शिशु या बच्चों को मलेरिया होने पर कैसे संभालें

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 8, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

डब्ल्यूएचओ के अनुसार मलेरिया हर दो मिनट में बच्चे की जान ले रहा है। यह गंभीर बीमारी है, यदि इससे बचाव को लेकर कदम न उठाए गए तो यह बीमारी आसानी से किसी को हो सकती है, खासतौर से छोटे बच्चों को। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बीमारी फिमेल एनाफेलिस मॉस्किटो के काटने से होती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि यह मच्छर ज्यादा ऊंचाई में नहीं उड़ता वहीं, किसी व्यस्क के घुटनों के नीचे ही उड़ता है। ऐसे में संभावनाएं काफी बढ़ जाती है कि बच्चों की हाइट कम होने से या फिर वो बदन ढकने वाले कपड़े न पहनने के कारण उनको बीमारी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि बीमारी से बचाव किया जाए। हर किसी को कोशिश करनी चाहिए इसे बचाव की, वहीं बीमारी के लक्षणों की जानकारी हासिल कर जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। ऐसा करने से हम बीमारी से बच सकते हैं। वहीं यदि बीमारी को नजरअंदाज करें तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं यह बीमारी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है। क्योंकि न केवल उनमें जागरूकता की कमी होती है बल्कि वो सुरक्षा के लेकर कोई खास कदम नहीं उठाते हैं।

पांच साल से नीचे की उम्र के बच्चों को मलेरिया होने की ज्यादा संभावना

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लोगों के शिशु में मलेरिया के काफी केस देखने को मिलते हैं। अफ्रीका की बात करें तो वहां साल 2016 में पांच वर्ष तक आते-आते शिशु में मलेरिया के कारण करीब 2 लाख 85 हजार बच्चों की मौत हो गई। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बीमारी कितनी गंभीर है। वहीं भारत में कुछ इलाकों को तो मलेरिया संक्रमण का जोन घोषित कर दिया है।

वैसे इलाके जहां इस बीमारी के होने की ज्यादा संभावना रहती है उन इलाकों में शिशु में मलेरिया होने का बड़ा कारण बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना भी है। ऐसे में शिशु में मलेरिया होने के कारण उनकी मौत भी हो जाती है। वयस्कों की तुलना में शिशु में मलेरिया की बात करें तो उनमें एनेमिया (anaemia), हायपोग्लाइसीमिया (hypoglycemia ) और सेरब्रल मलेरिया (cerebral malaria) जैसे खास प्रकार के मलेरिया होने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं।

शिशु में मलेरिया न हो इसके बचाव व इलाज

  • लंबे समय तक चलने वाले इंसेक्टीसाइडल नेट्स (मच्छरदानी) का करें इस्तेमाल
  • वैसे इलाके जहां मलेरिया का सीजनल ट्रांसमिशन होने का ज्यादा खतरा होता है जैसे अफ्रीका, वैसी जगहों पर तीन साल तक के बच्चों के साथ 59 महीनों के बच्चों को सीजनल मलेरिया किमोप्रिवेंशन (एसएमसी) की जांच करवाना जरूरी होता है।
  • वैसे इलाके जहां मलेरिया के फैलने की हाई रिस्क है वहां पर बच्चों के लिए इंटरमिटेंट प्रिवेंटिव थेरेपी को अपनाना चाहिए।
  • शिशु में मलेरिया न हो या बीमारी से बचाने के लिए इससे लक्षणों को जानकर जल्द से जल्द इलाज करवाना चाहिए

शिशु में मलेरिया की ऐसे की जाती है जांच, यह है इलाज

व्यस्कों में चाहे शिशु में मलेरिया के लक्षण दिखे तो इलाज करने के पहले पैरासाइटीलॉजिकल कंफर्मेशन चेक किया जाता है, यानि मरीज के शरीर में पेरासाइट है या नहीं ब्लड टेस्ट कर इसकी जांच की जाती है। लेकिन सिर्फ डायग्नोस के लिए ट्रीटमेंट का इंतजार नहीं किया जाता है।

डॉ अभिषेक मुंडू
Dr Abshieak Mundu

भारत में बरसात के दिनों में ज्यादा खतरनाक

एम्पलॉई स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसी) घाटशिला के रेसीडेंट मेडिकल अफसर और जमशेदपुर के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाक्टर अभिषेक कुंडू बताते हैं कि सामान्य लोगों की तुलना में बच्चों में मलेरिया के होने की संभावनाएं काफी ज्यादा रहती है। क्योंकि बड़ों में महिलाएं जहां साड़ी या सलवार सूट पहनती है वहीं पुरुष लूंगी या फुल पेंट शर्ट आदि पहन कर रखते हैं। लेकिन बच्चों में लड़कियां जहां फ्रॉक तो लड़के हाफ पेंट में दिखते हैं। भारत में झारखंड सहित बरसात के दिनों में एकाएक मलेरिया के मामलों में इजाफा हो जाता है। बीमारी का इलाज न किया जाए तो यह और गंभीर हो सकता है, यहां तक की मरीज की जान भी जा सकती है। शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाके के लोगों को यह बीमारी होने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैँ।

यह भी पढ़े : बच्चों को मच्छरों या अन्य कीड़ों के डंक से ऐसे बचाएं

शिशु में मलेरिया के यह दिखते हैं लक्षण

एम्पलॉई स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसी) घाटशिला के रेसीडेंट मेडिकल अफसर और जमशेदपुर के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाक्टर अभिषेक कुंडू बताते हैं कि बीमारी के होने पर कुछ क्लीनिकल फीचर्स दिख सकते हैं। जैसे बच्चों को ठंड लगने के साथ बुखार आता है, नवजात है तो वह हंसनुमा और खिलखिलाने की बजाय बीमार सा दिखता है, शरीर में खून की कमी हो जाती है, हाथ पैर फूलने लगता है और शरीर में कमजोरी आती है। इसके अलावा एक से दो तीन दिनों में बीमारी का पता भी नहीं चलता, कुछ मामलों में मरीज का स्पलिन बढ़ने लगता है, फीवर की दवा देने के बावजूद बुखार कम नहीं होता है। ऐसे में शिशु में मलेरिया का इलाज न किया जाए तो आगे चलकर ब्रेन मलेरिया या फिर पेशाब में खून आने की समस्या भी हो सकती है। ब्रेन मलेरिया होने की स्थिति में शिशु कोमा में जा सकता है, शरीर में ग्लूकोज की कमी हो जाती है वहीं शिशु का दिमाग सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता है। वहीं पेशाब में खून की बीमारी हो जाए तो इसे ब्लैक वाटर फीवर भी कहा जाता है। इसके होने पर शिशु के पेशाब से खून आने लगता है। इसलिए जरूरी है कि बीमारी का सही समय पर जांच किया जाए और इलाज के लिए कदम उठाया जाए। पेशाब में खून आने की समस्या हो तो उसके कारण शिशु को जॉन्डिस की बीमारी भी हो सकती है। ऐसे में छोटी जान इन गंभीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता और उसकी मौत हो जाती है।

यह भी पढें : घर में ही बनाएं मच्छर मारने की दवा, आसान है प्रॉसेस

लक्षणों पर एक नजर

  • बुखार
  • कंपकपी
  • सिर दर्द
  • जी मचलाना या उल्टी
  • मसल्स पेन और थकान
  • पसीना आना, एबडॉमिनल पेन
  • कफ

मच्छर के ट्रांसमिशन साइकिल को समझें

बता दें कि मलेरिया की बीमारी एक बेहद ही छोटे माइक्रोस्कोपिक पेरासाइट के काटने के कारण होती है। यह पैरासाइट मच्छरों के काटने के साथ इंसानों के शरीर में प्रवेश कर जाती है जिसके कारण मलेरिया की बीमारी होती है।

अनइंफेक्टेड मॉस्किटो : मच्छर तबतक इंपेक्टेड नहीं होता जबतक वो किसी इंफेक्टेड व्यक्ति को काट न लें, वहीं इंफेक्टेड व्यक्ति को काटने के बाद जिस किसी को काटेगा उसे मलेरिया के होने की संभावना होगी।

पेरासाइट का ट्रांसमिशन : यदि कोई मच्छर आपको काटता है तो इस बात की संभावना बनी रहती है कि आपको मलेरिया की बीमारी हो सकती है।

लीवर के अंदर : शरीर में एक बार यदि पैरासाइट प्रवेश कर जाता है तो वो हमारे लीवर में चला जाता है। वहीं कुछ मामलों में यह सालों साल जीवित रहते हैं।

हमारे रक्त कोशिकाओं में जाने की संभावना : यदि पैरासाइट मैच्योर हो जाए तो उस स्थिति में यह हमारे लीवर को छोड़ रेड ब्लड सेल्स को प्रभावित करते हैं। इसके बाद मरीज में मलेरिया के लक्षण दिखने लगते हैं।

दूसरों में ऐसे फैलता है : यदि आप इंफेक्टेड हैं तो उस स्थिति में अनइंफेक्टेड मच्छर यदि आपको काटता है तो वह जिस-जिस को काटेगा उसको मलेरिया की बीमारी फैला सकता है।

अन्य मामलों में  : नवजात को मां के होने के कारण, पीड़ित व्यक्ति से किसी सामान्य व्यक्ति को खून चढ़ाने की वजह से, इंजेक्शन के नीडल्स शेयर करन के कारण बीमारी हो सकती है।

यह भी पढ़े : यूपी के 11 जिले जानलेवा मलेरिया की चपेट में, जानें मलेरिया के लक्षण

शिशु में मलेरिया का ऐसे करें बचाव़

शिशु में मलेरिया की बीमारी हो ही न इसको लेकर एम्पलॉई स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसी) घाटशिला के रेसीडेंट मेडिकल अफसर और जमशेदपुर के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाक्टर अभिषेक कुंडू बताते हैं कि पानी को घरों के आसपास जमा न होने दें। क्योंकि इस बीमारी के होने वाले मच्छर गंदे पानी के साथ साफ पानी में पनपते हैं। यदि कहीं पानी जमा हो रहा है तो वहां ऐसा इंतजाम करें कि पानी जमा न हो। इसके अलावा रात में सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें, बरसात के दिनों में फुल स्लीव्स के बाद फुल पेंट, मोजे आदि पहने ताकि मच्छर हमें व हमारे बच्चों को न काट सके, घर के आसपास डीडीटी का छिड़काव करें खासतौर से बरसात के दिनों में यदि संभव नहीं है तो केरोसीन या फिर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करना फायदेमंग रहता है। ऐसा कर शिशु को मलेरिया से बचाया जा सकता है। वहीं बीमारी के लक्षणों की शुरुआती दिनों में ही पहचान हो गई तो इसका इलाज एक सप्ताह में हो जाता है, वहीं सप्ताहभर में बच्चे को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाता है। जरूरी है कि बीमारी के लक्षणों को पहचान सबसे पहले डॉक्टरी सलाह ली जाए, ताकि इसके घातक परिणामों से बचा जा सके।

यह दी जाती है दवा

शिशु में मलेरिया से बचाव के लिए आर्टीमिसिनिन (Artemisinin ) दवा दी जाती है। ऐसे में दवा के प्रभाव को देखते हुए कि उसका असर अच्छे से हो रहा है या नहीं, सेफ है या नहीं, मरीज अच्छे से सेवन कर पा रहा है या नहीं तमाम मापदंडों को ध्यान में रखकर कई बार इसके वैकल्पिक दवा का प्रयोग भी किया जाता है। शिशु में मलेरिया का इलाज का अभाव है। ऐसे में वयस्कों को दी जाने वाली दवा को डिवाइड कर बच्चों को दिया जाता है, कई मामलों में यह सामान्य डोज देने से भी परेशानी हो सकती है।

डब्ल्यूएचओ सुझाव देता है कि बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए नए डोज स्कीम ईजाद किए हैं। इसके तहत वैसे बच्चे जिनका वजन 25 किलो या फिर 20 किलो से भी कम हैं उनको डिहाइड्रो-आर्टीमिसिनिन (dihydro-artemisinin) और पिपराक्वीन (piperaquine ) की दवा दी जाती है। वहीं शिशु की बात करें जिनका वजन पांच किलो से कम होता है उनका इलाज करना काफी जटिल हो जाता है, वैसे बच्चों में जिनका वजन पांच किलो से कम होता है, डब्ल्यूएचओ सुझाव देता है कि उनका इलाज एसीटी के तहत शरीर के एमजी व केजी की जांच कर दवा का डोज निर्धारित करें। खासतौर पर तब जब बच्चे का वजन पांच किलो से भी कम हो। डब्ल्यूएचओ यह सुझाव देता है कि वैसे बच्चे जिनका वजन कम है तो उसकी स्थिति को भांपने के साथ वजन सहित अन्य के हिसाब से ही दवा का डोज निर्धारित करना चाहिए।

यह भी पढ़े : प्रेग्नेंसी में मलेरिया: मां और शिशु दोनों के लिए हो सकता है खतरनाक?

पेरेंटरल ट्रीटमेंट के फायदे

शिशु में मलेरिया की बीमारी न हो इसको लेकर काफी सतर्क रहने की आवश्यकता है। मलेरिया से ग्रसित बच्चों के लक्षण को भांप यदि सही समय पर सही इलाज न किया गया तो समय के साथ साथ बच्चे के लक्षणों में बदलाव देखने को मिलता है। मौजूदा समय में आए डाटा से पता चला है कि शिशु में मलेरिया का इलाज करने के लिए इंट्रावेनस आर्टिसुनेट (intravenous artesunate) की मदद ली जा सकती है।

शिशु में मलेरिया या बच्चों को बीमारी होने से एंटीमलेरियल दवा दी जानी चाहिए

हां शिशु में मलेरिया की बीमारी होने पर एंटीमलेरियल दवा दी जा सकती है, लेकिन सभी प्रकार के मलेरिया होने पर ऐसा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि किसी भी उम्र के बच्चों को मलेरिया की बीमारी हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि वैसे इलाके जहां मलेरिया होने की संभावनाएं काफी ज्यादा रहती है उन जगहों पर जाने के पूर्व तैयारी करके जाना चाहिए। बता दें कि कुछ एंटीमलेरियल ड्रग्स बच्चों को सूट नहीं करते हैं। ऐसे में बच्चों के वजन को ध्यान में रखकर ही दवा देना फायदेमंद होता है।

मौजूदा समय में मलेरिया की बीमारी न हो इसके लिए वैक्सीन भी तैयार किया जा रहा है। शोधकर्ता इस बारे में जुटे हुए हैं और क्लीनिकल टेस्ट को अंजाम दे रहे हैं।

इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए डाक्टरी सलाह लें। हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

और पढ़े :

मलेरिया से जुड़े मिथ पर कभी न करें विश्वास, जानें फैक्ट्स

World Malaria Day : जानें क्या हैं मलेरिया के लक्षण, बचाव और इलाज ?

गर्भावस्था में मलेरिया होने पर कैसे रखें अपना ध्यान? जानें इसके लक्षण

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy"
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

कीड़े का काटना या डंक मारना कब हो जाता है खतरनाक? क्या है बचाव का तरीका

कीड़े का काटना in Hindi, कीड़े का काटना या कीड़े के डंक के लिए घरेलू उपाय, मधुमक्खी के काटने पर क्या करें, के लक्षण, मच्छर के काटने पर क्या करें। जानिए ततैया काटने पर क्या करना चाहिए।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Ankita Mishra

घर में ही बनाएं मच्छर मारने की दवा, आसान है प्रॉसेस

मच्छर मारने की दवा क्या है, मच्छर मारने की दवा का उपयोग कैसे करें, नेचुरल तरीके से मच्छर कैसे भगाएं, मच्छर की बीमारियां, natural mosquito killer in Hindi

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
हेल्थ टिप्स, स्वस्थ जीवन मार्च 24, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

Pao pereira: पाओ परेरा क्या है?

जानिए पाओ परेरा की जानकारी, लाभ, पाओ परेरा उपयोग, इस्तेमाल कैसे करें, कब लें, कैसे लें, खुराक, डोज, ओवरडोज, साइड इफेक्ट्स को जानने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।

के द्वारा लिखा गया Bhawana Sharma
जड़ी-बूटी A-Z, ड्रग्स और हर्बल दिसम्बर 30, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें

डेंगू के लक्षण दिखते ही न करें ये गलतियां, एक्सपर्ट से जानें कैसे करनी है रोकथाम

डेंगू के लक्षण, डेंगू के कारण, dengue fever in hindi, डेंगू बुखार के लक्षण व उपचार, डेंगी के लक्षण और उपचार, डेंगू बुखार में क्या खाना चाहिए जानकारी के लिए...

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Shruthi Shridhar
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel

Recommended for you

Lariago DS लारियागो डीएस

Lariago DS : लारियागो डीएस क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ जुलाई 20, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
माइक्रोब से मलेरिया की रोकथाम

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, माइक्रोब से मलेरिया की रोकथाम हो सकेगी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ जून 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
Myths about Malaria: मलेरिया से जुड़े मिथ

मलेरिया से जुड़े मिथ पर कभी न करें विश्वास, जानें फैक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Surender Aggarwal
प्रकाशित हुआ अप्रैल 25, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
मलेरिया के लक्षण

World Malaria Day : जानें क्या हैं मलेरिया के लक्षण, बचाव और इलाज ?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
प्रकाशित हुआ अप्रैल 25, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें