सोरियाटिक गठिया की परेशानी होने पर अपनाएं ये उपाय

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Update Date जनवरी 15, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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सोरियाटिक गठिया क्या है, जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में। सोरियाटिक गठिया, सूजन वाले गठिया का ही एक रूप है। सोरियाटिक गठिया में त्वचा पर  लाल रंग के पैच ऊपरी सतह पर उभर आते है। 1 से 3 प्रतिशत जनसंख्या में सोरायसिस की समस्या होती है। जबकि सोरियाटिक गठिया 5 से 40 तक लोगों में हो सकता है। यह पुरुषों में पाया जाने वाला सबसे आम गठिया है, जो 30 से 50 की उम्र के पुरुषों में दिखाई देता है। सोरियाटिक गठिया एक ऑटोइम्यून स्थिति होती है, जिसमें बॉडी अपने स्वयं के ऊतकों पर हमला करने लगती है, अब तक इस बीमारी का कोई स्पष्ट कारण मालूम नही है। हालांकि कई मामलों में जेनेटिक या पर्यावरणीय कारक मुख्य भूमिका निभाते है। सामान्यतौर सोरियाटिक गठिया तनाव, धूम्रपान, शराब के अत्यधिक सेवन और दूसरे संक्रमणों की वजह से हो सकता है। आमतौर पर त्वचा पर होने वाले सोरियाटिक के लक्षण ज्वाइंट्स पर होने वाले सोरियाटिक से पहले दिखाई देते है।

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सोरियाटिक गठिया क्या है जानिए इसके लक्षण 

सोरियाटिक गठिया क्या है जानने के बाद जानिए लक्षण। सोरियाटिक गठिया के लक्षण सभी लोगों में अलग-अलग हो सकते है। लेकिन फिर भी ये कुछ सामान्य लक्षण सभी लोगों में दिखाई देते है-

1.जोड़ों से संबंधित लक्षण-

सोरियाटिक गठिया जोड़ों में सूजन का कारण बनता है, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ों में दर्द, सूजन, कठोरता और विकृति के लक्षण दिखाई देते है। आमतौर पर जोड़ों में उंगलियां, कलाईयां, पैर की उंगलियां, टखने और घुटने प्रभावित होते है। सोरियाटिक गठिया में शरीर के सभी जोड़ एक ही समय में प्रभावित हो सकते है। सोरियाटिक गठिया में शरीर के दोनों तरफ के जोड़ एक साथ प्रभावित हो सकते है। सोरियाटिक गठिया के कई गंभीर मामलों में आमतौर पर हाथों और पैरों में विकृति देखी जा सकती है।

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2.टेंडन और लिगामेंट में सूजन-

सोरियाटिक गठिया होने पर टेंडन और लिगामेंट में सूजन होने लगती है जिसके परिणामस्वरूप टखने या एड़ी में दर्द के लक्षण दिखाई दे सकते है। कभी-कभी हाथों के जोड़ों में सूजन के साथ सॉसेज के आकार (बेलनाकार या कैप्सूल के आकार) की विकृति भी दिखाई दे सकती है।

3.गर्दन और पीठ में दर्द-

सोरियाटिक गठिया रीढ़ के जोड़ों को प्रभावित कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत हो सकती है।

4.त्वचा और नाखून में लक्षण-

सोरियाटिक गठिया के कारण त्वचा सूखी, लाल, पपड़ीदार और त्वचा में खुजली होती है जिससे लाल चकत्ते भी दिखाई देते है। त्वचा के ये लक्षण आमतौर पर खोपड़ी, घुटनों और कोहनियों पर देखे जा सकते है। इसके अलावा सोरियाटिक गठिया नाखूनों को भी प्रभावित कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप नाखूनों का रंग प्रभावित हो सकता है साथ ही नाखू खड़े या उखड़े भी दिखाई दे सकते है।

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सोरियाटिक गठिया जांच का तरीका 

सोरियाटिक गठिया क्या है जानने के बाद जानिए सोरियाटिक गठिया की जांच कैसे की जाती है। सोरियाटिक गठिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर चिकित्सकीय इतिहास देखने के साथ ही जोड़ों, त्वचा, और नाखूनों की जांच कर सकता है। अगर इन शुरूआती लक्षणों से बीमारी का पता नही चल सके तो डॉक्टर रक्त परीक्षण और एक्स-रे की सलाह भी दे सकते है।

सोरियाटिक गठिया मेडिकल ट्रीटमेंट 

सोरियाटिक गठिया क्या है जानने के बाद जानिए सोरियाटिक गठिया का मेडिकल ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है। सोरियाटिक गठिया के कारण होने वाली जोड़ों में सूजन को नियंत्रित करने और आगे की क्षति को रोकने के लिए निर्धारित दवाएं दी जा सकती है। त्वचा के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए सामयिक अनुप्रयोग निर्धारित किए जा सकते है। कभी-कभी जोड़ो में ज्यादा तकलीफ होने पर जोड़ों में इंजेक्शन भी दिए जा सकते है।

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सोरियाटिक गठिया सर्जिकल ट्रीटमेंट 

सोरियाटिक गठिया क्या है जानने के बाद जानिए सोरियाटिक गठिया का सर्जिकल ट्रीटमेंट। सोरियाटिक गठिया में जोड़ों की क्षति रोकने के लिए सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा कई बार जोड़ों को प्रत्यारोपित भी किया जा सकता है।

जोड़ों को स्वस्थ्य बनाने के उपाय 

सोरियाटिक गठिया क्या है जानने के बाद आपको सोरियाटिक गठिया में होने वाली जोड़ों की परेशानी से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करना जरूरी है। जानिए सोरियाटिक गठिया में जोड़ों को स्वस्थ्य करने के उपाय-

1.नियमित व्यायाम करना-

रोजाना 30 मिनट या हफ्ते में 3-4 बार नियमित रूप से व्यायाम करने से हड्डी और जोड़ स्वस्थ्य रहते है, इसके अलावा नियमित व्यायाम से जोड़ों को लचीलापन बनाने में भी मदद मिलती है। हालांकि व्यायाम करते समय आपको ऐसी कसरत करने से बचना चाहिए जिससे जोड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ता हो। अगर आप जोड़ों की कोई एक्सरसाइज करना चाहते है तो अपने डॉक्टर से उचित सलाह जरूर लें।

2.वेट मैनेजमेंट (वजन प्रबंधन) करना-

सोरियाटिक गठिया में अगर आपका वजन ज्यादा है, तो ओवरलोडिंग की वजह से जोड़ों की परेशानियां बढ़ सकती है। ऐसे में अगर सोरियाटिक गठिया के दौरान वजन को मेंटेन करके रखते है तो जोड़ों के दर्द और लक्षणों में पहले से काफी सुधार होगा। इसलिए सोरियाटिक गठिया में वेट मैनेजमेंट बेहद जरूरी है।

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3.धूम्रपान बंद करना-

सोरियाटिक गठिया में धूम्रपान एक जोखिम कारक होने के साथ ही ट्रिगर का काम भी करता है। ऐसे में अगर आप समय रहते सोरियाटिक गठिया में धूम्रपान बंद कर देंगे तो आपका ये फैसला आपकी बीमारी को नियंत्रित करने में काफी मदद कर सकता है।

4.शराब का सेवन सीमित मात्रा में करना-

सोरियाटिक गठिया में अतिरिक्त शराब के सेवन की मात्रा स्थिति को और ज्यादा खराब कर सकती है। इसके साथ ही शराब का सेवन एंटी-सोरियाटिक दवाओं के साथ प्रतिक्रिया भी कर सकती है। ऐसे में सोरियाटिक गठिया होने पर शराब की मात्रा को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है, हो सके तो आप शराब को धीरे-धीरे बंद ही कर दें तो सोरियाटिक गठिया में काफी फायदा हो सकता है।

5. तनाव से रहें दूर–

सोरियाटिक गठिया में तनाव एक ट्रिगर का काम करता है। ऐसे में इफेक्टिव स्ट्रेस मैनेजमेंट के द्वारा तनाव को कम करने की कोशिश करने पर बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद कर मिलती है।

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सोरियाटिक गठिया एक खतरनाक बीमारी तो है लेकिन अगर सही दवाओं के साथ जीवनशैली में जरूरी बदलाव किए जाए तो इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सोरियाटिक गठिया का सही समय पर निदान और उचित उपचार संयुक्त विनाशकारी स्थायी विकलांगता को रोकने में मदद कर सकता है।

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