Chlamydia trachomatis : क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस क्या है?

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Update Date जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस (chlamydia trachomatis) बैक्टीरिया की वजह से फैलने वाली सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) को क्लेमेडिया कहते हैं। अगर आप असुरक्षित सेक्स करते हैं या फिर अगर आपके पार्टनर को ये संक्रमण है तो आपको भी ये संक्रमण हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि शुरुआत में इस बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ समय बाद जेनाइटल पार्ट्स में दर्द या फिर वजायना से सफेद पानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। क्लेमेडिया होने पर सर्विक्स, ऐनस, आंख और गला प्रभावित हो सकता है।

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस होना कितना आम है?

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस बहुत ही तेजी से फैलने वाली बीमारी है। प्रतिवर्ष लगभग 131 मिलियन लोग इस संक्रमण से प्रभावित हैं। पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही इस स्थिति की दर बढ़ती ही जा रही है।

25 वर्ष से कम उम्र के वयस्कों में इसके होने की संभावना अधिक होती है। अगर आपको इसके होने की संभावना दिखती है तो डॉक्टर से मिलें और सलाह लें।

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस के लक्षण क्या हैं?

इसके बहुत अधिक लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देंगे लेकिन बढ़ते वक्त के साथ इन लक्षणों को आसानी से देखा जा सकता है। निम्नलिखित शारीरिक बदलाव आने पर समझें इसके लक्षणों को, जैसे-

  • हल्का बुखार होना
  • महिलाओं में वजायना या पुरुष में टेस्टिकल्स में सूजन  होना
  • पेशाब करते समय जलन महसूस होना
  • वजायना से सफेद पानी, जिसमें दुर्गंध आने जैसी परेशानी
  • सेक्शुअल एक्ट में परेशानी महसूस होना
  • असमान ब्लीडिंग होते रहना
  • टेस्टिकल्स में दर्द होना

ये सभी लक्षण संक्रमण के तीन हफ्तों के अंदर दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और सलाह लें। कभी-कभी ऊपर बताये गये लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

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क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस के कारणों को समझें 

किन कारणों से क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस होने की संभावना बढ़ जाती है ?

वजायनल, ऐनल या फिर ओरल सेक्शुअल इंटरकोर्स करते समय क्लेमेडिया ट्राइकोमैटिस (chlamydia trachomatis) का संक्रमण हो सकता है। अगर आपके पार्टनर को भी ये संक्रमण है तब भी सेक्शुअल एक्ट के दौरान ये आपको हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इस समस्या के होने पर ये संक्रमण मां से बच्चे में जा सकता है। साथ ही कई बार इस स्थिति के होने पर महिलाओं को गर्भ धारण करने में भी परेशानी हो सकती है। अगर स्वयं में या फिर अपने पार्टनर में आपको इस बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहें हैं तो डॉक्टर से मिलकर सलाह अवश्य लें।

इनफर्टिलिटी के साथ ही क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस की वजह से और भी कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे कि :

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज ( PID )

इस स्थिति में कई बार संक्रमण सर्विक्स, फैलोपियन ट्यूब और यूट्रस तक फैल सकता है। इसके साथ ही एक्टोपिक प्रेग्नेंसी  (Ectopic Pregnancy) का खतरा भी बढ़ जाता है।

सिस्टाइटिस (Cystitis)

ब्लैडर में जलन होने पर ये संक्रमण हो सकता है।

प्रोस्टेटाइटिस (Prostatitis)

प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate gland) में सूजन आने की वजह से ये संक्रमण हो सकता है।

रेटेर सिंड्रोम (Reiter’s syndrome)

इस स्थिति में अर्थराइटिस की परेशानी हो सकती है।

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किन कारणों से हो सकता है क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस?

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कैसे करवाएं जांच और इलाज

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। सटीक जानकारी के लिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। 

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस की जांच कैसे की जाती है ?

क्लेमेडिया से जुड़े किसी भी लक्षण को देखकर डॉक्टर आपके संक्रमण की जांच कर सकते हैं। अगर अनप्रोटेक्टेड सेक्स कर चुके हैं तो समय – समय पर जांच जरूर करवा लें। साथ ही अगर आपके पार्टनर में कोई भी लक्षण है तो उनसे भी जांच करवाने के लिए अवश्य कहें।

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस का इलाज कैसे किया सकता है ?

एंटीबायोटिक की मदद से इस बीमारी का इलाज किया जाता है। आमतौर से डॉक्टर आपको पांच से 10 दिनों की दवाएं देंगे कई बार दो हफ्तों का समय भी लग सकता है। कोशिश करें कि जब तक दवा चल रही हो तब तक सेक्स न करें। साथ ही दवाइयों का पूरा कोर्स अवश्य पूरा करें। अगर आप बीच में कोई भी दवा छोड़ते हैं तो ये इन्फेक्शन दोबारा भी हो सकता है।

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस के कारण क्या-क्या परेशानी हो सकती है?

इसकी वजह से निन्मलिखित  परेशानी हो सकती है। जैसे-

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस से पीड़ित लोगों में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STIs) का खतरा ज्यादा होता है।

पेल्विस इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID)

पीआईडी यूट्रस में होने वाला एक तरह का इंफेक्शन है। पीआईडी होने पर पेल्विस में दर्द और बुखार भी हो जाता है। कभी-कभी परेशानी बढ़ने पर हॉस्पिटल में एडमिट भी होना पड़ सकता है। PID के कारण फॉलोपियन टियूब, ओवरी और यूट्रस समेत सर्विक्स पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

टेस्टिकल्स के पास इंफेक्शन होना

क्लेमेडिया इंफेक्शन के कारण टेस्टिकल्स के पास इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कई बार इंफेक्शन के कारण बुखार, स्क्रोटल में दर्द और सूजन की समस्या होती है।

प्रोस्टेट ग्लैंड इंफेक्शन

क्लेमेडिया इंफेक्शन प्रोस्टेट में भी फैल सकता है। इसकी वजह से पुरुषों में बुखार होना, अत्यधिक ठंड लगना, यूरिन के दौरान दर्द महसूस होना और बैक के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है।

नवजात शिशु में इंफेक्शन

अगर गर्भवती महिला क्लेमेडिया इंफेक्शन से पीड़ित हैं तो यह डिलिवरी के दौरान जन्म लेने वाले शिशु में भी हो सकता है। ऐसे बच्चे को निमोनिया या आई इंफ्केशन होने की संभावना बनी रहती है।

इनफर्टिलिटी की समस्या

जिन लोगों में क्लेमेडिया इंफेक्शन नजर नहीं भी आते हैं तो इनमें इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है। महिलाओं में इस कारण बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपाय

क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस के खतरे से बचाव के लिए आप क्या कर सकते हैं ?

  • सेफ सेक्स करें और हमेशा कॉन्डम (Condom) का इस्तेमाल करें। इससे आप सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का खतरा घटा सकते हैं।
  • साथ ही अगर आप इलाज करवा रहें है तो कुछ दिन किसी भी सेक्शुअल एक्टिविटी से बचें।
  • कोशिश करें कि आप एक ही सेक्शुअल पार्टनर रखें इससे भी इस तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • गर्भावस्था रोकने के लिए खाई जाने वाली कंट्रासेप्टिव पिल्स आपको STD से सुरक्षा नहीं दे सकती हैं। इसलिए प्रोटेक्शन का इस्तमाल जरूर करें।
  • अगर आप मल्टीप्ल पार्टनर्स के साथ सेक्स करते हैं तो समय – समय पर अपनी जांच जरूर करवाएं।

अगर आप क्लेमेडिया ट्रैकोमेटिस से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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