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Abdominal MRI Scan: जानिए कब पड़ सकती है पेट के MRI स्कैन की जरूरत!

    Abdominal MRI Scan: जानिए कब पड़ सकती है पेट के MRI स्कैन की जरूरत!

    डायजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी कई तरह की तकलीफें होती हैं। कुछ तकलीफों को दूर करने के लिए इलाज की जरूरत पड़ती है, तो कुछ अपने आप दो से तीन दिनों में ठीक हो जाती है। वैसे अगर कुछ केसेस में इलाज की जरूरत पड़ती है, तो डॉक्टर एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन (Abdominal MRI Scan) की सलाह देते हैं। पेट का MRI स्कैन कब और किन स्थितियों में किया जाता है, इसे समझने की कोशिश करते हैं।

    • एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन क्या है?
    • पेट का MRI स्कैन कब किया जा सकता है?
    • एब्डॉमिनल MRI स्कैन के रिस्क फैक्टर क्या हो सकते हैं?
    • पेट का MRI स्कैन करवाने से पहले मरीज को क्या करना चाहिए?
    • एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन कैसे किया जाता है?
    • एब्डॉमिनल MRI स्कैन के बाद क्या होता है?

    चलिए अब पेट की जांच से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

    एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन (Abdominal MRI Scan) क्या है?

    एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन (Abdominal MRI Scan)

    एमआरआई जिसे मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) कहते हैं। एब्डॉमिनल एमआरआई के दौरान किसी प्रकार बॉडी में कट नहीं लगाया जाता है। इस दौरान मेग्नेट एवं रेडियो वेव्स की मदद से बॉडी की अंदर इमेज क्रिएट की जाती है। मेग्नेट एवं रेडियो वेव्स पेट के अंदर क्रॉस-सेक्शनल इमेज बनती है, जिससे डॉक्टर टिशू या ऑर्गन में बिना किसी सर्जरी के एब्नॉर्मलटिस को देख पाने में सक्षम होते हैं। एमआरआई की मदद से बोन एवं सॉफ्ट टिशू को भी आसानी से एग्जामिन करने में मदद मिलती है। एमआरआई का विकल्प सीटी स्कैन के बदले अपनाया जाता है। वहीं एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन की जरूरत एक्स-रे (X-ray), सीटी स्कैन (CT scan) या ब्लड टेस्ट (Blood test) के बाद जरूरत पड़ सकती है।

    पेट का MRI स्कैन कब किया जा सकता है? (When Abdominal MRI Scan is performed)

    एब्डॉमिनल MRI स्कैन कई कारणों पर निर्भर है। एब्डॉमिनल MRI स्कैन विशेष रूप से करवाने की सलाह डॉक्टर देते हैं जब फिजिकली एग्जामिन करने के बाद पेट से जुड़ी परेशानियों की जानकारी नहीं मिल पाती है। इसलिए निम्नलिखित स्थितियों में पेट का MRI स्कैन किया जा सकता है। जैसे:

    • ब्लड फ्लो (Blood flow) की जानकारी के लिए।
    • ब्लड वेसेल्स (Blood vessels) की जानकारी के लिए।
    • दर्द (Pain) या सूजन (Swelling) से जुड़ी जानकारी के लिए।
    • लिम्फ नॉड्स (Lymph nodes) की जानकारी के लिए।

    इन ऊपर बताई स्थितियों में पेट का MRI स्कैन किया जा सकता है, जिससे पेशेंट की शरीर के अंदुरुनी हिस्से में हो रही तकलीफ या गतिविधि की जानकारी मिल सके।

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    एब्डॉमिनल MRI स्कैन के रिस्क फैक्टर क्या हो सकते हैं? (Risk factor of Abdominal MRI Scan)

    यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस (U.S. Department of Health and Human Services) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार MRI स्कैन के दौरान मेग्नेटिक वेव्स एवं रेडियो वेव्स से अभी तक किसी तरह के साइड इफेक्ट्स नहीं हुए हैं। इसलिए एब्डॉमिनल MRI स्कैन से किसी तरह का खतरा नहीं हो सकता है।

    अगर मरीज को एंग्जाइटी जैसी तकलीफ रहती है, तो हो सकता है कि एब्डॉमिनल MRI स्कैन के दौरान अनकंफर्टेबल महसूस करें।

    पेट का MRI स्कैन करवाने से पहले मरीज को क्या करना चाहिए? (Why Abdominal MRI Scan is performed)

    पेट का MRI स्कैन करवाने से पहले किसी भी तरह का मेटल अगर पेशेंट के बॉडी में है, तो उसे हटा देना चाहिए। वहीं अगर पेशेंट के हार्ट में पेसमेकर लगाई गई है, तो इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। वहीं निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे:

    • आर्टिफिसियल हार्ट वॉल्व्स (Artificial heart valves)
    • क्लिप या पिन का इस्तेमाल ना करें।
    • स्टेंट्स ना हो।
    • गोल्ड, सिल्वर या किसी भी तरह के मेटल का सामान न पहनें।

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    एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन कैसे किया जाता है? (How Abdominal MRI Scan is performed)

    पेट का MRI स्कैन करने से दौरान किसी भी तरह पीड़ा नहीं होती है। जैसे ही पेशेंट को MRI स्कैन वाले रूम में प्रवेश करवाया जाता है, तो एक बेंच पर उन्हें लिटा दिया जाता है। इस बेंच को रिमोट की सहायता से टेक्निकल टीम ऑपरेट करती है। हालांकि MRI स्कैनिंग प्रोसेस (MRI Scanning process) के दौरान मरीज जिस बेंच पर लेटे होते हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान मूव किया जाता है, तो शायद परेशान हो जाएं लेकिन इस दौरान घबराने या परेशान होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इस दौरान मशीन की आवाज से शायद सिर्फ पेशेंट को परेशानी हो सकती है, लेकिन बढ़ती टेक्नोलॉजी के कारण कुछ हॉस्पिटल पेशेंट को ईयर फोन जैसी सुविधा देते हैं जिससे मशीन की आवाज कम आये। एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन के दौरान पेशेंट से माइक्रोफोन की सहायता से बात करते रहते हैं। एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन (Abdominal MRI Scan) के वक्त कुछ सेकेण्ड के लिए सांस रोकने के लिए भी डॉक्टर कह सकते हैं शरीर के अंदुरुनी गतिविधियों को आसानी से मॉनिटर किया जा सके और इमेज लिया जा सके।

    अगर आपके मन में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन (Abdominal MRI Scan) से क्या तकलीफ हो सकती है, तो एमआरआई स्कैनिंग के दौरान निकलने वाली वेव्स रेडियो वेव्स की तरह होती है जिसका शरीर पर कोई नुकसान नहीं होता है। एब्डॉमिनल एमआरआई स्कैन की पूरी प्रक्रिया में 30 मिनट से 90 मिनट का वक्त लग सकता है।

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    एब्डॉमिनल MRI स्कैन के बाद क्या होता है? (After Abdominal MRI Scan)

    एब्डॉमिनल MRI स्कैन के बाद रेडियोलॉजिस्ट इमेजिंग रिपोर्ट्स को मॉनिटर करते हैं। एब्डॉमिनल MRI स्कैन के बाद पेशेंट घर जा सकते हैं। इसके बाद रेडियोलॉजिस्ट इसपर एक रिपोर्ट तैयार कर डॉक्टर को देते हैं।

    टेस्ट रिपोर्ट्स को ध्यान में रखकर और पेशेंट की हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखते हुए इलाज शुरू की जाती है।

    नोट: किसी भी डिजीज के डायग्नॉसिस के पहले डॉक्टर से अच्छे तरह से टेस्ट के पहले बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी जरूर लें। वहीं अगर आप किसी भी हेल्थ कंडिशन (Health condition) के शिकार हैं या किसी भी तरह की दवा या सप्लिमेंट (Supplements) का सेवन की जानकारी डॉक्टर से जरूर दें।

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    डायजेशन से जुड़ी हुई परेशानी एवं कई अन्य परेशानियों के इलाज से एब्डॉमिनल MRI स्कैन (Abdominal MRI Scan) किया जाता है। एब्डॉमिनल MRI स्कैन (Abdominal MRI Scan) के बाद ही डायजेशन से जुड़ी हुई तकलीफों को दूर करने में मदद मिल सकती है। अगर आप एब्डॉमिनल MRI स्कैन (Abdominal MRI Scan) से जुड़े किसी तरह के सवालों का जवाब जानना चाहते हैं, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज पर अपना सवाल पूछ सकते हैं। हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देने की कोशिश करेंगे।

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/04/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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