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ऑटिज्म की बीमारी के कारण कम हो सकता है शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रॉल!

ऑटिज्म की बीमारी के कारण कम हो सकता है शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रॉल!
ऑटिज्म की बीमारी |क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम? (Autism spectrum)|क्यों एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) हमारे लिए है जरूरी?|एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) और ऑटिस्टिक बच्चों में संबंध |रिसर्च का नतीजा

ऑटिज्म की बीमारी

ऑटिज्म की बीमारी मेडिकल साइंस के लिए अब भी पहेली बनी हुई है। इस बीमारी के लिए जितनी जानकारी मिले उतनी कम है। इसे लेकर अब भी बहुत कुछ समझा जाना बाकी है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि हर रोगी में इसके लक्षण, कारण और इलाज अलग होते हैं। ऑटिज्म (Autism) को समझने और इसके इलाज का विकसित करने के लिए की शोध चलते रहते हैं।

ऑटिज्म की बीमारी (Autism) का दिमाग की संरचना पर भी असर पड़ता है। साथ ही किए गए शोधों में यह भी सामने आया है कि जन्म के समय सामान्य कम वजन और असामान्य दिमागी संरचना वाले बच्चों में ऑटिज्म की बीमारी का शिकार होने की आशंका बहुत अधिक होती है। इसके अलावा शोध के दौरान पाया गया कि ऑटिज्म की बीमारी (Autism) से जूझ रहे बच्चों में दिमाग के वे भाग असामान्य पाए गए, जो भावनाओं और विचारों को कंट्रोल करते हैं ।

ऑटिज्‍म की बीमारी के लक्षण (Symptoms of Autism)

ऑटिज्म की बीमारी के लक्षण बच्चों में बहुत ही जल्दी दिखने लगते हैं। एक से तीन साल तक के बच्चों में इसके लक्षणों को देखा जा सकता है। एक साल का शिशु अगर इशारे करने या खिलौने दिखाने के बाद भी मुस्कुराता या कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो ऐसे में यह ऑटिज्म (Autism) की बीमारी का संकेत हो सकता है और पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसके अलावा ऑटिज्म की बीमारी में जब बच्चा बोलने की कोशिश करता है, तो वह अजीबो-गरीब आवाजें निकालता है। ऑटिज्म की बीमारी के लक्षण बच्चों में अलग-अलग भी हो सकते हैं। ऑटिज्म के ऐसे ही कुछ आम लक्षण हैं।

  • आमतौर पर बच्चे के आस-पास पेरेंट्स या अन्य किसी के होने पर या उनके साथ बात करने पर वे प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन, ऑटिज्म की बीमारी से जूझ रहे बच्चे इस तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। वे किसी भी खिलौने या गतिविधी पर मुस्कुराते या रिस्पॉन्स नहीं देते हैं। साथ ही ऑटिज्म की बीमारी (Autism problem) का असर का दिमाग पर देखा जा सकता है।
  • कई बार मां-बाप को लगता है कि बच्चे को सुनने में परेशानी (Hearing issue) है और वे इसको लेकर परेशान हो जाते हैं और कान की समस्या के लिए बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाते हैं। लेकिन, बच्चे का आवाजें सुनने के बाद भी प्रतिक्रिया न देने का कारण ऑटिज्म की बीमारी भी हो सकती है। ऐसे में पेरेंट्स काफी समय तर समझ ही नहीं पाते कि ऐसा क्यों है।
  • ऑटिज्म की बीमारी में बच्चों के प्रतिक्रिया न देने के अलावा उन्हें बोलने या अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भी परेशानी होती है। इसके चलते बच्चे कई बार हीन भावना का भी शिकार हो जाते हैं। अक्सर यह भी देखा जाता है ऑटिज्म की बीमारी के शिकार बच्चे चिड़चिड़े भी हो जाते हैं।
  • ऑटिज्म की बीमारी से ज़ूझ रहे बच्चे अक्सर अपने अंगों को हिलाते रहते हैं या यह कहें कि उनके शरीर के अंगों में लगातार कंपन होता रहता है।
  • ऑटिज्म का शिकार बच्चे लोगों के साथ ज्यादा घुलते मिलते नहीं हैं। साथ ही वे अपने में ही खोए रहते हैं। इस कारण ऐसे बच्चे सोशल स्किल्स (Social skills) नहीं सीख पाते हैं, जो पेरेंट्स के लिए चिंता की बात हो सकती है।
  • ऑटिज्म की समस्या के दौरान बच्चों को कई बार एक काम को करने में जरूरत से कहीं ज्यादा समय भी लग सकता है। कई मामलों में तो ऐसे बच्चे मिनटों के काम के लिए घंटों तक का समय ले लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि पेरेंट्स उन पर नजर रखें और ऐसी स्थिति होने पर बच्चों को ब्रेक लेने के लिए कहें।
  • इसके अलावा ऑटिज्म का दिमाग पर असर होने के कारण कई बार यह बच्चों के मानसिक विकास (mental development) को भी अवरुद्ध कर सकता है।

क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम? (Autism spectrum)

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को बोलने और सामाजिक व्यवहार करने में भी परेशान होती है। इसकी वजह से बच्चे समाज में घुलने मिलने से डरने लगते हैं और हमेशा डरे हुए नजर आते हैं। ऑटिज्म के कई प्रकार (Types of autism) और लक्षण हैं और ये हर रोगी में भिन्न होते हैं। इसी वजह से इसके लिए ऑटिज्म स्पेक्ट्रम (Autism spectrum) शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। ऑटिज्म की बीमारी के सटीक कारणों की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है कि किस वजह से ऑटिज्म (Autism) होता है। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि ये बीमारी हमारे जीन्स और वातावरण की वजह से होती है।

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क्यों एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) हमारे लिए है जरूरी?

कोलेस्ट्रॉल एक जरूरी फैट है, जो हमारे शरीर के हर सेल में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। कोलेस्ट्रॉल दो तरीके के होते हैं एक एचडीएल (HDL cholesterol) जिसे अच्छा कोर्लेस्ट्रॉल कहते हैं। वहीं दूसरा होता है एलडीएल (LDL कोलेस्ट्रॉल) जिसे बुरा केलेस्ट्रॉल कहते हैं। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल पूरे शरीर में खून के माध्यम से प्रवाहित होकर बुरे कोलेस्ट्रॉल को हटाता है। इसके अलावा ये रक्त वाहिकाओं के अंदर एक कवच बनाकर उसे साफ भी रखता है। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की ज्यादा मात्रा दिल की बीमारियों से बचाती है।

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एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) और ऑटिस्टिक बच्चों में संबंध

यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा में डॉक्टर यास्मिन नेगर्स द्वारा की गई रिसर्च में सामने आया कि ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) यानी एचडीएल की मात्रा कम हो जाती है। इस रिसर्च में दो बच्चों के ग्रुप पर अध्ययन किया गया। जिसमें से एक में स्वस्थ बच्चे तो दूसरे में ऑटिज्म ग्रस्त बच्चे थे। पाया गया कि एक जैसा भोजन लेने के बावजूद ऑटिस्टिक बच्चों (Autistic children) में ओमेगा-3 से ओमेगा-6 फैटी एसिड का संतुलन कम था और साथ ही एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का भी स्तर कम पाया गया।

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ऑटिज्म का कारण (Cause of autism)

वैसे तो इस बीमारी के होने के कारणों का अबतक पता नहीं चल पाया है। शोधकर्ताओं का मानना है कुछ जीन्स में गड़बड़ी की वजह से ऑटिज्म की बीमारी (Autism) होती है। कुछ बच्चों में यह बीमारी अनुवांशिक तो कुछ में जन्म के बाद देखने को मिलती है। एनआईएनडीएस के अनुसार शोध से पता चला कि जुड़वा बच्चों में यदि एक ऑटिज्म की बीमारीसे ग्रसित है तो संभावना है कि दूसरे बच्चे में भी 36 से 95 फीसदी संभावनाएं होती है कि उसे भी यह बीमारी हो।

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के बोलने व व्यवहार में बदलाव आा है। प्राकृतिक कारणों की वजह से भी यह बीमारी हो सकती है।

क्या वैक्सीन के कारण होती है यह बीमारी? (Vaccine and Autism)

लोगों में गलत भ्रांति है कि वैक्सीनेशन के कारण ऑटिज्म की बीमारी होती है। इसके अलावा मिसल्स (Measles), मम्प्स (Mumps), रूबेला (Rubella) के कारण भी ऑटिज्म की बीमारी (Autism) होती है। सीडीसी के अनुसार वैक्सीन और ऑटिज्म में किसी प्रकार का कोई कनेक्शन नहीं है।

जानें इस बीमारी का क्या है ट्रीटमेंट? (Treatment of Autism)

वैसे तो इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज नहीं है। डॉक्टर अलग-अलग मरीजों को उनके कंडीशन को ध्यान में रखते हुए इलाज करते हैं। मौजूदा समय में कई प्रकार की थेरेपी है जिसके जरिए एक्सपर्ट ऑटिज्म की बीमारी का इलाज करते हैं। यदि ऑटिज्म का इलाज न किया गया तो मरीज को आगे चलकर इपीलेप्सी (Epilepsy), डिप्रेशन (Depression), ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (obsessive compulsive disorder), स्लीप डिस्टर्बेंस (sleep disturbance) जैसी बीमारी हो सकती है।

रिसर्च का नतीजा

इस रिसर्च से साफ हो गया कि ऑटिज्म प्रभावित बच्चों में कोलेस्ट्रॉल की इस गड़बड़ी से दिल की बीमारियों (Heart diseases) का खतरा कई गुना रहता है। वहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है कि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) को बढ़ाकर ऑटिज्म से राहत मिल सकती है। अभी भी ऑटिज्म और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) के बीच संबंध का कोई खास आधार नहीं मिला है।

हमेशा लें एक्सपर्ट से सलाह

यह बीमारी जटिल न्यूरोडेवलप्मेंटल कंडीशन (Neuro developmental condition) है, इस कारण मरीज सामाजिक जीवन को जीने में परेशानी होती है। यदि आपके परिवार में किसी बच्चे को ऑटिज्म की बीमारी है या फिर बच्चे में ऑटिज्म से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं तो जरूरी है कि एक्सपर्ट की मदद लेकर उसका इलाज करवाना चाहिए। यदि इस बीमारी का इलाज न कराया गया तो मरीज को अन्य प्रकार की बीमारी भी हो सकती है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि इलाज करवाया जाए।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह के चिकित्सा परामर्श और इलाज नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

ATN/AIR-P Medication Decision Aid/https://www.autismspeaks.org/tool-kit/atnair-p-medication-decision-aid / Accessed on 25 sep 2020

Autism Spectrum Disorder (ASD)/ https://www.cdc.gov/ncbddd/autism/research.html / Accessed on 25 sep 2020

Autism Spectrum Disorder Fact Sheet/https://www.ninds.nih.gov/Disorders/Patient-Caregiver-Education/Fact-Sheets/Autism-Spectrum-Disorder-Fact-Sheet / Accessed on 25 sep 2020

Treatments for Autism/https://www.autismspeaks.org/treatments-autism / Accessed on 25 sep 2020

Science Summary: CDC Studies on Thimerosal in Vaccines/https://www.cdc.gov/vaccinesafety/pdf/cdcstudiesonvaccinesandautism.pdf / Accessed on 25 sep 2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Piyush Singh Rajput द्वारा लिखित
अपडेटेड 09/07/2019
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