Diabetes and ultrasonic lipolysis: क्या डायबिटीज में वेट लॉस करना है आसान?

    Diabetes and ultrasonic lipolysis: क्या डायबिटीज में वेट लॉस करना है आसान?

    शरीर का बढ़ता वजन भविष्य में होने वाली शारीरिक परेशानियों एवं गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करता है। देखा जाए तो आज के इस बदलते लाइफस्टाइल में हर कोई फिट रहना चाहता है, लेकिन बदलते वक्त के साथ-साथ लोगों के खानपान का तरीका और लाइफस्टाइल भी कहीं ना कहीं बदलती जा रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है वजन को संतुलित रखना इसलिए आज के इस आर्टिकल में डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे।

    • डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस क्या है?
    • क्या हैं अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस के फायदे?
    • शरीर के कौन-कौन से हिस्से पर अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस की जा सकती है?
    • अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस के दौरान किन-किन बातों को ध्यान रखना आवश्यक है?
    • अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस कौन-कौन से हेल्थ चेकअप रिपोर्ट्स आवश्यक होते हैं?
    • अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस प्रोसेस क्या है?

    चलिए अब एक एक कर डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) क्या है?

    सबसे पहले जानते हैं डायबिटीज के बारे में-

    डायबिटीज (Diabetes) क्या है?

    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis)

    डायबिटीज (Diabetes) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बॉडी में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। डायबिटीज दो अलग-अलग तरह के होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) में पेशेंट की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) कमजोर पड़ने लगती है और इंसुलिन (Insulin) का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। ज्यादातर लोग डायबिटीज के इस प्रकार से प्रभावित होते हैं। वहीं टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) में शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के साथ कोई रिएक्शन नहीं देती हैं। हाय ब्लड शुगर वाले मरीजों को आमतौर पर बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है और उन्हें जल्दी-जल्दी भूख और प्यास लगती है। डायबिटीज के लक्षणों को समझेंगे, लेकिन उससे पहले डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) क्या है यह जान लेते हैं।

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    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Ultrasonic lipolysis) क्या है?

    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis)

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस वजन कम करने का एक तरीका है। अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस की मदद से बॉडी के एक्स्ट्रा वेट को कम करने में मदद मिल सकती है। इस वेट लॉस तकनीक की मदद से शरीर के बाहरी फैट और शरीर के अंदर जमा होने वाले एक्स्ट्रा फैट को कम किया जा सकता है। अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस एक तरह की कॉस्मेटिक सर्जरी है। यूनाइटेड स्टेट्स (US) में अल्ट्रासोनिक लिपॉलिसिस वेट लॉस के लिए काफी लोकप्रिय है। अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस की मदद से शरीर के उस हिस्से से वजन कम किया जा सकता है जहां चर्बी ज्यादा हो। डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) के बारे में इस आर्टिकल में और ज्यादा आगे समझेंगे की अल्ट्रासोनिक लिपॉलिसिस के फायदे क्या है और इससे नुकसान क्या हो सकते हैं।

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    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis): क्या हैं अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस के फायदे?

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस के फायदे निम्नलिखित हैं। जैसे:

    • इंजेक्शन या सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है।
    • दर्द नहीं होता है।
    • बॉडी स्ट्रक्चर बेहतर होती है।
    • एक्स्ट्रा फैट को कम किया जाता है।
    • मसल्स को टोन करने में मदद मिलती है।
    • बॉडी का शेप बेहतर होता है।

    इन फायदों की वजह से अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस प्रक्रिया को और एडवांस बनाया जा रहा है। वहीं नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार शरीर का बढ़ता वजन डायबिटीज (Diabetes), कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (cardiovascular disease), स्ट्रोक (Stroke) एवं पैरालिसिस (Paralysis) का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए वजन को संतुलित रखना बेहद जरूरी है। इसलिए डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) की चर्चा एकसाथ होती है।

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    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस: शरीर के कौन-कौन से हिस्से पर अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस की जा सकती है?

    अल्ट्रासोनिक लिपॉलिसिस शरीर के निम्नलिखित हिस्सों पर की जा सकती है। जैसे:

    • कमर (Waist)
    • पेट (Stomach)
    • जांघ (Thigh)
    • कुल्हें (Hips)
    • नितंब (Ass)
    • बांह का ऊपरी हिस्सा (Upper arms)

    दरअसल इन ऊपर बताये शारीरिक अंगों में फैट ज्यादा बनते हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पेशेंट की हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखते हुए अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस की जाती है।

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    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis): किन बातों को ध्यान रखना आवश्यक है?

    अल्ट्रासोनिक लिपॉलिसिस के पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान बेहद जरूरी है। जैसे:

    • अगर आप किसी हेल्थ कंडिशन (Health condition) से पीड़ित हैं, तो इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।
    • अगर आपको एलर्जी (Allergy) की समस्या है, तो इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।
    • अगर आप किसी दवाओं (Medication) का सेवन करते हैं, तो इसकी जानकारी अपने हेल्थ एक्सपर्ट को जरूर दें।

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस कौन-कौन से हेल्थ चेकअप रिपोर्ट्स आवश्यक होते हैं?

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस के पहले निम्नलिखित हेल्थ चेकअप रिपोर्ट्स आवश्यक माने जाते हैं। जैसे:

    • एक्स-रे (X-Ray) रिपोर्ट
    • इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम (Electrocardiogram) रिपोर्ट

    इन दोनों रिपोर्ट्स के अलावा डॉक्टर पेशेंट से उनके हेल्थ कंडिशन से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं।

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    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Ultrasonic lipolysis) के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

    अगर आप अल्ट्रासोनिक लिपुलेख करवाने जा रहे हैं तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें जैसे

    1. एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन ना करें
    2. स्मोकिंग (Smoking) ना करें
    3. अगर आप किसी सप्लीमेंट (Supplement) का सेवन करते हैं, तो उसका सेवन भी बंद कर दें।
    4. अगर आप किसी हर्बल सप्लिमेंट्स (Herbal supplements) का सेवन करते हैं, तो उनका भी सेवन बंद कर दें।
    5. एस्प्रिन (Aspirin) या नॉट स्टेरॉइड्स एंटी इन्फ्लामेट्री (Non Steroid Anti-inflammatory) ड्रग्स का सेवन ना करें।

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस से पहले इन ऊपर बताई गईं 5 बातों का ध्यान अवश्य रखें, डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) के बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी प्राप्त करें।

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    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस प्रोसेस क्या है? (Process of Ultrasonic lipolysis)

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस प्रोसेस के दौरान पेशंट के चर्बी वाली जगह पर एक विशेष प्रकार की उपकरण से इस प्रक्रिया की शुरुआत होती है। अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस अल्ट्रासाउंड प्रोसेस की तरह है। इस दौरान चर्बी वाले एरिया पर एक जेल अप्लाई की जाती है और फिर फैट कम करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस पेशेंट की हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर शुरू की जाती है। क्योंकि पेशेंट के बॉडी स्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर इसके अलग-अलग सेशन होते हैं। आप डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) के बारे में डॉक्टर से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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    स्वस्थ्य रहने के लिए नियमित योग (Yoga) करें। योग आपके मन और तन दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक है। योग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और योग करने का सही तरीका जानिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक में।

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    डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis): इन बातों का रखें ध्यान!

    अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस करवाने के बाद निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे:

    • अगर आप एक्सरसाइज (Exercise) करते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर फिर एक्सरसाइज करें।
    • एल्कोहॉल (Alcohol) या स्मोकिंग (Smoking) से दूर रहें।
    • डॉक्टर द्वारा अगर कोई दवा प्रिस्क्राइब (Prescribed medication) की जाती है, तो उनका सेवन समय पर करें।
    • आरामदायक कपड़े पहनें।
    • वजन ना उठायें।
    • रिलैक्स (Relax) करें।

    नोट: अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस की जितनी सेशन आपको लेने की सलाह दी गई है, उसे समय-समय पर पूरा करें। वहीं अगर आपको अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस के बाद कोई शारीरिक परेशानी महसूस होती है, तो अपने डॉक्टर से इस बारे में जरूर बात करें।

    अगर आप डायबिटीज और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस (Diabetes and ultrasonic lipolysis) से जुड़ी किसी तरह की कोई जानकारी पाना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब देंगे। हालांकि अगर आप डायबिटीज की समस्या से परेशान हैं और अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस करवाना चाहते हैं, तो डॉक्टर से कंसल्टेशन के बाद ही आपको अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस करवाना चाहिए। क्योंकि डॉक्टर ब्लड शुगर की समस्या को ध्यान में रखकर अल्ट्रासोनिक लिपोलिसिस करवाने की सलाह दे सकते हैं।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 23/12/2021 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड