कोरोना वायरस के अलावा ये न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी हैं जानलेवा, जानना है आपके लिए भी जरूरी

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अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आज “कोरोना वायरस” का डर दुनिया भर में फैला हुआ है। सभी लोग इस बीमारी से डरे-सहमे से हैं। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी कि यह कोई नई बीमारी नहीं है। कोरोना वायरस वास्तव में जानवरों में पाए जाने वाले वायरस के एक बड़े परिवार को संदर्भित करता है। कोरोना वायरस से होने वाली दो अन्य बीमारियों में मिडिल ईस्ट श्वसन सिंड्रोम (MERS) और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (SARS) शामिल हैं। ये बहुत ही गंभीर वायरल श्वसन रोग हैं।

हालांकि, नोवेल कोरोना वायरस (2019-nCoV) को वुहान कोरोनावायरस के रूप में जाना जाता है। यह हाल ही में खोजा गया वायरस है। इसे हाल ही में चीन के वुहान में सांस की बीमारी के प्रकोप के कारण के रूप में खोजा गया था। 2019-एनसीओवी संक्रमण के लक्षणों में बुखार, श्वसन रोग और यहां तक ​​कि मौत भी शामिल है। आज तक, चीन में 31,526 मामले और 636 मृत्यु के मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। 30 जनवरी, 2020 को, सीडीसी ने इस वायरस से ग्रस्त पहले अमेरिकी व्यक्ति की पुष्टि की थी जो सात फरवरी तक बढ़कर 12 हो गई है। सीडीसी सक्रिय रूप से 2019-nCoV संक्रमण के संदिग्ध 100 व्यक्तियों की लगातार जांच कर रहा है।

केवल 2019-nCoV ही नहीं बल्कि, हाल ही में खोजी गई अन्य नई बीमारियां भी सुर्खियों में बनी हैं। यहां पांच मुख्य बीमारियों के बारे में बात की जा रही है।

न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर : ऑटोइम्यून सिंड्रोम एड्यूवेंट्स (एएसआईए) द्वारा प्रेरित

तमाम एंटी-वैक्सएक्सर्स का दावा है कि टीकाकरण से स्वास्थ्य पर कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना बहुत ही असामान्य है। फिर भी, एक व्यक्ति जिसमें इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) के टीकाकरण के दो महीने बाद ही ट्रांसवर्स माइलिटिस के लक्षण पाए गए। ट्रांसवर्स माइलाइटिस (टीएम) एक तरह का तंत्रिकीय विकार है जो मेरुरज्जु के पूरे एक खंड में सूजन के कारण होता है। माइलाटिस का मतलब मेरुरज्जु में आई सूजन को कहते हैं। ट्रांसवर्स शब्द मेरुरज्जु की पूरी चौड़ाई में सूजन की स्थिति को बताता है। सूजन की वजह से माइलिन को नुकसान पहुंच सकता है। इससे नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है जिससे शरीर के कई हिस्सों के बीच संचार बाधित होता है।

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न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर : गेमिंग डिसऑर्डर (gaming disorder)

हालांकि यह डिसऑर्डर विवादास्पद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रोगों के अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण यानी इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (ICD-11) के 11 वें संस्करण में इंटरनेशनल डिजिटल और विडियो गेम की लत को मानसिक बीमारी यानी मनोविकार के रूप में वर्गीकृत किया है। गेमिंग डिसऑर्डर एक ऐसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसकी निगरानी किए जाने की जरूरत है। WHO द्वारा जारी 11वें संस्करण में गेमिंग डिसऑर्डर को स्थायी या आवर्ती खेल व्यवहार (डिजिटल गेमिंग या विडियो गेम) के तौर पर बताया गया है, जो ऑनलाइन या ऑफलाइन हो सकता है।

WHO के अनुसार, गेमिंग डिसऑर्डर के ये कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं 

  • गेमिंग को इतनी ज्यादा तरजीह और वरीयता दी जाने लगती है कि दूसरी सभी एक्टिविटीज और जरूरी काम पीछे रह जाते हैं।
  • गेमिंग की वजह से परेशानी इतनी बढ़ जाए कि निजी, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक और व्यवसायिक कामों पर असर पड़ने लगे।
  • गेमिंग डिसऑर्डर की वजह से नींद, खानपान और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित होने लगे।
  • गेमिंग की वजह से जागने के घंटों में इजाफा होना।
  • गेमिंग नींद, फिटनेस और पोषण को प्रभावित करता है।

उपरोक्त संकेत कम से कम 12 महीने तक बने रहते हैं।

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सेमिनोमा से जुड़ा हुआ पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम

द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक मामले की रिपोर्ट में, शोधकर्ताओं ने पाया कि केल्च-जैसे प्रोटीन 11(KLHL11) ऑटो-एंटीबॉडीज का संबंध नोवेल वायरस से था। साथ ही वृषण कैंसर वाले पुरुषों में पैरानियोप्लास्टिक एन्सेफलाइटिस भी पाया गया।

शोधकर्ताओं ने 32 साल की उम्र में बाएं वृषण सेमिनोमा (left testicular seminoma) का निदान हुए एक व्यक्ति पर रिसर्च में पाया कि ऑर्किक्टोमी और कीमोथेरेपी के साथ उपचार के बाद, पीड़ित को 45 महीने के बाद ही कुछ समस्याएं होने लगी। उपचार के नौ महीने में उसे एन्सेफलाइटिस के साथ कुछ न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का भी सामना करना पड़ा जिसमें वर्टिगो (अक्सर चक्कर आने का आभास), अटैक्सिआ (गति भंग), डिप्लोपिया (दोहरा दिखाई देना), न्यस्टागमस (आंख की पुतलियों का अनायास घूमना) आदि शामिल था। ये निष्कर्ष समान न्यूरोलॉजिकल विशेषताओं और वृषण रोग वाले 12 अन्य रोगियों के नमूनों द्वारा समर्थित थे।

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न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर : सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (SBS) या बिल्डिंग रिलेटेड सिंड्रोम 

सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (एसबीएस) ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को किसी बड़े भवन में समय बिताने के दौरान, स्वास्थ्य समस्या का अनुभव हो सकता है। इसके पीछे कोई निश्चित रोग या कारण नहीं खोजा जा सका है। सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (SBS) या बिल्डिंग रिलेटेड सिंड्रोम एक जैसी समस्या का अनुभव कराते हैं। ये सिंड्रोम किसी विशेष कमरे या क्षेत्र को लेकर भी हो सकती हैं। एसबीएस से ग्रस्त व्यक्ति को बड़ी बिल्डिंग में रहने से सिरदर्द, आंख, नाक या गले में जलन, खुजली या सूखी ड्राई स्किन, थकान, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, और गंध के प्रति संवेदनशीलता आदि कई लक्षण दिख सकते हैं। हालांकि, घर से बाहर निकलने के बाद लक्षण अक्सर कम हो जाते हैं। एसबीएस के कारण अज्ञात हैं, लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि अपर्याप्त वेंटिलेशन, जैविक संदूषण (बायोलॉजिकल कंटैमिनेशन) या रासायनिक संदूषण (केमिकल कंटैमिनेशन) की वजह से ऐसा हो सकता है।

एसबीएस के विपरीत, बीआरआई के कारण स्पष्ट हैं। बीआरआई वाले लोग खांसी, सीने में जकड़न, ठंड लगना, बुखार और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत करते हैं। इमारत से बाहर निकलने के बाद, एसबीएस की तुलना में बीआरआई से उबरने में अधिक समय लग सकता है।

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सतर्कता है जरूरी

विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार शनिवार तक 25 देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित 270 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

हांगकांग प्रशासन ने एक सख़्त आदेश जारी कर यह कहा है कि ‘जो लोग भी चीन के मुख्य भू-भाग से आ रहे हैं, उन्हें दो सप्ताह तक होटल के कमरों या फिर सरकार द्वारा बनाए गए केंद्रों में अकेले रहना होगा।’ वहीं, भारत सरकार ने दावा किया है कि ‘जो लोग अपने आप चीन से लौट रहे हैं, उनकी भी स्क्रीनिंग की जा रही है। साथ ही ऐसे लोगों की भी जांच हो रही है जो बीते कुछ सप्ताह में चीन का दौरा कर लौटे हैं।’

अगर कोरोना वायरस के कोई भी लक्षण सामने आए तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें। ‘हैलो स्वास्थ्य’ किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें। बिना डॉक्टर के परामर्श पर कियी भी तरह की दवा न लें। 

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