इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन (Intestinal obstruction) का मतलब ही होता है आंतों में रुकावट। इसमें भोजन या तरल पदार्थ आपकी छोटी आंत या बड़ी आंत से होकर नहीं गुजर पाता है। इस बीमारी में भोजन या लिक्विड आपके आंतों में ही रुका रहता है। इसे बाउल ऑबस्ट्रक्शन भी कहते हैं।

इससे मल त्यागने और गैस पास करने में दिक्कत होती है। यह डायरिया का कारण भी बन सकता है। भोजन की रुकावट के कारण पेट में गैस्ट्रिक एसिड, गैस और एसिड बनता बनते रहते हैं। ऐसा होते रहने से पेट पर दबाव बढ़ता जाता है। आंतों में रुका हुआ भोजन और लिक्विड फूड पेट की गुहा में भी पहुंच जाते हैं। जो लगातार बैक्टीरिया फैलाते हैं। आगे चलकर इससे हालत गंभीर भी हाे जाती है।
यह बीमारी आम है या दुर्लभ, इस बारे में डॉक्टर आपको अच्छी सलाह दे सकते हैं। अगर डॉक्टर बीमारी का पता लगा लेते हैं तो यह कुछ समय तक रहने वाली समस्या है। इलाज होने पर ठीक हो सकती है।
इंटेस्टाइनल ऑब्सट्रक्शन यानी आंतों में रुकावट के सामान्य लक्षण हैं:

कुछ लक्षण अवरोध के स्थान और यह कितने समय से है इस पर निर्भर हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, उल्टी होने छोटी आंत में अवरोध का शुरुआती संकेत है, लेकिन यदि यह जारी रहता है, तो बड़ी आंत में रुकावट का भी संकेत हो सकता है। यदि अवरोध आंशिक है तो डायरिया हो सकता है, जबकि पूरी तरह से अवरोध होने पर गैस या मल त्याग नहीं किया जा सकता।
इंटेस्टाइल ऑब्स्ट्रक्शन (आंत में अवरोध) की वजह से एब्डॉमिनल कैविटी में गंभीर संक्रमण और सूजन हो सकता है, जिसे पेरिटोनिटिस कहा जाता है। यह तब होता है जब आपकी आंत का एक हिस्सा टूट गया हो। इसकी वजह से बुखार और पेट दर्द होता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है और तुरंत सर्जरी करनी पड़ सकती है।
हो सकता है कि कुछ लक्षण यहां नहीं दिए गए हों। यदि इन लक्षणों के अलावा आपको अन्य कोई लक्षण महसूस हो रहे हैं तो अपने डॉक्टर से मिलें। अगर आपने इस समस्या का शुरूआती दौर पर ध्यान दे दिया तो भविष्य में होने वाली गंभीर शारीरिक स्थित से आप बच सकते हैं।
यदि दिए गए लक्षणों में आप कुछ भी महसूस कर रहे हैं तो कृपया अपने डॉक्टर से बात करें। हर किसी का शरीर अलग तरह से कार्य करता है। इसलिए लक्षण दिखने पर अपने मन से कोई भी दवा ना लें।
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इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन (Intestinal obstruction) ज्यादातर वयस्कों को होता है। बच्चों में इस तरह की समस्या कम देखने को मिलती है। आंतों में रुकावट के सबसे आम कारण हैं:
कई मामलों में सूजन, पहले हुई सर्जरी या कैंसर के कारण इंटेस्टाइन में रुकावट आती है, खासतौर पर बुजुर्गों के साथ ऐसा अधिक होता है।
अवरोध छोटी और बड़ी दोनों आंतों में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर छोटी आंत में ही रुकावट आती है। अवरोध के अन्य कारणों में शामिल हैः
इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन (Intestinal obstruction) के कारण पेट ब्लॉक होने पर मल त्याग करने की स्थिति उत्पन्न होती है जिसे सामान्य रूप से कब्ज भी कहा जाता है। इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन का सबसे सामान्य लक्षण कब्ज होता है और कुछ मामलों में इसका विपरीत भी हो सकता है।
पेट के पूरी तरह ब्लॉक होने पर कब्ज या गैस की कमी की समस्या होने लगती है। इसके अलावा कम ब्लॉकेज में डायरिया का खतरा रहता है।
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आंतों में रुकावट या इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन(Intestinal obstruction) होने के कई अन्य कारण हो सकते हैं, जैसे कि –
बच्चों में इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन (Intestinal obstruction) आमतौर पर संक्रमण, अंगों में रोग और आंतों में रक्त प्रवाह बढ़ने के कारण होता है। कुछ बच्चों में पेट में फ्लू होने के बाद यह स्थिति उत्पन्न होती है। इसके कारण उनके पर में सूजन हो सकती है।
2 वर्ष से कम आयु वाले शिशुओं में सोख लेना सबसे सामान्य होता है। ऐसा तब होता है जब उनकी आंत गिरने लगती है या फिसल कार किसी अन्य अंग में चली जाती है। इसके परिणामस्वरूप उनका पेट ब्लॉक हो जाता है।
डॉक्टर शारीरिक परिक्षण के जरिए इसका पता लगता है। इसके लिए पेट पर दवाब देने के साथ ही स्टेथेस्कोप से पेट के अंदर की आवाज सुनता है। जिसके माध्यम से उसे अवरोधों का पता लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं।
इंटेस्टाइल ऑब्स्ट्रक्शन का जल्दी उपचार किया जाना जरूरी है ताकि ये जटिलताएं न हो –
यदि अवरोध की वजह से रक्त आंत के किसी हिस्से में नहीं पहुंच पा रहा तो निम्न समस्याएं हो सकती है –
जिन लोगों को क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्शन होता है जिसकी वजह से आंत संकीर्ण हो जाती है तो डॉक्टर एक लंबी ट्यूब जिसे एंडोस्कोपी कहते हैं के इस्तेमाल से मेटल स्टेंट डालकर आंत को फैलाता है। इस प्रक्रिया में पेट में किसी तरह का चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती।
इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन(Intestinal obstruction) का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। इस बीमारी का इलाज घर पर ना करें।
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Current Version
17/05/2021
Bhawana Sharma द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Bhawana Awasthi