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क्या ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करना सुरक्षित है?

क्या ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करना सुरक्षित है?

स्तनपान कराने के दौरान मां कई चीजों का परहेज करती हैं। क्योंकि वह जानती है कि वह जो खाती-पीती है, वह उसके दूध के जरिए बच्चे तक पहुंचता है। इसलिए, स्तनपान कराने वाली मां को पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। स्तनपान कराने वाली मां को किसी भी तरह के मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। जहां तक बात रही एल्कोहॉल की, तो मां को स्तनपान के दौरान ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन (Alcohol) नहीं करना चाहिए। हैलो स्वास्थ्य ने इस संबंध में एक्सपर्ट की राय जाननी चाही। वाराणसी स्थित ओपल हॉस्पिटल की स्त्री रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. पूनम राय ने कहा कि “एल्कोहॉल का सेवन किसी भी व्यक्ति के सेहत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में जब एक मां ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करेगी तो उसका सीधा असर बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। साथ ही ब्रेस्ट मिल्क की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता है।”

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ब्रेस्ट मिल्क में एल्कोहॉल का घुलना

अगर मां फल का जूस पीती है तो भी और एल्कोहॉल पीती है तो भी, दोनों जा कर ब्रेस्ट मिल्क में घुलते हैं। जैसा की आप जानती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने से स्वास्थ्य के लिए नुकसान है तो वहीं, उसका दूध में घुलना क्या बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सही रहेगा? एल्कोहॉल की मात्रा घुलने से ब्रेस्ट मिल्क टॉक्सीकेटेड हो जाता है। इसलिए स्तनपान के दौरान मां को ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने से बचना चाहिए।

ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने से बच्चे के सेहत पर पड़ने वाले प्रभाव

किसी भी तरह का मादक पदार्थ सेहत के लिए हानिकारक होता है। ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन न सिर्फ इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है, बल्कि दिमाग पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।

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बच्चे का इम्यून सिस्टम होता है प्रभावित

मां के दूध में पाए जाने वाले माइक्रोब्स बच्चे के शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) विकसित करते हैं। जब मां एल्कोहॉल का सेवन करती है तो बच्चे के इम्यून सिस्टम पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे बच्चे का शरीर अन्य संक्रमणों (Infections) से नहीं लड़ पाता है। जिससे उसके जल्दी बीमार होने के जोखिम बढ़ जाती है।

बच्चे के ब्रेन का विकास होता है प्रभावित

ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने से ब्रेस्ट मिल्क में एल्कोहॉल की ज्यादा मात्रा होने से बच्चे के दिमाग का विकास भी बाधित होता है। कभी-कभी तो बच्चे के दिमाग को स्थायी या दीर्घकालिक रुप से नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा बच्चे के लिवर पर भी प्रभाव डालता है।

बच्चे के स्लीपिंग पैटर्न पर पड़ता है असर

स्तनपान कराने के दौरान अगर मां द्वारा एल्कोहॉल का सेवन किया जाता है, तो बच्चे की आदतों में बदलाव आ सकता है। बच्चे का स्लीपिंग पैटर्न बिगड़ जाता है। जिससे बच्चा सही तरह से नींद नहीं ले पाता है।

ब्रेस्ट मिल्क उत्पादन (Breast Milk Production) में आती है कमी

एक रिसर्च के मुताबिक मां के द्वारा ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने से उसके ब्रेस्ट मिल्क फॉर्मेशन में कमी आती है। सामान्य महिला की तुलना में ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने वाली महिला के दुग्ध उत्पादन में 20 प्रतिशत की कमी आती है।

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एक्सपर्ट की राय

डॉ.पूनम राय का कहना है कि “ मां को ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन अगर कभी मां ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन कर लेती है तो उसे कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है। बच्चे को दूध पिलाने के बाद ही मां को शराब का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन करने के बाद कम से कम दो-तीन घंटे का इंतज़ार करना चाहिए।”

विशेषज्ञों का मानना है कि शराब के बढ़ते सेवन से स्वास्थ्य के अलावा आर्थिक व सामाजिक पहलू भी हैं। इसे पीने वाले लोगों के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। इसके अलावा ज्यादातर कमाई शराब पर खर्च कर देने की वजह से परिवार का पेट पालने और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाने में भी दिक्कतें आती है।

वहीं अर्थशास्त्रियों का कहना है कि शराब की बिक्री केंद्र व राज्य सरकारों के लिए कमाई का जरिया है। उनको इससे राजस्व के तौर पर मोटी कमाई होती है। यही वजह है कि देश में शराबबंदी वाले कुछ राज्यों को छोड़ दें तो तमाम राज्य सरकारें इसकी बिक्री पर अंकुश लगाने की बजाय इसे बढ़ावा देने में ही जुटी हैं।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि जहां शराबबंदी है वहां भी तस्करी के जरिए भारी मात्रा में शराब पहुंचती है। यह पुलिस और संबंधित विभाग के लिए अवैध कमाई का जरिया बनता जा रहा है। मौजूदा हालात में इस समस्या पर काबू पाना मुश्किल ही नजर आता है।

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महिलाओं में स्तनपान के दौरान शराब का सेवन से होने वाले नुकसान क्या हैं?

रिसर्च के अनुसार स्तनपान के दौरान शराब का सेवन जो महिलाएं करती हैं उनके बच्चों में हाई ब्लड शुगर लेवल की संभावना ज्यादा होती है। चूहे पर किए गए रिसर्च में ये बात भी सामने आई है कि ऐसे बच्चों को कम उम्र में ही डायबिटीज की समस्या शुरू हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड की प्रोफेसर सराह रॉबर्ट्सन अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहती हैं कि अपने शिशु के सेहत का ख्याल उसके गर्भ में आने से पहले किया जाए तो यह सबसे बेहतर विकल्प होगा बेबी को हेल्दी रखने के लिए। एल्कोहॉल के ज्यादा सेवन से वजन भी बढ़ सकता है।

रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि एल्कोहॉल के कम से कम सेवन से भी महिलाओं के फर्टिलिटी पर असर पड़ता है। अगर महिला दोबारा मां बनना चाहती है तो इससे उसके फर्टिलिटी पर भी असर पड़ता है। नवजात के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। एल्कोहॉल के सेवन से ऑव्युलेशन पर असर पड़ता है जिससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।

इस तरह से बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग में शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बच्चे की सेहत से बढ़कर कुछ नहीं होता है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Infant and toddler health https://www.mayoclinic.org/healthy-lifestyle/infant-and-toddler-health/expert-answers/breast-feeding-and-alcohol/faq-20057985 Accessed on 24/12/2019

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Alcohol and breastfeeding. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/24118767/. Accessed On 10 October, 2020.

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Shayali Rekha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/05/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड