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Impingement syndrome: इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम क्या है?

परिचय|लक्षण|कारण|निदान|इलाज|रिकवरी टाइम
Impingement syndrome: इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम क्या है?

परिचय

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम (Impingement syndrom) किसे कहते हैं ?

यह एक प्रकार से कंधे के दर्द से सम्बन्धित एक सामान्य कारण है। इसे इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम या तैराकी कंधे के नाम से भी भी जाना जाता है, क्योंकि यह आमतौर पर अधिक्तर तैराकों को ही होता है लेकिन अब यह अन्य एथलीटों में भी आम हो गया है जो अपने कंधों का बहुत अधिक उपयोग करते हैं, जैसे कि बेसबॉल या सॉफ्टबॉल के खिलाड़ी ।

आपका रोटेटर कफ मांसपेशियों और (Tendons) का एक समूह है जो आपके ऊपरी बांह की हड्डी को आपके कंधे से जोड़ता है। यह आपकी बांह को ऊपर उठाने और घुमाने में आपकी मदद करते हैं। रोटेटर कफ कंधे के ऊपरी भाग के नीचे स्थित रहता है, जिसे एक्रोमियन भी कहा जाता है। यदि आपके कंधे में ज्यादे झुकाव है, तो आपका रोटेटर कफ और एक्रोमियन आपस में रगड़ खाते हैं । जब आप अपनी बांह को उठाते हैं, तो रोटेटर कफ और एक्रोमियन नार्स के बीच के स्थान (बर्सा), पर जो दबाव बढ़ाता है, उस बढ़े हुए दबाव के कारण रोटेटर कफ में रगड़ होती है जिसके कारण आपके कंधे में दर्द बढ़ जाता है, और आप ज्यादे परेशान रह सकते हैं |

लक्षण

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम का क्या लक्षण हैं? (Symptoms of Impingement syndrome)

जब आप अपनी बांह को ऊपर या पीछे की ओर उठाते हैं, तो कंधे के अकड़ने का मुख्य लक्षण आपके कंधे में अचानक दर्द का होना है । इसके साथ साथ अन्य लक्षण भी है जो निम्न हैं:

आपकी बांह में मामूली लेकिन लगातार दर्द का रहना.
दर्द जो आपके कंधे से होकर आपके हाथ की तरफ तक जाता हो.
दर्द के कारण रात का खराब हो जाना या रात में दर्द का बढ़ जाना.
कंधे या हाथ की कमजोरी का होना.

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कारण

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम होने का क्या कारण है? (Cause of Impingement syndrome)

कंधे के अधिक प्रयोग के कारण आपके कंधे में में अकड़न के साथ ही दर्द की भी स्थिति उत्पन्न हो सकती है,यह ही नहीं अगर आप कंधे का उपयोग बार-बार करते हैं तो आपके कंधे में सूजन, कंधे की ऊपरी हड्डी में “रगड़” की समस्या भी हो सकती है, इसके कुछ और भी कारण है जो निम्न हैं-

किस भी व्यक्ति की बढती उम्र भी इस बीमारी का कारण बन सकती है, इसकी शिकायत अक्सर उन्ही लोगो को होता है जिनकी उम्र 40 साल से ऊपर हो चुकी हो|

इस सिंड्रोम से अधिक्तर वे खिलाडि पीड़ित रहते हैं जो, कुछ ऐसा खील खेलते हैं जिसमे कन्धों का उपयोग सबसे ज्यादे होता है, जैसे कि तैराकी, क्रिकेट, टेनिस, बेसबाल इत्यादि |

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम की समस्या उन्हें भी हो सकती है जिनके पेशे या काम में कंधे का ज्यादा प्रयोग किया जाता है, जैसे कि- पेंटिंग का काम करने वाले,लकड़ी का काम करने वाले लोग|

इसके साथ ही साथ अगर आपके घर में कोई इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम से पीड़ित है तो यह आपको भी हो सकता है |

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निदान

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Impingement syndrome)

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम के निदान की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपका डॉक्टर आपको लगी पिछली चोटों के साथ-साथ आपके व्यायाम करने की आदतों के बारे में कुछ प्रश्न पूछकर शुरू कर सकता है। इसके बाद वह आपको किसी भी असामान्य महसूस किये गये लक्षणों की जाँच करते समय आपको कई तरह से अपने कंधे का उपयोग करने लिए कह सकता है, जैसे कि हाथ को रोटेट करना या आगे पीछे घुमाना। इस प्रक्रिया से (Impingement syndrome) का निदान ठीक तरह से किया जा सकता है |

कुछ मामलों में आपको गठिया की पीड़ा से बाहर निकलने या हड्डी में हो रहे परिवर्तन की जाँच करने के लिए एक्स-रे की भी आवश्यकता हो सकती है |

यदि आपका डॉक्टर सोचता है कि आपको रोटेटर कफ में अधिक गंभीर की चोट लग है या वे अभी भी आपके रोग का निदान नहीं कर पा रहें हैं, तो वे आपके कंधे को बेहतर रूप से देखने और उसका परिक्षण करने के लिए एमआरआई स्कैन (MRI Scan) का भी उपयोग कर सकते हैं।

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इलाज

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है? (Treatment for Impingement syndrome)

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम के लिए कई प्रकार की उपचार विधि उपलब्ध हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि आपका दर्द कितना गंभीर है। जैसे-

घरेलू देखभाल

जब कंधे की अकड़न का इलाज किया जाता है तो आराम करना बहुत जरूरी है। कठिन व्यायाम या किसी भी ऐसे कार्य को करने से बचें जो दर्द को बदतर बना सकता है। यदि आप एथलीट हैं तो यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि आप कुछ दिन के लिए अपने आपको खेल से दूर कर लें |

अपने कंधे को आगे या पीछे की ओर घुमाने से बचे नही तो आप दर्द की स्थिति से गुजर सकते हैं, नही तो आपके कंधे में अधिक कमजोरी और कठोरता भी महसूस हो सकती है।

दर्द को कम करने और आपके कंधे में होने वाली किसी भी प्रकार की सूजन को कम करने के लिए एक दिन में 10 से 15 मिनट के लिए अपने कंधे पर आइस पैक (बर्फ से सिकाई) रखने की कोशिश करें, जिससे आपको आराम मिल सकता है ।

फिजिकल थेरेपी:

Impingement syndrom (कंधे का दर्द ) के इलाज में भौतिक चिकित्सा एक उपयोगी उपचार विधि साबित होती है, फिजिकल थेरेपी द्वारा आप इलाज कराकर आप अपने कंधे का उपयोग सुचारू रूप से पहले की तरह फिर से कर सकते हैं| इस लिए आपका डॉक्टर आपको एक फिजियो थेरेपिस्ट के पास भेज सकता है जो कंधे की चोटों के इलाज को करने में माहिर हो ।

फिजिकल थेरपी के समय चिकित्सक आपके कंधे, हाथ और छाती की मांसपेशियों का बारिकी से आकलन करता है, जिससे आपके रोटेटर कफ के कार्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सके । यदि आप एक एथलीट हैं या किसी ऐसे क्षेत्र में काम करते हैं जिसमें आपके कंधे का लगातार उपयोग करने की आवश्यकता पड़ती है, तो आपका फिजियो आपको दुबारा (Impingement syndrome) की संभावना न हो उसके लिए उचित तकनीक या कोई नया एक्सरसाइज आपको सिखा सकता है।

आपका फिजियो आपको कुछ ऐसे व्यायाम भी करने को दे सकता है जिसे आप घर पर कर सकते हैं, जिससे सहायता से आपको तेजी से ठीक होने में मदद मिल सकती है। बस आपको यह ध्यान रखना है कि आप इस ट्रिक या व्ययाम का अति नहीं करें ।

दवाएं-

नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, जैसे इबुप्रोफेन (एडविल, मोट्रिन) का सेवन करने से सूजन और कंधे के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि इन दवाएं, बर्फ से सिकाई और आराम करने से आपके दर्द को कम करने में मदद नही मिलती है तो आपका डॉक्टर सूजन और दर्द को कम करने के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन भी लिख सकता है।

सर्जरी

यदि अन्य उपचार काम नहीं करते हैं, तो आपको अपने रोटेटर कफ के चारों ओर की जगह को चौड़ा करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। यह आपकी हड्डी पर पकड़ या रगड़ के बिना इसे स्वतंत्र रूप से कार्य करने में मदद कर सकता है। यह आमतौर पर न्यूनतम इनवेसिव आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी के साथ किया जाता है, हालांकि अधिक गंभीर मामलों में पारंपरिक ओपन सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

किसी भी प्रकार की कंधे की सर्जरी के बाद, आपको आर्म स्लिंग पहनने की आवश्यकता पड़ सकती है, यह आपका आर्थोपेडिक सर्जन ही निर्धारित करेगा कि पहने हुए स्लिंग को कब हटाना हैं।

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रिकवरी टाइम

इम्पिन्गेमेंट सिंड्रोम (Impingement syndrome) की समस्या से रिकवर होने में कितना समय लगता है?

कंधे की चोट को आमतौर पर पूरी तरह से ठीक होने में लगभग तीन से छह महीने लगते हैं। लेकिन कभी कभी अधिक गंभीर मामलों को इसे ठीक होने में एक साल तक का समय भी लग सकता है। हालांकि, आप आमतौर पर दो से चार सप्ताह के भीतर अपनी सामान्य गतिविधियों को पुनः करना शुरू कर सकते हैं। बस आपको यह सुनिश्चित करना है कि आप नियमित रूप से अपने चिकित्सक से जांच करवाते हैं कि नहीं, नहीं तो आपको इससे उबरने में और ज्यादे समय लग सकता है या इसकी वजह से कोई अन्य गम्भीर समस्या भी हो सकता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Siddharth srivastav द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/06/2021 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड