बच्चों के डर जो उन्हें बना देते हैं मानसिक बीमार

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अक्टूबर 5, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

हम सभी अपने माता-पिता को देखते हुए बढ़े होते हैं। वो कैसे बात करते हैं या फिर हमे किस तरह से समझाते हैं, इन बातों का असर बच्चों के व्यवहार में पड़ता है। जब पेरेंट्स शालीन व्यवहार करते हैं, तो बच्चा भी वही सब बातें सीखता है। पेरेंट्स का व्यवहार सही नहीं है तो इसका असर बच्चे में भी साफ देखने को मिलता है। कई बार माता-पिता का यही व्यवहार बच्चों के डर का कारण भी बन सकते हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको उन घरेलू समस्याओं के बारे में बताएंगे जो बच्चों के डर का कारण बन सकते हैं।

बच्चों के डर-child fear
बच्चों के डर को दूर करना है आसान

माता-पिता की आदतें जो बन सकती हैं बच्चों के डर का कारण

इमोशनल एब्यूज

अक्सर पेरेंट्स किसी न किसी स्ट्रेस की वजह से इमोशनल एब्यूज करने लगते हैं, जो भी बच्चों के डर का कारण बन सकता है।

अपमानजनक व्यवहार

माता-पिता का अपमानजनक व्यवहार भी बच्चों पर बुरा असर डालता है। जो एज रिलेटेड प्रॉब्लम का कारण बन सकता है।

ओवर-पेरेंटिंग

ओवर पेरेंटिंग की समस्याएं अक्सर सिंगल चाइल्ड में ज्यादा देखी जाती है। सिंगल चाइल्ड होने के कारण माता-पिता बच्चे का ख्याल जरूरत से ज्यादा रखने लगते हैं, जिसके कारण बच्चे का मानसिक विकास भी प्रभावित हो सकता है और यह भी बच्चों में डर का कारण बन सकता है।

बच्चों के डर पर क्या कहती है स्टडी?

कुछ अध्ययनों और साइकोलॉजिकल रिसर्च में ये बात सामने आई है कि पेरेंट्स का व्यवहार बच्चों में पॉजिटिव या निगेटिव इफेक्ट डाल सकता है। यूनीवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया में हुई एक स्टडी के मुताबिक, एब्युसिव पैरेंट्स के कारण बच्चों को एज रिलेटेड डिसीज, जैसे कि, कार्डियोवेस्कुलर बीमारी हो सकती है। साथ ही, 756 सब्जेक्ट में रिसर्च के अकॉर्डिंग, ऐसे में जब बच्चे बड़े (एडल्ट) हो जाते हैं तो, उन्हें हाई कोलेस्ट्राल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा भी बना रहता है।

और पढ़ें : अगर बच्चा स्कूल जाने से मना करे, तो अपनाएं ये टिप्स

बुरे व्यवहार के दौरान दिखते हैं ये लक्षण

जब बच्चे अपने आस-पास अनुकूल वातावरण नहीं पाते हैं, तो वो कुछ अलग तरह का व्यवहार करने लगते हैं। उनमे कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जैसे,

  • बच्चा बड़ों की बातों को अनसुना करता है
  • बच्चा ज्यादा शैतानी करता है
  • बच्चे का व्यवहार दूसरों के प्रति ठीक नहीं है
  • बच्चा पढ़ाई में पिछड़ने लगता है
  • बच्चा बीमारी के बहाने बताता है
  • बच्चा गुस्सा दिखाता है
  • बच्चा अपने से बड़ों की इज्जत नहीं करता है
  • बच्चा अपने पेरेंट्स या किसी दूसरे पर हाथ उठाता है
  • बच्चा असभ्य भाषा का इस्तेमाल करता है।

और पढ़ें : ऐसे बनाएं बच्चों के पढ़ाई का टाइम टेबल

माता-पिता की बुरी आदतें भी बन सकती हैं बच्चों के डर का कारण

रिसर्च में ये बात भी सामने आई है कि बचपन में किसी भी समस्या के कारण लिया गया स्ट्रेस बच्चों को लाइफटाइम किसी न किसी बीमारी के रूप में परेशान करता है। साथ ही, अगर माता-पिता ड्रग्स के लती हैं, तो बच्चों के अंदर असुरक्षा का भाव आ जाता है जो बच्चों के डर का कारण भी बना सकता है और आगे चलकर बच्चे के अंदर माता-पिता के लिए सेवाभाव खत्म हो सकता है।

डिप्रेशन भी हो सकता है बच्चों के डर का कारण

अगर माता या पिता में से कोई एक या दोनों ही डिप्रेशन का शिकार होते हैं, तो उनका डिप्रेशन भी बच्चों के डर का कारण बन सकता है।  डिप्रेशन के शिकार माता-पिता कई बार बच्चों को खुश रहने के लिए उन पर प्रेशर डाल सकते हैं, इसका असर बच्चों पर पड़ता है। बच्चे बातों को समझते हैं और बड़े होने पर अपनी पर्सनल बातों को माता-पिता के साथ शेयर नहीं करते हैं।

और पढ़ें : जानिए ब्रेन स्ट्रोक के बाद होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव

बच्चों के डर को दूर करने के लिए उपाय

बच्चों के डर को दूर करने के लिए माता-पिता या उनके करीबियों को बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्थिति का ख्याल रखना चाहिए। एक बात ध्यान में रखें कि बच्चे का विकास धीरे-धीरे उसकी उम्र के अनुसार होते है, इसलिए हर उम्र में बच्चों के साथ-साथ व्यवहार का खास ध्यान रखना चाहिए।

जन्म से लेकर 6 साल के बच्चे

जन्म से लेकर लगभग 6 साल का शिशु और छोटे बच्चे माता-पिता की किसी भी परेशानी या बात को बहुत ही कम समझते हैं। इस उम्र में बच्चे बहुत उपद्रवी होते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा रोना, हर बात मनवाने के लिए जिद्द करना इस उम्र के बच्चों की खास आदत हो सकती है। इसलिए उम्र के बच्चों के साथ उनके माता-पिता को पूरा समय देना चाहिए। अगर दोनों साथी के बीच कभी कोई मन-मुटाव या किसी भी तरह की बहस होती है, तो बच्चे के सामन न करें।

7 से 10 साल के बच्चे

7 से 10 साल की उम्र में बच्चों के दिमाग बहुत ज्यादा एक्टिव रहता है। इस उम्र में वो हर बात को बहुत जल्दी समझते और सीखते हैं। ऐसे में माता-पिता कोई भी गलती बच्चों में डर का कारण बन सकती है।

8 से 11 साल के बच्चे

आमतौर पर इस उम्र के बच्चे हर तरह की स्थिति को बड़े अच्छे से समझ सकते हैं। इसके अलावा, बच्चे के आसा-पास का सामाजिक और पारिवारिक व्यवहार भी बच्चे के लिए कई तरह से मायने रखता है। इसलिए बच्चों के डर को समझने के लिए उनसे खुलकर बात भी किया जा सकता है। इस उम्र में माता-पिता अपने बच्चों के बहुत करीब आ सकते हैं। इसके लिए वो बच्चों के साथ उनके होमवर्क कर सकते हैं, उनके साथ थोड़ी देर तक कोई खेल खेल सकते हैं या फिर चाहें तो उन्हें अपने साथ घर के किसी छोटे-मोटे कामों में हाथ बटाने के लिए भी कह सकते हैं।

और पढ़ें : बच्चों की स्वस्थ खाने की आदतें डलवाने के लिए फ्रीज में रखें हेल्दी फूड्स

अगर माता-पिता बनें बच्चों में डर का कारण, तो क्या करें?

लगभग 12 से 14 साल के बच्चे पारिवारिक और सामाजित स्तर के अलग-अलग व्यवहारों को समझने लगते हैं। ऐसे में अगर घर के अंदर उनके माता-पिता झगड़ते हैं, तो बच्चों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसेः

  • अगर दो बड़े लोग आपस में झगड़ रहे हैं या कोई बहस कर रहे हैं, तो उनके बीच मामले को रोकने के लिए न आएं।
  • जब भी लगे कि माता-पिता के बीच झगड़ा शुरू होने वाले है या शुरू हो गया है, तो आपको चाहिए आप खुद ही उस स्थान से किसी शांत स्थान में चलें जाएं।
  • अगर ऐसे लगे कि उनके बीच का बहस ज्यादा बढ़ रहा है, तो घर के किसी अन्य वयस्क को इसके बारे में बचाएं या पड़ोसियों की मदद लें।

ये बात ध्यान देने वाली है कि जैसा व्यवहार माता-पिता बच्चों के साथ करते हैं, ठीक वैसा ही व्यवहार आगे चलकर बच्चे करते हैं। जब माता-पिता बूढ़े हो जाते हैं तो कई बार चाहकर भी बच्चों के लिए उचित करना मुश्किल हो जाता है।

ऊपर दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सक द्वारा प्रदान नहीं की जाती। इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से बात करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

बच्चों के लिए सही टूथपेस्ट का कैसे करे चुनाव

टूथपेस्ट क्या होता है, बच्चों के लिए सही टूथपेस्ट कौन सा होता है और बच्चों को किस उम्र में ब्रश करना शुरू कर देना चाहिए। Baccho ke liye sahi toothpaste.

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 15, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

बच्चे की करियर काउंसलिंग करते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

जानिए बच्चे की करियर काउंसलिंग in Hindi, बच्चे की करियर काउंसलिंग के फायदे, बच्चे के लिए सही स्ट्रीम कैसे चुनें, Bachche ki Career counseling, बच्चे के लिए सही भविष्य चुनने के लिए टिप्स।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Ankita Mishra
पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग अप्रैल 7, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

बच्चों में साइनसाइटिस का कारण: ऐसे पहचाने इसके लक्षण

जानिए बच्चों में साइनसाइटिस का कारण in Hindi, बच्चों में साइनसाइटिस का कारण कैसे पहचानें, Baccho me sinus ka karan, शिशुओं में साइनसाइटिस के लक्षण और उपचार, बंद नाक के कारण।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Ankita Mishra
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 7, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

बच्चों में टॉन्सिलाइटिस की परेशानी को दूर करना है आसान

जानिए टॉन्सिल और टॉन्सिलाइटिस में क्या है अंतर? बच्चों में टॉन्सिलाइटिस से बचने के क्या हैं उपाय? बच्चों में Tonsillitis की वजह क्या हो सकती है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

जिद्दी बच्चे को सुधारने के टिप्स कौन से हैं जानिए

बच्चों में जिद्दीपन: क्या हैं इसके कारण और उन्हें सुधारने के टिप्स?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Anu sharma
प्रकाशित हुआ अगस्त 20, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
मानसिक मंदता

क्या मानसिक मंदता आनुवंशिक होती है? जानें इस बारे में सबकुछ

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ अगस्त 7, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
बॉडी शेमिंग -body shaming

बच्चों को बॉडी शेमिंग से कैसे बचाएं?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया sudhir Ginnore
प्रकाशित हुआ मई 19, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
बच्चे-स्कूल-नहीं-जाते

जब बच्चे स्कूल नहीं जाते तो पैरेंट्स क्या करें

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
प्रकाशित हुआ अप्रैल 23, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें