इसोफेजियल वर्सिस पेट या पाचन संबंधित समस्या है। इसमें गले और पेट को जोड़ने वाली नली में खून की नसें बढ़ जाती हैं। इसोफेजियल वर्सिस अक्सर लिवर डिजीज के साथ होता है। इसोफेजियल वर्सिस तब होता है जब लिवर में थक्के या स्कार टिश्यू के द्वारा खून की नस ब्लॉक हो जाती है। इस ब्लॉकेज के कारण आस पास की नसें जो ज्यादा खून नहीं प्रवाहित कर पाती हैं, उनमें खून ज्यादा मात्रा में भरने लगता है। जिससे खून की नसें फट सकती हैं। इससे आपकी जान भी जा सकती है। दवाओं और मेडिकल प्रक्रियाओं के द्वारा होने वाले ब्लीडिंग को रोका जाता है।

इसोफेजियल वर्सिस होना कितना सामान्य है, इससे जुड़ी जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।
इसोफेजियल वर्सिस का कोई मुख्य लक्षण नहीं है कि जिससे पता चल सके कि नसों के फटने से ब्लीडिंग हो रही है या नहीं। इसके अलावा ब्लीडिंग होने के कुछ सामान्य लक्षण सामने आ जाते हैं-
आपके डॉक्टर इसोफेजियल वर्सिस की आशंका तब भी जताते हैं, जब लिवर डिजीज के साथ निम्न लक्षण सामने आते हैं :
इसके अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
अगर आप में ऊपर बताए गए लक्षण सामने आ रहे हैं तो डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही इसोफेजियल वर्सिस से संबंधित किसी भी तरह के सवाल या दुविधा को डॉक्टर से जरूर पूछ लें। क्योंकि हर किसी का शरीर इसोफेजियल वर्सिस के लिए अलग-अलग रिएक्ट करता है।
लिवर एक ऐसा अंग है जो खून से टॉक्सिन को अलग करने का काम करता है। इसलिए पोर्टल वेन लिवर तक खून को पहुंचाने का काम करता है। इसोफेजियल वर्सिस अक्सर उन्ही लोगों में पाया जाता है, जिन्हें लिवर की बीमारी हो। जब रक्त का संचार कम हो जाता है तो लिवर डिजीज हो जाता है।
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हाई ब्लड प्रेशर में पोर्टल वेन ज्यादा दबाव के साथ खून को पास करता है। जिससे नसों की पतली दीवारों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। जिस कारण से खून की नसें सूज जाती हैं। वर्सिस पेट के ऊपरी हिस्से में खून की छोटी-छोटी नसें विकसित कर देता है। जब खून की नसों पर ज्यादा दबाव पड़ता है तो वे फट जाती हैं या उनमें से खून रिसने लगता है। अनियंत्रित ब्लीडिंग होने से शॉक या मौत भी हो सकती है।
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हर किसी को इसोफेजियल वर्सिस में ब्लीडिंग नहीं होती है। लेकिन निम्न मामलों में जोखिम बढ़ जाता है :
यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
अगर आपको सिरोसिस है तो डॉक्टर इसोफेजियल वर्सिस की जांच कराने के लिए कहेंगे। इसोफेजियल वर्सिस का पता निम्न तरह के टेस्ट से लगाया जा सकता है :
इसोफेजियल वर्सिस का प्राथमिक इलाज है खून को बहने से रोकना। क्योंकि इसोफेजियल वर्सिस में ब्लीडिंग होना जानलेवा साबित हो सकती है। इस समस्या का इलाज निम्न तरह से हो सकता है।
ब्लड प्रेशर को लो रख कर ब्लीडिंग होने के रिस्क को कम किया जा सकता है। बीटा ब्लॉकर दवाओं से ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है। जैसे-प्रोप्रानोलॉल और नैडोलॉल।
ब्लीडिंग के रिस्क को कम करने के लिए डॉक्टर बैंड लाइगेशन करते हैं। इसमें डॉक्टर खून की नसों को इलास्टिक बैंड से बांध देते हैं। जिससे ब्लीडिंग का रिस्क कम हो जाता है। इलास्टिक बैंड को बांधने के लिए एंडोस्कोप का प्रयोग किया जाता है।
लगातार ब्लीडिंग होने से आपकी जान को खतरा हो सकता है। अगर ब्लीडिंग हो रही है तो उसे निम्न तरीकों से रोका जा सकता है:
इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
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Current Version
28/05/2020
Shayali Rekha द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Ankita mishra