Intestinal obstruction: इंटेस्टाइनलऑबस्ट्रक्शन क्या है ?

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अपडेट डेट सितम्बर 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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परिचय

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन क्या होता है?

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन का मतलब ही होता है आंतों में रुकावट। इसमें भोजन या तरल पदार्थ आपकी छोटी आंत या बड़ी आंत से होकर नहीं गुजर पाता है। इस बीमारी में भोजन या लिक्विड आपके आंतों में  ही रुका रहता है। इसे बाउल ऑबस्ट्रक्शन भी कहते हैं। 

इससे मल त्यागने और गैस पास करने में दिक्कत होती है। यह डायरिया का कारण भी बन सकता है। भोजन की रुकावट के कारण पेट में गैस्ट्रिक एसिड, गैस और एसिड बनता बनते रहते हैं। ऐसा होते रहने से पेट पर दबाव बढ़ता जाता है। आंतों में रुका हुआ भोजन और लिक्विड फूड पेट की गुहा में भी पहुंच जाते हैं। जो लगातार बैक्टीरिया फैलाते हैं। आगे चलकर इससे हालत गंभीर भी हाे जाती है।

कितना आम है इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन?

यह बीमारी आम है या दुर्लभ, इस बारे में डॉक्टर आपको अच्छी सलाह दे सकते हैं। अगर डॉक्टर बीमारी का पता लगा लेते हैं तो यह कुछ समय तक रहने वाली समस्या है। इलाज होने पर ठीक हो सकती है। 

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लक्षण

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन के सामान्य लक्षण क्या हैं ?

इंटेस्टाइनल ऑब्सट्रक्शन यानी आंतों में रुकावट के सामान्य लक्षण हैं:

कुछ लक्षण अवरोध के स्थान और यह कितने समय से है इस पर निर्भर हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, उल्टी होने छोटी आंत में अवरोध का शुरुआती संकेत है, लेकिन यदि यह जारी रहता है, तो बड़ी आंत में रुकावट का भी संकेत हो सकता है। यदि अवरोध आंशिक है तो डायरिया हो सकता है, जबकि पूरी तरह से अवरोध होने पर गैस या मल त्याग नहीं किया जा सकता।

इंटेस्टाइल ऑब्स्ट्रक्शन (आंत में अवरोध) की वजह से एब्डॉमिनल कैविटी में गंभीर संक्रमण और सूजन हो सकता है, जिसे पेरिटोनिटिस कहा जाता है। यह तब होता है जब आपकी आंत का एक हिस्सा टूट गया हो। इसकी वजह से बुखार और पेट दर्द होता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है और तुरंत सर्जरी करनी पड़ सकती है।

हो सकता है कि कुछ लक्षण यहां नहीं दिए गए हों। यदि इन लक्षणों के अलावा आपको अन्य कोई लक्षण महसूस हो रहे हैं तो अपने डॉक्टर से मिलें। अगर आपने इस समस्या का शुरूआती दौर पर ध्यान दे दिया तो भविष्य में होने वाली गंभीर शारीरिक स्थित से आप बच सकते हैं। 

 डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि दिए गए लक्षणों में आप कुछ भी महसूस कर रहे हैं तो कृपया अपने डॉक्टर से बात करें। हर किसी का शरीर अलग तरह से कार्य करता है। इसलिए लक्षण दिखने पर अपने मन से कोई भी दवा ना लें।

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कारण

 इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन के कारण क्या हैं?

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन ज्यादातर वयस्कों को होता है। बच्चों में इस तरह की समस्या कम देखने को मिलती है। आंतों में रुकावट के सबसे आम कारण हैं:

  • पेट का कैंसर
  • ट्यूमर भी आंतों को ब्लॉक कर सकता है।
  • ट्यूमर या उसी तरह के किसी अन्य चीज के आंत के अंदर विकसित होने से आंत में रुकावट आती है।
  • आंतों में खून न पहुंचने से भी इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन हो सकता है।
  • यह तब होता है जब पेट की कोई सर्जरी हुई हो।
  • आंत में कोई बड़ी बीमारी होना।
  • डायवर्टीक्युलाइटिस – पाचन तंत्र में किसी संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है, तो उसे डायवर्टीक्युलाइटिस कहते हैं। इस कारण भी इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन हो सकता है।
  • आंतों में मरोड़ होना।
  • क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल) की वजह से कुछ आंत के टिशू मर जाते हैं जिससे ब्लॉकेज हो सकता है।

कई मामलों में सूजन, पहले हुई सर्जरी या कैंसर के कारण इंटेस्टाइन में रुकावट आती है, खासतौर पर बुजुर्गों के साथ ऐसा अधिक होता है।

अवरोध छोटी और बड़ी दोनों आंतों में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर छोटी आंत में ही रुकावट आती है। अवरोध के अन्य कारणों में शामिल हैः

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कब्ज और इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन में संबंध

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन के कारण पेट ब्लॉक होने पर मल त्याग करने की स्थिति उत्पन्न होती है जिसे सामान्य रूप से कब्ज भी कहा जाता है। इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन का सबसे सामान्य लक्षण कब्ज होता है और कुछ मामलों में इसका विपरीत भी हो सकता है।

पेट के पूरी तरह ब्लॉक होने पर कब्ज या गैस की कमी की समस्या होने लगती है। इसके अलावा कम ब्लॉकेज में डायरिया का खतरा रहता है।

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जोखिम कारक

क्या चीजें हैं जो इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन की आशंका को बढ़ा सकती हैं?

आंतों में रुकावट या इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन होने के कई अन्य कारण हो सकते हैं, जैसे कि –

  • पेट की सर्जरी होने पर आंतों में संक्रमण हो सकता है। जिससे यह बीमारी हो जाती है।
  • आंतों में सूजन होने पर मार्ग संकरा हो जाता है। जिससे भोजन गुजरने में परेशानी होती है।
  • पेट में कैंसर या ट्यूमर की सर्जरी हुई है तो भी इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन हो सकता है।
  • इस बीमारी की एक वजह डायबिटीज भी हो सकती है।

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नवजात बच्चों में इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन

बच्चों में इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन आमतौर पर संक्रमण, अंगों में रोग और आंतों में रक्त प्रवाह बढ़ने के कारण होता है। कुछ बच्चों में पेट में फ्लू होने के बाद यह स्थिति उत्पन्न होती है। इसके कारण उनके पर में सूजन हो सकती है।

2 वर्ष से कम आयु वाले शिशुओं में सोख लेना सबसे सामान्य होता है। ऐसा तब होता है जब उनकी आंत गिरने लगती है या फिसल कार किसी अन्य अंग में चली जाती है। इसके परिणामस्वरूप उनका पेट ब्लॉक हो जाता है।

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परीक्षण

इंटेस्टाइल ऑब्स्ट्रक्शन को कैसे डायग्नोस किया जाता है?

डॉक्टर शारीरिक परिक्षण के जरिए इसका पता लगता है। इसके लिए पेट पर दवाब देने के साथ ही स्टेथेस्कोप से पेट के अंदर की आवाज सुनता है। जिसके माध्यम से उसे अवरोधों का पता लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं।

  • ब्ल्ड काउंट, इलेक्ट्रोलाइट्स, किडनी और लिवर के काम का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।
  • एक्स रे
  • सीटी स्कैन
  • कोलोनोस्कोपी, एक फ्लेक्सिबल और रोशनी वाली ट्यूब के जरिए डॉक्टर आपकी बड़ी आंत को देखता है।
  • कॉन्ट्रास्ट के साथ एनीमा

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आशंकित जटिलताएं

इंटेस्टाइल ऑब्स्ट्रक्शन का जल्दी उपचार किया जाना जरूरी है ताकि ये जटिलताएं न हो –

  • डिहाइड्रेशन
  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
  • परफोरेशन या आंत में छेद जिसकी वजह से संक्रमण हो सकता है।
  • किडनी फेलियर

यदि अवरोध की वजह से रक्त आंत के किसी हिस्से में नहीं पहुंच पा रहा तो निम्न समस्याएं हो सकती है –

  • संक्रमण
  • ऊतकों को नष्ट हो जाना
  • इंटेस्टाइन परफोरेशन
  • सेप्सिस, जानलेवा रक्त संक्रमण
  • मल्टीपल ऑर्गन फेलियर
  • मृत्यु

जिन लोगों को क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्शन होता है जिसकी वजह से आंत संकीर्ण हो जाती है तो डॉक्टर एक लंबी ट्यूब जिसे एंडोस्कोपी कहते हैं के इस्तेमाल से मेटल स्टेंट डालकर आंत को फैलाता है। इस प्रक्रिया में पेट में किसी तरह का चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती।

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उपचार

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन का इलाज कैसे करें?

इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। इस बीमारी का इलाज घर पर ना करें।

  • इंटेस्टाइनल ऑबस्ट्रक्शन को ठीक करने के लिए कुछ दवा देकर भोजन और तरल पदार्थों को आंतों से साफ करने की कोशिश की जाएगी। इस दौरान आप कुछ खा-पी नहीं सकते हैं।
  • इस बीमारी के चलते डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। डिहाइड्रेशन का इलाज करना जरूरी है। ये इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन से होता है।
  • इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर कुछ लिक्विड वाली दवाएं दे सकता है
  •  इसमें यूरिन की सफाई होनी भी जरूरी है। 
  •  इसके अलावा एक ट्यूब को आपकी नाक के माध्यम से गले, पेट, और आंतों में डाला जाता है। जो आंतों की सफाई करता है।
  • इससे सूजन और उल्टी आने की समस्या भी खत्म हो जाती है।
  •  अगर आपको ये समस्या किसी दवा के कारण हुई है तो डॉक्टर आपको वो दवा लिखेगा जिससे नशीले पदार्थ का प्रभाव कम हो।
  • यदि इन उपायों से समस्या ठीक नहीं होती है तो सर्जरी की आवश्यकता होगी। इसके इलाज के ​लिए आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।
  • इस बीमारी का इलाज ऑपरेशन द्वारा भी किया जाता है।

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डॉक्टर आपको ये दवाएं लिख सकते हैं

  • संक्रमण को कम करने के लिए एंटिबायोटिक्स
  • उल्टी से बचाए रखने के लिए एंटिनोसिया की दवाइयां
  • दर्द निवारक गोलियां
  • आंतों की रुकावट के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और न ही घर में इसके इलाज का प्रयास करना चाहिए।

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घरेलू उपाय

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