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एचआईवी को रोकने के लिए वैक्सीन की जरूरत क्यों है?

एचआईवी को रोकने के लिए वैक्सीन की जरूरत क्यों है?

किसी भी संक्रमण को होने से पहले ही रोकने के लिए वैक्सीन की जरूरत पड़ती है। वर्तमान समय में कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने दिन-रात एक कर दिया है और कुछ को सफलता भी मिली है, हालांकि वैक्सीन सौ फीसदी कारगर होगी या नहीं इसके बारे में स्पष्ट तौर पर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। ब्रिटेन पहला देश बन गया है, जहां कोरोना का टीकाकरण शुरू हो चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि वैक्सीन की बदौलत कोरोना महामारी पर काबू पाय जा सकता है, तो क्या एचआईवी के लिए भी हम यह उम्मीद कर सकते हैं।

वैक्सीन क्या है और यह क्या काम करती है?

वैक्सीन को ‘शॉट’ या ‘इम्यूनाइजेशन’ भी कहा जाता है। यह एक ऐसा पदार्थ है, जो आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से पहचान करवाता है और बचाव भी करता है।

किसी संक्रमण के होने से पहले ही जो वैक्सीन दी जाती है उसे ‘प्रिवेंटिव वैक्सीन’ कहा जाता है और यह स्वस्थ इंसान को दी जाती है। यह आपके शरीर को खतरनाक वायरस और बैक्टेरिया से लड़ने के लिए तैयार करता है। इसका मतलब है कि वैक्सीन लगने के बाद भविष्य में जब आप उस वायरस/बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं, तो आप बीमार नहीं पड़ते हैं। प्रिवेंटिव वैक्सीन बड़े पैमाने पर पोलियो, चिकन पॉक्स, मिजल्स, रुबेला, एंफ्लूएंजा, हेपेटाइटिस ए और बी जैसी बीमारियों से बचाव के लिए दिया जाता है।

और पढ़ें: क्या ओरल सेक्स से एचआईवी का खतरा बढ़ जाता है? जानें सेफ ओरल सेक्स टिप्स

क्या एचआईवी से बचाव के लिए कोई वैक्सीन है?

विज्ञान और तकनीक की तमाम तरक्की के बावजूद आजतक एचआईवी इंफेक्शन की कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, वैज्ञानिक इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन दशकों बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिल पाई है। अभी एचआईवी पेशेंट के इजाल के लिए एंटी रेट्रोवायरल थेरिपी और दवाई़यों का उपयोग किया जा रहा है। जिससे उनकी समस्याओं को कुछ हद तक आगे बढ़ने से रोका जा रहा है, इससे उन्हें आराम भी मिल सके। लेकिन जब तक इसकी वैक्सीन नहीं आ जाती है, इससे बचाव मुश्किल है। वैक्सीन की पूरी उम्मीद थी, इस साल तक आ जाने की, लेकिन यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के कारण ये साल वैक्सीन आना संभव नहीं हो पाया।

यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के अनुसार

एड्स पर जारी यूनाइटेड नेशंस रिपोर्ट से पता चला है कि एचआईवी वैक्सीन के लिए साल 2020 के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था, उसे हासिल नहीं किया जा पाया रिपोर्ट ने इसके लिए कोविड -19 को जिम्मेवार माना है इस वजह से एंटीरेट्रोवायरल थेरिपी, दवाओं और सेवाओं के वितरण में दिक्कतें आ रही हैं ‘सैजिंग द मूमेंट’ नामक यह रिपोर्ट यूएनएड्स द्वारा प्रकाशित की गई है यूएनएड्स और डब्लूएचओ द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2000 से 2019 के बीच नए एचआईवी संक्रमणों में करीब 39 फीसदी मामलों में गिरावट आई है। जबकि इसी अवधि में एचआईवी संबंधित मौतों में भी 51 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है जिसमें एंटीरेट्रोवायरल थेरिपी और दवाओं का बहुत बड़ा योगदान है।

एंटीरेट्रोवाइरल थेरिपी के उपयोग से लगभग 1.5 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकी है। पर जिस तरह से कोरोनावायरस और उसके कारण हुए लॉकडाउन ने सब कुछ रोक दिया है, उससे जरूरतमंदों तक यह दवाएं और सेवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष करीब 3.8 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त थे, जबकि उनमें से करीब 1.26 करोड़ लोगों तक जरुरी दवा नहीं पहुंच पाई थी, जिसकी वजह से करीब 690,000 मरीजों की मौत हो गई थी फिलहाल एचआईवी के इलाज के लिए एंटी रेट्रोवायरल थेरिपी दवाईयों का उपयोग कुछ प्रीवेंटिव मेजर में किया जाता है। जो कुछ हद तक एचआईवी के असर को कम जरूर करता है, लेकिन इसे पूरी तरह से ठीक करने के लिए वैक्सीन की जरूरत है। वैक्सीन आने में इन आंकड़ाें में भी काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

और पढ़ें: एड्स के कारण दूसरे STD होने के जोखिम को कम करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

आखिर क्यों नहीं बन पाई वैक्सीन?

वैज्ञानिकों के सामने इस संक्रमण को लेकर कई तरह की चुनौतिया हैं, जो वैक्सीन की राह में रोड़ा बनी हुई हैं।

  • दरअसल, मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता एचआईवी वायरस के खिलाफ प्रतिक्रिया नहीं देती। यह मरीज के शरीर में इम्यून सिस्टम एंटीबॉडी उत्पन्न तो करता है, लेकिन वो सिर्फ बीमारी की रफ्तार को कम करता है, उसे रोक नहीं पाता है।
  • एचआईवी संक्रमण होने पर व्यक्ति का ठीक होना करीब-करीब नामुमकिन होती है। इसके प्रति इम्यून सिस्टम की कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखने के कारण ही वैज्ञानिकों के लिए वैक्सीन बनाना अभी तक संभव नहीं हो पाया है।
  • शरीर में एचआईवी संक्रमण लंबे समय तक फैलता रहता है और इस दौरान वायरस इंसान के डीएनए में छिपा रहता है। ऐसे में इंसान का शरीर उसे ढूंढ़कर नष्ट नहीं कर सकता और वैक्सीन के मामले में भी यही दिक्कत आती है।
  • अधिकांश वैक्सीन ऐसे वायरस से सुरक्षा करती है, जो शरीर में रेस्पिरेटरी और गैस्ट्रो-इंटसटाइनल सिस्टम के जरिए जाते हैं, जबकि एचआईवी का संक्रमण जननांग या ब्लड के जरिए फैलता है। इसलिए भी वैक्सीन बनाने में दिक्कतें आ रही हैं।
  • शुरुआत में जिस तरह कोरोना वायरस तेजी से रूप बदलकर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहा था कुछ ऐसा ही एचआईवी वायरस के साथ भी है। यह वायरस बहुत तेजी से रूप बदलता है, जिसकी वजह से वैक्सीन बनाना संभव नहीं हो पाया है।

और पढ़ें: WHO का डर: एचआईवी से होने वाली मौत का आंकड़ा न बढ़ा दे कोविड-19

कब हुई थी एचआईवी की पहचान?

1984 में पहली बार एचआईवी यानी ह्युमैन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस की पहचान की गई थी और तब से लेकर आज तक पिछले 36 सालों में इसकी रोकथाम के लिए वैक्सीन नहीं बन पाई है। यह वायरस अब तक दुनिया भर में लाखों लोगों को संक्रमित कर चुका है। 1990 से 2014 तक एचआईवी पीड़ित लोगों की संख्या 8 मिलियन से बढ़कर 36.9 मिलियन हो गई। जबकि यूएन एड्स 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 69 हजार लोगों की मौत एचआईवी के कारण हो चुकी है।

एचआईवी को रोकने के लिए वैक्सीन की जरूरत क्यों है?

भले ही एचआईवी की वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है, लेकिन वर्तमान में कुछ दवाओं की बदलौत एचआईवी पीड़ित पहले की मुकाबले अच्छी जिंदगी जी पाते हैं। कुछ जीवन रक्षक उपचार के साथ ही एचआईवी दवाएं (जिसे एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी या एआरटी कहा जाता है) मरीजों के स्वास्थ्य को ठीक रखती है। यदि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति वायरस के असर को कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का नियमित सेवन करता है, तो वह स्वस्थ रह सकता है और पार्टनर को भी संक्रमित करने का जोखिम नहीं रहता है।

एचआईवी संक्रमित ऐसे मरीज जो हाई रिस्क पर हैं उन्हें एचआईवी से बचाने के लिए प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीआरईपी) या एआरटी का उपयोग किया जा सकता है। फिर भी दुर्भाग्यवश अमेरिका में 2018 में 37,832 लोग एचआईवी से संक्रमित हुए और पूरी दुनिया में करीब 1.7 मिलियन लोग एचआईवी से संक्रमित हुए थे। यानी वैश्विक स्तर पर इस बीमारी की रोकथाम के लिए मजबूत उपकरण और ऐसी प्रणाली की जरूरत है। ऐसा सिर्फ एक कारगर वैक्सीन की बदौलत ही हो सकता है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर, सुरक्षित और किफायती तरीका है। चेचक और पोलियो की वैक्सीन की तरह ही प्रिवेंटिक एचआईवी वैक्सीन लाखों लोगों की जान बचा सकता है।

सुरक्षित, असरदार और किफायती वैक्सीन बनाने की दिशा में प्रयास जारी है और यदि ऐसा संभव हुआ तो एचआईवी/एड्स महामारी को खत्म किया जा सकता है।

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कैसे फैलता है एचआईवी?

एचआईवी/एड्स का संक्रमण आमतौर पर इन चार माध्यमों से फैलता है।

  • पीड़ित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने के कारण ये संक्रमण दूसरे व्यक्ति को भी हो सकता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के रक्त के जरिए ऐसा हो सकता है।
  • संक्रमित सुई के इस्तेमाल के कारण।
  • एचआईवी मां से उसके होने वाले बच्चे को संक्रमण हो सकता है।

एचआईवी के लक्षण

जरूरी नहीं है कि सभी संक्रमित व्यक्ति में तुरंत लक्षण नजर आए, लेकिन आमतौर पर एड्स के कुछ शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए, जैसे कि –

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एचआईवी से बचाव के तरीके

कोरोना वायरस की तरह ही वैक्सीन के अभाव में बचाव के लिए एहतियात ही एकमात्र तरीका है।

  • संक्रमित पार्टनर या व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध न बनाएं। यदि संबंध बना रहे हैं, तो हमेशा सावधानीपूर्वक कॉन्डोम का इस्तेमाल करें। एक से अधिक पार्टनर के साथ यौन संबंध न बनाएं।
  • मरीज को खून चढ़ाने से पहले डॉक्टर को इसकी जांच अच्छी तरह कर लेनी चाहिए, क्योंकि यदि किसी संक्रमित व्यक्ति का खून स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चला जाए तो वह भी संक्रमित हो जाएगा।
  • एक मरीज को लगाई गई सुई का उपयोग दूसरे के लिए नहीं करना चाहिए।
  • दाढ़ी बनवाते समय हमेशा नाई को हमेशा नया ब्लेड इस्तेमाल करने के लिए कहें।

एचआईवी की वैक्सीन इस साल आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन कोरोना महामारी के आगे कुछ भी संभव नहीं रहा है। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती है, इस वायरस से भी बचाव के लिए सतर्कता बहुत जरूरी है।

 

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 15/12/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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