home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

Pinched nerve : नस दबना (पिंच्ड नर्व) क्या है?

परिचय |लक्षण |कारण |जोखिम |उपचार |घरेलू उपचार
Pinched nerve : नस दबना (पिंच्ड नर्व) क्या है?

परिचय

नस दबना (पिंच्ड नर्व) क्या है?

नसें मस्तिष्क से लेकर रीढ़ की हड्डी तक फैली होती हैं जो पूरे शरीर में मैसेज भेजने का कार्य करती हैं। नसों के दब जाने से शरीर में दर्द शुरु हो जाता है। इन संकेतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। पिंच्ड नर्व या नस दबने की समस्या तब होती है जब ऊतकों के आसपास की नसों जैसे हड्डियों, कार्टिलेज, मांसपेशियां या टेंडन के ऊपर बहुत अधिक दबाव पड़ता है। यह दबाव तंत्रिका के कार्यों को बाधित कर देता है जिसके कारण दर्द, झुनझुनी, सुन्नता और कमजोरी महसूस होती है।

शरीर में कई जगहों पर नस दब सकती है। जैसे कि रीढ़ के निचले हिस्से में स्थित हार्निएटेड डिस्क नर्व रुट पर दबाव डाल सकती है जिसके कारण गंभीर दर्द हो सकता है और पैर का पिछला हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इसी तरह कलाई की नस दबने से दर्द एवं हाथ और उंगलियां सुन्न हो सकती हैं। डैमेज या पिंच्ड नर्व से हल्का या गंभीर नुकसान हो सकता है। साथ ही इससे स्थायी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। अगर समस्या बढ़ जाती है तो आपके लिए गंभीर स्थिति बन सकती है । इसलिए नसों की समस्या का समय रहते इलाज जरूरी है। इसके भी कुछ लक्षण होते हैं ,जिसे ध्यान देने पर आप इसकी शुरूआती स्थिति को समझ सकते हैं।

कितना सामान्य है पिंच्ड नर्व होना?

पिंच्ड नर्व एक आम समस्या है। ये महिला और पुरुष दोनों में सामान प्रभाव डालता है। पूरी दुनिया में लाखों लोग पिंच्ड नर्व से पीड़ित हैं। यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

और पढ़ें : क्या हेपेटाइटिस से होता है सिरोसिस या लिवर कैंसर?

लक्षण

नस दबने के क्या लक्षण है?

पिंच्ड नर्व शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित करता है। नस दबने से पीड़ित व्यक्ति में प्रायः सिर्फ दर्द होता है। जबकि कुछ लक्षण बिना दर्द के नजर आने लगते हैं। शुरुआत में ये लक्षण काफी हल्के होते हैं लेकिन धीरे-धीरे काफी गंभीर होने लगते हैं जिसके कारण ये लक्षण सामने आने लगते हैं :

कभी-कभी कुछ लोगों में इसमें से कोई भी लक्षण सामने नहीं आते हैं और अचानक से कुछ समय के लिए गर्दन, पीठ और कमर में नसों पर दबाव पड़ने के कारण तेज दर्द होता है। नस दबने की तीव्रता आमतौर पर व्यक्ति के फिजिकल पोजीशन पर निर्भर करती है।

पिंच्ड नर्व से पीड़ित व्यक्ति को सोते समय सबसे अधिक परेशानी होती है और मांसपेशियां में अकड़न आ जाती है।

इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी सामने आते हैं :

मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

ऊपर बताएं गए लक्षणों में किसी भी लक्षण के सामने आने के बाद आप डॉक्टर से मिलें। हर किसी के शरीर पर पिंच्ड नर्व अलग प्रभाव डाल सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति के लिए आप डॉक्टर से बात कर लें। यदि आपके हाथ और पैर की उंगलियों में लंबे समय तक दर्द, झुनझुनी या कमजोरी महसूस हो तो डॉक्टर के पास जाएं।

और पढ़ें : अचानक दूसरों से ज्यादा ठंड लगना अक्सर सामान्य नहीं होता, ये है हाइपोथर्मिया का लक्षण

कारण

नस दबने के कारण क्या है?

पिंच्ड नर्व की समस्या तब होती है जब ऊतकों से घिरे तंत्रिकाओं पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है। नसों पर दबाव रेपिटेटिव मोशन या अपने शरीर को लंबे समय तक एक ही पोजिशन में रखने, जैसे कि सोते समय कोहनी मोड़ने के कारण हो सकता है।

हमारे शरीर में नसें उन जगहों पर सबसे ज्यादा कमजोर होती हैं जहां वे संकरी जगहों से गुजरती हैं लेकिन कुछ सॉफ्ट टिश्यू उनकी सुरक्षा करते हैं। नसें अक्सर तब दब जाती हैं जब लिगामेंट, टेंडन और हड्डी जैसे ऊतकों के बीच स्थित तंत्रिका दब जाती है। जैसे की रीढ़ की हड्डी में स्थित तंत्रिका में सूजन या दबाव से गर्दन और पीठ एवं कमर में दर्द हो सकता है।

इसके अलावा गर्दन, कंधे, बांह और पैर में भी दर्द हो सकता है। सिर्फ यही नहीं नसों में चोट लगने, रुमेटाइड या रिस्ट अर्थराइटिस, एक ही काम करने से नसों में तनाव, स्पोर्ट्स एक्टिविटी और मोटापे के कारण भी पिंच्ड नर्व की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कार्पल टनल के छोटे होने, बोन स्पर्स, थायरॉयड डिजीज, डायबिटीज, हाथ, कलाई और कंधे का अधिक इस्तेमाल, प्रेग्नेंसी और लंबे समय तक बेड रेस्ट करने के कारण नसें दब सकती हैं।

और पढ़ें : हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट में क्या अंतर है ?

जोखिम

पिंच्ड नर्व के साथ मुझे क्या समस्याएं हो सकती हैं?

नस दबने से व्यक्ति को हल्की या गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यदि पिंच्ड नर्व थोड़े समय तक रहता है तो आमतौर पर तंत्रिका में कोई स्थायी डैमेज नहीं होता है। एक बार दबाव कम होने पर आराम मिल जाता है और नसें सामान्य रुप से कार्य करने लगती हैं। हालांकि यदि प्रेशर लगातार बना रहे तो गंभीर दर्द होने के साथ ही नसें स्थायी रुप से डैमेज हो सकती हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

उपचार

यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

पिंच्ड नर्व का निदान कैसे किया जाता है?

पिंच्ड नर्व का पता लगाने के लिए डॉक्टर शरीर की जांच करते हैं और मरीज का पारिवारिक इतिहास भी देखते हैं। इस बीमारी को जानने के लिए कुछ टेस्ट कराए जाते हैं :

  • एक्सरे- हड्डियों का एक्सरे करके असमान्यता, डिस्क डैमेज होने और हड्डियां संकरी होने जैसी स्थिति का पता लगाया जाता है।
  • सीटी स्कैन- इससे सर्वाइकल स्पाइन में बोन स्पर्स विकसित होने का पता लगाया जाता है।
  • एमआरआई- गर्दन की एमआरआई की जाती है और सॉफ्ट टिश्यूओं के डैमेज होने और नसों पर दबाव पड़ने की स्थिति का पता लगाया जाता है। इसके साथ ही रीढ़ की हड्डी और नर्व रुट के डैमेज होने की जांच भी की जाती है।
  • इलेक्ट्रोमायोग्राफी- ईएमजी के दौरान डॉक्टर त्वचा के जरिए विभिन्न मांसपेशियों में इलेक्ट्रोड डालते हैं और इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी से मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने की जांच करते हैं।

कुछ मरीजों में नस दबने का पता लगाने के लिए नसों में करेंट दिया जाता है और तंत्रिका के डैमेज होने या सॉफ्ट ऊतकों पर दबाव पड़ने की स्थिति का पता लगाया जाता है।

पिंच्ड नर्व का इलाज कैसे होता है?

पिंच्ड नर्व का कोई सटीक इलाज नहीं है। लेकिन, कुछ थेरिपी और दवाओं से व्यक्ति में पिंच्ड नर्व के असर को कम किया जाता है। नस दबने के लिए कई तरह की मेडिकेशन की जाती है :

  1. नॉन स्टीरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन से दर्द और अन्य लक्षणों को कम किया जाता है।
  2. सूजन और दर्द को दूर करने के लिए ओरल कॉर्टिको स्टीरॉइड्स दिया जाता है। साथ ही गंभीर दर्द को कम करने के लिए नार्कोटिक्स दिया जाता है।
  3. स्टीरॉइड इंजेक्शन सूजन को कम करने के साथ ही नसों को सामान्य अवस्था में लाने में मदद करता है।
  4. लगातार इलाज के बाद भी पिंच्ड नर्व की समस्या कई हफ्तों या महीनों तक ठीक नहीं होती है तो नसों पर दबाव को कम करने के लिए डॉक्टर सर्जरी करने की सलाह देते हैं। सर्जरी से बोन स्पर्स या रीढ़ की हड्डी में हर्निएटेड डिस्क को निकाल दिया जाता है।

इसके अलावा पिंच्ड नर्व को ठीक करने के लिए कुछ मरीजों को फिजिकल थेरेपी दी जाती है जिसमें उन्हें एक्सरसाइज और मांसपेशियों को स्ट्रेच करना सीखाया जाता है। इससे प्रभावित हिस्से की नसों पर दबाव कम होता है और नसें पहले की तरह सामान्य हो जाती हैं। इसके साथ ही स्पलिंट या सॉफ्ट कॉलर लिमिट मोशन से मांसपेशियों में अकड़न को कम किया जाता है। जीवनशैली और आदतों में बदलाव करके भी पिंच्ड नर्व से काफी हद तक बचा जा सकता है।

घरेलू उपचार

जीवनशैली में होने वाले बदलाव क्या हैं, जो मुझे पिंच्ड नर्व को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?

अगर आप पिंच्ड नर्व से पीड़ित हैं तो डॉक्टर आपको सही पोजिशन में बैठने, उठने और सोने के लिए कहेंगे। इसके साथ ही पैरों को क्रास करके बैठने या एक ही पोजिशन में लंबे समय तक काम करने के लिए मना करेंगे। मांसपेशियों को लचीला बनाने के लिए नियमित एक्सरसाइज करना काफी फायदेमंद है। सिर्फ इतना ही नहीं किसी भी तरह की अधिक रेपिटेटिव एक्टिविटी करने से बचना चाहिए और अपने वजन को नियंत्रित करना चाहिए।

कई बार शरीर के प्रभावित हिस्से को आराम देने से भी पिंच्ड नर्व की समस्या से राहत मिल सकती है। गर्दन, बांह, कमर या कंधे की नस दबने पर पर्याप्त आराम करना चाहिए और किसी भी तरह का भारी काम करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही हड्डियों की मजबूती के लिए आयरन और कैल्शियम से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। पिंच्ड नर्व से पीड़ित व्यक्ति को निम्न आहार लेना चाहिए:

नसें दबने पर हल्के लक्षण नजर आने पर मसाज या मसल्स के स्ट्रेच करना फायदेमंद होता है। इसके अलावा मांसपेशियों या नसों में सूजन होने पर सिंकाई करना चाहिए। अगर पैर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में झुनझुनी, सनसनाहट या अन्य दिक्कतें होने एवं स्थिति गंभीर होने पर घरेलू उपचार की बजाय बिना लापरवाही किए डॉक्टर के पास जाकर इलाज कराना चाहिए।

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Daphal के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Anoop Singh द्वारा लिखित
अपडेटेड 10/04/2020
x