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Cold Agglutinin Test: कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट क्या है?

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट को जानें

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट क्या है?

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट एक विशेष शारीरिक स्थिति की जांच के लिए किया जाता है। इस स्थिति में शरीर में कुछ विशेष प्रकार के एंटीबॉडी बनने लगते हैं जिन्हे एग्लूटिनिन कहा जाता है। कोल्ड एग्लूटिनिन आमतौर पर संक्रमण के कारण इम्यून सिस्टम द्वारा बनाए जाते हैं। इसके कारण कम तापमान में लाल रक्त वाहिकाएं एक झुंड बनाने लगती हैं।

Cold Agglutinin Test: कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट क्या है?

स्वस्थ लोगों के खून में आमतौर पर कोल्ड एग्लूटिनिन का स्तर कम होता है लेकिन लिम्फोमा या अन्य प्रकार के संक्रमण जैसे माइकोप्लाज्मा निमोनिया शरीर में कोल्ड एग्लूटिनिन का स्तर बढ़ा देते हैं।

आमतौर पर कोल्ड एग्लूटिनिन का अधिक स्तर किसी प्रकार की गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं करता है। हालांकि, कभी-कभी ठंडे तापमान के संपर्क में आने पर कोल्ड एग्लूटिनिन त्वचा के अंदर रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के जमाने लगता है। इसके कारण त्वचा पीली पड़ सकती है और हाथ व पैर सुन्न हो जाते हैं। त्वचा के गर्म होने पर लक्षण अपने आप चले जाते हैं। कुछ मामलों में खून के थक्के हाथ और पैर की उंगलियों, कानों या नाक में खून का प्रवाह रोक देते हैं। इसके कारण ऊतकों को क्षति पहुंच सकती है और दुलर्भ मामलों में गैंग्रीन जैसी गंभीर स्थिति के उत्पन्न होने का खतरा रहता है।

कभी-कभी कोल्ड एग्लूटिनिन का अधिक स्तर शरीर की सभी लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है। इस स्थिति को ऑटोइम्यून हीमोलिटिक एनीमिया कहा जाता है।

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जरूरत

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट कब करवाया जाता है?

इस टेस्ट की सलाह डॉक्टर व्यक्ति को तब देते हैं जब उसे ठंडे तापमान के संपर्क में आते ही हीमोलिटिक एनीमिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं जो कि कोल्ड एग्लूटिनिन रोग के कारण हो सकता है। इसके लक्षणों में निम्न शामिल हैं :

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इसके अलावा कुछ मामलों में ठंडे तापमान के संपर्क आने पर हाथ व पैर की उंगलियों, कानों और नाक पर दर्दनाक नील पड़ सकती है।

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सावधानियां और खतरे

कोल्ड एग्लूटिनिन कराने से पहले क्या जानना है जरूरी?

इस टेस्ट को करवाने में कोई दुष्प्रभाव या खतरा नहीं होता है। हालांकि, नस से खून का सैंपल लेने के कारण कुछ सामान्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि-

  • सुई लगने वाली जगह पर छोटा निशान पड़ना। लेकिन उस जगह पर कुछ समय के लिए दबाव बनाकर रखने से इसकी आशंका को कम किया जा सकता है।
  • दुर्लभ मामलों में ब्लड सैंपल लेने के बाद नसों में सूजन आ सकती है। इस स्थिति को फिलीबाइटिस कहा जाता है। सूजन का इलाज करने के लिए दिन में 2 से 3 बार गर्म सिकाई करें।

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प्रक्रिया

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट में होने वाली प्रक्रिया क्या है?

यह एक ब्लड टेस्ट है जो खून के अंदर कोल्ड एग्लूटिनिन की मात्रा को मापता है। यह टेस्ट ब्लड सैंपल को विभिन्न तापमान के संपर्क में लाने के दौरान भी किया जा सकता है। यह डॉक्टर को समझने में मदद करता है कि कौन से तापमान में आपकी लाल रक्त वाहिकाएं खून के थक्के जमाना शुरू करती हैं।

इस टेस्ट के लिए किसी प्रकार की विशेष तैयारी करने की जरूरत नहीं होती है। डॉक्टर आपकी कोहनी के ठीक ऊपर की त्वचा को साफ करेंगें। इसके बाद वह सुई की मदद से आपकी नस से खून का सैंपल निकालेंगे। इस संपूर्ण प्रक्रिया में केवल 2 से 3 मिनट का समय लग सकता है।

खून लेने के बाद उसे कई ट्यूब में घोल और फैला दिया जाता है। इसके बाद खून के सैंपल को कई प्रकार के कम तापमानों पर ठंडा किया जाता है। इससे यह निर्धारित हो पाता है कि आपके शरीर में किस तापमान पर लाल रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के जमाना शुरू करती हैं।

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट के बाद क्या होता है?

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट के बाद डॉक्टर आपको इस स्थिति के लक्षणों के बारे में बताएंगे और परिणाम आने तक आप उन्हें कैसे कम कर सकेंगे। अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए आप निम्न बातों का खास ध्यान रखें-

  • ठंडा खाना न खाएं।
  • घर का तापमान गर्म रखने की कोशिश करें।
  • ठंडे पानी से स्नान न करें।
  • ठंडे मौसम में घर से बाहर न जाएं।

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परिणामों को समझें

मेरे परिणामों का क्या मतलब है?

कोल्ड एग्लूटिनिन टेस्ट का परिणाम आमतौर पर टिटर के रूप में आता है। टिटर एक लैब प्रक्रिया होती है जिसमें खून में मौजूद एंटीबॉडी को मापा जाता है जैसे कि 1:64 या 1:512। अधिक संख्या का मतलब होता है कि आपके रक्त में अधिक ऑटोएंटीबॉडीज मौजूद हैं।

पॉजिटिव टिटर का मतलब होता है कि व्यक्ति कोल्ड एग्लूटिनिन रोग से ग्रस्त है। कोल्ड एग्लूटानिन प्राथमिक या माध्यमिक हो सकता है जिसका अर्थ है कि यह किसी अन्य गंभीर रोग या स्थिति के कारण उत्पन्न हुआ है, जैसे कि-

  • माइकोप्लाज्मा निमोनिया संक्रमण- इस स्थिति से ग्रस्त मरीजों में कोल्ड एग्लूटिनिन होने की 75 फीसदी अधिक आशंका होती है।
  • मोनो (संक्रमिक मोनोन्यूक्लियोसिस)- इस संक्रमण के कारण कोल्ड एग्लूटिनिन की 60 फीसदी तक आशंका बढ़ जाती है। हालांकि, इस संक्रमण के कारण एनीमिया होना दुर्लभ है।
  • कुछ प्रकार के कैंसर जैसे लिम्फोमा, ल्यूकेमिया और मल्टिपल मायलोमा
  • कुछ अन्य प्रकार के बैक्टीरियल इंफेक्शन जैसे लेगियोनेयरेस रोग और सिफिलिस
  • कुछ परजीवी संक्रमण के कारण जैसे मलेरिया
  • कुछ वायरल इंफेक्शन जैसे एचआईवी, इन्फ्लूएंजा (फ्लू), साइटोमेगालो वायरस (सीएमवी), एपस्टीन-बार वायरस (लार से फैलने वाली बीमारी) और हेपेटाइटिस सी

ऑटोएंटीबॉडीज के अधिक टिटर स्तर और गर्म तापमान में प्रक्रिया करने वाले ऑटोएंटीबॉडीज हीमोलिटिक एनीमिया और गंभीर लक्षणों से जुड़ा होता है। लाल रक्त वाहिकाओं के हीमोलिटिक और हिमोलाइसिस एनीमिया का स्तर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। अपने परिणामों से जुड़े सवालों और कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए कृपया आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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डॉ. प्रणाली पाटील
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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Shivam Rohatgi द्वारा लिखित · अपडेटेड 12/10/2020