आईबीडी, क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या है अंतर, जानिए यहां

    आईबीडी, क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस में क्या है अंतर, जानिए यहां

    क्रोहन और यूसी दोनों को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा असामान्य प्रतिक्रिया द्वारा चिह्नित किया जाता है, और वे कुछ लक्षण साझा कर सकते हैं। IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) समझना बहुत जरूरी है। क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस इम्यून सिस्टम द्वारा एब्नॉर्मल रिस्पान्स के कारण पैदा होने वाली परेशानिया हैं और इनके कारण कुछ लक्षण भी दिखाई पड़ते हैं, लेकिन तीनों ही समस्याओं में कुछ अंतर होता है। तीनों कंडिशन की लोकेशन अलग होती है। तीनों ही कंडिशन में कुछ समानताएं और कुछ विभिन्नताएं भी होती हैं। आइए इस आर्टिकल के माध्यम से IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) के बारे में जानें।

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    IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC)

    IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर

    IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) जानने के लिए आपको तीनों में अंतर समझना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं सबसे पहले जानते हैं इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory bowel disease) के बारे में।

    इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory bowel disease)

    इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory bowel disease) किस कारण से होती है, इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं मिल पाई है। आईबीडी का मुख्य कारण क्या है, इस बारे में कोई एक बात कहना सही नहीं होगा। ऐसा माना जाता है कि गट बैक्टीरिया में कमी होने के कारण आईडी की समस्या हो सकती है। वहीं जिसकी फैमिली हिस्ट्री में आईबीडी के पेशेंट्स होते हैं, उन्हें भी यह बीमारी होने की अधिक संभावना होती है। जिन लोगों को आईबीडी की समस्या हो जाती है, उनका इम्यून सिस्टम शरीर की रक्षा करने के बजाय शरीर पर ही वार करने लगता है। आईबीडी की समस्या में पाचन तंत्र में सूजन की समस्या शुरू हो जाती है और सूजन की वजह से डायजेशन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है।

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    इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज के अंतर्गत ही अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis) और क्रोहन रोग (Crohn’s disease) की परेशानी शुरू हो जाती है। इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज के कारण एक या दो नहीं बल्कि कई हो सकते हैं। पेट दर्द, डायरिया या आंत से जुड़ी परेशानी होने की वजह से इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। वहीं कुछ लोगों में इस बीमारी का कारण अनुवांशिक होता है। ये बात भी सामने आई है कि वैक्सीनेशन, एंटीबायोटिक या फिर ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स भी कई बार इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज का कारण बन जाते हैं। IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) जानने से पहले इन्फ्लामेटरी बाउल डिजीज के लक्षणों के बारे में जानें।

    आईबीडी के कई रूपों के लिए, कोई इलाज नहीं होता है। बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। ये लाइफलॉन्ग डिजीज है, जो कभी कम हो जाती है तो कभी बढ़ जाती है।

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    क्रोहन डिजीज (Crohn’s disease)

    क्रोहन डिजीज इंटेस्टाइन या आंतों से संबंधित बीमारी है। क्रोहन डिजीज (Crohn’s disease) के कारण इंटेस्टाइन में इन्फ्लामेशन और पेन शुरू हो जाता है। आंतों की वॉल या दीवार मोटी हो जाती है और साथ ही पाचन के समय समस्या पैदा होने लगती है। इस कारण से खाने से न्यूट्रिएंट्स का अवशोषण नहीं हो पाता हैं। इस बीमारी के कारण पेट दर्द, वेट का घटना (weight loss), डायरिया (Diarrhea) आदि समस्या पैदा हो जाती है। अगर मेडिसिन से यह बीमारी ठीक नहीं होती है, तो डॉक्टर सर्जरी करवाने की सलाह भी दे सकते हैं। वायरस या बैक्टीरिया क्रोहन रोग (Crohn’s Disease) का कारण हो सकता है। क्रोहन उन लोगों में अधिक देखा जाता है, जिनकी फैमिली हिस्ट्री में ये बीमारी हो चुकी हो। कुछ मेडिसिंस के साथ ही स्मोकिंग और रिफाइंड, हाय फैट वाले खाद्य पदार्थों को आहार में लेने से भी इस बीमारी की आशंका बढ़ जाती है।

    यह बीमारी त्वचा, आंखों, जोड़ों और लिवर को भी प्रभावित कर सकती है। चूंकि भोजन के बाद लक्षण आमतौर पर बिगड़ जाते हैं, इसलिए बीमार व्यक्ति अक्सर भोजन से बचता है और वजन कम हो जाता है। IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) के बारे में जानने से पहले ये जरूर जान लें कि तीनों ही कंडीशन में पेशेंट का वजन तेजी से कम होता है।

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    अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis) क्या है?

    अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या लार्ज इंटेस्टाइन में होती है। इस बीमारी के कारण डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है। आतों में जलन की समस्या पैदा हो जाती है और साथ ही डाइजेस्टिव सिस्टम की लाइनिंग में अल्सर की समस्या भी हो जाती है। यह बीमारी भी जेनेटिक या अनुवांशिक हो सकती है। अगर समय पर ट्रीटमेंट न तो अल्सर में पस के साथ ही ब्लीडिंग की समस्या भी शुरू हो जाती है। इसके लक्षण में पेट में दर्द, लूजमोशन, स्टूल के दौरान खून का आना, बार-बार मोशन का एहसास, थकान, वजन कम होना, बुखार आदि लक्षण दिखने लगते हैं। तीनों कंडीशन के बारे में जानने के बाद IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) के रूप में आपको बीमारियों के लक्षण एक जैसे लग रहे होंगे लेकिन ये भिन्न हैं।

    लेफ्ट-साइड कोलाइटिस (Left-sided colitis): इस प्रकार से कोलेन और रेक्टम में प्रभाव पड़ता है।
    अल्सरेटिव प्रोक्टाइटिस (Ulcerative proctitis): इसे अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis) का माइल्डेस्ट फॉम कहा जाता है। ये केवल रेक्टम को प्रभावित करता है।
    एक्सटेंसिव कोलाइटिस (Extensive colitis): ये अल्सरेटिव कोलाइटिस पूरे कोलन को प्रभावित करता है।

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    क्रोहन के लिए उपयोग की जाने वाली सभी दवाएं अक्सर अल्सरेटिव कोलाइटिस के लिए भी उपयोग की जाती हैं। सर्जरी, हालांकि, अल्सरेटिव कोलाइटिस में अधिक बार उपयोग की जाती है। आईबीडी के कारण टिशू में निशान पैदा होता है और साथ कोलन कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) के संबंध में आप डॉक्टर से भी अधिक जानकारी ले सकते हैं।

    किसी भी बीमारी को समय पर डायग्नोज करने के बाद अगर उसका ट्रीटमेंट करा लिया जाए, तो भविष्य में बड़ी समस्या या खतरे से बचा जा सकता है। अगर आपको भी पेट में किसी भी प्रकार की समस्या महसूस होती है, तो आपको बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। डॉक्टर आपको जो भी मेडिसिंस लेने की सलाह दें, उसे समय पर लें। अगर जरूरत पड़ती है, तो डॉक्टर की भी सलाह ले सकते हैं। आप अपने खानपान में बदलाव करके और साथ ही लाइफस्टाइल में परिवर्तन करके इन रोगों को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

    इस आर्टिकल में हमने आपको IBD क्रोहन और अल्सरेटिव कोलाइटिस में अंतर (Difference Between Crohn’s Disease, IBD And UC) को लेकर जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/01/2022 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड