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बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी साबित होती है बेहद कारगर!

बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी साबित होती है बेहद कारगर!

बच्चों के सही विकास के लिए माता पिता को कई थेरिपी का सहारा लेना पड़ता है। यह थेरिपी बच्चों के सही विकास में मददगार साबित होती है। कई बार बच्चों को मनोवैज्ञानिक समस्याओं (Psychological problems) के चलते कई तरह की तकलीफ उठानी पड़ती है, ऐसी समस्याएं उनके विकास पर गलत प्रभाव डालती हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) का सहारा लिया जाता है। बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) अपने आप में एक कारगर थेरिपी मानी जाती है। इस थेरिपी के अंतर्गत बच्चों में पैदा होने वाली नकारात्मक सोच और भावनाओं (negative thoughts and feelings) को सही दिशा देकर उनके दृष्टिकोण को बेहतर बनाया जाता है। जिससे उनका सही मानसिक विकास हो सकता है। यही वजह है कि बच्चों के शुरुआती सालों में बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी का इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी के बारे में यह जरूरी बातें।

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क्या है बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी? (Cognitive Behavioral Therapy for kids)

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी एक प्रकार की टॉक थेरिपी (Talk therapy) मानी जाती है, जिसका इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक समस्याओं, नकारात्मक विचारों और व्यवहार में आ रही समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। अक्सर शुरुआती सालों में कई फ़ैक्टर्स के चलते बच्चों के व्यवहार में समस्याएं दिखाई देती हैं, जिसका प्रभाव बच्चे के मानसिक विकास पर पड़ता है। बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) के अंतर्गत बातचीत से उनके नकारात्मक विचारों को बदलकर सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का करने की कोशिश की जाती है। हालांकि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी ले सकता है। खास तौर पर जिन लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन लोगों को कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी की जरूरत आमतौर पर पड़ती है। कई बार बच्चों में भी एंग्जायटी और स्ट्रेस की समस्याएं देखी जाती हैं, जो आगे चलकर गंभीर तकलीफों में परिवर्तित हो सकती हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) का इस्तेमाल किया जाता है।

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हर बच्चे के विकास का मार्ग अलग-अलग होता है और उनके सोचने का तरीका भी एक दूसरे से अलग होता है। जब हम अपने विचारों को किसी तरह का माध्यम दे देते हैं, तो हमारे लिए सोच को सही दिशा देना आसान हो जाता है। बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) के अंतर्गत इसी को आधार बनाया जाता है, जिससे उनके विचार सकारात्मक हो और उन्हें हो रही मानसिक समस्याओं (Mental problems) को ठीक किया जा सके। बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) के जरिए उनके विचार, भावनाओं और अनुभव को भी प्रभावित किया जा सकता है, जिससे भविष्य में वह मानसिक समस्याओं से आसानी से उबर सकें।

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बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) की मदद से नकारात्मक विचारों को बदलकर उन्हें सकारात्मक विचारों में तब्दील किया जाता है, जिससे बच्चे को भविष्य में डिप्रैशन, एंग्जायटी, मेंटल इलनेस (Depression, Anxiety, Mental Illness) जैसी समस्याएं ना हो। आइए अब जानते हैं बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) किस तरह से काम करती है।

बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids)

कैसे काम करती है बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी? (Cognitive Behavioral Therapy for kids)

बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) आमतौर पर किसी केरगिवर, पेरेंट या मेंटोर के जरिए दी जाती है। इसमें स्ट्रक्चरल अप्रोच का सहारा लिया जाता है, जिसमें अलग-अलग सेशन के दौरान बच्चों की नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदलने की कोशिश की जाती है। अलग-अलग बच्चों में उनकी जरूरतों के मुताबिक कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी के सेशन निर्धारित किए जाते हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) टॉक थेरिपी मानी जाती है, जिसमें बच्चों को अलग-अलग तकनीक के जरिए अप्रोच किया जाता है। इसके जरिए बच्चों को सेशन दिए जाते हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति बेहतर बन सके।

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इसके साथ ही यदि बच्चे की मानसिक स्थिति पर जरूरत से ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ा है, तो बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) के साथ-साथ उन्हें मेडिकेशन भी दी जा सकती है। उन्हें किस तरह की मेडिकेशन दी जानी चाहिए, यह उनके थैरेपिस्ट तय करते हैं, इसलिए किसी भी तरह की मेडिसिन बच्चों को डॉक्टर की सलाह के बगैर नहीं देना चाहिए। आइए जानते हैं बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) के अंतर्गत किस तरह की टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है।

  • प्ले थेरिपी : बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) के अंतर्गत प्ले थेरिपी बेहद आसान टेक्निक मानी जाती है। इसमें आर्ट और क्राफ्ट के जरिए रोलप्ले का सहारा लिया जाता है और बच्चों की समस्याओं को समझ कर उन्हें सुलझाने का प्रयत्न किया जाता है। इससे बच्चे आसानी से एंगेज हो सकते हैं।

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  • ट्रॉमा फोकस सीबीटी : बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) के अंतर्गत ट्रॉमा फोकस सीबीटी इस्तेमाल तक किया जाता है। जब बच्चा किसी तरह के ट्रॉमेटिक इवेंट से प्रभावित हुआ हो, ऐसे में उसके बिहेवियर पर ध्यान देते हुए उसके समस्या को सुलझाया जा सकता है।
  • मॉडलिंग : बच्चों में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी के अंतर्गत ये एक ऐसी तकनीक मानी जाती है, जिसमें किसी व्यक्ति को मेंटोर के तौर पर पेश किया जाता है। जिस से प्रभावित होकर बच्चा खुद में बदलाव लाने की कोशिश करता है।
  • रिस्ट्रक्चरिंग : बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) के अंतर्गत स्ट्रक्चरिंग एक खास टेक्निक मानी जाती है। इसमें बच्चों के नकारात्मक विचारों को समझकर उन्हें सकारात्मक विचारों में बदलने की कोशिश की जाती है। इससे बच्चे में सेल्फ कॉन्फिडेंस का निर्माण होता है।

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  • एक्स्पोज़र : बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) के अंतर्गत एक्स्पोज़र ऐसी टेक्निक मानी जाती है, जिसमें बच्चों को उन समस्याओं के सामने धीरे-धीरे लाया जाता है, जिससे उनकी एंग्जायटी ट्रिगर होती है। इसके बाद उस समस्या को समझ कर उसे सुलझाने का प्रयत्न किया जाता है।

बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) अलग अलग तरह से इस्तेमाल की जा सकती है, जिसमें इंडिविजुअली, पैरंट – चाइल्ड, फ़ैमिली और ग्रुप सीबीटी का प्रयोग किया जाता है।

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बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy) की मदद से कई समस्याओं को ठीक करने में मदद मिल सकती हैं, जिसमें अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी), एंग्जायटी और मूड डिसऑर्डर जैसी समस्याओं में मदद मिलती है। बच्चों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरिपी (Cognitive Behavioral Therapy for kids) अपने आप में एक बेहतरीन थेरिपी मानी जाती है। इससे बच्चों की इमोशनल हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ भी बेहतर बनती है, जिससे उनका विकास बेहतर रूप से हो सकता है।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/10/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड