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सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स बच्चाें के लिए क्यों जरूरी है, जानिए यहां....

सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स बच्चाें के लिए क्यों जरूरी है, जानिए यहां....

बच्चे एक कच्चे मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें जैसा ढ़ाला जाएगा, वो वैसे ही होते जाएंगे। आज हम यहां बात करेंगे सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स की, जो बच्चे के अच्छे व्यवहार में बहुत अहम रोल निभाता है। कई बार ऐसा होता है कि पेरेंट्स बच्चे के व्यवहार को समझ नहीं पाते हैं या अचानक से बच्चे के व्यवहार में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, जिसमें उसका शांत रहना और चिड़चिड़ापन जैसा व्यवहार भी शामिल है। तो ऐसे में सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स (self regulation skills) बच्चों के व्यवहार को समझने और उसमें सुधार लाने में काफी प्रभावकारी है। तो आइए जानते हैं कि सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स (self regulation skills) क्या है?

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सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स (self regulation skills) क्या है?

कई बार बच्चे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते हैं, उन्हें समझ नहीं आता है कि कैसे करें, तो ऐसे में सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स काफी प्रभावकारी है। सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स बच्चे के व्यवहार और भावनाओं या चीजों के प्रति अपनी प्रतिक्रियाओं को समझने और व्यक्त करने में मदद करता है। खासतौर उन बच्चों के लिए, जो:

सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स में बच्चा यह सिखता है कि वो अन्य लोगों के साथ कैसे व्यवहार करे और जुडेंद्ध

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सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स क्यों महत्वपूर्ण है (Why self regulation skills are important)?

जैसे-जैसे आपका बच्चा बढ़ता है, उनके अच्छे विकास में सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स मदद करता है:

  • सेल्फ रेगुलेशन स्किल्सआपके बच्चे को क्लास में बैठने और वहां जो पढ़ाया जा रहा है, उसे सुनने की क्षमता काे बढ़ाता है।
  • सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स बच्चे को अपने गुस्से को नियंत्रित करने की क्षमता देता है
  • सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स आपके बच्चे को खेल और बातचीत के माध्यम से और भावनाओं को उचित तरीके से व्यक्त करने की क्षमता देता है।
  • यह आपको बच्चे को सही निर्णय लेने में मदद करता है।

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सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स कैसे और कब विकसित होता है (How and when self regulation skills are developed)?

सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स तब शुरू होता है, जब बच्चा पूर्वस्कूली वर्षों में सबसे अधिक विकसित होता है, लेकिन यह वयस्कता में भी विकसित होता रहता है। यह स्किल्स बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है, उदाहरण के लिए, बच्चे में इससे धैर्य बढ़ता है, जैसे कि यदि वो पहले हर छोटी-छोटी बात के लिए रोता या जिद्द अगर करता है,तो धीरे-धीरे उसमें समझ खुद ही आ जाएगी। इसके अलावा, जैसे कि अक्सर बच्चे भोजन और खिलौनों के लिए धैर्य नहीं रख पाते हैं, लेकिन जैसे-जैसे वो इसे समझने लगते हैं, उनके अंदर धैर्य आने लगता है और बच्चा अपनी उम्र के अनुसार समझदार बनने लगते हैं। बच्चा इससे बहुत कुछ सिखता है इस स्किल्स से। इसके अलावा, स्कूली उम्र के बच्चे अपनी इच्छाओं और जरूरतों को नियंत्रित करने, दूसरे लोगों के दृष्टिकोण की कल्पना करने और स्थिति को समझने की भी कोशिश करते हैं।

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बच्चों और किशोरों को सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स सीखने और अभ्यास करने में मदद करना (Helping children and adolescents learn and practice self-regulation)

यहां कुछ व्यावहारिक तरीके दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर बच्चे सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स को सिखने में मदद कर सकते हैं:

  • पेरेंट्स बच्चों को समझाएं कि वो अपनी भवनाओं को समझने और दूसरों को समझाने के लिए बेहतर कोशिश करें।
  • टॉडलर्स के लिए शांत करने वाले सिकल्स पैटर्न का उपयोग करें। इसके बारे में अधिक जानें और काउंसलर की मदद लें। प्रीस्कूलर और स्कूली उम्र के बच्चों के लिए शांत वातावरण के बारे में समझाएं।
  • चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए योजना बनाएं बनाना बच्चे को सिखाएं यानि कि वो अपनी उम्र के अनुसार सिचुएशन को हैंडल करना सिखें।
  • समस्या-समाधान और कठिन परिस्थितियों पर बातचीत से हल निकल सकता है, साथ ही स्किल्स और भावनाएं भी किशोरों को शामिल करें।
  • अपने बच्चे की प्रशंसा करें जब वे आत्म-नियमन दिखाते हैं या किसी अपनी उम्र के अनुसार किसी मुश्किल सिचुएशन को हैंडल करते हैं।

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सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स के साथ समस्याएं (Problems with self-regulation)

समय-समय पर, अलग-अलग चीजें आपके बच्चे की आत्म-नियमन की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसके लिए पेरेंट्स को भी कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। कई चीजें बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं। शुरुआत में हो सकता है कि बच्चे इसे मेंटली स्वीकार नहीं कर पाएं, लेकिन धीरे-धीरे वो इसे समझने लगेंगे। हो सकता है कि बच्चा थकान, बीमारी और आपके बच्चे की दिनचर्या में बदलाव सभी आपके बच्चे की प्रतिक्रियाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। कई बच्चों के लिए काफी मुश्किल होता है, वो इसे स्वीकार नहीं पाते हैं, उन्हें बदलाव को आदत को धीरे-धीरे स्वीकार करना होगा। जब बच्चा इसे पूरी तरह से स्वीकार लेता है, तो फिर सब सही हो जाता है। यह सिकल्स बच्चे की लाइफ के लिए अच्छा है। हो सकता है कि शुरूआती दौर में पेरेंट्स को भी बच्चे के साथ कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ऐसे में पेरेंट्स को भी धैर्य रखने की आवश्यकता होती है। सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स बच्चे के विकास में काफी प्रभावकारी है, केवल छोटे में ही नहीं, बल्कि पूरी लाइफ उनके काम आती है। जो बच्चे मेंटली अपने गुस्से पर भी काबू नहीं पा पाते हैं, वो आदत भी बच्चे की सही हो जाती है। इसके अलावा, यदि आपको इस स्किल्स को लेकर गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, तो ऐसे में बच्चे के लिए आप काउंसलर से मिल सकते हैं। इससे आपको बच्चे को यह सिकल्स समझाने में काफी आसानी होगी।

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यसेल्फ रेगुलेशन स्किल्स के बारे में आपने जाना यहां, यह पेरेंटिंग के सफर में काफी मददगार हो सकता है। बच्चों के लिए यह काफी प्रभावकारी होता है। इसलिए भी जरूरी है कि आप बच्चों को इसके बारे में पेरेंट्स को बताना और समझाना चाहिए। ताकि बच्चे जरूरत पड़ने पर बच्चे इसे असानी से स्वीकार कर पाएं। सेल्फ रेगुलेशन स्किल्स की अधिक जानकारी के लिए आप चाइल्ड काउंसलर से संपर्क करें, ऐसा तब करें, जब आपको लगे कि स्थिति गंभीर हो रही है और बच्चे को इसकी जरूरत है। इसी के साथ ही पेरेंट्स भी कुछ बातों का ध्यान रखें और अलर्ट रहें।

 

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/12/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड