home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट क्या हैं? जानिए कैसे होता है बांझपन का इलाज

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट क्या हैं? जानिए कैसे होता है बांझपन का इलाज

इनफर्टिलिटी को सामान्य भाषा में समझा जाए तो इसका अर्थ है बांझपन। जब महिला किसी भी कारण (अपने पार्टनर या खुद के कारण) गर्भधारण न कर पाए तो ऐसी स्थिति में हेल्थ एक्सपर्ट की सहायता ली जाती है। जिनकी मदद से इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट करवाना आसान हो जाता है। रिसर्च के अनुसार इनफर्टिलिटी के 2 प्रकार हैं। इस आर्टिकल में आप जानेंगे इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट और इनफर्टिलिटी के प्रकार।

इनफर्टिलिटी के प्रकार

1. प्राइमरी इनफर्टिलिटी-

वे कपल्स जो एक साल से बिना प्रोटेक्शन के संबंध बना रहे हैं और महिला गर्भवती नहीं हो पा रही है तो यह स्थिति प्राइमरी इनफर्टिलिटी के अंतर्गत आती है। इस दौरान महिला गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन भी नहीं करती हैं।

2. सेकेंड्री इनफर्टिलिटी-

वह महिला जो गर्भधारण का प्रयास करने के बाद सिर्फ एक बार प्रेग्नेंट हुई हो लेकिन, उसे फिर से गर्भधारण करने में परेशानी हो रही हो तो यह स्थिति सेकेंड्री इनफर्टिलिटी के अंतर्गत आती है।

फर्टिलिटी के प्रकार के बाद जानते हैं किन कारणों से होती है इनफर्टिलिटी की समस्या?

भारत में इनफर्टिलिटी (बांझपन) बेहद ही गंभीर समस्या बनती जा रही है। इंडियन सोसाइटी ऑफ अस्सेस्टेड रिप्रोडक्शन [Indian Society for Assisted Reproduction] के अनुसार भारत में 14 प्रतिशत तक लोग इनफर्टिलिटी से पीड़ित हैं। वहीं 27.5 मिलियन कपल्स ऐसे हैं जिनमें महिलाएं कंसीव नहीं कर पा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल में संतुलित आहार नहीं लेना और स्ट्रेस में रहना हो सकता है। बदलती लाइफस्टाइल के साथ-साथ इसके और भी कारण हो सकते हैं।

और पढ़ें: गर्भावस्था के दौरान बच्चे के वजन को बढ़ाने में कौन-से खाद्य पदार्थ हैं फायदेमंद?

फीमेल इनफर्टिलिटी

फीमेल इनफर्टिलिटी निम्नलिखित कारणों से होती है

  • फर्टिलाइज्ड एग या भ्रूण गर्भ में न ठहर पाना।
  • फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस की लाइनिंग से अटैच न हो पाना।
  • एग का ओवरी से गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाना।
  • ओवरी से एग का निर्माण न हो पाना।

और पढ़ें: योगासन जो महिलाओं की फर्टिलिटी को बढ़ा सकते हैं

इन कारणों के अलावा अन्य कारण भी हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं।

मेल इनफर्टिलिटी

मेल इनफर्टिलिटी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं

  • स्पर्म की संख्या में कमी
  • ब्लॉकेज (स्पर्म रिलीज होने में रुकावट)
  • स्पर्म से जुड़ी समस्या

इन कारणों के अलावा और भी कारण हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं।

  • जन्म से जुड़ी परेशानी
  • कैंसर ट्रीटमेंट
  • ज्यादा वक्त हीट के संपर्क में रहना
  • एल्कोहॉल, मैरवान या कोकीन का सेवन करना
  • असंतुलित हॉर्मोन
  • इम्पोटेंस
  • इंफेक्शन
  • सिमेटिडाइन (Cimetidine) , स्पिरोनोलैक्टोन (Spironolactone) और नाइट्रोफ्युरेन्टॉइन (Nitrofurantoin) जैसी दवाओं का सेवन करना
  • मोटापा
  • बढ़ती उम्र
  • रेट्रोग्रेड इजाकुलेशन
  • सिगरेट पीना

हेल्दी कपल्स जिनकी उम्र 30 साल से कम है और अगर वो नियमित रूप से सेक्स करते हैं तो 25 से 30 प्रतिशत तक गर्भवती होने की संभावना होती है। 20 से 30 साल की महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या न के बराबर होती है लेकिन, 35 साल से ज्यादा उम्र होने पर गर्भधारण करने में समस्या हो सकती है।

फर्टिलिटी के प्रकार और यह महिलाओं और पुरुषों में क्यों होता यह समझने के बाद अब हम जानेंगे इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स के बारे में। कुछ बातों का ध्यान रखकर इनफर्टिलिटी से बचा जा सकता है। जैसे एल्कोहॉल और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन न करें। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट क्या हैं?

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट (बांझपन का इलाज) निम्नलिखित तरह से किया जाता है।

1. इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए एजुकेशन है जरूरी

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में एजुकेशन शब्द आपको फिट न लगे लेकिन, इनफर्टिलिटी से जुड़ी सही जानकरी अवश्य लेनी चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट इससे जुड़ी जानकारी लोगों को देते हैं जिससे ये पता लग सके कि इसके क्या-क्या विकल्प हैं जिससे बेहतर तरीके से इलाज किया जा सके और उसका रिजल्ट भी सही आए। इसलिए इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट करवाने के लिए सबसे जरूरी बीमारी का सही ज्ञान होना जरूरी है।

2. बांझपन का इलाज में ये दवाएं करती हैं मदद

ऐसी दवाएं जिससे ओवरी में एग का निर्माण हो सके। एग फॉर्मेशन के लिए ओरल पिल्स या इंजेक्शन दिए जाते हैं। ऑव्युलेशन के लिए डॉक्टर सबसे ज्यादा क्लोमीफीन साइट्रेट दवा रिकमेंड करते हैं। इसे पीरियड्स (मासिक धर्म) के शुरुआती 3 से 7 दिनों तक लिया जाता है। इससे एग निर्माण ज्यादा हो सकता है, जो गर्भधारण में सहायक हो सकता है। वहीं एग फॉर्मेशन के लिए इंजेक्शन भी दिए जाते हैं। 5 से 7 दिनों तक इंजेक्शन से गर्भ में एग (अंडों) का निर्माण शुरू हो सकता है। यह एक आसान इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट है।

3. आसान बांझपन का इलाज है इनसेमिनेशन (IUI)

इनसेमिनेशन जिसे इंट्रायूट्राइन इनसेमिनेशन (IUI) भी कहते हैं। यह गर्भधारण की एक कृत्रिम तकनीक है। इसे इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के नाम से भी जाना जाता है। आईयूआई (IUI) में पुरुष के स्पर्म को महिला के यूट्रस में डाला जाता है, जिससे फर्टिलाइजेशन होता है। आईयूआई करने का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा संख्या में स्पर्म को फैलोपियन ट्यूब में पहुंचाना होता है, जिससे फर्टिलाइजेशन की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, आईयूआई का प्रयोग इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट के रूप में उन कपल्स में किया जाता है, जिन्हें अनएक्सप्लेनड इनफर्टिलिटी की समस्या होती है।

और पढ़ें: क्या पुदीना स्पर्म काउंट को प्रभावित करता है? जानें मिथ्स और फैक्ट्स

4. सबसे प्रचलिट इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF)

आईवीएफ (IVF) जिसे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) कहते हैं ,ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से वे महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं, जिन्हें गर्भधारण में परेशानी आती है। दरअसल इस प्रॉसेस की मदद से महिला में दवाओं की मदद से फर्टिलिटी बढ़ाई जाती है जिसके बाद ओवम (अंडाणु/अंडों) को सर्जरी की मदद से निकाला जाता है और इसे लैब भेजा जाता है। लैब में पुरुष के स्पर्म (शुक्राणु) और महिला के ओवम को एक साथ मिलाकर फर्टिलाइज किया जाता है। 3-4 दिनों तक लैब में रखने के बाद फर्टिलाइज्ड भ्रूण (Embryo) को जांच के बाद महिला के गर्भ में फिर से इम्प्लांट किया जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार IVF के इस प्रॉसेस में 2 से 3 सप्ताह का वक्त लगता है। यूटरस (बच्चेदानी) में इम्ब्रियो इम्प्लांट होने के 2 सप्ताह बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट से महिला के गर्भवती होने की जांच की जाती है। आईवीएफ इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में सबसे ज्यादा प्रचलित है।

5. इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में लिया जाता है थर्ड पार्टी रिप्रोडक्शन (सरोगेसी) का सहारा

यह एक सामान्य प्रक्रिया है जहां एक कपल शुक्राणु (Sperm) या अंडे (Egg) या फिर दोनों देते हैं और एक अन्य महिला सरोगेट मां की रूप में कार्य करती है। इस प्रक्रिया में भी फर्टिलाइज भ्रूण को महिला के गर्भ में इम्प्लांट किया जाता है। महिला गर्भ में बच्चा पालती है और जन्म के बाद महिला उस बच्चे को कपल को सौंप देती है। इसे भी इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में विशेष रूप से शामिल किया जाता है।

6. बांझपन का इलाज में होती है सर्जरी भी

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में सर्जरी भी की जाती है। वे महिलाएं जिनकी फैलोपियन ट्यूब बंद हो तो सर्जरी की मदद से उसे ठीक किया जा सकता है। तीन अलग-अलग सर्जरी जैसे लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy), हिस्ट्रोस्कोपी (Hysteroscopy) और मायोमेक्टमी (myomectomy) की जाती है।

लेप्रोस्कोपी- लेप्रोस्कोपी पेट या पेल्विस में छोटी से सर्जरी की मदद से की जाती है। दरअसल लेप्रोस्कोपी इंस्ट्रूमेंट की मदद से सर्जरी की जाती है और इसमें एक कैमरा भी लगा होता है।

हिस्ट्रोस्कोपी- इस तकनीक की मदद से यूटेराइन केविटी से होते हुए सर्विक्स तक स्क्रीनिंग की जाती है। इस दौरान एब्नॉर्मलटीज को ठीक किया जाता है।

मायोमेक्टमी- गर्भाशय में फाइब्रॉएड होने पर उसे मायोमेक्टमी की मदद से निकाल दिया जाता है।

इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट विशेषकर ऊपर बताए गए 6 तरीकों से किए जाते हैं लेकिन, अगर आप इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट (इनफर्टिलिटी इलाज) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

सायकल की लेंथ

(दिन)

28

ऑब्जेक्टिव्स

(दिन)

7

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Infertility/https://www.womenshealth.gov/a-z-topics/infertilityAccessed on 15/11/2019

Diagnosis and Treatment of Unexplained Infertility/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2505167/Accessed on 15/11/2019

Understanding Infertility — Treatment/https://medlineplus.gov/infertility.htmlAccessed on 15/11/2019

Treating Infertility/https://www.acog.org/-/media/For-Patients/faq137.pdfAccessed on 15/11/2019

Trends of Infertility and Childlessness in India: Findings from NFHS Data/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4188020/Accessed on 15/11/2019

Infertility/https://www.hhs.gov/opa/reproductive-health/fact-sheets/male-infertility/index.html Accessed on 15/11/2019

 

 

लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/04/2021 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
x