वायु प्रदूषण बन सकता है डिप्रेशन का कारण!

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Update Date जून 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आप दुनिया के किसी भी कोने में रहते हो आपके कानों तक दिल्ली (Delhi) की पब्लिक हैल्थ इमरजेंसी ( Public Health Emergency) की खबर पहुंच ही गई होगी। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) को  स्मॉग (Smog) की मोटी परत ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है और यह बात अब यहीं तक सीमित नहीं है। दिल्ली- एनसीआर (Delhi-NCR) में रहने वालों को आंखों में जलन, गले में खराश और घुटन महसूस होने लगी है। वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, साथ ही यह गंभीर स्थिति में है। हैल्थ इमरजेंसी दिल्ली में पहली बार नहीं है। हर कोई दिल्ली की इस हैल्थ इमरजेंसी को लेकर परेशान है। सेहत खराब होने के साथ-साथ हैल्थ इमरजेंसी की वजह से लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।

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मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के खतरे

दिल्ली की हैल्थ इमरजेंसी का कारण वायु प्रदूषण है। वायु प्रदूषण सांस की बीमारी से लेकर दिल, दिमाग और यहां तक ​​कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। हवा के कणों में मौजूद टॉक्सिक पदार्थों को  कई उच्च स्तर के एक्यूट और क्रोनिक परेशानियों का कारण माना जाता है। हालांकि, हृदय रोगों और सांस की बीमारियों के लक्षणों के बढ़ते जोखिम के अलावा वायु प्रदूषकों का यह खतरनाक कॉकटेल आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है। हैल्थ इमरजेंसी घोषित करने के पीछे सरकार का कारण यह है कि लोग अपने स्वास्थ को लेकर ज्यादा सावधान रहें।

दमघोटु हवा का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

हैल्थ इमरजेंसी लागू करने के पीछे दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण था जिसकी वजह से लोगों को अलग-अलग तरह की स्वास्थ संबंधित परेशानियां हो सकती है। वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के संपर्क में आने से बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित करने और मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों को खराब करने के साथ जोड़ा गया है। खतरनाक वायु प्रदूषण शारीरिक विकास पर जितना प्रभाव डालता है, उसकी तुलना में कहीं ज्यादा नुकसान दिमाग को पहुंचाता है। वॉल्टर्स क्लूवर द्वारा लिपिपकॉट पोर्टफोलियो में प्रकाशित एक पत्रिका के अनुसार, किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य में हवा के कणों से होने वाले नुकसान की अधिक आशंका है।

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क्या है स्टडी

इस अध्ययन के दौरान 144 किशोरों को एक सोशियल स्ट्रेस टेस्ट दिया गया, जिसमें पांच मिनट का भाषण और एक गणित टेस्ट शामिल था। किशोरों की हृदय गति और अन्य शारीरिक प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने के बाद यह पाया गया कि तनाव के लिए एक हाई ऑटोनॉमिक रेस्पांस के साथ किशोरों में उनके घर के पास पीएम का स्तर 2.5 तक बढ़ गया था।

जबकि अध्ययन में प्रदूषित हवा और अधिक तनावों के बीच संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन यह इस तथ्य पर फिर से जोर देता है कि जहरीली हवा न्यूरोडेवलपमेंट और कॉग्नेटिव डेवलेपमेंट को भी नुकसान पहुंचा सकता है। दिल्ली में लागू कि गई हैल्थ इमरजेंसी के पीछे का एक और सच यह है कि प्रदूषण सीधे मानसिक स्वास्थ से जुड़ा हुआ है।

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वायु प्रदूषण हमें स्ट्रैस में डाल रहा

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने कौन सा न्यूज चैनल लगा रहे या कौन सा अखबार आप पढ़ने के लिए उठाते हैं, वे सारे ही इस वक्त वायु प्रदूषण के घातक स्तरों के प्रभाव से भरे हुए हैं। इसके अलावा, डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरत न हो, घर से बाहर जाने से बचें। दिल्ली में हैल्थ इमरजेंसी लागू करने के बाद लोगों को घर से ज्यादा बाहर निकलने के लिए मना किया गया है।

लोगों को बाहर काम करना बंद करने और एक्सरसाइज से बचने के लिए भी कहा गया है, जो सांस की बीमारियों का कारण हो सकता है।  सर्दियों के छोटे दिन, धुंए से भरा आसमान और हर जगह दमघोटू हवा की उपस्थिति किसी को भी तनाव में डालने और मूड खराब करने का कारण बन सकती है। दिल्ली में लागू हैल्थ इमरजेंसी के बाद खुली हवा में एक्सरसाइज करने के लिए भी मना किया गया जिससे लोग कम से कम हवा को महसूस करें। वायु प्रदूषण जहां स्ट्रेैस बढ़ा रहा वहीं हमारे आसपास का मीडिया इस पर अधिक फोकस कर रहा जिससे लोगों के दिमाग में केवल प्रदूषण और हैल्थ इमरजेंसी घूम रहा।

क्या वायु प्रदूषण आपको डिप्रेशन में डाल सकता है

2018 में प्रकाशित चीन के आंकड़ों के लिए ओशनेर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट है। उस डेटा के अनुसार PM2.5 से अधिक बढ़ने से 6.67 प्रतिशत मानसिक बीमारी (अवसाद सहित) होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए प्रदूषित हवा न केवल आपके फेफड़ों का दम घोट रही है, बल्कि यह आपके सोचने के तरीके को भी प्रभावित करती है। वायु प्रदूषण हमारे मानसिक स्वास्थ्य को कितना नुकसान पहुंचा रहा है, यह निर्धारित करने के लिए गहराई से शोध करने की सख्त जरूरत है। दिल्ली की हैल्थ इमरजेंसी सीधे आपके दिमाग से कैसे जुड़ी है इसके बारे में बताने के लिए यह शोध काफी है कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने से मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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क्या करें, क्या ना करें

अभी के लिए, प्रदूषित हवा और AQI अपडेट्स पर घबराने के बजाय, इस पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है कि क्या किया जाना चाहिए। कारपूलिंग से आप अपनी कार का उपयोग कम करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, अधिक से अधिक पेड़ लगाने के साथ ही कचरा जलाने से बचने की जरूरत है। ऐसा बहुत कुछ है जो व्यक्तिगत स्तर पर किया जा सकता है। आप अपने स्तर पर प्रदूषण को रोकने के लिए बहुत सी चीजें कर सकते हैं। अलग-अलग जगहों पर कचरा फेंकने से बचें और कचरे को जलाने से भी बचें। कोशिश करें कि कम दूरी के लिए कार या दोपहिया वाहन का प्रयोग ना करें और इसके बजाय पैदल चलकर अपना काम निपटाएं। कार पूलिंग के जरिए भी आप वातावरण को स्वच्छ बनाने में योगदान दे सकता हैं। इसलिए दिल्ली की हैल्थ इमरजेंसी में घबराने से बेहतर है अपनी तरफ से प्रदूषण कम करने की कोशिश कर सकते हैं।

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