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कैसे हैंडल करें किशोरों का मूड स्विंग और सिबलिंग फाइटिंग?

कैसे हैंडल करें किशोरों का मूड स्विंग और सिबलिंग फाइटिंग?

पेरेंट्स का बच्चों के जीवन और करियर को लेकर नजरिया आज बदला है। नए पेरेंट्स बच्चों के करियर को लेकर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा अवेयर हुए हैं, लेकिन सभी पॉसिबल तरीकों को अपनाने के बावजूद भी बच्चों में मूड स्विंग की शिकायतें बढ़ी हैं। एक बच्चे का उदासी की भावनाओं को लगातार महसूस करना उसके शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा बन सकता है।

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कैसे पहचानें बच्चों के बदलते मिजाज को?

कई मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जहां पहले बच्चों में हाॅर्मोनल बदलाव 13-14 वर्ष में होते थे, अब यह बदलाव 10-12 साल के बच्चों में देखा गया है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सीमा हिंगोरानी कहती हैं : बच्चों को मशीन बना दिया गया है। बच्चे क्लास, और ट्यूशन में इतना उलझा हुआ है कि वह रुकने का नाम ही नहीं लेती। वह जान ही नहीं पाता कि, बॉडी और माइंड में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं? गुस्सा करना इनकी आदत जैसी होने लगती है। फैमिली एक्टिविटीज में कमी के कारण बच्चों में मूड स्विंग करना आम हो गया है।

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बच्चों में मूड स्विंग को कैसे पहचानें?

ज्यादातर सभी पेरेंट्स की जिंदगी में वो पल आता है जब उनका बच्चा मूडी और चिड़चिड़ा बिहेव करने लगता है। तब आप सोचते होंगे आपका बच्चा ऐसे क्यों कर रहा है? क्या हम एक अच्छे पेरेंट्स नहीं है जो अपने बच्चे को हैंडल नहीं कर पा रहे हैं? इसे कैसे ठीक करें? सबसे पहले आपको अपने बच्चे के बिहेवियर को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। बच्चों में मूड स्विंग्स होना नॉर्मल है। पेरेंट्स को इस बात को समझना चाहिए कि हर दिन बच्चे के पास कई सारे काम होते हैं। स्कूल जाना, ट्यूश्न जाना, होमवर्क करना, एग्जाम की तैयारी, दोस्तों के साथ लड़ाई आदि।

जब बच्चे की ग्रोथ होती है तो उसमें मूड स्विंग्स होना आम बात है। इसका कोई इलाज नहीं है। आखिरकार वो बच्चे हैं। वह इमोश्नल भाषा को नहीं जानते हैं। उन्हें नहीं मालूम होता कि वे किन चीजों से गुजर रहे हैं और वे अपनी भावनाओं को कैसे वयक्त करें। आइए सबसे पहले जानते है बच्चे के मूड स्विंग को पहचानने के टिप्स…

ये हैं आसान तरीके :

सभी बच्चों में मूड स्विंग के दौरान अलग रिएक्शन होता है। कुछ बच्चे इसकी वजह से ज्यादा गुस्सा दिखाते हैं तो वहीं कुछ बच्चे पहले से ज्यादा चिड़चिड़े दिखते हैं। कई बच्चे खाना-पीना कम कर देते हैं, तो बहुत से बच्चे घंटों नहाने की आदत के शिकार हो जाते हैं। कई बच्चे लोगों से मिलना-जुलना छोड़ने लगते हैं। यह एक बहुत बड़े संकेत की ओर इशारा करता है कि बच्चों में मूड स्विंग ने जगह बनाना शुरू कर दिया है।

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बच्चों में मूड स्विंग: ऐसे करें सामना

  • अपने बच्चे को समझें: जब बच्चे मूड स्विंग को लेकर परेशान हों तब आपको अपने बच्चों के शरीर में आ रहे बदलाव को समझने की कोशिश करना चाहिए। बच्चे के स्वभाव में आ रहे बदलाव के कारण को समझें। कभी भी उनके मूड स्विंग्स के कारण उन पर चिल्लाए नहीं। उन्हें स्पोर्ट करें। अपने बच्चे से बात करें कि वो किन चीजों से गुजर रहे हैं। हालांकि उन पर ज्यादा दबाव न बनाएं। यदि वो अपनी परेशानी साझा नहीं करना चाहते तो उन्हें बताएं कि आप उनके लिए हमेशा हैं। उन्हें समझाएं कि वे कभी भी अपनी परेशानी आपके साथ साझा कर सकते हैं।
  • निराश न हों: बच्चे के मूड स्विंग और गुस्से को देखकर कई बार आप निराश हो सकते हैं। ऐसा होना लाजमी है। लेकिन आप अकेले ऐसे पेरेंट्स नहीं है जो इसका सामना कर रहे हैं। आप दूसरे पेरेंट्स से बात कर सकते हैं। उनके साथ अपने एक्सपीरिएंस शेयर कर सकते हैं। जब आप दूसरे पेरेंट्स के अनुभव जानंगें, तो इससे आप अच्छा महसूस करेंगे।
  • बच्चों पर अपनी आकांक्षाओं का बोझ अभी से न डालें, बच्चे हर चीज में उतने होशियार नहीं होते, जितना कि बड़े चीजों को समझते हैं।
  • बच्चों में हो रहे हार्मोनल चेंज पर पैनी नजर बनाए रखें और उनसे बहुत सॉफ्ट्ली पेश आएं। ऐसी स्थिति होने पर जितनी ज्यादा हो सके उनसे बात करनी चाहिए।
  • कभी-कभी बच्चे आपसे बात नहीं करना चाहते तो उन्हें ज्यादा परेशान न करें। हर समय उन्हें कुछ सिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जितना अधिक हो सके बच्चों से सहानभूति बनाए रखें, गुस्सा करने की जरूरत नहीं है। उन्हें डांटने की बजाए उनसे प्यार से ट्रीट करें।
  • आपके सवाल का जवाब दें, तो उन्हें बीच में टोकें भी न करें। जब बच्चा जवाब दे रहा हो तो उनको ध्यान से सुनें।
  • मूड स्विंग के दौरान बच्चे के डाइट से किसी तरह का समझौता नहीं करें। हेल्दी और पौष्टिक खाना खिलाएं। फल, और अंडे रेगुलर बेसिस पर खिलाने से उन्हें नेगेटिविटी से लड़ने की ताकत मिलेगी। एक बार में खिलाने से बेहतर है कि उनके खानों को बारी-बारी बांटकर खिलाएं।
  • जब आपके बच्चे को मूड स्विंग हो रहे हैं तो कई बार आप अपना आपा खो सकते हैं। आप उन पर गुस्सा कर सकती हैं, लेकिन इससे कोई हल नहीं निकलेगा। क्योकि आप उन पर गुस्सा करेंगी या सुनाएंगी तो आप उन्हें खुद से ओर दूर कर लेंगी। इसलिए खुद को शांत रखने की कोशिश करें और बच्चे को प्यार से हैंडल करें।
  • बच्चे के साथ खेलें: जब बच्चे का मूड खराब होता है तो उसके साथ उसके पसंदीदा गेम्स खेलें। ऐसा करके आप बच्चे को शांत कर पाएंगे। इसके साथ ही आप दोनों में बॉन्डिंग अच्छी होगी।
  • बच्चे के लिए घर पर अच्छा माहौल बनाकर रखें:
  • सबसे जरूरी घर के माहौल को पॉजिटिव बनाए रहना है। घर के अंदर और बाहर पॉजिटिविटी बनाए रखें। बच्चों के सामने ऐसी कोई चीज न करें, जिनसे उन्हें अकेलापन महसूस हो सकता है। किसी भी कीमत पर उन्हें अकेलापन नहीं महसूस होने दें। बच्चे के लिए घर में पॉजिटिव माहौल बनाएं। एक ऐसा कॉर्नर नाएं जहां जब वह किसी बात को लेकर परेशान हो तो खुद के साथ समय बिता सके। जैसे उनके रूम के एक कोने में चेयर टेबल, किताबें और इंडोर प्लांट्स लगा दें। इसके साथ ही आप म्यूजिक सिस्टम भी रख सकते हैं।

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बच्चे में मूड स्विंग का ध्यान रखते समय आपको अपनी सीमा मालूम होनी चाहिए। आपको बच्चे को समझने की जरूरत है, लेकिन आपको अपनी सीमा भी पता होनी चाहिए। कई बार बच्चे यह टेस्ट करने कि कोशिश करते हैं कि वें कितनी दूर जा सकते हैं। हमारी प्रतिक्रिया उन्हें इस बात का इशारा देती है कि उन्हें कितनी दूर जाना चाहिए। आपको खुद में यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि आप किस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त कर सकते हैं और अपने निर्णयों पर हमेशा टिके रहें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr. Abhishek Kanade के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 06/11/2019
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