओं से बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।

किडनी डिजीज (Kidney Disease) से बचने के लिए अपनाएं सावधानी

अगर आपको शरीर में किसी भी प्रकार के लक्षण दिख रहे हैं, तो जांच जरूर कराएं। किडनी में स्टोन (Kidney stone) होने पर मेडिकल या सर्जिकल प्रोसेस से लार्ज स्टोन को निकाला जा सकता है। डॉक्टर एक्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिस्पी (Extracorporeal shock wave lithotripsy) टेक्नीक का यूज कर किडनी से स्टोन हटा सकते हैं। इस प्रोसीजर में साउंड का यूज करके लार्ज स्टोन को छोटे स्टोन में तोड़ा जाता है। ऐसा करने से छोटे स्टोन शरीर से आसानी से बाहर निकल जाते हैं। अगर आपको किडनी में अन्य समस्या है, तो डॉक्टर से ट्रीटमेंट जरूर कराएं। उपरोक्त जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।

और पढ़ें: किडनी कैंसर के क्या हैं लक्षण, जानिए क्या है इसका इलाज?

लाइफस्टाइल में सुधार बचाएगा ब्लैडर प्रॉब्लम्स (Bladder Problems) से

अगर आपको यूरिन पास करने में समस्या हो रही है या फिर एक दिन में आठ से नौ बार आपको बाथरूम जाने की जरूरत महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। यूरिन में ब्लड आना, यूरिन के दौरान दर्द का एहसास ब्लैडर प्रॉब्लम के लक्षण हैं। डॉक्टर जांच के माध्यम से बीमारी का कारण पता लगाने की कोशिश करेंगे। कुछ मेडिसिन भी ब्लैडर प्रॉब्लम का कारण बना सकती हैं। ऐसे में डॉक्टर मेडिसिन को चेंज करने की सलाह दे सकते हैं। साथ ही कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर भी ब्लैडर की समस्या उत्पन्न करते हैं। डॉक्टर आपको लाइफस्टाइल चेंज करने की सलाह भी दे सकते हैं।

यूरिनरी ट्रैक स्टोन (Urinary Tract Stones) से बचाव के लिए सर्जिकल प्रोसेस

डॉक्टर आपसे समस्या के बारे में पूछेंगे और साथ ही पिछली बीमारी के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। डॉक्टर जांच के दौरान कम्प्यूटेड टोमोग्राफी ( computed tomography)की हेल्प ले सकते हैं। सीटी की हेल्प से स्टोन के बारे में जानकारी मिल जाती है। डॉक्टर अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography) की भी हेल्प ले सकते हैं। कैल्शियम स्टोन को एक्स-रे की हेल्प से डिटेक्ट किया जा सकता है। डॉक्टर दर्द से राहत के लिए नॉनस्टेरॉयडल एंटी इंफ्लामेट्री ड्रग लेने की सलाह देंगे और अधिक मात्रा में पानी पीने के लिए कहेंगे। यूरेटर की ओपनिंग में डॉक्टर टेलीस्कोपिक व्यूइंग इंस्ट्रूमेंट ( telescopic viewing instrument) की हेल्प से स्टेंट को डालते हैं और स्टोन हटाने का काम करते हैं। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं।

यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस (Urinary Incontinence) से ऐसे करें बचाव

यूरोलॉजिकल हेल्थ

अगर आपको यूरिनरी इनकॉन्टिनेंट के लक्षण नजर आ रहे हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं। डॉक्टर यूरिनरी इनकॉन्टिनेंट की समस्या को दूर करने के लिए पहले फिजिकल चेकअप करेंगे। डॉक्टर साइटोस्कोपी, यूरिन फ्लो टेस्ट, खून की जांच कर सकते हैं। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर यूरिनरी इनकॉन्टिनेंट की समस्या से निजात पाने के लिए पेल्विक फ्लोर मसल एक्सरसाइज, पुरुषों के लिए मेल स्लिंग या फिर आर्टिफिशियल यूरिनरी स्पिनच्टर के उपयोग की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर आपको खानपान में बदलाव की सलाह भी दे सकते हैं।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (Urinary Tract Infection ) से बचने के लिए न करें लापवाही

अगर आपको यूरिन करने के दौरान जलन महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराएं। डॉक्टर यूरिन टेस्ट करेंगे। यूरिन का सैंपल देने के बाद बैक्टीरिया के संक्रमण के बारे में जानकारी मिल जाती है। ब्लड काउंट की जानकारी के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं। जांच के बाद यदि बैक्टीरियल इन्फेक्शन के बारे में जानकारी मिलती है, तो डॉक्टर आपको कुछ दिनों तक एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देंगे। डॉक्टर आपको अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह भी दे सकते हैं। आप यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन से बचने के लिए बताई गई डोज का सेवन करें। अगर आपको एंटीबायोटिक्स लेने के बाद साइड इफेक्ट नजर आते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।

अन्य यूरोलॉजिक समस्याओं (Other Urological Issues) से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

अन्य यूरोलॉजिक समस्याओं से बचने के लिए आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट आदि के माध्यम से समस्या का कारण जानने की कोशिश करेंगे। अगर आपको बैक्टीरिया का संक्रमण है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स के साथ ही अधिक पानी पीने की सलाह देंगे। आपको बैक्टीरिया इन्फेक्शन को कम करने के लिए वजायना और उसके आसपास सफाई रखनी चाहिए। जननांगों की सफाई के साथ ही सेक्स के बाद यूरिन पास करना न भूलें। हेल्दी डायट लेने के साथ ही खाने में नमक की मात्रा को संतुलित करें। यूरिन का प्रेशर लगने पर ज्यादा वेट न करें वरना इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। अगर डॉक्टर जांच के बाद आपको कोई एहतियात बरतने को कहते हैं, तो उसे जरूर अपनाएं। कैंसर की समस्या होने पर डॉक्टर टेस्ट के बाद आपको ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी देंगे।

यूरोलॉजिक समस्याओं की जांच के लिए ये टेस्ट्स हैं उपलब्ध

पेशाब संबंधी समस्याओं की जांच के लिए विभिन्न प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। टेस्ट्स के माध्यम से बीमारी के कारण का पता लगता है। डॉक्टर ब्लड टेस्ट के माध्यम से डॉक्टर प्रोटेस्ट में इंफ्लामेशन का कारण जानने की कोशिश करते हैं। इस टेस्ट को पीएसए ब्लड टेस्ट कहते हैं। वहीं ब्लड यूरिया नाइट्रोजन टेस्ट के माध्यम से किडनी फंक्शन और क्रिएटिनिन की माप के बारे में जानकारी मिलती है। अगर ब्लड टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ती है, तो डॉक्टर यूरिन टेस्ट कर सकते हैं। यूरिन टेस्ट के माध्यम से बैक्टीरिया, ब्लड सेल्स के बारे में जानकारी मिलती है। यूटीआई के लिए यूरिन टेस्ट किया जाता है। यूरिन कल्चर के माध्यम से यूरिन में बैक्टीरिया संबंधी जांच की जाती है। इमेजिंग टेक्नीक के माध्यम से इंटरनल सिस्टम, ऑर्गन के बारे में जानकारी मिलती है। यूरोलॉजिस्ट लक्षणों के आधार पर ही टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। जानिए कौन से टेस्ट पेशाब संबंधी समस्याओं के दौरान किए जाते हैं।

  • एक्स-रे स्कैन ( X-ray)
  • अल्ट्रासाउंड ( Ultrasounds )
  • इमेजिंग टेस्ट ( imaging tests)
  • कम्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (CT scans)
  • साइटोस्कोपी ( cystoscopy)
  • ब्लड यूरिया नाइट्रोजन टेस्ट (Blood Urea Nitrogen)

एक्सपर्ट के मुताबिक इन तकलीफों से कैसे बचा जा सकता है?

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम निदेशक और प्रमुख डॉ. राजीव यादव ने यूरोलॉजिक डिजीज के बारे में बताया कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में यूरीनरी ट्रेक को प्रभावित करने वाली कुछ सामान्य बीमारियां जैसे कि यूरीनरी ट्रेक इन्फेक्शन (Urinary tract infections), किडनी स्टोन और प्रोटेस्ट इंलार्जमेंट (पुरुषों में) की समस्या हो सकती है। कई केसेज में बीमारी को रोकना संभव नहीं होता है लेकिन कुछ अच्छी आदतें इन बीमारियों को कम करने में मदद कर सकती हैं। खाने में पौष्टिक आहार और फाइबर से भरपूर आहार को शामिल करें। फलों और सब्जियों में विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। प्रोसेस्ड चीज, अचार, प्रिजर्वेटिव रिच फूड आइटम्स, पिज्जा, सॉस आदि जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें अधिक मात्रा में नमक पाया जाता है। अधिक नमक का सेवन करने से किडनी में पथरी की समस्या पैदा हो सकती है। आपको पानी का पर्याप्त सेवन ( 6-8 ग्लास रोजाना) करने के साथ ही रोजाना एक्सरसाइज भी करनी चाहिए। कोल्ड ड्रिंक में अधिक मात्रा में शुगर होता है इसलिए आपको इनकी जगह पानी का सेवन करना चाहिए।

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यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स से बचने के लिए लें ये प्रिकॉशन्स

  • अगर यूरिन के साथ ब्लड आ रहा है, तो ये हेमाट्यूरिया (hematuria) के लक्षण हो सकते हैं। आपको लक्षण दिखते ही डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
  • पेशाब करते समय जलन महसूस हो रही है, तो ये यूटीआई का संकेत हो सकता है। पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से मिले।
  • अगर आपको तेजी से पेशाब लगती है या फिर पेशाब करने में दिक्कत महसूस होती है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • रेग्युलर एक्सरसाइज करें और वेट को मेंटेन करें।
  • डायट में कोलेस्ट्रॉल युक्त फूड को कम मात्रा में लें।
  • बीपी का चेकअप कराएं। हाई ब्लड प्रेशर यूरोलॉजिकल हेल्थ पर बुरा असर डालता है। रोजाना मेडिसिन जरूर लें।
  • खाने में कैफीन के साथ ही नमक की मात्रा सीमित करें।
  • डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।
  • अगर मसल्स को स्ट्रेंथ देने वाली एक्सरसाइज की जाएं, तो यूरोलॉजिक प्रॉब्लम्स से बचा जा सकता है।
  • बाहरी खाने से खुद को बचाएं क्योंकि बाहर के खाने में नमक ज्यादा होता है। ज्यादा नमक यूरोलॉजिकल हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • ऐसा नहीं है कि पुरुष और महिला की यूरोलॉजिक हेल्थ ही महत्वपूर्ण है। बच्चों की यूरोलॉजिकल हेल्थ का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है।

मेडिसिन्स लेते समय ध्यान रखें ये बातें

मूत्र संबंधी रोग होने पर डॉक्टर दवाओं के साथ ही आपको एहतियात बरतनें की सलाह भी देते हैं। अगर आपको इन्फेक्शन की समस्या हो गई है, तो डॉक्टर आपको कुछ दिनों की मेडिसिन्स देंगे। एंटीबायोटिक्स मेडिसिन्स का पूरा कोर्स करें। दवाओं का कोर्स अधूरा न छोड़ें वरना इन्फेक्शन पूरी तरह से खत्म नहीं होगा। अगर डॉक्टर आपको कुछ समय बाद दोबारा टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, तो टेस्ट जरूर कराएं। यूरिनरी इन्फेक्शन दोबारा होने के अधिक चांस रहते हैं। इस कारण से इन्फेक्शन ठीक हो जाने के बाद भी आपको एहतियात बरतनें की जरूरत पड़ती है। दवाओं का डोज अधिक मात्रा में न लें। एंटीबायोटिक्स का सेवन करते समय आपको कुछ साइडइफेक्ट्स भी दिख सकते हैं। आपको इससे घबराने की जरूरत नहीं है। आप डॉक्टर से दवाओं के दुष्प्रभाव के बारे में बात करें। डॉक्टर आपको अन्य दवाओं का सेवन करने की भी सलाह दे सकते हैं। पेशाब संबंधी समस्याओं से बचने के लिए मेडिसिन्स का सेवन करते समय जो भी सावधानियां बरतनी है, डॉक्टर से इस संबंध में परामर्श कर सकते हैं।

पेशाब संबंधी है समस्या तो इन चीजों से बना लें दूरी

अगर आपको पेशाब संबंधी समस्या है, तो आपको अपनी डायट में ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप खाने में सावधानी नहीं बरतेंगे, तो आपको पेशाब संबंधी समस्याओं का बार-बार सामना करना पड़ सकता है। आपको खाने में नमक की मात्रा को कम कर देना चाहिए। साथ ही कैफीन यानी चाय और कॉफी की मात्रा भी कम कर देनी चाहिए। ये दोनों ही आपकी यूरोलॉजिकल हेल्थ के लिए खतरनाक हैं। आप इस संबंध में डॉक्टर से भी परामर्श करें कि आपको खाने में किन चीजों से दूरी बना लेनी चाहिए।ओवरएक्टिव ब्लैडर होने पर डायट लेते समय आपको कुछ फूड से दूरी बना लेनी चाहिए। कुछ फूड और बेवरेज ओवरएक्टिव ब्लैडर के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। आपको निम्नलिखित फूड या बेवरेज को लेना बंद कर देना चाहिए या फिर सीमित मात्रा में लेना चाहिए।

  • कार्बोनेटेड बेवरेज
  • कैफीन युक्त बेवरेज
  • चॉकलेट
  • एल्कोहॉल ड्रिंक्स
  • स्पोर्ट्स ड्रिंक
  • खट्टे फल
  • टमैटो कैचअप,टमैटो के प्रोडक्ट
  • कच्चा प्याज
  • शुगर प्रोडक्ट
  • स्पाइसी फूड
  • शहद
  • चॉकलेट

और पढ़ें: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कैसे करें? जानिए इससे जुड़ी सावधानियां

यूरोलॉजिकल हेल्थ को अच्छा बनाते हैं ये फूड्स (foods for urological health)

यूरोलॉजिक हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए आपको खाने में ऐसे फूड शामिल करने चाहिए, जो इन्फेक्शन को कम करें और साथ ही इम्यूनिटी भी बढ़ाए। आपको खाने में विटामिन सी युक्त फूड को शामिल करना चाहिए। आप क्रैनबेरी का जूस, संतरा आदि खाने में शामिल कर सकते हैं। प्रोबायोटिक्स युक्त फूड भी यूरोलॉजिकल हेल्थ के लिए अच्छे होते हैं। आप खाने में दही को जरूर शामिल करें। साथ ही चीज और प्रोबायोटिक्स सप्लीमेंट भी फायदेमंद रहेंगे। प्रोबायोटिक्स लेने से शरीर में लैक्टोबेसिलस की संख्या बढ़ती है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को कम करने का काम करता है। खाने के साथ ही पानी का खूब सेवन करें ताकि बैक्टीरिया से जल्द छुटकारा मिले।

ब्लैडर हेल्थ के लिए फ्रूट्स

ब्लैडर हेल्थ के लिए वेजीटेबल्स

  • एस्परैगस
  • ब्रोकोली
  • खीरा
  • गोभी
  • गाजर
  • अजवायन
  • सलाद
  • काली मिर्च

ब्लैडर के लिए फाइबर रिच फूड

  • मसूर की दाल
  • फलियां
  • रास्पबेरीज
  • जौ
  • जई
  • बादाम

ब्लैडर के लिए प्रोटीन से भरपूर फूड

  • फिश
  • चिकन
  • टोफू
  • अंडे

उपरोक्त फूड्स का सेवन करने से आपको पेशाब संबंधी समस्याओं में राहत मिलेगी। आपको खाने में क्या शामिल करना है और क्या नहीं, इस बारे में अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें। यहां दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।

क्या महिलाओं और पुरुषों में अलग होती हैं यूरोलॉजिकल समस्याएं

महिलाओं और पुरुषों में पाई जाने वाली यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स अलग होती हैं। महिलाओं और पुरुषों मूत्रमार्ग अलग होता है। इस कारण से दोनों में सामान समस्याएं नहीं पाई जाती हैं। जानिए महिलाओं और पुरुषों में पाई जाने वाली यूरोलॉजिकल समस्याओं के बारे में।

महिलाओं में होने वाली यूरोलॉजिकल समस्याएं (Female Specific Urologic Problems)

महिलाओं में यूरोलॉजिकल समस्याएं डिलिवरी के बाद या अधिक उम्र में पैदा होती हैं। अगर कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए, तो महिलाओं को इन समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। जानिए महिलाओं में आमतौर पर होने वाली यूरोलॉजिकल समस्याओं के बारे में।

पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन (Pelvic Floor Dysfunction)

पेल्विक फ्लोर ब्लैडर, वजायना और रेक्टम के सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है। बच्चों के जन्म के बाद मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इस कारण से यूरिन पास करने में महिलाओं को परेशानी हो सकती है। पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन के कारण दर्द की समस्या हो सकती है। थेरिपी की हेल्प से पेल्विक फ्लोर मसल्स को रिलेक्स किया जा सकता है। ऐसा करने से मसल्स स्ट्रेस कम होगा और दर्द में भी कमी आएगी।

पेल्विक ऑर्गन प्रोलेप्स (Pelvic Organ Prolapse)

जब वजायना की वॉल के कमजोर पार्ट या मसल्स जब एक स्थान से दूसरे स्थान में खिसक जाती है, तो पेल्विक ऑर्गन प्रोलेप्स की समस्या हो जाती है। महिलाओं में चाइल्डबर्थ इंजुरी के दौरान ये समस्या पैदा होती है। इस कारण महिलाओं को बैठने के दौरान वजाइना के आसपास जलन या दर्द का एहसास होता है। अधिक समस्या होने पर डॉक्टर सिलिकॉन सर्जिकल इंजर्शन (surgical insertion of a silicone) की हेल्प लेते हैं।

प्रेग्नेंसी के बाद इंकॉन्टिनेंस (Incontinence After Pregnancy)

प्रेग्नेंसी के बाद इंकॉन्टिनेंस की समस्या आम है। गर्भावस्था के बाद महिलाएं हंसते हुए, खांसते हुए या छींकते के दौरान लीकेज की समस्या का सामना कर सकती हैं। प्रेग्नेंसी के बाद इंकॉन्टिनेंस का ट्रीटमेंट संभव है। साथ ही कुछ एक्सरसाइज इस समस्या से निजात दिला सकती हैं।

पुरुषों में होने वाली यूरोलॉजिकल समस्याएं (Male Specific Urologic Problems)

पुरुषों और महिलाओं की एनाटॉमी अलग होती है, इस कारण से उनमे डिफरेंट यूरोलॉजिक समस्याएं पाई जाती हैं। जानिए पुरुषों में होने वाली मुख्य यूरोलॉजिकल समस्याओं के बारे में।

बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (Benign Prostatic Hyperplasia)

उम्र बढ़ने के साथ ही पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने लगती है। इस कंडीशन को बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया कहते हैं। प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने से मतलब प्रोस्टेट कैंसर बिल्कुल नहीं है। प्रोस्टेटिक बढ़ने के कारण यूरेथ्रा में अधिक प्रेशर पड़ता है। इस कारण से यूरिन ठीक तरह से नहीं हो पाता है। अगर इस समस्या का समाधान नहीं किया जाए, तो यूटीआई का खतरा बढ़ जाता है। मेडिकेशन या सर्जरी की हेल्प से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer)

पुरुषों की मौत के मुख्य कारण में प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है। जब प्रोस्टेट सेल्स तेजी से बढ़ने लगती हैं, तब प्रोस्टेट कैंसर डेवलप होता है। ये बीपीएच (Benign Prostatic Hyperplasia) से अलग कंडीशन है। अगर प्रोस्टेट की सही समय पर जांच कराई जाए, तो कैंसर को डिटेक्ट किया जा सकता है। सर्जरी या रेडिएशन की हेल्प से प्रोस्टेट कैंसर का इलाज किया जा सकता है।

प्रोस्टेटिटिस (Prostatitis)

यूरोलॉजिकल समस्याओं में प्रोस्टेटिटिस भी शामिल है। प्रोस्टेटिटिस के कारण प्रोस्टेट में सूजन हो जाती है। सूजन के कारण यूरिन पास करने में दिक्कत होती है। बुखार या ठंड लगना, पेट में दर्द, पीठ के निचले हिस्से में दर्द आदि प्रोस्टेटिटिस के लक्षणों में शामिल है। एंटीबायोटिक्स की हेल्प से प्रोस्टेटिटिस को ठीक किया जा सकता है।

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पुरुष नपुंसकता (Erectile Dysfunction)

पुरुष नपुंसकता को मूत्र संबंधी बीमारी भी माना जाता है। पुरुष को इरेक्शन को बनाए रखने में समस्या को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कहलाता है। डॉक्टर इस समस्या को मेडिकेशन या टेस्टोस्टेरॉन रिप्लेसमेंट की सहायता से ठीक करने की कोशिश करते हैं।

यूरोलॉजिकल तकलीफों से बचने के लिए करें ये एक्सरसाइज

यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स से बचने के लिए ट्रीटमेंट के साथ ही एक्सरसाइज भी बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। ब्लैडर की अच्छी हेल्थ के लिए लो इंपेक्ट एक्सरसाइज जैसे कि योगा, स्वीमिंग, कीगल एक्सरसाइज आदि आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। कीगल एक्सरसाइज पेल्विक फ्लोर मसल्स को स्ट्रॉन्ग बनाती हैं। पेल्विक फ्लोर मसल्स ब्लैडर के साथ ही यूट्रस और लार्ज इंटेस्टाइन को स्ट्रेंथ देने का काम करती है। जिन पुरुष और महिलाओं को यूरिन लीकेज की प्रॉब्लम होती है, उन्हें कीगल एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।

कीगल एक्सरसाइज करते समय ध्यान रखें ये बातें

  • एक्सरसाइज के पहले ब्लैडर को खाली रखें।
  • अब पेल्विक फ्लोर मसल्स को टाइट करें और आठ तक गिनें।
  • अब मसल्स को 10 काउंट तक रिलेक्स करने दें और इस एक्सरसाइज को 10 से 15 बार करें।
  • एक्सरसाइज के दौरान पेट, थाई और चेस्ट मसल्स को टाइट न होने दें।
  • यूरिनेशन के दौरान कीगल एक्सरसाइज न करें वरना पेल्विक फ्लोर मसल्स कमजोर हो सकती हैं।
  • आप इस एक्सरसाइज को चार से छह हफ्ते करें और फर्क महसूस करें।

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बार-बार हो रही है यूरोलॉजिकल समस्याएं तो अपनाएं ये उपाय

आपको बार-बार यूरोलॉजिकल समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है, तो आपको बीमारी के दोबारा आने का कारण पता करना चाहिए। महिलाओं और पुरुषों को यूटीआई की समस्या का कई बार सामना करना पड़ सकता है। जब हाइजीन का ठीक तरह से ख्याल नहीं रखा जाता है, तो आपको इन्फेक्शन की समस्या बार-बार हो सकती है। आपको इन बातों का ख्याल हमेशा रखना चाहिए।

  • अगर एक बार यूटीआई हो गया, तो दोबार भी हो सकता है।
  • वजाइना के आसपास साफ-सफाई रखें।
  • अनसेफ सेक्स न करें वरना आपको यूटीआई दोबारा हो सकता है।
  • सेक्स के समय शुक्राणुनाशक (spermicides) का यूज न करें। ये यूटीआई की संभावना को बढ़ाता है।
  • यूरिन को रोकने की भूल न करें वरना आपको पेशाब संबंधित संक्रमण हो सकता है।

यूरोलॉजिकल हेल्थ : यूरोलॉजिकल समस्याएं से बचने के लिए अपनाएं अल्टरनेटिव ट्रीटमेंट

यूरोलॉजिकल हेल्थ को दुरस्त रखने के लिए अल्टरनेटिव ट्रीटमेंट भी अपनाया जा सकता है। ओवरएक्टिव ब्लैडर, यूटीआई आदि समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अल्टरनेटिव ट्रीटमेंट को अपनाया जा सकता है। जानिए कुछ हर्बल मेडिसिन के बारे में, जो यूरोलॉजिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करती हैं।

गोशा-जिंकी-गन (Gosha-jinki-gan) – ये 10 जड़ी-बूटियों का मिश्रण है। इसका सेवन इंकॉन्टिनेंस की समस्या से राहत दिलाता है।

हची-मी-जियो-गन (Hachi-mi-jio-gan) – इस हर्बल में आठ नैचुरल इंग्रीडिएंट्स होते हैं। ये ब्लैडर की मसल्स के संकुचन को कम करने का काम करता है।

बारोस्मा बेटुलिना (Barosma betulina) – ये हर्बल मेडिसिन किडनी के संक्रमण को कम करने का काम करती है।

क्लीवर्स (Cleavers)- यूटीआई की समस्या से निजात के लिए क्लीवर्स हर्बल का उपयोग किया जाता है। ये हर्बल ब्लैडर की समस्या में निजात दिलाने का काम करती है।

यूरोलॉजिकल हेल्थ की देखभाल के लिए सावधानी की बहुत जरूरत है। अगर आपको मूत्र संबंधी किसी भी तरह की समस्या महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं और बीमारी का इलाज कराएं। समय पर बीमारी का इलाज न कराने से शरीर के दूसरे अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

किडनी से जुड़ी बीमारियों में क्या करें और क्या ना करें? जानने के लिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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