बेबी रैशेज: शिशु को रैशेज की समस्या से कैसे बचायें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अप्रैल 2, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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बच्चे के शरीर पर जरा-सी खरोंच आ जाये तो पेरेंट्स कितने परेशान हो जाते हैं। ऐसे में अगर बेबी रैशेज हो जाए तो माता-पिता कितने परेशान हो जाते हैं ये तो हम सभी अपने घर या आसपास देखते हैं। बच्चों के शरीर में होने वाले रैशेज किन कारणों से होते हैं और इससे आप अपने लाडले या लाडली को कैसे बचा सकती हैं इसके उपाय भी जानेंगे। बेबी रैशेज के साथ-साथ स्किन से जुड़ी कई अलग-अलग तरह की समस्याएं होती है।

किन कारणों से होते हैं बेबी रैशेज?

बेबी रैशेज के कई कारण हो सकते हैं। बच्चों या शिशु की त्वचा बेहद ही नाजुक होती है और इसके साथ ही शिशु की त्वचा सेंसेटिव भी होती है। इसलिए निम्नलिखित स्थिति में बेबी रैशेज का खतरा बना रहता है। जैसे:-

  • अत्यधिक मौसम का गर्म होना
  • बच्चे को एलर्जी होना
  • त्वचा में कपड़ों की वजह से घर्षण होना
  • अत्यधिक नमी होना
  • फ्रेग्नेंस (खुशबू)
  • लंबे समय तक डाइपर पहने रहना

इन ऊपर बताई गई स्थिति में बेबी रैशेज का खतरा बना रहता है। बेबी रैशेज शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकता है। जैसे:-

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बेबी रैशेज क्या अलग-अलग तरह के होते हैं?

शिशु में रैशेज अलग-अलग तरह के होते हैं:-

बेबी रैशेज अलग-अलग तरह के हो सकते हैं। क्योंकि बच्चे की स्किन सेंसेटिव होती है। इसलिए ऐसी स्थिति में विशेष ख्याल रखना चाहिए और बच्चों को अनजाने में भी ऐसे किसी भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जिससे उनको त्वचा संबंधी परेशानी हो।

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बेबी रैशेज का इलाज कैसे किया जाता है?

बेबी रैशेज अलग-अलग कारणों से होता है। इसलिए इसका इलाज भी अलग-अलग तरह से ही किया जाता है।

डायपर की वजह से बेबी रैशेज का ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है?

अगर आपके शिशु को डायपर एरिया में रैशेज हो रहा है, तो इसके लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे:-

  • समय-समय पर डायपर चेक करते रहें और उसे बदलते रहें।
  • बेबी रैशेज न हो इस लिए डॉक्टर की सलाह से जिंक ऑक्साइड वाले क्रीम का इस्तेमाल करें।
  • अगर आप शिशु को ब्रेस्ट मिल्क के अलावा फल, सब्जी या अन्य किसी खाद्य पदार्थों का सेवन करवाते हैं तो बच्चे को सिट्रस फ्रूट और टमाटर जैसे खाद्य पदार्थ कम दें।
  • रैशेज न हो इसलिए डायपर पहनाने के पहले और पहनाने के बाद भी अपने हाथ को अच्छी तरह से साफ करें।

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एग्जिमा की वजह से बेबी रैशेज का ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है?

एग्जिमा की वजह से बच्चों की त्वचा पर रैशेज होना सामान्य है। अगर परिवार में किसी को एग्जिमा की समस्या है या सेंसेटिव स्किन की समस्या है, तो ऐसी स्थिति में बेबी रैशज का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए पेरेंट्स को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे:-

  • बच्चे की त्वचा (पूरे शरीर) को साफ रखें।
  • बेबी क्रीम का इस्तेमाल करें (शिशु की त्वचा को मॉश्चाराइज करें)।
  • शिशु को रोज स्नान करवाएं।
  • शिशु की त्वचा को अच्छी तरह से देखें की कहीं कोई निशान तो नहीं है।
  • शिशु में होने वाली त्वचा संबंधी किसी भी परेशानी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह लें।

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डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

पेरेंट्स को निम्नलिखित स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जब:-

  1. फीवर- अगर शिशु को बुखार आने से रैशज हुआ है, तो ऐसा इंफेक्शन की वजह से होता है। ऐसे स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें।
  2. एक हफ्ते तक रैशेज रहना- अगर किसी शिशु को एक सप्ताह से अधिक समय तक रैशज रहता है और साथ में बच्चे को रैशेज की वजह से दर्द या जलन होता है, तो इसका घरेलू इलाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। 
  3. रैशेज बढ़ने लगे- शिशु की त्वचा पर हुए रैशेज अगर फैलने लगे या शिशु में कफ की समस्या, उल्टी होना, शिशु को घबराहट या सांस लेने से संबंधित परेशानी होने पर इसकी जानकारी डॉक्टर को दें।

इन सभी परेशानियों के साथ ही तेज बुखार होना, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, न्यूरोलॉजिकल परिवर्तन या मेनिन्जाइटिस की समस्या होने पर जल्द से जल्द हेल्थ एक्सपर्ट से संपर्क करें। 

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बेबी रैशेज को दूर करने के लिए क्या हैं घरेलू उपाय?

शिशु को रैशेज न हो इसलिए पेरेंट्स को शिशु की त्वचा का पूरा-पूरा ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ ही निम्नलिखित घरेलू उपाय किये जा सकते हैं। इन उपायों में शामिल है:-

  • शिशु को स्नान करवाने वाले पानी में ओटमील (दलिया मिलाएं और नहलाएं) मिलाएं और फिर स्नान करवाएं। ऐसा करने से डाइपर रैशेज या शरीर के किसी भी हिस्से पर रैशेज की वजह से होने वाले जलन को शांत करने और खुजली से राहत मिल सकती है। ओटमील में सैपोनिन होता है, जो बच्चे की त्वचा के रोमछिद्रों से मौजूद गंदगी को साफ करता है।
  • जैतून का तेल (Olive Oil) भी रैशेज को कम करने में सहायक होता है। आप इसे हल्के हाथों से रैशेज पर लगाएं। जैतून के तेल से बच्चे के शरीर को मसाज करने से बच्चे की बॉडी मॉइस्चराइज भी होती है और बेबी रैशेज का खतरा भी कम होता है। ऑलिव ऑयल रैशेज पर लगाने से रैशेज धीरे-धीरे ठीक हो सकते हैं। इससे रैशेज वाली जगहों पर जलन भी कम होती है।
  • नारियल का तेल स्किन के लिए सबसे सुरक्षित माना गया है क्योंकि यह एक प्राकृतिक उपचार है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल जैसे दोनों ही गुण होते हैं। बच्चो को रैशेज हो जाने पर नारियल का तेल लगा सकते हैं। इससे रैशेज ठीक हो सकते हैं।
  • बेबी रैशेज को दूर करने के लिए दही का इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल दही यीस्ट संक्रमण और माइक्रोबियल संक्रमण को बहुत जल्दी ठीक करता है, क्योंकि दही में प्रोबायोटिक्स और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यदि आपका बच्चा कुछ ठोस खाता है तो उसे खाने में दही भी जरूर दें। अगर नहीं, तो इंफेक्शन वाली जगह पर लगाकर हल्का सा दही लगाएं और थोड़ी देर बाद साफ कर दें। इससे रैशेस जल्दी ठीक हो जाएगा।

अगर आप बेबी रैशेज की वजह से परेशान हैं और इससे जुड़े किसी तरह के कोई भी सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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