Keratosis pilaris: कैराटोसिस पाईलारिस क्या है?

    Keratosis pilaris: कैराटोसिस पाईलारिस क्या है?

    कैराटोसिस पाईलारिस के बारें में जानें मूल बातें

    कैराटोसिस पाईलारिस क्या होता है?

    कैराटोसिस पाईलारिस एक ऐसी कंडीशन है जिसमें स्किन के ऊपर खुरदुरे पैच, सूखापन, छोटा उभार दिखाई देता है। आमतौर पर यह ऊपरी बांह, गाल, जांघ या नितंब में दिखाई पड़ सकते हैं। इसके कारण स्किन सैंडपेपर की तरह खुरदुरी महसूस होने लगती है। इस समस्या के कारण कभी-कभार जलन भी हो सकती है लेकिन इन पैच के कारण ज्यादा समस्या नहीं होती है। ये हल्के रंग के दिखाई देते हैं। कभी-कभार इनमें सूजन या लालिमा भी दिख सकती है। चेहरे पर इनके आने की संभावना कम ही रहती है।

    कितना सामान्य है कैराटोसिस पाईलारिस?

    कैराटोसिस पाईलारिस लगभग 50-80% तक किशोरों और करीब 40% तक वयस्कों को प्रभावित करता है। महिलाओं में इस बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। ये बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन, यंग ऐज में इसकी संभावना ज्यादा होती है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार ये गर्भावस्था के दौरान ये शिशु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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    जानें क्या हैं लक्षण

    क्या हैं कैराटोसिस पाईलारिस के लक्षण?

    ये हैं में के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे-

    • बांह, गाल, जांघ या नितंब में दर्दरहित ऊभार होना (छोटे-छोटे दाने आना)।
    • मौसम बदलने के साथ ही स्किन का सूखा और खुरदुरा हो जाना।
    • उभार की वजह से मांस (एक्स्ट्रा फैट) बाहर की तरफ दिखाई देना।

    एक रिसर्च के अनुसार 92 प्रतिशत लोगों में यह अपर आर्म्स में होता है।

    59 प्रतिशत लोगों के थाई (जांघ) में कैराटोसिस पाईलारिस की समस्या होती है।

    तकरीबन 30 प्रतिशत लोगों के बटक्स (नितंब) पर यह परेशानी होती है।

    वैसे इन लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। यदि आपको किसी प्रकार की समस्या हो तो अपने डॉक्टर से संर्पक करें।

    मुझे डॉक्टर से कब संर्पक करना चाहिए ?

    जब कभी भी आपको अपनी स्किन में किसी प्रकार का बदलाव महसूस हो तो आपको अपने डॉक्टर से संर्पक करना चाहिए। डॉक्टर स्किन में आ रहें बदलाव को देखकर जांच करेंगे और उसका निदान करेंगे।

    हर किसी का शरीर अलग होता है। इसलिए किसी भी प्रकार की समस्या के लिए डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा अगर निम्नलिखित परेशानी महसूस किया जाये तो –

    • त्वचा का गर्म रहना, बुखार आना या फिर दर्द होना। ये सभी परेशानी इंफेक्शन की ओर इशारा करती है।
    • क्रीम या ऑयल के सेवन के बावजूद खुजली की परेशानी होना
    • घरेलू उपचार के बाद भी यह परेशानी ठीक न होना।
    • कभी-कभी उल्टी आने की भी परेशानी हो सकती है।

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    जानें क्या है वजह

    कैराटोसिस पाईलारिस किस वजह से होता है?

    इसका मुख्य कारण कैराटिन प्रोटीन है। कैराटिन प्रोटीन स्किन को इंफेक्शन और हानिकार पदार्थों से बचाने का काम करता है। जब ये बनता है तो हेयर फॉलिकल के ओपनिंग पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं जिसकी वजह से यह बीमारी हो जाती है। कैराटिन क्यों बनती है इसके कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। ये जेनिटक डिजीज या स्किन प्राब्लम (एटोपिक डर्मेटिसस और एक्जिमा) की वजह से भी हो सकता है।

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    किस वजह से बढ़ सकता है कैराटोसिस पाईरिस

    कैराटोसिस पाईलारिस किस वजह से बढ़ सकता है?

    इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे-

    इन कारणों के अलावा अन्य कारण हो सकते हैं।

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    कैसे करें डॉयग्नोज ?

    दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है, अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

    कैराटोसिस पाईलारिस को डॉयग्नोज कैसे किया जाता है?

    कैराटोसिस पाईलारिस खतरनाक बीमारी नहीं है।अगर आपको स्किन संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है तो आप अपने डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर इंफेक्टेड एरिया को देखकर बिना किसी टेस्टिंग के डायग्नोस कर लेंगें।

    कैराटोसिस पाईलारिस का कैसे होता है इलाज ?

    कैराटोसिस पाईलारिस गंभीर बीमारी नहीं है। कोई भी ट्रीटमेंट इसमें पूरी तरह से प्रभावी नहीं है। कई बार ये अपने आप ही सही हो जाता है। इस बीमारी को ठीक करने के लिए प्रभावित जगह में प्रोडेक्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। कैराटोसिस पिलासिस के लिए मेडिकेटेड मॉस्चराइजिंग क्रीम का उपयोग भी किया जाता है। मेडिकेटेड क्रीम प्रयोग बंद करने से ये बीमारी वापस आ जाती है।

    डेड स्किन सेल्स को हटाने के लिए प्रयोग की जाने वाली क्रीम में अल्फा हाइड्राक्सी एसिड, लैक्टिक एडिड, सेलिसिलक एसिड और यूरिया होता है। छोटे बच्चों को इस प्रकार की क्रीम के उपयोग से बचना चाहिए। बच्चों में क्रीम की वजह से लालिमा और जलन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    • प्लग्ड फोलिकल्स से बचाने के लिए उपयोग की जाने वाली क्रीम में विटामिन-ए से बनाई जाती है। ये सेल टर्नओवर बढ़ाने के साथ ही प्लग्ड हेयर फॉलिकल से बचाती है। प्रेग्नेंट और नर्सिंग को इस क्रीम की सलाह नहीं दी जाती है।
    • कैराटोसिस पाईलारिस के इलाज के लिए लेजर ट्रीटमेंट का सहारा भी लिया जाता है। जब मास्चराइजर और क्रीम बेअसर होती हैं तो इस विधि का अपनाया जाता है। इस विधि से लालिमा को दूर किया जाता है।

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    कैसे करें उपचार

    लाइफस्टाइल चेंज या फिर घरेलू उपचार से कैसे करें कैराटोसिस पाईलारिस का उपचार ?

    जीवन शैली में बदलाव कर और घरेलू उपाय से इस बीमारी से राहत पाई जा सकती है।

    • नहाने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करें और हो सके तो कम नहाएं। स्किन ऑयल को हटने से बचाएं।
    • ऐसे साबुन का प्रयोग न करें जिससे स्किन का ऑयल निकल जाए और त्वचा ड्राई हो जाए। शरीर को रगड़ के न पोछें।
    • मॉश्चराइजर का प्रयोग करें जिससे शरीर में नमीं बनी रहे। दरअसल त्वचा को ड्राई होने से बचायें।
    • टाईट स्किन कपड़े पहने से बचना चाहिए। क्योंकि टाइट कपड़ों की वजह से स्किन पर ज्यादा घर्षण हो सकता है और परेशानी बढ़ सकती है।
    • नियमित रूप से नारियल तेल का इस्तेमाल करें। नारियल तेल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व त्वचा संबंधी परेशानी को दूर करने में लाभकारी होता है। इसके नियमित इस्तेमाल से कैराटोसिस पाईलारिस की समस्या भी ठीक हो सकती है।

    कैराटोसिस पाईलारिस को एलर्जी समझना गलत होगा लेकिन, इस वजह से एग्जिमा की समस्या हो सकती है। अगर आप कैराटोसिस पाईलारिस से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Dr Sharayu Maknikar


    Bhawana Awasthi द्वारा लिखित · अपडेटेड 06/07/2020

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