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सिंगल पेरेंट्स बच्चे की परवरिश के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

सिंगल पेरेंट्स बच्चे की परवरिश के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

आज के दौर में बहुत से ऐसे सिंगल पेरेंट्स हैं, जो अपने बच्चे की अकेले परवरिश कर रहे हैं। अब के समय में ​सिंगल पेरेंटिंग में अधिकतर उन लोगों की संख्या ज्यादा है, जो लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे, तलाकशुदा हैं या जिन्हें शादी न कर के सिंगल पेरेंट्स ही रहना है। सिंगल पेरेंटिंग आज के समय में आम बात है।

ये पहले जहां बड़े शहरों तक ही सीमित थी, अब कई छोटे शहरों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। ‘सिंगल पेरेंटिंग कल्चर’ युवा वर्ग में बहुत प्रचलित है। सामान्य रूप से ये किसी व्यक्ति का अपना नजरिया है। बच्चों की परवरिश अकेले करना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन इस तरह की पेरेंटिंग में समस्याएं बढ़ जाती हैं।

सिंगल पेरेंटिंग के दौरान न करें ये गलतियां

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बच्चे की हर मांग को पूरा न करें

किसी भी तरह से बच्चों को जिद्दी होने से बचाएं। बच्चों को हर चीज उसकी मांग से पूरा कर देना बच्चे को जिद्दी बना सकता है। बच्चे की हर मांग पूरी करने से अच्छा यह है कि, पहले मांगें मानने या मना करने से पहले उसकी आवश्यकता की जरूरत को समझें। बच्चों को छोटी उम्र से ही घर के रूल्स एंड रेग्यूलेशन समझा दें। ये सब कुछ आप अकेले ही कर रहे हैं।

और पढ़ें – बच्चों को अनुशासन कैसे सिखाएं?

बच्चों के उम्मीद बस आप हैं, बातों को इग्नोर न करें

आप सिंगल पेरेंट हैं, इसलिए आपकी बच्चों के प्रति जिम्मेदारियां भी ज्यादा बढ़ी हैं। बच्चों को अधिक से अधिक समय दें और उनके साथ कुछ अच्छा समय भी बीताएं। ऐसा करने से बच्चे आपकी निगरानी में भी रहेंगे और करीब भी। बच्चों से उनके दोस्तों के बारे में बात करें, इनसे आपको बच्चों के दोस्त के बारे में बच्चे अपने खाली वक्त में दोस्तों के साथ क्या करता है, जान सकते हैं।

मदद लेने से परहेज न करें

इस बात की आप गांठ बांध लें कि आप बच्चों से जुड़ी हर काम आप ‘अकेले कर सकते हैं’ पर इसके अलावा भी सोचना चाहिए। आसपास के लोगों से जरूरत पड़ने पर मदद मांगे। कई ऐसे लोग हैं, जो आपकी और आपके बच्चे की मदद करना चाहते हैं। आप अपने बच्चे के परवरिश में अपने वरिष्ठ जनों से मदद की उम्मीद रख सकते हैं।

और पढ़ें – जानें बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार सेक्स एजुकेशन कैसे दें

बच्चे से झूठ न बोलें

सभी सिंगल पेरेंट्स अपने बच्चों से काफी झूठ बोलते हैं, ताकि उन्हें कोई तकलीफ न हो। अपने तलाक के बारे में या बच्चे के पापा/मम्मी के बारे में या फिर कुछ और बातों के बारे में जरूर बताएं। इससे आपका बच्चा आपसे जुड़ेगा और आपकी भावनाओं को समझेगा। अगर आप बच्चे से झूठ बोलेंगे और बच्चे को बाद में सच्चाई पता चलेगी तो उसे तकलीफ होगी। ऐसा भी हो सकता है कि बच्चा आप पर फिर भरोसा न कर सके।

और पढ़ें – पेरेंटिंग का तरीका बच्चे पर क्या प्रभाव डालता है? जानें अपने पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में

सिंगल पेरेंटिंग के दौरान इन बातों का भी रखें ध्यान:

बच्चे को ज्यादा से ज्यादा प्यार करें और उसकी सराहना करें

सिंगल पेरेंट होना कोई आसान बात नहीं है, लेकिन यह जितना मुश्किल आपके लिए होता है उतना ही बच्चे के लिए भी हो सकता है। बच्चों को अक्सर दूसरे बच्चों के माता-पिता देखकर उदासी की भावना महसूस हो सकती है। ऐसे में उन्हें दोगुना प्यार करने की जरूरत पड़ सकती है।

दरअसल सिंगल पेरेंट चाइल्ड की सोच सामान्य बच्चों से अलग होती है। उसे तौहफा, महंगी चीजें या महंगे रेस्टोरेंट जाने से ज्यादा खुशी आपके प्यार और अटेंशन से मिलती है। ऐसे बच्चों को अकेला महसूस न हो इसके लिए आप हर समय उसका ध्यान रखें और उनकी हर बात को सुनें।

बच्चे को खुश रखने के लिए उसके साथ वॉक पर जाएं, उसकी मनपसंद खाने की डिश बनाएं और जब कभी आपका बच्चा कोई अच्छा कार्य करे तो उसकी सराहना करें।

आभार प्रकट करना सिखाएं

सिंगल पेरेंटिंग में पले चाइल्ड अक्सर गुसैल या बुरे व्यवहार वाले व्यक्ति हो जाते हैं। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि आपकी परवरिश में कोई कमी हो बल्कि ऐसा अधिक प्यार दिखाने या दूसरे पेरेंट की कमी के कारण होता है।

बच्चा खुद को हर समय अकेला महसूस करने लगता है जिसकी वजह से वह समाज के साथ घुल मिल नहीं पाता है। सभी बच्चे अपने माता -पिता से पैसों या घूमने की डिमांड करते हैं, लेकिन सिंगल पेरेंट चाइल्ड के अकेलेपन के कारण उसका घूमने या खर्चा करने का अधिक मन कर सकता है। ऐसा वह अपना मन बहलाने के लिए भी कर सकते हैं।

बच्चों को इस बात का एहसास दिलाना बेहद जरूरी होता है कि उनके पास जो कुछ है उन्हें उसका आभारी होना चाहिए। क्योंकि दुनियाभर में ऐसे कई बच्चे हैं जिनके पास न तो रहने के लिए घर है, खाने के लिए खाना और न ही माता-पिता हैं।

बच्चे को सिखाएं की वह जीवन में कितना खुशनसीब है जो उसके पास ये सब है। जीवन में मिली वस्तुओं के प्रति आभारी होना बेहद आवश्यक होता है नहीं तो बच्चा अहंकारी बन सकता है।

सिंगल पेरेंटिंग में खुद को भी दें समय

आप अपने लिए वक्त निकालें। आप जॉब या घर के कामों में ही इतना उलझे रहते हैं कि बच्चों की जरूरतें पूरी करने के चक्कर में खुद को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर बच्चे की परवरिश मां और पिता दोनों कर रहे हो तब भी ये बात सामने आती हैं, लेकिन सिंगल पेरेंट्स के मामले में यह अधिक देखने मिलता है। बच्चों की परवरिश के बीच आप खुद का भी ध्यान रखें। बच्चों के साथ-साथ अपने भी खाने-पीने और तमाम चीजों का टाइम-टेबल बनाएं। ऐसे में खुद को समय दें और खुद की सरहाना करें की आपने जीवन में कितना कुछ किया है और आप अपने बच्चे की देखभाल के लिए जितनी हो सके उतनी कोशिश कर रहे हैं।

आप चाहें तो दूसरे सिंगल पेरेंट्स के साथ दोस्ती कर सकते हैं। ऐसे में आपको अपनी लाइफ से कुछ समय के लिए ब्रेक भी मिल जाएगा और आप सिंगल पेरेंटिंग के बारे में भी नई चीजें सीख या सीखा पाएंगे।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और सिंगल पेरेंटिंग से संबंधित जरूरी जानकारियां आपको मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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सूत्र

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14 Helpful Tips for Single Parents: How to Stay Sane While Doing it All/https://www.lifehack.org/816205/single-parent/Accessed on 11/08/2020

Single parenting/https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/HealthyLiving/single-parenting/Accessed on 11/08/2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 06/10/2019
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