आपकी क्या चिंताएं हैं?

close
गलत
समझना मुश्किल है
अन्य

लिंक कॉपी करें

Word immunization day: वैक्सीन किन बीमारियों से बचाने का करती हैं काम, जानिए यहां विस्तार से!

    Word immunization day: वैक्सीन किन बीमारियों से बचाने का करती हैं काम, जानिए यहां विस्तार से!

    “स्वस्थ जीवन सुखी जीवन” इस बारे में तो हम सभी जानते हैं। सही मायने में अगर आपका शरीर स्वस्थ हैं, तो यही आपके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। स्वस्थ रहने के लिए प्रयास बच्चे के जन्म के बाद नहीं बल्कि इसके पहले से ही शुरू हो जाना चाहिए। जब बच्चा गर्भ में होता है तो होने वाली मां हर तरीके से प्रयास करती है कि उसका बच्चा स्वस्थ पैदा हो। इसके लिए मां पौष्टिक आहार का सेवन करने के साथ ही जरूरी टीकाकरण भी करती है, ताकि बच्चे को किसी भी तरीके की बीमारी का खतरा न हो। आपके मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि स्वस्थ रहने के लिए आखिरकार टीकाकरण क्यों जरूरी होता है? बच्चे के जन्म के बाद टीका लगवाना बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह बच्चों को एक या दो नहीं, बल्कि कई बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। वैसे तो हमारा शरीर किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए खुद प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने लगता है लेकिन कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जो शरीर को बहुत बीमार बना सकती हैं। विभिन्न प्रकार की हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन (Vaccine-preventable health conditions) बहुत जरूरी होती है।

    शरीर को खतरनाक बीमारी के बारे में पहले से ही जानकारी टीकाकरण के माध्यम से दी जाती है। जी हां! वैक्सिनेशन की प्रोसेस में बैक्टीरिया या वायरस की कुछ मात्रा को शरीर में प्रवेश कराया जाता है। शरीर बीमारी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा करना शुरू कर देता है। वैक्सीन शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती है। बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक में बीमारी के खतरे को टीकाकरण के माध्यम से कम किया जा सकता है। टीकाकरण सिर्फ बच्चों के लिए जरूरी नहीं होता है बल्कि यह वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी जरूरी होता है। हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन कितनी जरूरी है और एक व्यक्ति को अपने जीवन में कौन-कौन सी वैक्सीन लेनी चाहिए, इस बारे में आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे।

    और पढ़ें: महिलाओं में टीकाकरण को लेकर होने वाले मिथक, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट!

    हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन (Vaccine-preventable health conditions)

    हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन

    जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि वैक्सीन केवल बच्चों के लिए नहीं बल्कि विभिन्न आयु के लोगों के लिए जरूरी होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। यहां हम आपको बच्चों से लेकर वयस्कों तक के लिए जरूरी वैक्सिंग के बारे में जानकारी देंगे।हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन अहम भूमिका निभाते हैं। आइए पहले जानते हैं कि बच्चों को कौन सी जरूरी वैक्सीन जरूरी होती हैं।

    बच्चों को दिए जाने वाली टीके

    जन्म के बाद शिशू को विभिन्न प्रकार के टीके लगाए जाते हैं। डॉक्टर आपको वैक्सीनेशन चार्ट देते हैं, जिसमें बच्चे के जन्म के बाद किस महीने में कौन-सा टीका लगाया जाना है, इस बारे में जानकारी दी जाती है। आपको बच्चे को समय पर टीका लगवाना चाहिए और जब भी टीके की डेट हो, उस दिन बच्चे को वैक्सिनेशन जरूर कराएं। जानिए बच्चों के लिए अहम टीकों के बारे में।

    और पढ़ें:बच्चों को टीकाकरण के बाद दर्द या सूजन की हो समस्या, तो अपनाएं ये उपाय

    जन्म के बाद बीसीजी का टीका (BCG vaccine after birth)

    बेसिलस कैलमेट-गुएरिन (Bacillus Calmette–Guérin) वैक्सीन या बीसीजी वैक्सीन जन्म के तुरंत बाद दी जाने वाली वैक्सीन है। ये वैक्सीन बच्चे को टीबी के खतरे से बचाने का काम करती है। वीक इम्यूनिटी सिस्टम या फिर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के चलते जन्म लेने के बाद बच्चों को बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में जन्म के बाद बीसीजी का टीका बहुत जरूरी हो जाता है। वैसे तो इस टीके को जन्म के बाद तुरंत लगाने की सलाह देती जाती है लेकिन अगर किसी कारण से बच्चे को तुरंत टीका नहीं लग पाया है तो जन्म के 1 महीने के भीतर इस टीके को जरूर लगवा लेना चाहिए।

    और पढ़ें: गर्भावस्था में टीकाकरण के दौरान बरतें ये सावधानियां

    DTaP/DTwP यानी डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खांसी (Diphtheria,, Tetanus and Pertussis)

    बच्चों को दी जाने वाली वैक्सीन में डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खांसी की वैक्सीन को अहम वैक्सीन माना जाती है। इसका कारण यह है कि यह बच्चे को एक नहीं बल्कि 3 भयानक बीमारियों से बचाने का काम करती है। इस वैक्सीन के कंपोनेंट में बैक्टीरिया को खत्म करने या बैक्टीरिया के प्रति बच्चों को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। पहली डोज जन्म के बाद, 10-16 सप्ताह में बच्चे को इस वैक्सीन की दूसरी डोज और 14-24 सप्ताह में तीसरी डोज दी जाती है। डॉक्टर से आप इसके डोज के बारे में जानकारी ले सकते हैं। वहीं डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, पोलियो और हिब रोग (diphtheria, tetanus, whooping cough, polio and Hib disease) से बचाव के लिए डॉक्टर पेंटावैलेंट की तीन डोज की सिफारिश भी कर सकते हैं। ये एक साथ पांच रोग से बचाने का काम करती है। इसकी डोज बच्चे को 6 सप्ताह, 10 सप्ताह और 14 सप्ताह में देने की सिफारिश की जाती है।

    OPV या ओरल पोलियो वैक्सीन (Oral polio vaccine)

    पोलियोमाइलाइटिस (Poliomyelitis) से बचाव के लिए बच्चों को OPV या ओरल पोलियो वैक्सीन दी जाती है। पोलियो का टीका न मिलने से बच्चे का शरीर लकवाग्रस हो सकता है। पोलियो का टीका इंजेक्शन के साथ ही ओरल यानी की मुंह के माध्यम से भी दिया जाता है। ओपीवी की बर्थ डोज के बाद बाद में तीन अलग से ओरल डोज दी जाती हैं। ये डोज 6 सप्ताह, 10 सप्ताह और 14 सप्ताह (6 weeks, 10 weeks & 14 weeks) के अंतराल में दी जाती हैं। IPV (inactivated Polio Vaccine) यानी की इंएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन 14 सप्ताह में इंजेक्शन के माध्यम से दी जा सकती है।

    और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में टीकाकरण की क्यों होती है जरूरत ?

    हेपेटाइटिस बी वैक्सीन (Hepatitis B Vaccine)

    हेपेटाइटिस बी सीरियल लीवर इंफेक्शन है, जो कि हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) वायरस की मदद से फैलता है। यह किसी भी उम्र में फैल सकता है। इससे बचने के लिए बच्चों को हेपिटाइटिस बी वैक्सीन (Hepatitis B Vaccine) दी जाती है। अगर समय पर बच्चों को या व्यक्ति को न दी जाए, तो लिवर डैमेज हो सकता है। नवजात शिशु से लेकर 18 वर्ष की उम्र तक ये वैक्सीन दी जाती है। पहली डोज जन्म के बाद और दूसरे डोज 6-8 सप्ताह के दौरान दी जाती है। डॉक्टर से आप इस बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं।

    वहीं हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) से बचाव के लिए शिशु को 1 साल का या 12 महीने का होने पर वैक्सीन की डोज दी जाती है।हेपेटाइटिस ए वायरस के कारण फैलने वाली बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन जरूरी होती है। 1 साल के बच्चे से लेकर 18 साल तक के बच्चे को वैक्सीन दी जा सकती है।

    न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (Pneumococcal conjugate vaccine)

    पीसीवी (PCV) बैक्टीरिया स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया से बचाव में मदद करता है। ये वैक्सीन शिशु, छोटे बच्चे और वयस्कों को बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाने में मदद करती है। निमोनिया और मेनिन्जाइटिस से बच्चे को बचाने में मदद करने के लिए इस वैक्सीन को जरूरी माना जाता है। डॉक्टर से जानकारी लेने के बाद इस वैक्सीन को 6-8 सप्ताह के भीतर इसे लगवाया जा सकता है।

    और पढ़ें: क्या बढ़ सकता है कोविड-19 वैक्सीन के बाद हार्ट इंफ्लेमेशन का रिस्क?

    रोटावायरस (Rotavirus) का टीका

    रोटावायरस वैक्सीन रोटावायरस से बचाव का काम करती है। रोटावायरस डायरिया से बचाने का काम करता है। ये वैक्सीन बच्चे के लिए जरूरी होती है। रोटावायरस के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। बच्चों में डिहाइड्रेशन होने की संभावना भी इस कारण से बढ़ जाती है। इस वैक्सीन को बच्चों को 2, 4 और 6 महीने में दिया जाता है। वैक्सीन के डोज ब्रान्ड के हिसाब से बदल भी सकते हैं। आपको इस बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी लेनी चाहिए।

    मीजल्स, मम्प्स और रूबेला और चिकनपॉक्स वैक्सीन

    चिकनपॉक्स की वैक्सीन वैरिकाला-जोस्टर वायरस (Varicella-zoster virus) के संक्रमण से बचाती है।12 से 15 महीने की उम्र में वैरीसेला वैक्सीन (Varicella vaccine) लगाई जाती है। 4 से 6 साल की उम्र में बच्चों को डॉक्टर बूस्टर डोज भी देते हैं। मीजल्स, मम्प्स और रूबेला के साथ ही चिकनपॉक्स वैक्सीन भी दी जाती है।

    ह्यूमन पेपिलोमावायरस वैक्सीन (Human Papillomavirus Vaccine)

    बच्चों को भविष्य में कैंसर की बीमारी से बचाने के लिए 9 से 10 साल की उम्र में एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine) लगाई जाती है। यह वैक्सीन एचपीवी के कारण होने वाले संक्रमण से बचाने का काम करती है। एचपीवी संक्रमण भविष्य में सर्वाइकल कैंसर, मुंह के कैंसर, एनल कैंसर, जेनिटल वार्ट्स (Genital warts) आदि से बचाने में मदद करती है। आपको डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए अगर बच्चे को डोज 9 से 10 साल की उम्र में छूट गई है, तो कब वैक्सीन लगवाई जा सकती है। 26 साल की उम्र तक ये वैक्सीन लगाई जा सकती है।

    विटामिन ए डोज

    जिस तरीके से बच्चे के लिए विभिन्न प्रकार की वैक्सीन जरूरी होती हैं, ठीक उसी प्रकार से बच्चों को विटामिन ए डोज भी पांच साल तक टीकाकरण कार्यक्रम के अंर्तगत दिया जाता है। 16-18 महीने की उम्र के बाद हर 6 माह के बाद एक खुराक ओरली दी जाती है। आप डॉक्टर से इसके डोज के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

    और पढ़ें: बच्चों में अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से बचाव के लिए ध्यान रखें इन टिप्स का!

    मेनिंगोकोकल क्वाड्रीवेलेंट वैक्सीन (Meningococcal quadrivalent vaccine)

    बैक्टीरिया के कारण फैलने वाली मेनिंगोकोकल डिजीज से बचाने में मेनिंगोकोकल क्वाड्रीवेलेंट वैक्सीन (Meningococcal quadrivalent vaccine) मदद करती है। इस बैक्टीरिया के कारण बच्चे को ब्रेन के साथ ही स्पाइनल कॉर्ड में संक्रमण की समस्या हो जाती है। ये बैक्टीरिया बच्चों को डिसेबल बना सकता है। अगर वैक्सीन की डोज समय पर न मिले तो इंफेक्शन ब्लड में भी फैल जाता है। ये वैक्सीन 11 से 12 साल और फिर बूस्टर डोज 16 साल तक दिया जाता है।

    फ्लू वैक्सीन (flu vaccine)

    इम्युनिटी पॉवर को बढ़ाने के लिए फ्लू वैक्सीनेशन भी जरूरी होता है। फ्लू वैक्सिनेशन बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में भी किया जा सकता है। इन्फ्लुएंजा के टीके, जिन्हें फ्लू जैब्स या फ्लू शॉट्स के रूप में भी जाना जाता है। ये टीके इन्फ्लूएंजा वायरस द्वारा संक्रमण से बचाते हैं। सीडीसी (CDC) 6 महीने या उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए एनुअल इन्फ्लूएंजा वैक्सिनेशन की सिफारिश करता है। आपको इसके बारे में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए।

    और पढ़ें: रोटाटेक ओरल वैक्सीन : छोटे बच्चों को रोटावायरस से जैसे गंभीर इंफेक्शन से बचाने में करती हैं मदद!

    कोविड-19 वैक्सीन (covid-19 vaccine)

    साल 2019 में दुनिया को एक नई महामारी का सामना करना पड़ा। इस महामारी का नाम कोरोनावायरस महामारी है। कोरोना वायरस (Corona virus) के कारण वाली इस बीमारी से व्यक्ति में बुखार, खांसी, बदनदर्द के साथ ही विभिन्न लक्षण दिखने लगते है। जिन लोगों को इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनके लिए ये बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके कारण कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है। कोरोना महामारी से बचने के लिए फिलहाल वैक्सीन बन चुकी है। सभी देशों के लोग इस वैक्सीन को लगवा रहे हैं। दो डोज की इस वैक्सीन की बूस्टर डोज भी तैयार हो चुकी है। बच्चों के लिए भी वैक्सीन तैयार हो चुकी है।

    पढ़ें: बेबी पाउडर के साइड इफेक्ट्स: इंफेक्शन, कैंसर या सांस की परेशानी दे सकती है दस्तक!

    जोस्टर वैक्सीन (Zoster vaccine)

    सीडीसी (CDC) सिफारिश करता है कि 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों को दाद का टीका जरूर लगवाना चाहिए। ये टीका शिंग्रिक्स की जटिलताओं को रोकने के लिए दो डोज में दिए जाते हैं। 19 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्क, जिनकी किसी बीमारी के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, उन्हें भी शिंग्रिक्स की दो खुराक देने की सिफारिश की जाती है। दाद और संबंधित जटिलताओं का खतरा इस वैक्सीन को लेने के बाद कम हो जाता है। हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन अहम भूमिका निभाता है।

    न्यूमोकोकल पॉलीसेकेराइड वैक्सीन

    न्यूमोकोकल पॉलीसेकेराइड वैक्सीन, जो गंभीर न्यूमोकोकल रोग से बचाता है। इस वैक्सीन से मेनिन्जाइटिस और ब्लड स्ट्रीम इंफेक्शन के खतरे से राहत मिलती है। 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए कुछ हेल्थ कंडीशन के दौरान इस वैक्सीन को लेने की सलाह दी जा सकती है।

    हम उम्मीद करते हैं कि आपको हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन (Vaccine-preventable health conditions) के बारे में जानकारी मिल गई होगी। वैसे तो वैक्सीन लगवाना सभी लोगों के लिए जरूरी होता है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनमें विभिन्न प्रकार की हेल्थ कंडीशन होती है। ऐसे में व्यक्ति को वैक्सीन लगावाना बहुत जरूरी हो जाता है। जानिए वह कौन-सी हेल्थ कंडीशन है, जिनमें वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी होता है।

    • अस्प्लेनिया
    • टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज
    • हृदय रोग, स्ट्रोक, या अन्य हार्ट डिजीज
    • एचआईवी संक्रमण
    • लिवर डिजीज
    • अस्थमा या फेफड़े की बीमारी
    • किडनी की बीमारी
    • कमजोर इम्यून सिस्टम

    इस आर्टिकल में हमने आपको हेल्थ कंडीशन से बचने के लिए वैक्सीन (Vaccine-preventable health conditions) से संबंधित अहम जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की ओर से दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

    health-tool-icon

    बेबी वैक्सीन शेड्यूलर

    इम्यूनाइजेशन शेड्यूल का इस्तेमाल यह जानने के लिए करें कि आपके बच्चे को कब और किन टीकों की आवश्यकता है

    आपके बेबी का जेंडर क्या है?

    पुरुष

    महिला

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    लेखक की तस्वीर badge
    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/04/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
    Next article: