मलेरिया में क्या खाएं और क्या नहीं?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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मलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जिससे कभी-कभी सभी को दो चार होना पड़ता है। मानसून और उसके बाद यह बीमारी चरम पर होती है, क्योंकि इस समय मच्छरों का आतंक सबसे ज्यादा होता है। मलेरिया फीमेल एनोफिलीस मच्छर (Female Anopheles mosquito) के काटने से होता है। मलेरिया पैरासाइट के कारण होता है जिनको मच्छर कैरी करते हैं। जो व्यक्ति पहले से ही मलेरिया से पीड़ित है, उन्हें काटकर मच्छर पैरासाइट को ऐसे व्यक्तियों तक पहुंचा देते हैं जो स्वस्थ होते हैं। इस प्रकार मलेरिया फैलता जाता है।

मलेरिया प्लासमोडियम पैरासाइट्स के कारण होता है। प्लास्मोडियम पैरासाइट्स के 100 से भी ज्यादा प्रकार होते हैं। ये पैरासाइट अलग-अलग स्पीड से खुद को रेप्लीकेट करते हैं, जिससे लक्षण तेजी से बढ़ने के साथ पीड़ित व्यक्ति कम समय में ही संक्रमित हो जाता है। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो मरीज की मौत तक हो सकती है। मलेरिया से पीड़ित होने पर व्यक्ति को ठंड के साथ तेज बुखार आता है। इसके साथ ही सिर और मांसपेशियों में दर्द, उल्टी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

मलेरिया पैरासाइट के चार प्रकार होते हैं।

  1. प्लास्मोडियम वाइवैक्स
  2. प्लास्मोडियम फैल्सिपैरम
  3. प्लास्मोडियम ओवेल
  4. प्लास्मोडियम मलेरी

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मलेरिया और डायट

मलेरिया से पीड़ित होने पर अगर आप अच्छी डायट अपनाते हैं, तो आप इस बीमारी से अच्छी तरह लड़ सकते हैं और रिकवरी कर सकते हैं। फूड बॉडी को पैरासाइट अटैक से लड़ने के लिए ईंधन प्रदान करते हैं। साथ ही हमारे इम्यून सिस्टम को हेल्दी रखने के लिए भी हेल्दी फूड्स बेहद जरूरी है। ये हमारे सिस्टम को अच्छी तरह काम करने योग्य बनाते हैं

जब हम बीमार होते हैं तो हमारा कुछ भी खाने का मन नहीं करता, लेकिन ये सही नहीं है। इससे बॉडी कमजोर हो सकती है। अगर आप मलेरिया से पीड़ित है तो आपको अपने खानपान को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। तो आइए जानते हैं मलेरिया डायट के बारे में।

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मलेरिया डायट में एनर्जी देने वाले फूड्स को शामिल करें

जब मरीज को मलेरिया होता है, तो बॉडी की कैलोरीज और न्यूट्रिशन की आवश्यकताएं बढ़ जाती हैं। इसे बीएमआर या बॉडी मेटाबोलिक रेट के रूप में जाना जाता है। साथ ही कैलोरी की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता शरीर के तापमान में वृद्धि पर निर्भर करती है।

ऐसे में हमें हाई कार्बोहाइड्रेड डायट को अपनाना चाहिए। इसको पचाने में ज्यादा समय नहीं लगता और एनर्जी भी तुरंत मिल जाती है। इसके लिए मलेरिया डायट में दाल चावल या खिचड़ी को अपनाना चाहिए। चावल आसानी से पच सकता है और तेजी से एनर्जी रिलीज करता है।

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मलेरिया डायट में इन फलों को करें शामिल

ताजे फल और सब्जियां मलेरिया पेशेंट के लिए बेहतरीन होते हैं। स्टडीज के अनुसार विटामिन सी और विटामिन ए रिच फ्रूट्स जैसे कि पपीता, अंगूर, बेरीज, संतरा मलेरिया से पीड़ित मरीज को डिटॉक्सीफाई करने के साथ ही इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही गाजर और चुकंदर को मलेरिया डायट में शामिल करना अच्छा होगा।

मलेरिया डायट में प्रोटीन इंटेक को होगा बढ़ाना

मलेरिया के दौरान भोजन में प्रोटीन का इंटेक बढ़ाना जरूरी है। मलेरिया डायट में हाई कार्बोहाइड्रेड और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने से बॉडी प्रोटीन का उपयोग टिशू रिपेयर में कर सकती है। प्रोटीन के लिए दाल, चिकन और अंडा खाया जा सकता है।

मलेरिया डायट में फैट्स पर रखें ध्यान

अगर आप मलेरिया से ग्रसित है, तो आपको फैट कंज्यूम करने से पहले थोड़ा ध्यान देना होगा। फैट्स बॉडी के लिए जरूरी है, लेकिन सीमित मात्रा में। मलेरिया डायट में क्रीम, मक्खन जैसे मिल्क प्रोडक्ट्स का उपयोग अपच और डायरिया का कारण बन सकता है। नट्स और सीड्स कई पोषक तत्वों के साथ ही हेल्दी फैट्स और प्रोटीन का सोर्स हैं। इन्हें डायट में शामिल किया जा सकता है। साथ ही इनमें फाइटोन्यूट्रिएंट्स भी पाए जाते हैं, जो कि इंफेक्शन से होने वाले एंटीऑक्सीडेंट स्ट्रेस से लड़ने में मदद करते हैं।

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पानी पीते रहें

फीवर होने पर भी 3-3.5 लीटर पानी पीना बॉडी को हाइड्रेड रखने के लिए जरूरी है। डीहाइड्रेशन आपकी स्थिति और अधिक खराब कर सकता है। इसके लिए आप ग्लूकोज वाटर, फलों का रस, नारियल पानी और इलेक्ट्रॉल पाउडर ले सकते हैं।

मलेरिया डायट से हटा दें इन चीजों

हाई फाइबर फूड

हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन इस समय मरीज के लिए सही नहीं होगा। इसलिए होल ग्रेन और ऐसी सब्जियां जिनमें फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है को इस समय अवॉइड करें। हाई फाइबर फूड गैस और अपच का कारण बन सकते हैं।

स्पाइसी फूड

मेलिरिया डायट में स्पाइसी फूड और सॉस की कोई जगह नहीं है। मलेरिया में अक्सर मुंह का स्वाद खराब हो जाता है, ऐसे में लोग स्पाइसी फूड खाने की डिमांड करते हैं जो कि सही नहीं है। बीमारी के समय पाचन तंत्र वैसे ही सुस्त पड़ जाता है। ऐसे में स्पाइसी फूड्स का सेवन पेट में जलन और गैस का कारण बन सकता है और डायजेशन को बिगाड़ सकता है।

जंक फूड

मलेरिया के दौरान जंक फूड खाने के बारे में तो सोचे भी नहीं। इस दौरान जंक फूड खाना आपकी स्थिति को बिगाड़ सकता है। जंक फूड नॉर्मल बॉडी के लिए भी अच्छा नहीं होता, ऐसे में बीमार बॉडी के लिए यह बुरा साबित हो सकता है। इसके साथ केक, पेस्ट्रीज, चिप्स, अचार आदि से दूरी बनाकर रखें।

मलेरिया डायट में कैफीन को अवॉयड करें

मलेरिया के दौरान अधिक मात्रा में कॉफी, चाय या किसी भी कैफीन युक्त ड्रिंक्स का सेवन करना डायजेस्टिव सिस्टम को खराब कर सकता है।

मलेरिया डायट से तो वाकिफ हो गए, चलिए अब जानते हैं मलेरिया से बचने के उपाय।

  • मच्छर ठहरे हुए पानी में प्रजनन करते हैं, यह आपके घर के पास का नाला, पड़ोस में गढ्ढे में भरा हुआ पानी या आपके घर के पास का छोटा तालाब हो सकता है। उन्हें बंद करवाएं या जितनी जल्दी हो सके सफाई करवाएं।
  • यहां तक कि गमलों, पक्षियों के खाने के लिए रखे बर्तन आदि में भी लंबे समय तक स्थिर पानी रहने नहीं देना चाहिए।
  • स्विमिंग पूल के पानी को भी सर्कुलेटेड और क्लोरीनयुक्त करने की आवश्यकता होती है। इसका विशेष ध्यान रखें।
  • यदि आप पानी की कमी के चलते घर में पानी स्टोर करते हैं, तो कंटेनर को बंद करें।
  • यदि आप मच्छर से ग्रस्त क्षेत्र में रहते हैं, तो अपनी खिड़कियों के लिए मच्छर स्क्रीन, जाल, फाइबर ग्लास और मच्छरों से बचाने वाली क्रीम का उपयोग करें।
  • बच्चे जब शाम के वक्त बाहर खेलने के लिए जाएं, तो उन्हें पूरी बाहों के कपड़े पहनाएं ताकि वे मच्छरों की चपेट में आने से बच सकें।
  • शाम को 6-8 के बीच में खिड़कियों को बंद करके रखें। यह मच्छरों के हमला करने का समय होता है।

इन उपायों को अपनाकर आप मच्छरों की चपेट में आने और मलेरिया से भी बच सकते हैं। उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और मलेरिया डायट से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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